Saturday, 27 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में ‘शिक्षा को कैसे बनावें आनंदकारी’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन

 


रचनात्मक कार्यों, सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने पर शिक्षा आनन्ददायी बन सकती है -प्रो. जैन

लाडनूँ, 27 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में “संकाय संवर्धन कार्यक्रम” के अंतर्गत शनिवार को ‘शिक्षा को कैसे बनावें आनंदकारी’ विषय पर विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि गीत, संगीत, कला, नृत्य, प्राकृतिक संरक्षण, बागवानी करना, पेड़ लगाना, सेवा, असह्ययों की सहायता, रचनात्मक कार्य, सामाजिक गतिविधियों भ्रमण आदि से शिक्षा को आनंदकारी बनाया जा सकता है। समय का सदुपयोग, रचनात्मक कार्य एवं सकारात्मक सोच आदि से केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि जीवन के हर पहलु को आनन्दमय बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रेम, शांति, करुणा, अहिंसा, ईमानदारी, पवित्रता, शुद्धता सात्विकता, सरलता, निश्छलता आदि के भाव आनंद के द्वार खोलते हैं, जबकि क्रोध, ईष्र्या, घृणा, वैमनस्य जैसे भाव जीवन में जहर घोल देते हैं। स्वयं और दूसरों के प्रति सकारात्मक सोच और नजरिया ही हमें खुशी और नकारात्मक सोच हमें दुःखी बनाती है। किसी कार्य को बोझिल मन से नहीं किया जाए और ना ही जीवन को बोझिल समझ कर के जिया जाए। जिंदगी में कितने भी आगे निकल जाने पर भी लाखों लोगों से किसी न किसी रूप में पिछड़े होंगे, इसलिए जहां है जैसी स्थिति में उसी का भरपूर आनंद उठाना चाहिए। प्रत्येक छोटे कार्य और बड़े कार्य को आनंद, शांति और मुक्त भाव से किया जाना चाहिए। चेहरे पर प्रसन्नता का भाव आनंद प्रदान करता हैं। सेवा, श्रम, निष्ठा व सामाजिक सरोकार से किया कार्य आनंद देता है। इस कार्यक्रम में डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. बी. प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. अमिता जैन, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरधारीलाल, ललित कुमार आदि उपस्थित रहे।

Friday, 26 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के अन्तर्गत नैनोसाइंस व नैनोटैक्नोलोजी पर व्याख्यान का आयोजन

 


नैनो टेक्नोलोजी से संभव है किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाना

लाडनूँ, 26 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में संकाय संवर्द्धन कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को ‘नैनो साइंस तथा नैनो टेक्नोलोजी’ विषय पर ललित कुमार गौड़ ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रोद्योगिकी लोगों के जीवन में काफी महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इसकी भूमिका नैनो तकनीक क्षेत्र में अधिक बढने वाली है। नैनो, अति सूक्ष्म आकार वाले तत्वों, जो मीटर के एक अरबवें हिस्से से बने होते हैं, का विज्ञान है। नैनोटेक्नोलोजी व्यावहारिक जीवन में 1 से 100 नैनोमीटर स्केल में प्रयुक्त और अध्ययन की जाने वाली सभी तकनीकों और सम्बंधित विज्ञान का समूह है। उन्होंने बताया कि नैनोटेक्नोलोजी अणुओं व परमाणुओं की इंजीनियरिंग है, जो भौतिकी, रसायन, बायोइन्फराॅर्मेटिक्स व बायोटेक्नोलोजी जैसे विषयों को आपस में जोड़ती है। इस टेक्नोलोजी से बायोसाइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रोनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। छोटे आकार, बेहतर क्षमता और टिकाऊपन के कारण मेडिकल और बायोइंजीनियरिंग में नैनोटैक्नोलोजी तेजी से बढ रही है।

