Monday, 8 January 2018

दिनांक 08.01.2018

जैन विश्वभारती संस्थान में यूथ फेस्टिवल 13 जनवरी को

दिनांक 08.01.2018

              जैन विश्वभारती संस्थान में कॅरियर काॅउन्सलिंग सेल एवं आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 13 जनवरी को यूथ फेस्टिवल का आयोजन होगा। कॅरियर काॅउन्सलिंग सेल के समन्वयक डाॅ जुगल किशोर दाधीच ने बताया कि इस यूथ फेस्टिवल मंे मुख्य अतिथि राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश प्रकाश टाटिया, कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पण्डित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी के कुलपति प्रोफेसर बी.एल. शर्मा एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. दूगड़ करेंगे।


            आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि इस फेस्टिवल में कुल 1200 विद्यार्थी भाग लेंगें एवं विभिन्न स्टालों के द्वारा हाथकरगा एवं रोजगार परक कार्यों का प्रशिक्षण विद्यार्थियों द्वारा दिया जायेगा। कार्यक्रम सुधर्मा सभा, जैन विश्व भारती परिसर में प्रातः 10 बजे से 4 बजे तक होगा।

Wednesday, 3 January 2018

ध्येय पथ पर निरन्तर गतिमान रहें-कुलपति प्रो. दुगड़

दिनांक 03.01.2018


             वर्ष 2018 के शुभागमन पर जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने शैक्षणिक खण्ड के सेमिनार हाॅल में संस्थान के सभी शिक्षकों, अधिकारियों एवं सदस्यों को  नववर्ष की शुभाकामनाओं के साथ संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की श्रेष्ठता एवं सर्वोच्चता तभी प्रतिष्ठापित हो सकती है जब वहां के छोटे से बड़े प्रत्येक सदस्य की सक्रिय भागीदारी हो। उन्होंने गत वर्ष किये गये सभी सदस्यों के योगदान की सराहना करते हुए भविष्य में सभी के प्रयास से संस्थान को नित नई उच्चाईयाँ मिले ऐसा विश्वास व्यक्त किया। वर्ष 2018 में प्रस्तावित कार्ययोजनाओं का जिक्र करते हुए प्रो. दूगड़ ने योगा नेचुरोपैथी हाॅस्पिटल एवं काॅलेज खोलने की संभावना व्यक्त की तथा सभी से अपेक्षा की कि सभी अपने ध्येय पथ पर निरंतर गतिमान रहे। इस अवसर पर दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने संस्थान के विकास में एकजुट होकर लक्ष्य को अर्जित करने पर विशेष बल दिया। कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने नये वर्ष में आत्मविश्वास से आपूरित होकर सभी को कार्य करने के लिए प्रेरित किया। समणी नियोजिका प्रो. ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि संस्थान के सदस्यों में विश्वास कूट-कूटकर भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य संस्थान के प्रति समर्पित हैं और संस्थान के विकास में संलिप्त है। यह भाव नववर्ष में और विकसित होना चाहिए।




Monday, 1 January 2018

New Year 2018

जैन विश्वभारती संस्थान में छाया नववर्ष का उत्साह

दिनांक 01.01.2018






जैन विश्वभारती संस्थान मंे नववर्ष के शुभागमन को महाप्रज्ञ सभागार में उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम संस्थान की सर्वमंगल प्रार्थना के साथ शुरू हुआ। 

कार्यक्रम में अध्यक्ष पद के दायित्व का निर्वहन कर रहे आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रोफेसर आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कार्यक्रम को शिखर तक ले जाते हुए कहा कि आज के दिन को नये वर्ष के प्रथम दिन के साथ ही संस्थान के विद्यार्थी नये सेमेस्टर के प्रथम दिन के रुप में भी देखे। इसी में विद्यार्थियों का हित निहित है। साथ ही उन्होंने कहा कि आज का दिन आत्मावलोकन व आत्मचिंतन का दिन है, ताकि हम अपने गुजरे अतीत से सबक लेकर अपना भविष्य संवार सके। प्रो. त्रिपाठी ने गत वर्ष संस्थान के सभी सदस्यों द्वारा दिये गये योगदान की सराहना करते हुए सभी के प्रति अनेकानेक शुभकामनायें दी।
 
संस्थापन शाखा के रमेश दान चारण ने देशभक्ति गीत ‘मेरे वतन के जैसा कोई वतन नहीं है’, चांद से भी प्यारा तारों से भी हसीं है।’ की प्रस्तुति देकर समस्त श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान चंद छात्र-छात्रा प्रस्तुतियां भी हुई जिनमें विनय जैन द्वारा नववर्ष शुभकामनायें, हेमलता शर्मा, प्रवीणा राठौड, कंचन स्वामी ने कवितायें एवं तांबी दाधीच द्वारा एकल नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इनके ठीक बाद विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से संस्थान के सभी कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को शुभकामना संदेश दिया। 

