Saturday, 27 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में ‘शिक्षा को कैसे बनावें आनंदकारी’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन

 


रचनात्मक कार्यों, सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर शिक्षा आनन्ददायी बन सकती है -प्रो. जैन

लाडनूँ, 27 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में “संकाय संवर्धन कार्यक्रम” के अंतर्गत शनिवार को ‘शिक्षा को कैसे बनावें आनंदकारी’ विषय पर विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि गीत, संगीत, कला, नृत्य, प्राकृतिक संरक्षण, बागवानी करना, पेड़ लगाना, सेवा, असह्ययों की सहायता, रचनात्मक कार्य, सामाजिक गतिविधियों भ्रमण आदि से शिक्षा को आनंदकारी बनाया जा सकता है। समय का सदुपयोग, रचनात्मक कार्य एवं सकारात्मक सोच आदि से केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि जीवन के हर पहलु को आनन्दमय बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रेम, शांति, करुणा, अहिंसा, ईमानदारी, पवित्रता, शुद्धता सात्विकता, सरलता, निश्छलता आदि के भाव आनंद के द्वार खोलते हैं, जबकि क्रोध, ईष्र्या, घृणा, वैमनस्य जैसे भाव जीवन में जहर घोल देते हैं। स्वयं और दूसरों के प्रति सकारात्मक सोच और नजरिया ही हमें खुशी और नकारात्मक सोच हमें दुःखी बनाती है। किसी कार्य को बोझिल मन से नहीं किया जाए और ना ही जीवन को बोझिल समझ कर के जिया जाए। जिंदगी में कितने भी आगे निकल जाने पर भी लाखों लोगों से किसी न किसी रूप में पिछड़े होंगे, इसलिए जहां है जैसी स्थिति में उसी का भरपूर आनंद उठाना चाहिए। प्रत्येक छोटे कार्य और बड़े कार्य को आनंद, शांति और मुक्त भाव से किया जाना चाहिए। चेहरे पर प्रसन्नता का भाव आनंद प्रदान करता हैं। सेवा, श्रम, निष्ठा व सामाजिक सरोकार से किया कार्य आनंद देता है। इस कार्यक्रम में डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. बी. प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. अमिता जैन, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरधारीलाल, ललित कुमार आदि उपस्थित रहे।

Friday, 26 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के अन्तर्गत नैनोसाइंस व नैनोटैक्नोलोजी पर व्याख्यान का आयोजन

 


नैनो टेक्नोलोजी से संभव है किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाना

लाडनूँ, 26 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को ‘नैनो साइंस तथा नैनो टेक्नोलोजी’ विषय पर ललित कुमार गौड़ ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रोद्योगिकी लोगों के जीवन में काफी महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इसकी भूमिका नैनो तकनीक क्षेत्र में अधिक बढने वाली है। नैनो, अति सूक्ष्म आकार वाले तत्वों, जो मीटर के एक अरबवें हिस्से से बने होते हैं, का विज्ञान है। नैनोटेक्नोलोजी व्यावहारिक जीवन में 1 से 100 नैनोमीटर स्केल में प्रयुक्त और अध्ययन की जाने वाली सभी तकनीकों और सम्बंधित विज्ञान का समूह है। उन्होंने बताया कि नैनोटेक्नोलोजी अणुओं व परमाणुओं की इंजीनियरिंग है, जो भौतिकी, रसायन, बायोइन्फराॅर्मेटिक्स व बायोटेक्नोलोजी जैसे विषयों को आपस में जोड़ती है। इस टेक्नोलोजी से बायोसाइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रोनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। छोटे आकार, बेहतर क्षमता और टिकाऊपन के कारण मेडिकल और बायोइंजीनियरिंग में नैनोटैक्नोलोजी तेजी से बढ रही है।

नैनो तकनीक से वस्तुएं बनती हैं बेहतर

गौड़ ने बताया कि नैनोसाइंस अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें जो मानव शरीर में उतरकर उसकी धमनियों में चल-फिर कर वहीं रोग का आपरेशन कर सके। आज हर घरेलु वस्तु में नैनोतकनीक का समावेश है। उपभोक्ता वस्तुओं में इनके अनेक अनुप्रयोग हैं, जैसे धूप का चश्मा, ग्लास कोटिंग में नैनो तकनीक का उपयोग होता है, जिसके कारण वे और भी मजबूत और हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पहले की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से ब्लाॅक कर सकते हैं। सनस्क्रीन और अन्य काॅस्मेटिक्स में भी नैनोकण होते हैं, जो प्रकाश को आर-पार जाने देते है, परन्तु पराबैंगनी किरणों को रोक लेते हैं। पहनावे के लिए कपड़ों को भी ये अधिक टिकाऊ बनाते हैं, उन्हें वाटरप्रूफ और हवा प्रूफ बनाते हैं। पैकेजिंग जैसे कि दूध आदि के कार्टन में नैनोकण इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि दूध प्लास्टिक की थैली में अधिक समय तक तरोताजा रहे।

नैनोटेक्नोलोजी में है कॅरियर की असीम संभावनाएं

उन्होंने अपने व्याख्यान में जानकारी दी कि देश में नैनोतकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान का काम तेजी से चल रहा है। भविष्य में इस क्षेत्र में विकास की काफी संभावनाएं हैं। नैनोटेक्नोलोजी के क्षेत्र में लगातार विकास होने की वजह से युवाओं के लिए इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं उत्पन्न होंगी। यह इंटरडिसीप्लेनरी एरिया है, इसलिए इस क्षेत्र में आने वाले युवाओं को फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बाॅयोलाॅजी और मैथ्स जैसे विषयों से अच्छा होना जरूरी है। लगातार अनुसंधान एवं विकास की वजह से यह कहा जा सकता है कि आने वाला समय नैनोटैक्नोलोजी का ही है।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने चिकित्सा तथा मेडिकल क्षेत्र में इस टेक्नोलोजी की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताया। इस व्याख्यान में डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभासिंह, डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा, डाॅ. विष्णुकुमार, डाॅ. अमिता जैन, प्रमोद ओला आदि ने भागीदारी निभाई व व्याख्यान की जानकारी के लिए आभार ज्ञापित किया।

Monday, 22 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में शहीद दिवस पर किया शहीदे-आजम भगतसिंह को याद

 

मिली आजादी उनकी बदौलत, जो कंधों पे अपने कफन लेके निकले

लाडनूँ, 23 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में संचालित विवेकानंद क्लब के तत्वावधान में मंगलवार को शहीद दिवस पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को याद किया गया। प्राचार्य प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शहीदों के प्रति श्रद्धा-शब्द अर्पित किए गए। प्रोफेसर त्रिपाठी ने बताया कि भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों की बदौलत ही आज उनके सपनों का स्वतंत्र भारत विकास की ओर अग्रसर होना संभव हो सका है। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा के प्रति विशेष रूप से जागरूक रहने हेतु भगत सिंह का उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसमें फांसी से ठीक पहले उनसे जब आखिरी इच्छा पूछी जा रही थी, तब भगत सिंह का जवाब था, ‘मैं आजकल लेनिन को पढ़ रहा हूं, यदि संभव हो सके तो इसे संपूर्ण पढ़ने की इजाजत दी जाए।’ भगत सिंह की ऐसी लगन एवं शिक्षा के प्रति समर्पण आज की शैक्षिक पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने शहीद दिवस पर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा- ‘‘बहुत थे जो दिल में लगन लेके निकले, बगावत की जलती अगन लेके निकले। मिली किंतु आजादी उनकी बदौलत, जो कांधों पे अपने कफन लेके निकले।’’ कार्यक्रम में महाविद्यालय हिंदी व्याख्याता अभिषेक चारण ने बताया कि शहीद दिवस के दिन देश के उन रणबांकुरों याद करना हर भारतवासी की नैतिक जिम्मेदारी है, क्योंकि आज हम इस फिजां में स्वतंत्रता का जो सुख अनुभव कर रहे हैं, वह सब उन्हीं क्रांतिकारियों की बदौलत है, जिनके शौर्य और पराक्रम की वजह से उनके सपनों का स्वतंत्र भारत विरासत में मिला है। उन्होंने अपनी भावनाएं इन शब्दों में व्यक्त की- ‘कहते हैं अमर शहीदों की आयु न अकारथ जाती है, वह आने वाली पीढ़ी के जांबाजों को लग जाती है।’ शहीदों को नमन के इस कार्यक्रम में छात्रा पूजा प्रजापत, उर्मिला डूकिया, सोनम कंवर, आरती चारण, रितिका सांखला, मुस्कान बानू, तमन्ना आदि ने भी अपने विचार प्रकट कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

Friday, 19 March 2021

31 वें स्थापना दिवस पर जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समारोह का आयोजन

 

अपने विचारों पर ध्यान केन्द्रित करके किया जा सकता है अच्छी आदतों का निर्माण- प्रो. गोदारा

कुलपति दूगड़ ने विश्वविद्यालय को अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप देने पर दिया जोर