नैनो तकनीक से वस्तुएं बनती हैं बेहतर

गौड़ ने बताया कि नैनोसाइंस अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें जो मानव शरीर में उतरकर उसकी धमनियों में चल-फिर कर वहीं रोग का आपरेशन कर सके। आज हर घरेलु वस्तु में नैनोतकनीक का समावेश है। उपभोक्ता वस्तुओं में इनके अनेक अनुप्रयोग हैं, जैसे धूप का चश्मा, ग्लास कोटिंग में नैनो तकनीक का उपयोग होता है, जिसके कारण वे और भी मजबूत और हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पहले की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से ब्लाॅक कर सकते हैं। सनस्क्रीन और अन्य काॅस्मेटिक्स में भी नैनोकण होते हैं, जो प्रकाश को आर-पार जाने देते है, परन्तु पराबैंगनी किरणों को रोक लेते हैं। पहनावे के लिए कपड़ों को भी ये अधिक टिकाऊ बनाते हैं, उन्हें वाटरप्रूफ और हवा प्रूफ बनाते हैं। पैकेजिंग जैसे कि दूध आदि के कार्टन में नैनोकण इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि दूध प्लास्टिक की थैली में अधिक समय तक तरोताजा रहे।

नैनोटेक्नोलोजी में है कॅरियर की असीम संभावनाएं

उन्होंने अपने व्याख्यान में जानकारी दी कि देश में नैनोतकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान का काम तेजी से चल रहा है। भविष्य में इस क्षेत्र में विकास की काफी संभावनाएं हैं। नैनोटेक्नोलोजी के क्षेत्र में लगातार विकास होने की वजह से युवाओं के लिए इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं उत्पन्न होंगी। यह इंटरडिसीप्लेनरी एरिया है, इसलिए इस क्षेत्र में आने वाले युवाओं को फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बाॅयोलाॅजी और मैथ्स जैसे विषयों से अच्छा होना जरूरी है। लगातार अनुसंधान एवं विकास की वजह से यह कहा जा सकता है कि आने वाला समय नैनोटैक्नोलोजी का ही है।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने चिकित्सा तथा मेडिकल क्षेत्र में इस टेक्नोलोजी की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताया। इस व्याख्यान में डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभासिंह, डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा, डाॅ. विष्णुकुमार, डाॅ. अमिता जैन, प्रमोद ओला आदि ने भागीदारी निभाई व व्याख्यान की जानकारी के लिए आभार ज्ञापित किया।

Monday, 22 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में शहीद दिवस पर किया शहीदे-आजम भगतसिंह को याद

 

मिली आजादी उनकी बदौलत, जो कंधों पे अपने कफन लेके निकले

लाडनूँ, 23 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में संचालित विवेकानंद क्लब के तत्वावधान में मंगलवार को शहीद दिवस पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को याद किया गया। प्राचार्य प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शहीदों के प्रति श्रद्धा-शब्द अर्पित किए गए। प्रोफेसर त्रिपाठी ने बताया कि भगत सिंह, राजगुरु एवं सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों की बदौलत ही आज उनके सपनों का स्वतंत्र भारत विकास की ओर अग्रसर होना संभव हो सका है। उन्होंने छात्राओं को शिक्षा के प्रति विशेष रूप से जागरूक रहने हेतु भगत सिंह का उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसमें फांसी से ठीक पहले उनसे जब आखिरी इच्छा पूछी जा रही थी, तब भगत सिंह का जवाब था, ‘मैं आजकल लेनिन को पढ़ रहा हूं, यदि संभव हो सके तो इसे संपूर्ण पढ़ने की इजाजत दी जाए।’ भगत सिंह की ऐसी लगन एवं शिक्षा के प्रति समर्पण आज की शैक्षिक पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने शहीद दिवस पर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा- ‘‘बहुत थे जो दिल में लगन लेके निकले, बगावत की जलती अगन लेके निकले। मिली किंतु आजादी उनकी बदौलत, जो कांधों पे अपने कफन लेके निकले।’’ कार्यक्रम में महाविद्यालय हिंदी व्याख्याता अभिषेक चारण ने बताया कि शहीद दिवस के दिन देश के उन रणबांकुरों याद करना हर भारतवासी की नैतिक जिम्मेदारी है, क्योंकि आज हम इस फिजां में स्वतंत्रता का जो सुख अनुभव कर रहे हैं, वह सब उन्हीं क्रांतिकारियों की बदौलत है, जिनके शौर्य और पराक्रम की वजह से उनके सपनों का स्वतंत्र भारत विरासत में मिला है। उन्होंने अपनी भावनाएं इन शब्दों में व्यक्त की- ‘कहते हैं अमर शहीदों की आयु न अकारथ जाती है, वह आने वाली पीढ़ी के जांबाजों को लग जाती है।’ शहीदों को नमन के इस कार्यक्रम में छात्रा पूजा प्रजापत, उर्मिला डूकिया, सोनम कंवर, आरती चारण, रितिका सांखला, मुस्कान बानू, तमन्ना आदि ने भी अपने विचार प्रकट कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