प्राच्यविद्या एवं भाषा विभाग के प्रोफेसर दामोदर शास्त्री ने द्विअर्थीय शब्दावली का प्रयोग करते हुए संपूर्ण कार्यक्रम का क्रियान्वयन विवेक द्वारा होना बताया व इसके लिये एक तरफ संचालन कर रहे डाॅ. विवेक महेश्वरी की तारीफ की वहीं दूसरी ओर इसके लिये समस्त संस्थान परिवार को साधुवाद दिया। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बी.एल. जैन ने अपने विभाग की तरफ से संस्थान परिवार के सभी सदस्यों के प्रति शुभकामनायें देते हुए कहा कि प्रयास और पुरुषार्थ के माध्यम से नववर्ष में हम अपने संकल्प की सिद्धि करते रहे। 

जिसमें शुभकामनाओं के क्रम में समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत, जैनविद्या एवं जैनेत्तर दर्शन विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश जैन, आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के हिन्दी व्याख्याता अभिषेक चारण, संस्थान के शैक्षणिक अधिकारी वी.के. शर्मा आदि ने अपने वक्तव्यों से विश्वविद्यालय परिवार को मंगलकामनायें दी। 



Friday, 15 December 2017

21 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन
नवाचार के साथ पाण्डुलिपि संरक्षण वर्तमान की आवश्यकता-प्रो दूगड़
लाडनूं 15 दिसम्बर
जैन विश्वभारती संस्थान के जैनविद्या एवं तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग व प्राच्य विद्या एवं भाषा विभाग के तत्वावधान में 21 दिवसीय पाण्डुलिपि विज्ञान एवं लिपिविज्ञान विषयक कार्यशाला का समापन संस्थान के सेमिनार हाॅल में समारोह पूर्वक हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए जैन विश्वभारती संस्थान के कुलपति प्रो बच्छराज दूगड ने कहा कि आज शिक्षा में हर जगह नवाचार का उपयोग हो रहा है ऐसे में पाण्डुलिपि जैसे परम्परागत ज्ञान के लिए भी नवाचार की आवश्यकता है। उन्होनें कहा कि एक रिसर्च के मुताबिक आने वाले समय में 70 प्रतिशत नौकरियों का स्वरूप एवं पदनाम बदल जायेगें। जिसके कारण पाण्डुलिपि संरक्षण में भी नवीन तकनीक का उपयोग जरूरी है। 
प्रो दूगड ने देश में लाखों पाण्डुलिपिया विद्यमान है जिनमे से मात्र दस प्रतिशत पाण्डुलिपियों पर ही काम हो पाया है, प्रकाशन तो इससे भी कम हुआ है। जरूरत है कि पाण्डुलिपि संरक्षण एवं संपादन के प्रति विद्वतजन नये तकनीकों का प्रयोग करते हुए अपना योगदान दें। प्रो दूगड ने पाण्डुलिपि के विकास के लिए तीन बातों को महत्वपूर्ण बताया जिनमें पाण्डुलिपियों संग्रह, प्रकाशन एवं नये शोधार्थी तैयार हो। उन्होनें देश भर से आये विद्वतजनों के समक्ष सीखने की अभीप्सा को ही ज्ञान विकास का माध्यम बताया। प्रो दूगड ने बताया कि आने वाले समय में इस विश्वविद्यालय में प्राकृतिक चिकित्सा काॅलेज एवं प्राच्य विद्याओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य होगा। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लखनऊ के प्रो के के थापलिपाल ने पाण्डुलिपि ज्ञान एवं गुप्तकालिन लिपियांे को समझाते हुए पाण्डुलिपि मिशन को रेखाकिंत किया। उन्होनें पाण्डुलियों में समाहित अंक गणित, ज्योतिष विज्ञान,चिकित्सा विज्ञान आदि को संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए गहनता के साथ करने का आह्वान किया।    
इस अवसर पर कार्यशाला की निदेशका प्रो समणी ऋजुप्रज्ञा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए परिचय दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला से पाण्डुलिपि एवं लिपियों के संरक्षण एवं ज्ञान के प्रति एक ठोस नींव का निर्माण हुआ है, जो भविष्य में और अधिक प्रवद्र्वमान होगा। उन्होनें कहा विद्वानों ने जो कुछ भी इस कार्यशाला में सीखा है उसका अभ्यास बहुत जरूरी है। प्राकृत एवं संस्कृत भाषा विभाग की अध्यक्ष डाॅ समणी संगीत प्रज्ञा ने 21 दिवसीय कार्यशाला का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में समणी सुयशनिधि, कुलदीप शर्मा, समणी स्वर्णप्रज्ञा आदि ने अपने अनुभव सुनायें। शुभारम्भ समणी वृन्द द्वारा प्रस्तुत मंगलसंगान से हुआ। इस अवसर पर देश भर से आये विद्वानों को प्रमाण पत्र, प्रतीक चिन्ह एवं साहित्य भेंट कर अतिथियों द्वारा स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ सत्यनारायण भारद्वाज एवं आभार ज्ञापन डाॅ योगेश कुमार जैन ने किया।