लाडनूँ, 20 मार्च 2021। वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के कुलपति प्रो. आरएल गोदारा ने कहा है कि चरित्र की पहली सीढी है अपने विचारों पर ध्यान देना। विचारों को केन्द्रित करना। हमें कभी अपने मन के वश में नहीं होना चाहिए, क्योंकि मन तो क्षण-क्षण में बदलता रहता है। विद्यार्थियों को इस ओर पूरा ध्यान देना चाहिए और अपने जीवन में अच्छी आदतों का निर्माण करना चाहिए। जो भी समय या कार्यक्रम तय किया जाता है, उस पर काम करें। वे आदत बन जाएंगे। आदत पर संयम, नियंत्रण जरूरी है। जहां आदत नियमित होती है, वहां चरित्र निर्माण होगा और आदर्श चरित्र ही मूल्यवान होता है। वे यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के 31वें स्थापना दिवस पर महाप्रज्ञ-महाश्रमण सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। समारोह की अध्यक्षता करते हुए जैविभा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि प्राकृत भाषा और साहित्य का विस्तार इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य है। इस ओर हमें सर्वाधिक ध्यान देना होगा। इन उद्देश्यों के अनुरूप संस्थान के पाठ्यक्रमों का संचालन करना है। इस दिशा में काफी कार्य किए गए हैं और अब जैन विद्या के विद्धानों को तैयार करने के कार्य को विस्तार देना है। प्राकृत भाषा का प्रचार-प्रसार करके इस जन-जन तक पहुंचाना है। जैन आगमों के अंग्रेजी में अनुवाद का कार्य भी करना होगा। योग व जीवन विज्ञान विभाग को देखना होगा कि कैसे प्रेक्षा लाईव कार्यक्रम करे देश-देशान्तर तक फैलाया जा सके। इन्हें आमजन तक पहुंचाना होगा।

अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों से जुड़ाव हो

कुलपति प्रो. दूगड़ ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का जुड़ाव संस्थान और इसके विभागों के साथ हो सके, इस ओर ध्यान देना होगा। यूनेस्को व यूएनओ के साथ संस्थान के सम्बंध संस्थागत सहयोगात्मक बने, इस नवाचार को अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान में निजी विश्वविद्यालयों में दूरस्थ शिक्षा केवल दो ही प्रमुख है, जिनमें जैविभा संस्थान का ही सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, यहां इनकी प्रतिष्ठा प्रामाणिकता के लिए है। कुलपति दूगड़ ने गूगल जैसे सर्च इंजिन पर भारतीय संस्कृति समबंधी प्रत्येक खोज में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की उपस्थिति नजर आए, इसका प्रयास करने पर भी जोर दिया। उन्होंने ऑनलाईन शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए सीखो और साथ में कमाओ की नीति के अनुरूप सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने पर आय का साधन भी मिलने का आश्वासन दिया और कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थी इससे कुछ कमाई भी कर सकते हैं। प्रो. दूगड़ ने बताया कि यूजीसी ने विभिन्न देशों के पारस्परिक पाठ्यक्रमों को मान्यता देने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत नई शिक्षा नीति में यहां के पाठ्यक्रमों को विदेशी विश्वविद्यालयों में और वहां के कोर्सेज को यहां क्रेडिट मिलने का प्रावधान है।

विदेशों में है यहां के पाठ्यक्रमों को मान्यता

उन्होंने बताया कि हाल ही में बेल्जियम और जापान के विद्यार्थी यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में आए और अध्ययन किया, जिसका लाभ उन्हें अपने देश में भी वहां के पाठ्यक्रम के समान ही प्राप्त हुआ। यह विश्वविद्यालय एक भाषणामाला का आयेाजन करने जा रहा है, जिसमें समाज के लोगों को भी जोड़ा जाएगा। आगामी एक-दो सालों में समग्र जैन समाज के लोगों को इससे जोड़ा जाएगा। यह काम निर्धारित नीति के तहत किया जाएगा तथा इससे विश्वविद्यालय का विस्तार संभव होगा। उन्होंने इस अवसर पर प्राकृतिक एवं योग महाविद्यालय के काम के बारे में बताते हुए कहा कि अगले साल सत्र 2022 में यहां पाठ्यक्रमों में अध्ययन शुरू करवा दिया जाएगा। इससे पहले 2021 में ही प्रकाृतिक व योग चिकित्सा का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। प्राकृतिक व योग चिकित्सा की सफलता के बाद यहां आयुर्वेद चिकित्सा को भी इससे जोड़ा जाएगा। वर्तमान समय में लोगों का काफी रूझान इन पद्धतियों की तरफ है। उन्होंने जैन विश्व भारती की हीरक जयंती पर अगले वर्ष बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों के आयेाजन के बारे में भी जानकारी दी।

श्रेष्ठ विद्यार्थी और श्रेष्ठ कर्मचारी का सम्मान

कार्यक्रम में समणी नियोजिका प्रो. समणी मल्लीप्रज्ञा ने अपने सम्बोधन में शिक्षा, संस्कार, साधना, शोध, सेवा पर जोर देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय इसके लिए समर्पित है। प्रारम्भ में प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कैरियर के साथ कैरेक्टर बिल्डिंग की विशेषता के बारे में बताया और कहा कि यहां मूल्यों को शिक्षा के केन्द्र में रखा गया है तथा आचार्य महाप्रज्ञ प्रवर्तित अहिंसा प्रशिक्षण की तकनीक को व्यावहारिक तौर पर जमीन पर उतारा है। कुलसचिव रमेश कुमार मेहता ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रगति विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी भागचंद बरड़िया मंचस्थ रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के श्रेष्ठ विद्यार्थी का अवार्ड दिव्यता कोठारी, जय ललिता, निकिता शर्मा व साक्षी प्रजापत को दिया गया। श्रेष्ठ एनसीसी कैडेट का सम्मान आकांक्षा डूकिया को दिया गया। योग के क्षेत्र में योगदान के लिए योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों पूनम स्वामी व सुरेश दीक्षित को प्रदान किया गया। चेम्पियन आफ चेम्पियन्स का खिताब स्नेहा पारीक को प्रदान किया गया। इस वर्ष का विद्यानिधि सम्मान डाॅ. बलवीर सिंह चारण व डाॅ. सुनीता इंदौरिया को दिया गया। बेस्ट वूमन आफ यूनिवर्सिटी का अवार्ड प्रगति चैरड़िया को दिया गया तथा श्रेष्ठ कर्मचारी का अवार्ड घासीलाल शर्मा व करण गुर्जर को दिया गया। बी वर्ग के श्रेष्ठ कर्मचारी का सम्मान दिनेश शर्मा, जगदीश सिंह शेखावत, सुनील कुमार, संजय व मनोज को प्रदान किया गया। कार्यक्रम मुमुक्षु बहिनों के मंगलाचरण से प्रारम्भ किया गया। अंत में प्रो. नलिन शास्त्री ने आभार ज्ञापित किया। डाॅ. युवराज सिंह खांगारोत ने कार्यक्रम का संचालन किया।

Thursday, 11 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा में ‘‘दूरस्थ शिक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका’’ विषय पर वेबिनार आयोजित

 

सूचना तकनीक व विभिन्न एप्प से दूरस्थ शिक्षा बन सकती है प्रभावी- डाॅ. आमीन

लाडनूँ, 12 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा ‘‘दूरस्थ शिक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका’’ विषय पर एक वेबिनार का आयेाजन किया गया। वेबिनार के मुख्य वक्ता महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा गजारात के फैकल्टी आॅफ काॅमर्स के डाॅ. प्रशांत आमीन ने दूरस्थ शिक्षा में आईटी की उपयोगिता पर बताते हुए एक पीपीटी के माध्यम से नवीन शिक्षा नीति-2021 एवं परम्परागत व आॅनलाईन ट्रेनिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी एवं अभिभावकों के जीवन में सूचना प्रौद्योगिकी की उपयोगिता के बारे में भी जानकारी दी और उन्होनें बताया कि दूरस्थ शिक्षा के शिक्षकों को विद्यार्थी को पढ़ाने के लिए गुगल क्लासरूम, माइंड मैपिंग, वल्र्ड क्लाउड, जैम बोर्ड, पौडकास्ट और ओलेप्स आदि उपकरणों का उपयोग कर हम अपनी दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को और प्रभावशाली व आसान बना सकते है। फैक्लटी ऑफ मैनेजमेंट श्रीगंगानगर के प्रो. निक्की शर्मा ने अपने वक्तव्य में तीन तरह के तत्त्वों के बारे जानकारी देते हुए कम्प्यूटर प्रबंधन निर्देशन, कम्प्यूटर एडेड लर्निंग, कम्प्यूटर काॅंफ्रेंसिग आदि पर प्रकाश डाला। वेबिनार का संचालन प्रगति चैरड़िया ने किया। प्रारम्भ में स्वागत भाषण प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. जे.पी. सिंह ने प्रस्तुत किया। वेबिनार में छात्रों, शिक्षकों और शोद्यार्थी समेत 281 प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाया एवं वेबिनार से लाभ लिया।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ विषय पर वेबिनार आयोजित

 

युवाओं में कार्य के प्रति ललक, उत्साह व जोश पैदा होना जरूरी- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 12 मार्च 2021।जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ विषय पर एक बेबिनार का आयोजन किया गया। संयोजक डाॅ. अमिता जैन ने बताया कि भारत सरकार अगले वर्ष स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ आयोजित कर रही है। वर्ष 2022 के स्वतंत्रता दिवस से 75 सप्ताह पहले इन कार्यक्रमों का आरम्भ 12 मार्च से हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से इन आयोजनों का शुभारम्भ करेंगे जो 5 अप्रैल तक चलेंगे।