Friday, 19 March 2021

31 वें स्थापना दिवस पर जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समारोह का आयोजन

 

अपने विचारों पर ध्यान केन्द्रित करके किया जा सकता है अच्छी आदतों का निर्माण- प्रो. गोदारा

कुलपति दूगड़ ने विश्वविद्यालय को अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप देने पर दिया जोर

लाडनूँ, 20 मार्च 2021। वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के कुलपति प्रो. आरएल गोदारा ने कहा है कि चरित्र की पहली सीढी है अपने विचारों पर ध्यान देना। विचारों को केन्द्रित करना। हमें कभी अपने मन के वश में नहीं होना चाहिए, क्योंकि मन तो क्षण-क्षण में बदलता रहता है। विद्यार्थियों को इस ओर पूरा ध्यान देना चाहिए और अपने जीवन में अच्छी आदतों का निर्माण करना चाहिए। जो भी समय या कार्यक्रम तय किया जाता है, उस पर काम करें। वे आदत बन जाएंगे। आदत पर संयम, नियंत्रण जरूरी है। जहां आदत नियमित होती है, वहां चरित्र निर्माण होगा और आदर्श चरित्र ही मूल्यवान होता है। वे यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के 31वें स्थापना दिवस पर महाप्रज्ञ-महाश्रमण सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। समारोह की अध्यक्षता करते हुए जैविभा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि प्राकृत भाषा और साहित्य का विस्तार इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य है। इस ओर हमें सर्वाधिक ध्यान देना होगा। इन उद्देश्यों के अनुरूप संस्थान के पाठ्यक्रमों का संचालन करना है। इस दिशा में काफी कार्य किए गए हैं और अब जैन विद्या के विद्धानों को तैयार करने के कार्य को विस्तार देना है। प्राकृत भाषा का प्रचार-प्रसार करके इस जन-जन तक पहुंचाना है। जैन आगमों के अंग्रेजी में अनुवाद का कार्य भी करना होगा। योग व जीवन विज्ञान विभाग को देखना होगा कि कैसे प्रेक्षा लाईव कार्यक्रम करे देश-देशान्तर तक फैलाया जा सके। इन्हें आमजन तक पहुंचाना होगा।

अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों से जुड़ाव हो

कुलपति प्रो. दूगड़ ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का जुड़ाव संस्थान और इसके विभागों के साथ हो सके, इस ओर ध्यान देना होगा। यूनेस्को व यूएनओ के साथ संस्थान के सम्बंध संस्थागत सहयोगात्मक बने, इस नवाचार को अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान में निजी विश्वविद्यालयों में दूरस्थ शिक्षा केवल दो ही प्रमुख है, जिनमें जैविभा संस्थान का ही सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, यहां इनकी प्रतिष्ठा प्रामाणिकता के लिए है। कुलपति दूगड़ ने गूगल जैसे सर्च इंजिन पर भारतीय संस्कृति समबंधी प्रत्येक खोज में जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की उपस्थिति नजर आए, इसका प्रयास करने पर भी जोर दिया। उन्होंने ऑनलाईन शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए सीखो और साथ में कमाओ की नीति के अनुरूप सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने पर आय का साधन भी मिलने का आश्वासन दिया और कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थी इससे कुछ कमाई भी कर सकते हैं। प्रो. दूगड़ ने बताया कि यूजीसी ने विभिन्न देशों के पारस्परिक पाठ्यक्रमों को मान्यता देने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत नई शिक्षा नीति में यहां के पाठ्यक्रमों को विदेशी विश्वविद्यालयों में और वहां के कोर्सेज को यहां क्रेडिट मिलने का प्रावधान है।

