Friday, 31 January 2020

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अखिल भारतीय अंतर्महाविद्यालय हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अखिल भारतीय अंतर्महाविद्यालय हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित

देश को गुमराह नहीं करने वाली राजनीति से ही देश का विकास संभव- प्रो. जैन

लाडनूँ, 31 जनवरी 2020। अखिल भारतीय अंतर्महाविद्यालय हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन शुक्रवार को यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) स्थित महाप्रज्ञ-महाश्रमण ऑडिटोरियम में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रतियोगिता के शुभारम्भ कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगरपालिका की अध्यक्ष संगीता पारीक थी। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी जगदीश प्रसाद पारीक व शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. बीएल जैन थे। प्रतियोगिता में कुल 31 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और ‘सदन की राय में क्षेत्रीय दलों का बढता वर्चस्व देश के संघीय ढांचे के लिये हानिकारक है’ विषय के पक्ष व विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किये। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की स्नेहा पारीक रही। द्वितीय स्थान पर आदर्श बीएड काॅलेज श्रीडूंगरगढ के जितेन्द्र राजपुरोहित, तृतीय गाॅवर्नमेंट लाॅ काॅलेज बीकानेर की विद्या भाटी रही और सांत्वना पुरस्कार राजकीय विधि महाविद्यालय चूरू की प्रमिला प्रजापत और महारानी सुदर्शना काॅलेज बीकानेर की खुशबू भाटी ने प्राप्त किया।

लोगों को बांटने वाली राजनीति अनुचित

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रो. जैन ने कहा कि वक्तृत्व कला के लिये सबसे ज्यादा जरूरी आत्मविश्वास होता है और उसके बाद वाणी की ओजस्विता और नेतृत्व शैली का महत्व होता है। उन्होंने जातिवाद, धर्म, क्षेत्र, भाषा आदि के माध्यम से राजनीति करने और लोगों को बांटने के काम को संविधान की आत्मा के विरूद्ध बताया और कहा कि राजनीति में आत्मवंचना सबसे खराब होती है। अगर राजनीति से गुमराह करने वाली बात हट जाये तो राजनीति देश का विकास करने वाली साबित होगी। पालिकाध्यक्ष संगीता पारीक ने कहा कि वाद-विवाद प्रतियोगिता से जहां विद्यार्थियों में भाषण देने की क्षमता का विकास होता है, वहीं उन्हें तर्क द्वारा अपनी बात सिद्ध करने की कला भी सीखने को मिलती है। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने प्रतियोगिता की विशेषताओं के बारे में बताया और आचार्य कालू कन महाविद्यालय में संचालित किये जा रहे विभिन्न प्रकल्पों व क्लबों के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि यहां विवेकानन्द क्लब, महाप्रज्ञ क्लब, सोनल मानसिंह क्लब, रानी लक्ष्मीबाई क्लब आदि के माध्यम से छात्रायें विविध गतिविधियों में भाग लेकर अपनी रूचि के अनुरूप अपना विकास कर पाती है। उन्होंने छात्राओं के कॅरियर के समबंध में स्थापित ज्ञानकेन्द्र के बारे में भी बताया। इस अवसर पर प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, सोमवीर सांगवान, डाॅ. विनोद सिहाग, शेर सिंह, मांगीलाल, दक्षता कोठारी, हसीना बानो आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक चारण ने किया।