इस वेबिनार की आयोजना में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि इस महोत्सव को मनाने का उद्देश्य 12 मार्च 1930 की तिथि को याद करना है, जिससे हम युवाओं में कार्य के प्रति ललक, उत्साह, और जोश उत्पन्न हो। उन्होंने 11 सूत्रों की भी चर्चा की, जो देश हित के विषय में थे। इस अवसर पर हमारे सवतंत्रता सेनानियों को भी नहीं भुलाया जा सकता। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि हम अपने विकास से ही देश के विकास को देख सकते हैं। हमारा विकास होगा तो स्वतः ही देश का विकास संभव है। हमें हिंसा से दूर रहकर मानसिक शांति प्राप्त करनी है। समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजेंद्र प्रधान ने आजादी के बाद देश का शिक्षा स्तर, संसाधन, उद्योगों का विकास, स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रगति, ग्रामीण विकास, यातायात आदि सुविधाओं एवं उन्नति से रूबरू करवाया। बेबिनार में 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया। साथ ही इस अवसर पर एक निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमे 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया। संयोजिका डॉ. अमिता जैन ने कहा कि भारत जैसे विभिन्नताओं वाले देश में एकता के सूत्र में बांधे रखने के लिए महात्मा गांधी के दांडी मार्च का स्मरण करना अति आवश्यक है। कार्यक्रम में डॉ.मनीष भटनागर, डॉ. बी. प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. गिरधारी लाल, डॉ. बलवीर सिंह, डॉं प्रमोद ओला, ललित कुमार, विनोद कुमार आदि संस्थान के समस्त संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Monday, 8 March 2021

प्रो. दूगड़ दूसरी बार फिर बने जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति

 

लाडनूँ, 9 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के कार्यकाल की अवधि को आगामी पांच वर्षों के लिए फिर आगे बढा दिया गया है। इस सम्बंध में कुलाधिपति सावित्री जिंदल ने विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण के सम्यक दृष्टिबोध से अनुप्राणित होकर आदेश जारी करते हुए प्रो. दूगड़ के कुलपति कार्यकाल को आगामी अप्रेल में पूर्ण होने को ध्यान में रखते हुए उनके प्रशासनिक काल में विश्वविद्यालय की प्रगति और व्यवस्थाओं में हुए सकारात्मक परिवर्तनों के मद्दे नजर आगामी पांच वर्ष की द्वितीय पदावधि के लिए संस्थान का कुलपति नियुक्त किया है। गौरतलब है कि प्रो. दूगड़ ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ से ही निरन्तर जुड़े हुए हैं। विश्वविद्यालय के विशिष्ट विभाग अहिंसा एवं शांति विभाग के वे लम्बे समय तक विभागाध्यक्ष भी रहे थे। जैन विश्व भारती के अध्यक्ष मनोज लूणियां एवं पूर्व अध्यक्ष डाॅ. धर्मचंद लूंकड़ ने बधाई व शुभकामनाएं देते हुए बताया कि कुलपति के रूप में प्रो. दूगड़ के प्रथम कार्यकाल में संस्थान ने स्वावलंबन और अकादमिक श्रेष्ठता के साथ-साथ वस्तुनिष्ठ और समदर्शी प्रबंधन का आदर्श प्रस्तुत कर विकास के नए प्रतिमान रचे हैं, जिनकी सराहना सम्पूर्ण समाज के साथ अकादमिक जगत ने की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके कुलपतित्वकाल में दूसरी पदावधि के सफल निर्वहन के साथ उत्तरोत्तर विकास की नयी गाथा लिखी जाएगी। इनके अलावा पूर्व कुलाधिपति बसन्तराज भंडारी, पूर्व कुलपति भापालचंद लोढा, महावीरराज गेलड़ा, सुधामही रघुराजन, विश्वविद्यालय के प्रबंधन मंडल के विनोद बैद, अमरचंद लूंकड़, जैन विश्व भारती के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र चैरड़िया, मूलचंद नाहर, रमेश बोहरा, केन्द्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के कुलपति प्रो. केसी अग्निहोत्री, केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिहार के कुुलपति प्रो. संजीव शर्मा, कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. नरेश दाधीच आदि ने भी उन्हें दूसरे कार्यकाल की नियुक्ति पर बधाइयां दी है। प्रो. दूगड़ को दूसरी बार कुलपति का दायित्व सौंपे जाने पर यहां समस्त विभागों के विभागाध्यक्षों, कुलसचिव और शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ ने भी उन्हें बधाइयां दी हैं और उनके निर्देशन में विश्वविद्यालय के नई ऊंचाइयां छूने की उम्मीद जताई है।

जैविभा की डाॅ. पुष्पा मिश्रा सहित तीन महिलाओं को ‘नारी रत्न सम्मान’ से नवाजा गया

 

लाडनूँ, 9 मार्च 2021। के.टी.सी. फाउंडेशन सुजानगढ़ द्वारा सम्मान समारोह का आयोजन करके स्थानीय तीन महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘‘नारी रत्न सम्मान’’ से सम्मानित किया गया है। इनमें जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग कर सहायक आचार्या डॉ. पुष्पा मिश्रा को लाडनूं व आस पास के गांवों में महिला शिक्षा को प्रोत्साहन देने, बालिकाओं एवं महिलाओं को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने के कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रदान किया गया। प्राच्यविद्या एवं जैन संस्कृति संरक्षण संस्थान की निदेशिका डॉ. मनीषा जैन को उल्लेखनीय लेखन कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। डॉ. जैन प्राकृत एवं जैन दर्शन के विकास एवं प्रचार प्रसार में अनवरत कार्य कर रही है साथ ही रचनात्मक साहित्यिक गतिविधियांें में भी निरंतर संलग्न रही हैं। इनके अलावा राजस्थान फिल्म इंडस्ट्रीज से जुड़ी अभिनेत्री सोनम पाटनी को अभिनय के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान इन तीनों महिलाओं को के.टी.सी. फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज खान, कार्यक्रम की अध्यक्ष नगर परिषद् सभापति नीलोफर गौरी, अति विशिष्ट अतिथि उपसभापति अमित मारोठिया, गोपालपुरा सरपंच सविता राठी, सेलिब्रिटी गेस्ट माहिया दाधीच, महिला उद्यमी सरिता चैधरी, एवरग्रीन पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर रतन सेन व माणक सराफ आदि अतिथियों के साथ-साथ केटीसी फाउंडेशन की स्थानीय अध्यक्ष सुनीता रावतानी के द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर डा. घनश्याम नाथ कच्छावा, सुमनेश शर्मा, पवन सोनी, सरला पांडे, मधु बागरेचा, मोनिका शर्मा, राज पाटनी, मारवाड़ी युवा मंच शाखा सखियां, गार्गी ग्रुप आदि उपस्थित थे।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित

 

महिलाओं की स्थिति में सुधार के आंदोलनों को सम्बल मिले - प्रो. अश्विनी कुमार

लाडनूँ, 9 मार्च 2021। जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली के समाज कार्य विभाग के आचार्य डाॅ. अश्विनी कुमार ने कहा है कि वैश्विक परिदृश्य में महिलाओं के साथ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर काफी विषमताएं रही हैं, जिन्हें दूर करना ही उनका दिवस मनाए जाने की सफलता होगी। वे जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने नारी आंदोलनों को एकांगी बताते हुए कहा कि सर्वांगीण सोच के साथ महिलाओं की स्थिति में सुधार के प्रयासों को सम्बल मिलना चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के प्रोफेसर अनूप कुमार भारतीय ने महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन के लिए मन, मस्तिष्क, व्यवहार और मनोवृति में परिवर्तन लाने की आवश्यकता बताई। खुजा बुलंदशहर की वरिष्ठ सहायक आचार्या डाॅ. गीता सिंह ने सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभुमि में महिलाओं के प्रति भेदभाव एवं सामाजिकरण की भिन्नता से उबारने को महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया और कहा कि महिलाओं के प्रति सभ्य व्यवहार किसी पूजा से कम नहीं होता है। प्रारम्भ में विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने सभी अतिथियों व वक्ताओं का स्वागत किया। अंत में सहायक आचार्य डाॅ. विकास शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वेबिनार का संचालन डाॅ. पुष्पा मिश्रा ने किया।

Sunday, 7 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एन.एस.एस. द्वारा कार्यक्रम का आयोजन

 