विदेशों में है यहां के पाठ्यक्रमों को मान्यता

उन्होंने बताया कि हाल ही में बेल्जियम और जापान के विद्यार्थी यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में आए और अध्ययन किया, जिसका लाभ उन्हें अपने देश में भी वहां के पाठ्यक्रम के समान ही प्राप्त हुआ। यह विश्वविद्यालय एक भाषणामाला का आयेाजन करने जा रहा है, जिसमें समाज के लोगों को भी जोड़ा जाएगा। आगामी एक-दो सालों में समग्र जैन समाज के लोगों को इससे जोड़ा जाएगा। यह काम निर्धारित नीति के तहत किया जाएगा तथा इससे विश्वविद्यालय का विस्तार संभव होगा। उन्होंने इस अवसर पर प्राकृतिक एवं योग महाविद्यालय के काम के बारे में बताते हुए कहा कि अगले साल सत्र 2022 में यहां पाठ्यक्रमों में अध्ययन शुरू करवा दिया जाएगा। इससे पहले 2021 में ही प्रकाृतिक व योग चिकित्सा का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। प्राकृतिक व योग चिकित्सा की सफलता के बाद यहां आयुर्वेद चिकित्सा को भी इससे जोड़ा जाएगा। वर्तमान समय में लोगों का काफी रूझान इन पद्धतियों की तरफ है। उन्होंने जैन विश्व भारती की हीरक जयंती पर अगले वर्ष बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों के आयेाजन के बारे में भी जानकारी दी।

श्रेष्ठ विद्यार्थी और श्रेष्ठ कर्मचारी का सम्मान

कार्यक्रम में समणी नियोजिका प्रो. समणी मल्लीप्रज्ञा ने अपने सम्बोधन में शिक्षा, संस्कार, साधना, शोध, सेवा पर जोर देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय इसके लिए समर्पित है। प्रारम्भ में प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कैरियर के साथ कैरेक्टर बिल्डिंग की विशेषता के बारे में बताया और कहा कि यहां मूल्यों को शिक्षा के केन्द्र में रखा गया है तथा आचार्य महाप्रज्ञ प्रवर्तित अहिंसा प्रशिक्षण की तकनीक को व्यावहारिक तौर पर जमीन पर उतारा है। कुलसचिव रमेश कुमार मेहता ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रगति विवरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी भागचंद बरड़िया मंचस्थ रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के श्रेष्ठ विद्यार्थी का अवार्ड दिव्यता कोठारी, जय ललिता, निकिता शर्मा व साक्षी प्रजापत को दिया गया। श्रेष्ठ एनसीसी कैडेट का सम्मान आकांक्षा डूकिया को दिया गया। योग के क्षेत्र में योगदान के लिए योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों पूनम स्वामी व सुरेश दीक्षित को प्रदान किया गया। चेम्पियन आफ चेम्पियन्स का खिताब स्नेहा पारीक को प्रदान किया गया। इस वर्ष का विद्यानिधि सम्मान डाॅ. बलवीर सिंह चारण व डाॅ. सुनीता इंदौरिया को दिया गया। बेस्ट वूमन आफ यूनिवर्सिटी का अवार्ड प्रगति चैरड़िया को दिया गया तथा श्रेष्ठ कर्मचारी का अवार्ड घासीलाल शर्मा व करण गुर्जर को दिया गया। बी वर्ग के श्रेष्ठ कर्मचारी का सम्मान दिनेश शर्मा, जगदीश सिंह शेखावत, सुनील कुमार, संजय व मनोज को प्रदान किया गया। कार्यक्रम मुमुक्षु बहिनों के मंगलाचरण से प्रारम्भ किया गया। अंत में प्रो. नलिन शास्त्री ने आभार ज्ञापित किया। डाॅ. युवराज सिंह खांगारोत ने कार्यक्रम का संचालन किया।

Thursday, 11 March 2021

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा में ‘‘दूरस्थ शिक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका’’ विषय पर वेबिनार आयोजित

 