आचार्य महाप्रज्ञ की पुस्तक प्रेक्षाध्यानः लेश्याध्यान की समीक्षा प्रस्तुत

आचार्य महाप्रज्ञ की पुस्तक प्रेक्षाध्यानः लेश्याध्यान की समीक्षा प्रस्तुत

व्यक्तित्व का रूपांतरण करने में सक्षम होती हैं लेश्यायें

लाडनूँ, 31 जनवरी 2020। आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष के अन्तर्गत संचालित विविध गतिविधियों में पुस्तक समीक्षा कार्यक्रम में शुक्रवार को जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने आचार्य महाप्रज्ञ कृत पुस्तक ‘‘प्रेक्षा ध्यान: लेश्याध्यान’’ की समीक्षा प्रस्तुत करते हुये कहा कि महाप्रज्ञ इस पुस्तक में कहते हैं कि व्यक्ति में अच्छी व बुरी प्रवृतियों का कारण उसकी लेश्यायें होती हैं। लेश्या के चेतना स्तर पर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का रूपांतरण कर सकता है। मनुष्य में वृतियों, भाव या आदतों को उत्पन्न करने वाला सशक्त तंत्र लेश्यातंत्र है। इनमें रंगों के व्यक्तित्व पर प्रभाव को चित्रित किया गया है और बताया गया है कि रंगों का साम्राज्य अखंड है और इनका प्रभाव हमारे कर्म-शरीर पर भी पड़ता है। महाप्रज्ञ ने वर्णित किया है कि बुरी आदतों को उत्पन्न करने वाली तीन लेश्यायें होती हैं- कृष्ण लेश्या, नील लेश्या और कापोत लेश्या। इन तीन लेश्याओं से क्रूरता, हत्या, कपट, असत्य, प्रवंचन, धोखाधड़ी, विषय-लोलुपता, प्रमाद, आलस्य आदि बुराइयां पैदा होती हैं। इन लेश्याओं के संवादी स्थान अधिवृक्क ग्रंथियां और जनन ग्रंथियां होती हैं। ये अप्रशस्त लेश्यायें हैं। प्रशस्त लेश्यायें भी तीन हैं। इनमें तेजो लेश्या का वर्ण लाल, पद्म लेश्या का वर्ण पीला और शुक्ल लेश्या का वर्ण सफेद होता है। ये तीनों अच्छी आदतें उत्पन्न करती हैं। जब इन लेश्याओं के स्पंदन जागते हैं तब व्यक्ति के भाव निर्मल हो जाते हैं। अभय, मैत्री, शांति, क्षमा आदि पवित्र भावों का निर्माण होता है। लेश्याओं के कारण जब व्यक्ति की अच्छी प्रवृति होती है तो अच्छा चिंतन, अच्छा भाव और अच्छा कार्य होता है, जबकि बुरी प्रवृति के समय व्यक्ति बुरा चिंतन, बुरा भाव और बुरा कार्य करने लगता है। प्रो. जैन ने बताया कि इस पुस्तक में महाप्रज्ञ ने पांच अध्यायों में अपनी बात को प्रकट किया है, जिनमें प्रथम अध्याय में लेश्या ध्यान-आध्यात्मिक आधार, द्वितीय अध्याय में लेश्या विज्ञान- वैज्ञानिक आधार, तृतीय में लेश्या ध्यान- ध्यान क्यों, चतुर्थ अध्याय में लेश्या ध्यान विधि तथा पंचम अध्याय में लेश्या ध्यान निष्पति का वर्णन किया गया है।

Wednesday, 29 January 2020

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के पूर्व कुलपति को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के पूर्व कुलपति को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार

गांधीवाद के प्रखर प्रचारक सर्वोदय विचारक डाॅ. रामजी सिंह को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री

लाडनूँ, 29 जनवरी 2020। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रामजी सिंह को समाजसेवा के लिये गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किये जाने पर यहां हर्ष जताया गया और उनकी स्वस्थता पूर्वक दीर्घायु के लिये कामनायें व्यक्त की गई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को देश-विदेश में फैलानेवाले सर्वोदय विचारक 94 वर्षीय डाॅ. रामजी सिंह वर्ष 1992 से 94 तक जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति रहे थे। उन्होंने 1993 में शिकागों में आयोजित हुए विश्व धर्म संसद में जैनिज्म पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने बताया कि प्रो. रामजी सिंह सादगी की प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने अथक प्रयास करके संपूर्ण भारत में गांधी विचार की पढ़ाई शुरू कराई। वे बिहार के भागलपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे हैं। देश के पहले गांधी विचार विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले और विभाग के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ. रामजी सिंह रहे हैं। मूल रूप से बिहार के भागलपुर के रहने वाले प्रो. रामजी सिंह के प्रयासों से देश के पहले गांधी विचार विभाग का उद्घाटन दो अक्टूबर 1980 को भागलपुर विश्वविद्यालय में किया गया था। तब यह देश का इकलौता विभाग था, जहां गांधी विचार की पढ़ाई शुरू हुई थी। इन्होने इसके लिये अपनी महत्वपूर्ण व दुर्लभ कही जानेवाली 5 हजार पुस्तकें दान कर दी थी। आज 25 विश्वविद्यालयों में गांधी विचार विभाग की पढ़ाई हो रही है। पद्मश्री का पुरस्कार के बारे में उनका कहना था कि यह पुरस्कार उन्हें नहीं बल्कि समाज के लिए काम करने वाले लोगों को समर्पित है।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में वसंत पंचमी पर कार्यक्रम का आयोजन

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में  वसंत पंचमी पर कार्यक्रम का आयोजन