लड़कियां होती है अनमोल हीरा- सविता राठी

लाडनूँ, 8 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की दोनों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महिला नैत्री गोपालपुरा सरपंच सविता राठी ने अपने सम्बोधन में एनएसएस स्वयंसेविकाओं को नदी की तरह से निरन्तर आगे बढते रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि राह में बाधक बनने वाले कंकरों को दूर करना ही होता है और अगर चट्टानें भी नदी की राह में आए तो उन्हें वह गोल कर देती है। राठी ने अनुशासन पालन की जरूरत बताते हुए कहा कि दो किनारों के बीच बहने वाली नदी अगर किनारों की मर्यादा को नहीं लांघती है, तो वह जीवनदायी होती है और अगर किनारों के अनुशासन का उल्लंघन कर देती है, तो वह विनाशक बन जाती है। उन्होंने कहा कि परिवार में लड़कियों पर अनेक बंदिशें होती है, जिनको लेकर उनके मन में अनेक भाव आते होंगे, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि जो हीरा जितना कीमती होगा, उसकी उतनी ही अधिक निगरानी की जाती है, उन्हें तिजोरियों में बंद रखा जाता है। और लड़कियां तो अनमोल हीरा होती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि जिनमें आत्मबल प्रबल होता है, उन्हें प्रगति से कोई नहीं रोक सकता। लैंगिक भेदभाव उनके विकास में बाधक नहीं बन सकता है। उन्होंने देश की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी, ब्रिटेन की मार्गरेट थेचर, बनजीर भुट्टो आदि अनेक उदाहरण प्रसतुत करते हुए कहा कि अपनी संकल्प शक्ति के आधार पर वे अपने देश की सुप्रीम पावर बन पाई। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो. रेखा तिवाड़ी, प्रगति चैरड़िया, श्वेता खटेड़ ने भी महिला दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए। एनएसएस छात्राओं दिव्यता कोठारी, शहनाज बानो, स्नेहा, आयशा सिंह, संतोष, निकिता, महक चैहान, मनीषा तुनगरिया, राधिका गहलोत ने भी अपने विचार व कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में एनएसएस की प्रथम ईकाई की प्रभारी डाॅ. प्रगति भटनागर ने स्वागत वक्तव्य एवं अतिथि परिचय प्रस्तुत किया। एनएसएस की द्वितीय ईकाई प्रभारी डाॅ. बलवीर सिंह चारण ने अंत में आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन नवनिधि दौलावत व इरम छींपा ने किया।

Monday, 1 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के सेमिनार हाॅल में अभिनन्दन एवं मंगलभावना समारोह आयोजित

 

संतों का विचरण होता है जन-जन को सद्मार्ग दिखाने के लिये- मुनिश्री अमृत कुमार

लाडनूँ, 2 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के सेमिनार हाॅल में आयोजित अभिनन्दन एवं मंगलभावना समारोह में मुनिश्री अमृत कुमार ने कहा है कि संत हमेशा मानव मात्र का कल्याण करते हैं। वे जहां भी रहते हैं, विचरते हैं, जन-जन को अपने प्रवचन व प्रेरणा से सद्मार्ग दिखाते हैं। लाडनूँ में वृद्ध साधु-साध्वियों का सेवाकेन्द्र है, उनकी सेवा और उन्हें चित-समाधि प्रदान करने का कार्य अन्य साधुओं के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि मुनिश्री सुमति कुमार ने एक वर्ष तक यहां सेवाकार्य करके साधुवृद्वों को चितसमाधि पहुंचाई। मुनिश्री युमति कुमार ने अपने उद्बोधन में एक साल के अनुभवों को साझा किया तथा कहा कि अब आगे का काम मुनि अमृतकुमार को देखना है। साधु हमेशा विचरण करते हैं और इसी में उनका उद्देश्य पूरा होता है। कार्यक्रम में मुनिश्री देवार्य कुमार, मुनि तन्मय कुमार व मुनि उपशम कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जैविभा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने मुनिश्री समुति कुमार के साथ बीते एक साल के संस्मरणों को प्रस्तुत किया तथा कहा कि यह विश्वविद्यालय और समूचा जैन विश्व भारती परिसर संतों के निरन्तर प्रवास के कारण आध्यात्मिक ऊर्जाओं से भरपूर रहता है। उनकी कृपा से ही यहां का वातावरण सदैव पावन बना रहता है। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, जैन मनीषी डाॅ. शान्ता जैन, प्रो. नलिन शास्त्री, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष शांतिलाल जैन, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष सुनीता बैद आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम के प्रारम्भ में महिला मंडल एवं कन्या मंडल की ओर से महिलाओं ने मंगलगान व गीतिका प्रस्तुत किए। तेरापंथी सभा के मंत्री राजेन्द खटेड़ ने कार्यक्रम का संचालन किया।

जैन मुनि का मंगल विहार

यहां जैन विश्व भारती स्थित भिक्षु विहार से मंगलवार को मुनिश्री सुमति कुमार ने अपने सहवर्ती संतों के साथ मंगल विहार किया। वे यहां पिछले एक वर्ष से वृद्ध साधु सेवा केन्द्र में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे थे। उन्होंने अपना दायित्व मुनिश्री अमृतकुमार को सौंप कर गंगानगर के लिए प्रस्थान किया। वे यहां से बीदासर, सरदारशहर होते हुए गंगाशहर पहुंचेंगे। उनके मंगल विहार के अवसर पर जैन विश्व भारती, जैविभा विश्वविद्यालय, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, तेरापंथ महिला मंडल, अणुव्रत समिति आदि संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे, इनमें अणुव्रत समिति के अध्यक्ष शांतिलाल बैद, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार रमेश कुमार मेहता, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. नलिन शास्त्री, प्रो. अनिल धर, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. युवराज सिंह खांगारोत, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, प्रगति चैरड़िया, आयुषी शर्मा, पंकज भटनागर, डाॅ. जेपी सिंह, डाॅ. विनोद कुमार सैनी, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. सुनिता इंदौरिया, विजयकुमार शर्मा, डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, डाॅ. रविन्द्रसिंह राठौड़, भाटी आदि उपस्थित थे।

Friday, 26 February 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष का सेवानिवृति पर मंगलभावना समारोह

 

दायित्व के प्रति समर्पण के साथ नियमितता व समयबद्धता जरूरी- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 27 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कार्यवाहक कुलपति प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा है कि अगर व्यक्ति अपने कर्तव्य से प्रेम रखता है, तो उसके सामने आने वाली समस्त चुनौतियां स्वतः ही हल होती जाती हैं। दायित्वों के प्रति समर्पण के साथ नियमितता और समयबद्धता दोनों का होना ही श्रेष्ठ गुण होता है। वे यहां समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान के सेवानिवृति पर आयोजित मंगलभावना समारोह के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने गुरू के लिए आवश्यक बताया कि वह केवल प्रिय बोले और सत्य नहीं बोले तो अनुचित होता है। सत्य को प्रकट नहीं करना विनाश का कारण बन सकता है। उन्होंने छात्रों के साथ शिक्षक का तादात्म्य रखने और संस्थान के प्रति समर्पण की भावना रखने को विकास के लिए आवश्यक बताया। इस अवसर पर डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान और उनकी पत्नी को शाॅल ओढा कर एवं प्रतीक चिह्न भेंट करके सम्मानित किया गया। डाॅ. प्रधान ने अपने सम्बोधन में अपने अनुभवों और सहकर्मियों के साथ पारस्परिक सम्बंधों के बारे में बताते हुए कहा कि व्यक्ति को जीवन भर सीखने की ललक रखनी चाहिए। हमेशा नवीनतम को ग्रहण करने की इच्छा से ही व्यक्ति आगे बढ सकता है। उन्होंने बताया कि समयबद्धता केवल समय पर आने या उपस्थित होने को ही नहीं कहा जा सकता है, बल्कि अपने जिम्मे आए प्रत्येक कार्य को समय पर पूर्ण करने की प्रवृति ही समयबद्धता होती है। कार्यक्रम में डाॅ. विकास शर्मा, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, आरके जैन, प्रो. रेखा तिवाड़ी व प्रो. अनिल धर ने डाॅ. प्रधान के भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनकी कार्यशैली की प्रशंसा की। कार्यक्रम के अंत में रजिस्ट्रार रमेश कुमार मेहता ने उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बताया कि सेवानिवृति के समय स्वास्थ्य, संतानों के कार्य और बीती सेवाओं के बारे में अक्सर पूछा जाता है और तीनों की सवालों में डाॅ. प्रधान संतोषजनक होने की सुखद स्थिति है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक व अशैक्षणिक कार्मिक उपस्थित रहे।

Monday, 15 February 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में एनसीसी की गल्र्स बटालियन का पांच दिवसीय शिविर

 

एनसीसी छात्राओं को राईफल, मानचित्र व संकेतों का दिया प्रशिक्षण

लाडनूँ, 16 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नेशनल केडिट कोर (एनसीसी) की 3राज गल्र्स बटालियन का पांच दिवसीय शिविर में हवलदार बलजिन्द्र सिंह ने एनसीसी छात्राओं को मानचित्र एवं पारम्परिक संकेतों की पहचान के बारे में जानकारी दी तथा उन्हें ड्रिल के बारे में बताया। इसके साथ ही इस अवसर पर कैडेट्स को पाॅइंट टू टू राईफल एंड फाइव पाॅइंट्स के बारे में विस्तार से समझाया और सम्बंधित ट्रेनिंग प्रदान की गई। प्रारम्भ में प्रथम सत्र में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने एनसीसी के उद्देश्यों के बारे में बताया और लीडरशिप के गुणों के विकास के बारे में जानकारी दी। सुबेदार मेजर गिरधारी व प्राचार्या साधना ने शिविर में होने वाली गतिविधियों के बारे में बताते हुए अपने विचार रखे। कार्यक्रम में एनसीसी छात्रा श्वेता नेहरा व मनीषा शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रारम्भ में ईशा व निशा ने स्वा्रगत गान प्रस्तुत किया। अंत में प्रभारी आयुषी शर्मा ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर बटालियन के हवलदार बलजिन्द्र सिंह के अलावा सोनादेवी सेठिया गल्र्स काॅलेज सुजानगढ की प्राचार्या साधना व एनसीसी प्रभारी मेघना सोनी, प्रियंका सैन, नरेश, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी व एनसीसी प्रभारी आयुषी शर्मा, डाॅ. प्रगति भटनागर एवं एनसीसी कैडेट्स उपस्थित रहे।