सूचना तकनीक व विभिन्न एप्प से दूरस्थ शिक्षा बन सकती है प्रभावी- डाॅ. आमीन

लाडनूँ, 12 मार्च 2021। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा ‘‘दूरस्थ शिक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका’’ विषय पर एक वेबिनार का आयेाजन किया गया। वेबिनार के मुख्य वक्ता महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा गजारात के फैकल्टी आॅफ काॅमर्स के डाॅ. प्रशांत आमीन ने दूरस्थ शिक्षा में आईटी की उपयोगिता पर बताते हुए एक पीपीटी के माध्यम से नवीन शिक्षा नीति-2021 एवं परम्परागत व आॅनलाईन ट्रेनिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थी, शिक्षक, शोधार्थी एवं अभिभावकों के जीवन में सूचना प्रौद्योगिकी की उपयोगिता के बारे में भी जानकारी दी और उन्होनें बताया कि दूरस्थ शिक्षा के शिक्षकों को विद्यार्थी को पढ़ाने के लिए गुगल क्लासरूम, माइंड मैपिंग, वल्र्ड क्लाउड, जैम बोर्ड, पौडकास्ट और ओलेप्स आदि उपकरणों का उपयोग कर हम अपनी दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को और प्रभावशाली व आसान बना सकते है। फैक्लटी ऑफ मैनेजमेंट श्रीगंगानगर के प्रो. निक्की शर्मा ने अपने वक्तव्य में तीन तरह के तत्त्वों के बारे जानकारी देते हुए कम्प्यूटर प्रबंधन निर्देशन, कम्प्यूटर एडेड लर्निंग, कम्प्यूटर काॅंफ्रेंसिग आदि पर प्रकाश डाला। वेबिनार का संचालन प्रगति चैरड़िया ने किया। प्रारम्भ में स्वागत भाषण प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. जे.पी. सिंह ने प्रस्तुत किया। वेबिनार में छात्रों, शिक्षकों और शोद्यार्थी समेत 281 प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाया एवं वेबिनार से लाभ लिया।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ विषय पर वेबिनार आयोजित

 

युवाओं में कार्य के प्रति ललक, उत्साह व जोश पैदा होना जरूरी- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 12 मार्च 2021।जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ विषय पर एक बेबिनार का आयोजन किया गया। संयोजक डाॅ. अमिता जैन ने बताया कि भारत सरकार अगले वर्ष स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ आयोजित कर रही है। वर्ष 2022 के स्वतंत्रता दिवस से 75 सप्ताह पहले इन कार्यक्रमों का आरम्भ 12 मार्च से हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद में साबरमती आश्रम से इन आयोजनों का शुभारम्भ करेंगे जो 5 अप्रैल तक चलेंगे।

इस वेबिनार की आयोजना में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि इस महोत्सव को मनाने का उद्देश्य 12 मार्च 1930 की तिथि को याद करना है, जिससे हम युवाओं में कार्य के प्रति ललक, उत्साह, और जोश उत्पन्न हो। उन्होंने 11 सूत्रों की भी चर्चा की, जो देश हित के विषय में थे। इस अवसर पर हमारे सवतंत्रता सेनानियों को भी नहीं भुलाया जा सकता। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा कि हम अपने विकास से ही देश के विकास को देख सकते हैं। हमारा विकास होगा तो स्वतः ही देश का विकास संभव है। हमें हिंसा से दूर रहकर मानसिक शांति प्राप्त करनी है। समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजेंद्र प्रधान ने आजादी के बाद देश का शिक्षा स्तर, संसाधन, उद्योगों का विकास, स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रगति, ग्रामीण विकास, यातायात आदि सुविधाओं एवं उन्नति से रूबरू करवाया। बेबिनार में 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया। साथ ही इस अवसर पर एक निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमे 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया। संयोजिका डॉ. अमिता जैन ने कहा कि भारत जैसे विभिन्नताओं वाले देश में एकता के सूत्र में बांधे रखने के लिए महात्मा गांधी के दांडी मार्च का स्मरण करना अति आवश्यक है। कार्यक्रम में डॉ.मनीष भटनागर, डॉ. बी. प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. गिरधारी लाल, डॉ. बलवीर सिंह, डॉं प्रमोद ओला, ललित कुमार, विनोद कुमार आदि संस्थान के समस्त संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।