ऋतुओं के परिवर्तनों को मनाया जाता है त्यौंहार के रूप में- प्रो. जैन

लाडनूँ, 29 जनवरी 2020। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने वसंत पंचमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कहा कि हमारे देश में ऋतुओं के परिवर्तनों को त्यौंहार के रूप में मनाने की परम्परा रही है। वसंत ऋतु के आगमन के प्रतीक के रूप में प्रकृति के नवीन स्वरूप में आने की खुशी के रूप में हर वर्ष वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है और इस अवसर पर सरस्वती मां की आराधना की जाती है। सरस्वती उपासकों शिक्षक, विद्यार्थी, लेखक और अन्य विद्वानों को इस पर्व पर अपने कार्यों, आदर्शों व व्यवहार में संस्कारों को प्रधानता देने का संकल्प लेना चाहिये। संस्कृति के निर्माण के लिये प्रेरणा एवं आधुनिक काल की विसंगतियों से बचाव करने की भूमिका निभाने को पर्व का मूल समझना चाहिये। डाॅ. गिरीराज भोजक ने वसंत पंचमी पर्व को जीवन में उल्लास भरने वाला और सृजन का संचार करने वाला पर्व बताया और कहा कि सदैव ज्ञानार्जन के प्रति उत्सुक रहना चाहिये और अपने गुरूजनों व माता-पिता के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिये। कार्यक्रम में छात्राध्यापिकाओं ने वसंत पंचमी पर्व की वैज्ञानिकता और उसके पौराणिक महत्व के बारे में बताया। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा, रवि कुमार, स्वाति एवं समस्त एमएड, बीएड, बीए-बीएड, बीएससी’-बीएड में अध्ययनरत छात्राध्यापिकायें उपस्थित रही।

Monday, 27 January 2020

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा कौशल विकास के तहत टैली व इंग्लिश स्पोकन के अल्पकालीन व्यावसायिक कोर्स प्रारम्भ

लाडनूँ, 27 जनवरी 2020। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा कौशल विकास के अन्तर्गत अल्पकालीन व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कम्प्यूटर पर टैली ऑन एकाउंटिंग के कोर्स एवं इंग्लिश स्पोकन कोर्स का शुभारम्भ सोमवार को किया गया। पाठ्यक्रमों के शुभारम्भ पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवाड़ी ने कहा कि आधुनिक कम्प्यूटर युग में अंग्रेजी की आवश्यकता बहुत अधिक हो गई है। अंग्रेजी विश्व भाषा के रूप में प्रतिष्ठित है और इसे वैश्विक सम्पर्क भाषा माना जाता है, इसलिये आज के भूमंडलीकरण के समय में अंग्रेजी का बोलना और प्रभावी वार्तालाप जरूरी हो गया है। उन्होंने बहीखातों को कम्प्यूटर पर रखने और ओनलाईन हिसाब किताब रखने के लिय टैली सीखने की जरूरत बताई। शैक्षणिक अधिकारी विजय कुमार शर्मा ने बताया कि यह संस्थान कैरियर निर्माण की दिशा में बहुत कार्य कर रहा है। कौशल विकास कार्यक्रम भी उसी दिशा में कदम है। उन्होंने टैली व अंग्रेजी स्पोकन कोर्स के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि इनमें सफल रहने वाले सभी विद्यार्थियों को संस्थान का प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेंगे। इस अवसर पर प्रो. रेखा तिवाड़ी व विजयकुमार शर्मा के अलावा अभिषेक शर्मा, रणजीत मंडल आदि उपस्थित थे।

Sunday, 26 January 2020

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समारोह पूर्वक मनाया गणतंत्र दिवस

अधिकारों के साथ कर्तव्यों को महत्व देना आवश्यक- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 26 जनवरी 2020। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में गणतंत्र दिवस के अवसर पर समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने झंडारोहण किया तथा एनएसीसी छात्राओं द्वारा प्रसतुत परेड की सलामी ली। इस अवसर पर उन्होंने शहीदों को याद किया तथा कहा कि शहीदों की भावना देश के संविधान को लोकतांत्रिक व लोकहितकारी स्वरूप प्रदान किया गया। उन्होंने संविधान प्रदत्त कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी और कहा कि हमें केवल अधिकारों की बात नहीं  करनी चाहिये बल्कि अपने दायित्वों को भी समझाना चाहिये। संस्थान के कुलसचिव रमेश कुमार मेहता, प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. आशुतोष प्रधान, प्रो. अनिल धर आदि ने भी कार्यक्रम को समबोधित किया और विद्यार्थियों को राष्ट्रसेवा के लिये प्रेरित किया व गणतंत्र की रक्षा के लिये सजग रहने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में छात्राओं ने भी सम्बोधित किया एवं कवितायें प्रस्तुत की। इस अवसर पर प्रो. बीएल जैन, आरके जैन, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. विनोद सियाग, डाॅ. पुष्पा मिश्रा आदि उपस्थित थी।

Friday, 24 January 2020

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर पोस्टर पेंटिंग प्रतियेागिता आयोजित

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बालिकाओं ने उकेरे रंग

लाडनूँ, 24 जनवरी 2020। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर छात्राओं में सृजनात्मकता के विकास के लिये पोस्टर पेंटिंग प्रतियेागिता आयोजित की गई। पंच महाव्रत पर आधारित इस पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में 13 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर चांदनी सैनी रही।, द्वितीय महिमा प्रजापत और तृतीय स्थान पर मोनालिका रही। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. विष्णु कुमार व प्रगति चैरड़िया शामिल थे।