एनसीसी कैडेट्स लक्ष्य को फोकस करके सफलता की ओर बढें- प्रो. त्रिपाठी

23 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नेशनल केडिट कोर (एनसीसी) की 3राज गल्र्स बटालियन के पांच दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय एवं सोनादेवी सेठिया गल्र्स काॅलेज सुजानगढ की कैडेट्स छात्राओं ने भाग लेकर सलामी शस्त्र, कैमोफ्लेगिंग, गार्ड माउंटिंग, प्राथमिक उपचार, मैप रीडिंग, आपदा प्रबंधन आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। शिविर में प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए सभी कार्यों की आखिर में परीक्षा भी ली गई। शिविर में कुल 53 कैडेट्स छात्राओं ने भाग लिया। समापन समारोह में कैडेट्स दमयंती व्र कृष्णा प्रजापत ने नृत्य प्रस्तुत किया। सविता, मनीषा व सुमन ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। कैडेट्स ने इस अवसर पर अपने शिविर के अनुभवों को भी साझा किया। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कार्यक्रम में कहा कि अर्जुन द्वारा केवल मछली की आंख देखकर निशाना लगाने की तरह ही छात्राओं को अपने लक्ष्य को फोकस करके चलना चाहिए और उसी मुताबिक अपने कैरियर का चुनाव करना चाहिए। दृढ प्रतिज्ञा और मजबूत इच्छाशक्ति से ही लक्ष्य प्राप्त करने में सफलता मिल सकती है। एनसीसी प्रभारी आयुषी शर्मा ने बताया कि छात्राओं को पाइंट टू-टू राइफल को खोलना, जोड़ना, लोडिंग, काॅकिंग, होल्डिंग, पायरिंग पाॅजिशन, आम्र्स फोर्स के बैज, रैंक सम्मान आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। सोना देवी सेठिया गल्र्स महाविद्यालय सुजानगढ की एनसीसी प्रभारी मेघना सोनी ने बताया कि शिविर में कैडेट्स को विभिन्न स्थलों की पहचान, ड्रिल, मानचित्रों के प्रकार एवं पारम्परिक संकेतों की पहचान, इन्फेन्टरी बटालियन के संगठन एवं उसके प्रमुख हथियार, बुनियादी संचार प्रक्रिया, आपदा प्रबंधन, पर्सनैलिटी डवलेपमेंट, आम्तरक्षा, फिटनैस, आत्मविश्वास वृद्धि, टीमवर्क आदि पर कक्षाओं का संचालन किया जाकर प्रशिक्षित किया गया। शिविर में कमांडिंग ऑफिसर कर्नल अभिषेक चतुर्वेदी, सुबेदार मेजर गिरधारीसिंह व हवलदार बलजिन्द्र सिंह ने कैडेट्स को विभिन्न प्रशिक्षण प्रदान किया।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में वसंत पंचमी के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित

 

वसंत पंचमी पर ज्ञान व स्वाध्याय का महत्व बताया

लाडनूँ, 16 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में वसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बनवारीलाल जैन ने ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कोविड काल में केवल ज्ञान के माध्यम से ही विविध चिंतन व सृजन संभव हो पाया। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन व ज्ञान के प्रति अनुराग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नित्य स्वाध्याय करने को को ही सरस्वती की वास्तविक अर्चना बताया। डाॅ. सरोज राय व डाॅ. गिरीराज भोजक ने इस अवसर पर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। प्रारम्भ में सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप-प्रज्ज्वलन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. आभासिंह ने किया। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा मूक्स व ओडीएल पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित

 

प्रगति के लिए आत्मनिर्भरता के साथ जागरूकता जरूरी- प्रो. तिवाड़ी

लाडनूँ, 16 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के तत्वावधान में मूक्स शिक्षा पद्धति पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के निर्देशन में आयोजित इस वेबिनार में मुख्य वक्ता अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. शम्भुनाथ तिवाड़ी ने कहा कि जीवन में प्रगति के लिए आत्मनिर्भरता एवं जागरूकता का समन्वय होने पर संभव होती है। उन्होंने दूरस्थ शिक्षा में अकेडमिक व व्यावयायिक शिक्षा के बारे में जानकारी देते हुए क्वालिटी एजुकेशन दिए जाने पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने पाठ्यसामग्री, वीडियो, आॅनलाईन चर्चा, एसाइनमेंट, नोट्स आदि के बारे में बताते हुए उनमें नयापन और स्तर होने की बात कही। उन्होंने मूक में 9 संस्थाओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाने और टेक्नीकल, प्रोफेशनल, सोशल और अन्य ट्रेड के हिसाब से संस्थाओं के सम्पर्क के बारे में बताया।

युवा शक्ति को संसाधन में बदलना जरूरी

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. प्रभातकुमार मिश्रा ने कहा कि भारत में युवा आबादी की बहुतायत है और उसे संसाधन में बदलने की आवश्यकता है। युवावर्ग के लिए मूक्स शिक्षा पद्धति लाभदायक सिद्ध हो सकती है। कोरोना काल में जब स्कूल और काॅलेज बंद थे, तब मूक्स के माध्यम से घर बैठे शिक्षा दी जानी संभव हो पाई थी। इस अवधि में ई-लर्निंग और मूक्स की क्षमता व सीमाएं पता चली। सरकार ने भी इसमें 3-4 बड़ी समस्याओं को दूर करने की कोशिश की है। वेबिनार के प्रारम्भ में जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने वेबिनार की विषयवस्तु के बारे में बताया तथा ओडीएल (ओपन डिस्टेंस लर्निंग) व मूक्स के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि इसमें शिक्षा मुक्त है, कोई बंधन नहीं है। उन्होंने घरेलु महिलाओं, विकलांगों आदि के लिए ओडीएस और उच्च शिक्षा के लिए मूक्स को लाभदायक बताया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्रतिभा कोठारी ने मंगलाचरण किया एवं डाॅ. प्रेमलता चैरड़िया ने जैन विश्वभारती संस्थान का परचिय दिया तथा विश्वविद्यालय के अनुशास्ताओं के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन प्रगति चैरड़िया ने किया। वेबिनार में आयुषी शर्मा, अभिषेक शर्मा, अंजुला जैन, चारू मित्तल, डाॅ. वीरबाला छाबड़ा, गायत्री चैधरी, हीना अरोड़ा, ज्योति पूनिया, कमल कुमार मोदी, करा भडाना, मंदिरा घोष, मनोहरलाल, जगदीश यायावर, निशा राठौड़, ओमप्रकाश सारण, पंकज भटनागर, प्रभात कुमार, प्रियंका सिखवाल, सरोज सेवदा, सुष्मिता स्वामी, सीता कंवर, उज्ज्वल बिस्वास, उत्तम मंडल, दीपक कक्कड़, अभिषेक चारण, भागीरथ खरड़िया, डाॅ. जेसी रेड्डी, डाॅ. विनोद कुमार सैनी, निशा कक्कड़, प्रवीण दूगड़, रवीना बालिया, सोमवीर सांगवान आदि मौजूद रहे।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में जैन संस्कृति, दर्शन व भाषा पर व्याख्यान आयोजित

 

जैन परम्परा का अनेकांतवाद सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत

लाडनूँ, 16 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में संचालित आंतरिक व्याख्यानमाला के तहत सहायक आचार्य सोमवीर सांगवान ने ‘जैन संस्कृति, दर्शन एवं भाषा’ विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। सांगवान ने अपने व्याख्यान में जैन तीर्थंकर ऋषभदेव से लेकर 24 तीर्थंकरों के समय में जैन दर्शन व संस्कृति के विकास, जैन साहित्य की रचनाओं आदि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिन संस्कृति में अनेकांतवाद व स्याद्वाद का सिद्धांत महत्वपूर्ण रहा है। साथ ही सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन औार समरूक चरित्र के बारे में भी बताया। उन्होंने भद्रबाहु से दिगम्बर परम्परा के शुरू होने और श्वतेामबर परम्परा के अलग होने के बारे में भी जानकारी दी। प्राकृत, अर्धमागधी, कन्नड़, तमिल, हिन्दी आदि में रचित जैन साहित्य की जानकारी भी अपने व्याख्यान में दी। व्याख्यान के अंत में उन्होंने उपस्थित संभागियों के प्रश्नों का समाधान भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचाय्र प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने जैन धर्म, संस्कृति व दर्शन सम्बंधी अनेक महत्वपूर्ण व चर्चित बातों का खुलासा किया।ं कार्यक्रम का संचालन अभिषेक चारण ने किया। इस अवसर पर डाॅ. बलवीर चारण, कमल कुमार मोदी, शेर सिंह, डाॅ. विनोद कुमार सैनी, श्वेता खटड़े, डाॅ. प्रगति भटनागर आदि उपस्थित रहे।

Thursday, 11 February 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वाधान में मासिक सड़क सुरक्षा कार्यक्रम के तहत व्याख्यान का आयोजन

 

यातायात नियमों की जानकारी के साथ उनका पालन हमारा कत्र्तव्य

लाडनूँ, 12 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की दोनों इकाइयों के संयुक्त तत्वाधान में भारत सरकार द्वारा चलाए गए मासिक सड़क सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत सड़क सुरक्षा संबंधी नियमों एवं सावधानियों की जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम की शुरुआत में इकाई प्रथम प्रभारी डॉ. प्रगति भटनागर ने सड़क सुरक्षा के महत्व को उजागर किया। तत्पश्चात सुरभि नाहटा, नफीसा बानो तथा स्नेहा पारीक ने यातायात नियमों एवं सावधानियों की जानकारी प्रदान करते हुए अपने विचार अभिव्यक्त किए। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य तथा दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने सड़क सुरक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बतलाया कि न केवल हमें यातायात नियमों की जानकारी होना आवश्यक है, बल्कि उनका स्वेच्छा से पालन करना भी हमारा नैतिक कर्तव्य है, अतः यातायात नियमों की पालना करके हम राष्ट्रीय विकास में सहायक बन सकते हैं। अंत में इकाई द्वितीय प्रभारी डॉ बलबीर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Monday, 8 February 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नियमित कक्षाओं का नई गाईड लाईन के अनुसार संचालन

 लाडनूँ, 9 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय एवं सभी विभागों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर की सभी ऑफ लाईन कक्षाओं में शिक्षण कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने बताया कि अभी तक यहां सभी कक्षाओं का ऑनलाईन संचालन किया जा रहा था। अब राज्य सरकार की नई गाइड लाईन के अनुसार संस्थान के विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य ऑफ लाईन शुरू कर दिया गया है। कक्षाओं के दौरान छात्राओं को मास्क लगाना अनिवार्य है तथा सेनिटाईजर साथ रखना, हाथों का धोना, कक्षाओं में इस दौरान बैठने की व्यवस्था में सामाजिक दूरी का खयाल रखने, कहीं भी एकजगह एकत्र नहीं होने, अपने सामान को परस्पर साझा नहीं करने आदि निर्देशों का पालन आवश्यक किया गया है। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि बीए फाईनल एवं बीकाॅम फाईनल ईयर की छात्राओं को कक्षाओं में बुलाया जा रहा है, जिन्हें आधी-आधी संख्या में ही बुलाने की व्यवस्था की गई है। इन सभी ऑफ लाईन संचालित कक्षओं की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने भी किया तथा मौके पर सभी विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में ‘कन्या भ्रूण हत्या रोकने के प्रति जागरूकता’ विषय पर व्याख्यान आयोजित

 

सोच बदलने की जागरूकता से संभव है कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण

लाडनूँ, 9 फरवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में आयोजित व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘कन्या भ्रूण हत्या रोकने के प्रति जागरूकता’ विषय पर डाॅ. विष्णु कुमार ने अपने व्याख्यान में कहा कि मानव का मरना इतना दुःखदायी नहीं है, जितनी मानवता की मौत- ये शब्द बांग्ला लेखक शरतचन्द्र के हैं। कन्या भ्रूण हत्या से हर साल लाखों अजन्मी कन्याओं की हत्या मानवता के अंत को प्रकट करती हैं। इससे देश की संस्कृति, सभ्यता, नैतिकता और प्राकृतिक न्याय की भी हत्या हो रही है। यहां गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, सीता, अनुसूईया आदि महिलाओं को देश का गौरव समझा जाता रहा है और यहां यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता जैसी उक्तियों से महिला सम्मान की बात कही जाती है, वहां कन्या भ्रूण हत्या सबसे निन्दनीय विषय माना जाएगा, जिस पर सार्थक रोक आवश्यक है।

हर साल 15 लाख कन्या भ्रूण हत्याएं

उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न प्रांतों में प्रतिवर्ष 15 लाख के करीब कन्याओं की जन्म लेते ही अथवा भ्रूण अवस्था में ही हत्या कर दी जाती है। इसके लिए जरूरी है कि समाज की लैंगिक सोच में परिवर्तन किया जाए। अगर परिवार में पहला बच्चा लड़की होता है, तो माता-पिता दूसरी संतान को लड़की के रूप में पसंद नहीं करते। दूसरी संतान लड़के की आस में कन्या भ्रूण पर अन्याय होता है। यह सोच केवल गरीब या मध्यमवर्गीय परिवारों में ही नहीं बल्कि उच्च वर्ग के परिवारों एवं शिक्षित महिलाओं में भी अधिकतर देखने को मिल रही है। इस मानसिकता को रोकने और लोगों में सोच बदलने के लिए जागरूकता जरूरी है। गर्भस्थ बच्चे के लिंग परीक्षण पर सरकार ने कानून बनाकर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि सरकार इसे प्रभावी तरीके से लागू करे।

बालिकाओं व महिलाओं की स्थिति में सुधार जरूरी

डाॅ. विष्णु कुमार ने बताया कि इन सबके साथ ही बालिकाओं एवं महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के प्रयासों पर भी सरकार को जोर देना चाहिए। केन्द्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं धनलक्ष्मी योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना, जननी सुरक्षा योजना आदि की क्रियान्विति तेज की जाए और स्वयंसेवी संगठनों, संस्थाओं को समाज में जागृति लाने के लिए अभियान चलाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों की मानसिकता में बदलाव से ही कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सकता है। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने भी कन्या भ्रूण हत्या के लिए सामाजिक जागरूकता जरूरी बताया। इस अवसर पर डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभा सिंह, डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा, डाॅ. ममता, ललित, प्रमोद ओला आदि उपस्थित रहे।

Friday, 29 January 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में रामचरित मानस में जीचन मूल्य विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन

 

तुलसी ने रामकथा के माध्यम से मानव जाति के समक्ष आदर्शों की प्रतिष्ठा की- प्रो. तिवारी

लाडनूँ, 30 जनवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में ‘रामचरित मानस में जीवनमूल्य’ विषय पर एक ऑनलाईन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. कैलाश नारायण तिवारी ने कहा कि संत तुलसी ने रामकथा के माध्यम से समग्र मानव जाति के समक्ष जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी अद्वितीय और अनुपम हैं। शाश्वत जीवन मूल्यों का जितना सरगर्भित विवेचन रामचरित मानस में मिलता है, उतरा किसी भी दूसरे धर्मग्रन्थ में मिल पाना मुश्किल है। इस ग्रंथ में रामकथा के विभिन्न पात्रों के जरिये एक आदर्श राजा, आदर्श पुत्र, आदर्श मित्र, आदर्श शिक्षक, आदर्श विद्यार्थी, आदर्श अभिभावक, आदर्श भाई, आदर्श पत्नी, आदर्श मित्र, आदर्श सेवक और आदर्श शत्रु तक के स्वरूप चरित्रों को निरूपित किया गया है। रामचरित मानस में संत तुलसीदास हमारे समक्ष धर्मउपदेशक और नीतिकार के रूप में उपस्थित होते हैं। इसमें देश के सनातन जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठा के साथ अनेक नवीन जीवन मूल्यों की स्थापना भी की गई है। वेबिनार के मुख्य वक्ता वाराणसी के सम्पूर्णानन्द विश्वविद्यालय के प्रो. राजेन्द्र मिश्रा ने अपने सम्बोधन में कहा कि वाल्मीकि रामायण में चार पुरूषार्थों का आधार तत्व बनाया गया है, लेकिन रामचरित मानस में श्रद्धा व भक्ति की भावनाओं को महत्व दिया गया है। इससे क्षमा, दया, ममता, करूणा, सतय, अहिंसा, विश्वबंधुत्व, परोपकार, उदारता आदि मूल्यों का प्रस्फुटन स्वतः ही हो जाता है। हमारी परम्परा और विरासत के महत्वपूर्ण प्रतिरूप के रूप में रामचरित मानस अपना स्थान रखता है। वेबिनार के प्रारम्भ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने अपने स्वागत वक्तव्य के साथ विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मूल्यों का संकट दुनिया के सामने सबसे बड़ी समस्या के रूप में उपस्थित है। मूल्यों का नष्ट होना चिंताजनक है। इसके लिए आवश्यक हो गया है कि अपने कालजयी साहित्य का गहन अध्ययन करके हम उदात्त जीवन मूल्यों की तलाश करके उन्हें आत्मसात करने के साथ समाज में उन्हें प्रतिष्ठापित करें। वेबिनार के अंत में डाॅ. विनोद कुमार सैनी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक चारण ने किया।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शहीद दिवस पर किया गांधी को याद

 

अहिंसा के प्रतीक गांधी की शिक्षाओं में सभी समस्याओं का हल- डाॅ. लिपि

लाडनूँ, 30 जनवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग के अन्तर्गत महात्मा गांधी की पुण्यतिथि शहीद दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाकर राष्ट्रपिता के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में डाॅ. लिपि जैन ने महात्मा गांधी को आधनिक युग में अहिंसा के प्रतीक के रूप में चित्रित करते हुए उनके द्वारा प्रतिपादित शिक्षाओं को वर्तमान की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया। विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल धर ने गांधीमार्ग की विशेषताओं को रेखांकित करते हुये वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में उसका महत्व बताया तथा कहा कि इच्छाओं के अल्पीकरण एवं सरलीकरण से मानव समाज की विभिन्न समस्याओं का समाधान संभव है। डाॅ. रविन्द्रसिंह राठौड़ ने वैश्विक परिपेक्ष्य में सामाजिक समरसता के लिए गांधी के अहिंसा सिद्धांत और व्यवहार को उपयोगी बताया। डाॅ. बलवीर सिंह ने गांधी की प्रासंगिकता का भारतीय परिप्रेक्ष्य में उल्लेख किया। डाॅ. विकास शर्मा ने भारतीय स्वतंत्रका के आंदोलन में महात्मा गांधी और उनके सिद्धांतों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में मोनिका भाटी व कोमल तुनवाल ने भी अपने विचार रखे व गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में प्रेरण जैन ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी राखी प्रजापत ने किया।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में ग्राीन कम्प्यूटिंग पर व्याख्यान आयोजित

 

कम्प्यूटर-मोबाईल के अंधाधुंध प्रयोग से हुए पर्यावरण खतरे से निपटने के उपायों पर ध्यान जरूरी

लाडनूँ, 30 जनवरी 2021।जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में ‘ग्रीन कम्प्यूटिंग एक पर्यावरण सम्मत उपागम’ विषय पर डाॅ. मनीष भटनागर ने कहा कि आधुनिक समाज में प्रत्येक कार्य सूचना और प्रौद्योगिकी पर आधारित है और मानव जीवन के प्रत्येक कार्यक्षेत्र में कम्प्यूटर, मोबाईल जैसी तकनीकों का उपयोग बढता ही जा रहा है। सभी उपकरणों का अपशिष्ट एकत्रित होकर बढता ही जा रहा है और इनके कारण पर्यावरण खतरे भी बढने लगे हैं। इनमें अनुपयोगी विभिन्न पदार्थों के नष्ट करने से पर्यावरणीय खतरा बढता जा रहा है। इन खतरों से बचने और मानव पीढी को संरक्षित रखने की दिशा में विश्वभर में लोगों की चिंताएं बढ रही हैं। इसके लिए इलेक्ट्रोनिक उपकरणों के उपयोग के काल को दीर्घ बनाने और ऊर्जा के समुचित उपयोग के लिए सोचने की आवश्यकता है। शिक्षा के माध्यम से इस सम्बंध में जागरूकता लाई जा सकती है। पर्यावरण एक सामाजिक दायित्व है और इसके संरक्षण के लिए अनुशासित होकर भावी पीढी को खतरों से बचाने के लिए काम करने की जरूरत है।

पर्यावरण सम्मत उपकरणों के निर्माण व प्रयोग को बढावा जरूरी

डाॅ. भटनागर ने कहा कि ग्रीन कम्प्यूटिंग में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के साथ विभिन्न उपकरणों का प्रयोग सुनिश्चित करता है। कम्प्यूटर, माॅनिटर, स्टारेज डिवाइस आदि का निस्तारण भी सर्वसम्मत व सुनिश्चित होना आवश्यक है। साथ ही अवांछित उपकरणों को पुनः उपयोग में लाने योग्य बनाने की आवश्यकता है। ऊर्जा संरक्षण वाले कम्प्यूटर, प्रिंटर, सर्वर का निर्माण और सहयोगी स्टोरेज व्यवस्था को विकसित करने, ऑटो ऑफ सिस्टम लाए जाने, कंप्यूटर अपशिष्ट के लिए संग्रहण केन्द्र बनाए जाने आदि कदमों को उठाए जाने की महत्ती आवश्यकता बनी हुई है। ग्रीन कम्प्यूटिंग को एक आंदोलन के रूप में लिया जाकर अपनाना होगा। डाॅ. भटनागर ने कहा कि आज जरूरत है कि एलईडी का उपयोग करके बेहतर परिणामों को प्राप्त किया जाए एवं पर्यावरण-सम्मत उपकरणों का निर्माण किया जाए, यह आवश्यक बन गया है। व्याख्यान के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र किया गया, जिसमें सहभागियों के सवालों का जवाब देते हुए समाधान की दिशा में चर्चा की। अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने आभार ज्ञापित किया। इस दौरान डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभासिंह, ममता सोनी, प्रमोद ओला, ललित गौड़ आदि उपस्थित रहे।

Thursday, 28 January 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अन्तर्राष्ट्रीय कार्यो के लिए कार्यालय का उद्घाटन


 

विदेशी छात्रों व संस्थानों के साथ जैविभा विश्वविद्यालय की बढेगी गतिविधियां- कुलपति

लाडनूँ, 29.जनवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अन्तर्राष्ट्रीय कार्यो को गति देने हेतु एक कार्यालय का उद्घाटन संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ द्वारा किया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए कुलपति दूगड़ ने अन्तर्राष्ट्रीय कार्यों के नौ सूत्रीय कार्यक्रमों की ओर आकर्षित करते हुए बताया कि इस कार्यालय के माध्यम से विदेशी छात्रों के स्वागत और समर्थन से संबंधित सभी मामलों का समन्वय किया जाएगा। विदेशी छात्रों के बीच प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी का प्रसार किया जाएगा। देश से बाहर होने वाली प्रचार गतिविधियों और ब्रांड निर्माण सम्बंधी अभियान में यह कार्यालय संलग्न रहेगा। विदेशी संस्थानों के साथ सभी सहयोगी गतिविधियों को पूरा करने के लिए यह सिंगल पॉइंट संपर्क रखेगा। विदेशी छात्रों और प्रायोजक एजेंसी के बीच संपर्क निकाय के रूप में यह कार्यालय काम करेगा। सभी प्रकार के मामलों में इस कार्यालय द्वारा विदेशी छात्रों की शिकायतों को दूर किये जाने का काम किया जाएगा। साथी छात्रों के साथ नेटवर्किंग की सुविधा की जाएगी। विदेशी छात्रों के भारत में प्रवास को आरामदायक और समृद्ध बनाने के लिए तथा उन्हें नए सांस्कृतिक वातावरण के अनुकूल बनाने के सम्बंध में हर संभव सहायता प्रदान करने का कार्य करेगा। इस अवसर पर उन्होंने कार्यालय की समन्वयक को कार्यो को गति देने के सम्बंध में आवश्यक निर्देश भी प्रदान किए।

विदेशी छात्रों के लिए होंगे सुविधापूर्ण कोर्स

इस अवसर पर दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान में विगत कई वर्षों से अन्तर्राष्ट्रीय कार्यों की दिशा में कुछ प्रयत्न होते रहे हैं। किन्तु अब यह केन्द्र खुल जाने से इस दिशा में विशेष गति मिल पाएगी। अहिंसा एवं शान्ति विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल धर ने कहा कि अनेकान्त शोधपीठ के अन्तर्गत विदेशी छात्रों के लिए बनाई गई योजनाओं को अब इस कार्यालय के माध्यम से आगे बढ़ाने का काम किया जा सकेगा। अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के इस कार्यालय की समन्वयक प्रगति चैरड़िया ने इन्टरनेशनल अफेयर्स की विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यालय के माध्यम से संस्थान की बेवसाइट पर इन्टरनेशनल अफेयर्स की गतिविधियों को प्रकाशित किया जायेगा तथा इस सम्बंध में एक पत्रिका भी लांच की जायेगी। विदेशी छात्रों की सुख-सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमण्डलों की मेजबानी के लिए सम्भावनाएं तलाशी जायेगी। विदेशी छात्रों के लिए सर्टिफिकेट, स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी शुरू किये जायेंगे। कुलसचिव रमेश मेहता ने इस अवसर शुभकामनां प्रस्तुत करते हुए सबके सहयोग से कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये प्रेरित किया।

जैविभा को मिलेगा अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. नलिन शास्त्री ने कहा कि संस्थान में अन्तर्राष्ट्रीय कार्यों के लिए पहले से ही काम होता रहा है, किन्तु संस्थान इस दिशा में अब बड़े कदम बढायेगा। एक विस्तृत कार्य योजना के साथ समयबद्ध कार्य किये जायेंगे और तदनुरूप इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किये जायेंगे। इससे इस संस्थान को अब अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त हो सकेगा। प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह, डाॅ. विकास शर्मा आदि ने इस संदर्भ में कुछ सुझाव दिये। कार्यक्रम के प्रारंभ में डाॅ. अरिहन्त जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। अन्त में कार्यक्रम समन्वयक चैरड़िया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम संयोजना में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की सहायक आचार्य आयुषी शर्मा ने सहयोग प्रदान किया।

Friday, 22 January 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जन्म जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित

 

आत्मशक्ति व राष्ट्रप्रेम से सराबोर थे नेताजी सुभाष बोस

लाडनूँ, 23 जनवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जन्म जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करके मनाया गया। कार्यक्रम में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि आत्मविश्वास, आत्मशक्ति, सूझबूझ एवं राष्ट्रप्रेम की भावना उनमें प्रबल थी। नेताजी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व बहुत ही निराला था। उन्होंने नेताजी के जीवन से मिलने वाली ग्रहणीय शिक्षाओं से अवगत कराया। प्रो. अनिल धर ने कहा कि सर्वप्रथम गांधीजी को नेताजी ने ही संबोधित किया था। नेताजी में राष्ट्रप्रेम, देश प्रेम, देशभक्ति और स्वाभिमान कूट-कूट कर भरा था। विदेशी शासन से मुक्त कराने की भावना और देशवासियों में निडर रहने का साहस उन्होंने जाग्रत किया। प्रो. बी.एल.जैन ने कहा कि नेताजी जवानों में प्राण फूंकने वाले थे। पूरा देश उनके जन्म दिवस को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मना रहा है। उन्होंने गुलामी को कभी जीवन में नहीं अपनाने पर बल दिया था। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. अमिता जैन ने कहा कि मनुष्य को अपने उद्देश्य की प्राप्ति करनी चाहिए। इसके लिए श्रद्धा और आत्मविश्वास का होना अति आवश्यक है। छात्राध्यापिका रुबीना, शोभा स्वामी और नेहा पारीक ने भी अपने अपने भावों को भाषण के माध्यम से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. बी.प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. गिरधारी लाल, डॉ. बलवीर सिंह, डॉ. ममता सोनी, प्रमोद ओला, ललित कुमार आदि संस्थान के समस्त संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनोद सियाग ने किया।

Tuesday, 19 January 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में ‘भारतीय राजनीति में गत्यात्मकता’ पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित

 

परिपक्व नेतृत्व को पहचानने और स्थापित करने में महत्वपूर्ण रही है भारतीय राजनीति- प्रो. आढा

लाडनूँ, 20 जनवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में ‘भारतीय राजनीति में गत्यात्मकता’ विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के मार्गदर्शन एवं निर्देश्सन में आयोजित इस वेबिनार में मुख्य वक्ता जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के राजनीति विज्ञान के आचार्य प्रो. आरएस आढा ने कहा कि भारतीय राजनीति में परिपक्व नेतृत्व को पहचानने और उसे वैधता प्रदान करना मुख्य गत्यात्मकता रही है। व्यक्ति केन्द्रीकृत प्रवृति भारतीय राजनीति की मुख्य गत्यात्मकता रही है। उन्होंने भारत में राजनीतिक दलों के संदर्भ में भी राजनीति की गत्यात्मकता को चिह्नित किया। महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार के डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने अपने वक्तव्य में परिवर्तन को प्रकृति का नियम बताते हुये भारतीय संस्कृति में मौजूद आदर्शों सत्य, अहिंसा, धर्म-सहिष्णुता, समानता, न्याय तथा स्वतंत्रता को सार्वभौमिक मानते हुए हामारी सरकारों की गत्यात्मकता को अपनाने की के बारे में जानकारी दी। एसएस जैन सुबोध पीजी महाविद्यालय की सहायक आचार्य डाॅ. मधुबाला ने राजनीति को सामाजिकता, विकास और चुनावी व्यवस्था के मुख्य बिन्दुओं के रूप में अभिव्यक्त करते हुये महत्वपूर्ण बदलावों को चिह्नित किया। उन्होंने ‘वन नेशन - वन इलेक्शन’ की प्रकृति पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के प्रारम्भ में प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने अपने स्वागत वक्तव्य में वेबिनार की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। वेबिनार समन्वयक डाॅ. बलवीर सिंह चारण ने कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में अभिषेक चारण ने धन्यवाद ज्ञापित किया। वेबिनार में तकनीकी सहयोग मोहन सियोल का रहा। कार्यक्रम में डाॅ. सत्यानारायण भारद्वाज, डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. प्रगति भटनागर डाॅ. जेपी सिंह, डाॅ. लिपि दूगड़ कमल कुमार मोदी, अभिषेक शर्मा, श्वेता खटेड़, डाॅ. विनोद कुमार सैनी, आयुषी शर्मा आदि समस्त संकाय सदस्यो के अलावा 100 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

Sunday, 10 January 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति का सम्मान


 

प्राकृतिक चिकित्सा का पशु चिकित्सा की दिशा में उपयोग पर भी काम होना जरूरी- प्रो. शर्मा

लाडनूँ, 11 जनवरी 2021। पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति प्रो. विष्णु शर्मा ने यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के साथ सहयोगी रूप में कार्य करने की इच्छा जताई है। यह बात उन्होंने यहां जैविभा विश्वविद्यालय के अवलोकन और जानकारी प्राप्त करने के बाद बैठक में जाहिर की। उन्होंने कहा कि लाडनूँ में यह विश्वविद्यालय बहुत ही अच्छा कार्य कर रहा है। विशेष रूप से यहां की प्राकृतिक चिकित्सा की व्यवस्था सराहनीय है। वे चाहते हैं कि इसका उपयोग पशु चिकित्सा की दष्टि से भी किया जावे और इस दिशा में विकास व अनुसंधान हो। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने उन्हें जैविभा विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी और यहां की विशेषताओं के बारे में बताया। इस अवसर पर यहां उनका विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों द्वारा स्वागत-सम्मान किया गया। प्रो. नलिन शास्त्री ने उन्हें विश्वविद्यालय का स्मृति चिह्न और साहित्य भेंट किया। इस अवसर पर उनके साथ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ वेटरनरी एजुकेशन एंड रिसर्च, जयपुर की डीन प्रो. संगीता शर्मा व प्रसार शिक्षा निदेशालय के निदेशक डाॅ. राजेश धूड़ीया भी थे। उनका भी इस अवसर पर स्वागत किया गया। उनके साथ आयोजित बैठक में रजिस्ट्रार रमेश कुमार मेहता, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. अनिल धर, आरके जैन, डाॅ. विजेन्द्र प्रधान, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत आदि उपस्थित रहे।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में विभागाध्यक्ष रहे प्रो. वर्मा को श्रद्धांजलि

 लाडनूँ, 11 जनवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष रहे प्रो. आरबीएस वर्मा के निधन पर यहां समाज कार्य विभाग में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करके उन्हें श्रद्धांजलि अपित की गई। विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द प्रधान ने बताया कि वे बहुत ही सुलझे हुये विद्वान थे। उन्होंने देश की सेवा के लिये युवा वर्ग को नई दिशा प्रदान की थी। इस अवसर पर संकाय सदस्य डाॅ. पुष्पा मिश्रा, डाॅ. विकास शर्मा ने भी अपने विचार रखते हुये प्रो. वर्मा के निधन को अपूरणीय क्षति बताया। इस अवसर पर सभी विद्यार्थी उपस्थित थे।

Monday, 4 January 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में आंतरिक व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘समावेशी शिक्षा एवं शिक्षण अधिगम प्रक्रिया’ विषय पर व्याख्सानमाला कार्यक्रम का आयोजन

 

शिक्षक प्रशिक्षण की भावी चुनौतियों में नवाचार व तकनीक अपनायें- डाॅ. भोजक

लाडनूँ, 5 जनवरी 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में संचालित आंतरिक व्याख्यानमाला के अन्तर्गत डाॅ. गिरीराज भोजक ने ‘समावेशी शिक्षा एवं शिक्षण अधिगम प्रक्रिया’ विषय पर अपना व्याख्यान देते हुय विभिन्न नवाचारों एवं लचीलापन अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा की विविध चुनौतियों एवं उनके अनुरूप शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में नवाचार एवं व्यक्तिगत विभिन्नताओं पर आधारित लोचशीलता अपनाना आवश्यक है। कक्षा में व्याप्त विभिन्न परिस्थितियों यथा प्रतिभाशाली, औसत और न्यून उपलब्धि वाले विद्यार्थियों के सीखने के तरीकों में भिन्नतायें पाई जाती है। भारतीय संविधान भी एक समावेशी समाज की अवधारणा लेकर विभिन्न जाति, धर्म, सम्प्रदाय तथा सामाजिक, आर्थिक विषमता से मुक्त परिवेश की स्थापना पर बल देता है। भविष्य में सामान्य वैयक्तिक विभिन्नता के साथ-साथ दिव्यांग बालकों को भी सामान्य विद्यालय से जोड़ने पर एक शिक्षक तथा शैक्षिक प्रबंधन के समक्ष अनेक चुनौतियां प्रस्तुत होगी, जैसे सीखने का सार्वभौमिक अभिकल्प, शैक्षिक तकनीकी सम्बंधी उपकरण, कक्षा-कक्ष गतिविधियां, सामान्य तथा दिव्यांग बालकों का समन्वय आदि। नेशनल सेंटर आॅन युनिवर्सल डिजाईन फाॅर लर्निंग (2016) के द्वारा मस्तिष्क के सीखने सम्बंधी शोध कार्यों के आधार पर अधिगम के सार्वभैमिक अभिकल्प (यूडीएल) के द्वारा विविध अधिगम शैलियों के समागम हेतु प्रतिनिधित्व के साधन, विद्यार्थी अभिव्यक्ति के अवसरों में वृद्धि के साथ विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। डाॅ. भोजक ने भावी शिक्षकों के रूप में सभी प्रशिक्षकों को अधिकाधिक समावेशी शिक्षा की चुनौतियों तथा संभावित समाधानों के लिये सघन प्रशिक्षण एवं नवाचारों को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने सभी संकाय सदस्यों को शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में आने वाली भावी चुनौतियों के अनुरूप नवाचार तथा तकनीकी साधनों को अपनाने के लिये प्रेरित किया। इस व्याख्यान कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभासिंह, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. गिरधारी लाल शर्मा, डाॅ. ममता सोनी, प्रमोद ओला, ललित गौड़ आदि उपस्थित थे।