लाडनूँ, 12 नवम्बर 2021। जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय में संचालित एनसीसी की 3राज गर्ल्स बटालियन में शुक्रवार को नई भर्ती के लिए छात्राओं से दस्तावेज संकलन के साथ दौड़ करवाई गई और मौखिक परीक्षा ली गई। जाएगी। लेफ्टिनेंट आयुषी शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग एवं आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की समस्त संकाय की छात्राओं के एनसीसी चयन के सम्बंध में भर्ती की इच्छुक छात्राओं से उनकी अंकतालिका, आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, फीस चालान एवं बैंक पासबुक की दो-दो फोटोप्रतियां, खेल या सांस्कृतिक प्रतियेागिताओं सम्बंधी प्रमाण पत्र एवं परिवार से आर्मी में होने या सेवानिवृत होने के प्रमाण आदि के संकलन सहित उनकी दौड़ करवाई गई तथा साक्षात्कार लिया गया। इसके बाद चयनित छात्राओं की सूची जोधपुर में इस बटालियन के उच्चधिकारियों को भेजी जाकर उससे अंतिम चयन किया जाएगा। इस अवसर पर आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, लेफ्टीनेंट आयुषी शर्मा एवं कोच अजयपालसिंह उपस्थित रहे।
Thursday, 11 November 2021
जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. त्रिपाठी को मिला साहित्य का शिखर सम्मान
लाडनूँ, 12 नवम्बर 2021। जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी को प्रयागराज की भारतीय संस्कृति एवं साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित विमर्श, सम्मान एवं कविकुम्भ के आयोजन के अवसर पर इस वर्ष का ‘राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी शिखर सम्मान’ से नवाजा गया है। उन्हें यह सम्मान समाजसेवी विद्याशंकर तिवाड़ी और संस्थाध्यक्ष साहितयकार डा. विजयानन्द द्वारा प्रदान किया गया। प्रो. त्रिपाठी लम्बे समय से बाल साहित्य की रचना करते रहे हैं तथा इनकी 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित होने के साथ अनेक प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं भी छपती रहती है। प्रो. त्रिपाठी को पूर्व में प्रशासनिक एवं सांस्थनिक आदि विभिन्न क्षेत्रों से भी अनेक बार पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा चुका है। इस सम्मान के मिलने पर उन्हें यहां जैन धर्म एवं संस्कृति संरक्षण संस्थान की डा. मनीषा जैन, शरद जैन साहित्य संगम के अध्यक्ष जगदीश यायावर, अणुव्रत समिति के मंत्री डॉ. वीरेन्द्र भाटी मंगल, आलोक खटेड़ एवं अन्य सभी साहित्यकारों एवं साहितय प्रेमियों ने बधाइयां प्रदान की है।
Wednesday, 10 November 2021
कुलपति सहित जैन विश्वभारती संस्थान के कार्मिक-दल ने किए भीलवाड़ा में आचार्य महाश्रमण के दर्शन
शिक्षा के साथ संस्कारों का स्तर भी उच्चतर बने- आचार्यश्री महाश्रमण
लाडनूँ, 11 नवम्बर 2021। तेरापंथ धर्मसंघ के ग्याहरवें आचार्य एवं जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय के अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा है कि यह विश्वविद्यालय उपकार के लिए बनाया हुआ गुरूदेव आचार्यश्री तुलसीपरिकल्पना की पूर्ति है। जैन शासन के विभिन्न संतों से मिलना होता है, तो स्वयं बताते हैं कि उन्होंने एम.ए. या पीएच.डी. जैन विश्वभारती संस्थान से किया है। इस संस्थान द्वारा हमें जैनत्व का प्रभाव भी देखने को मिलता है, जो सदैव बना रहना चाहिए। उन्होंने भीलवाड़ा में आए विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव एवं स्टाफ से भेंट एवं कुलपति से संस्थान की पूर्ण जानकारी लेने के बाद अपने सम्बोधन में संस्थान द्वारा नैक से ‘ए’ ग्रेड मिलने को विशेष बात बताते हुए कहा कि शिक्षा की व्यवस्था और सुन्दर होनी चाहिए तथा शिक्षा के साथ संस्कार का स्तर भी उच्चतर रहना चाहिए। साथ ही अणुव्रतों का प्रभाव भी बना रहे। उन्होंने जैविभा विश्वविद्यालय में आध्यात्मिक, धार्मिक व शैक्षिक संदर्भों में अच्छा काम और विकास बना रहने की शुभाशंषा व्यक्त की।
नैक की टीम ने माना आदर्श संस्थान
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने सम्बोधन में कहा कि जिस स्थान पर कभी जंगल था और पशु-पक्षी, सर्पादि विचरण करते थे, उस स्थान पर यह विश्वविद्यालय विकास के स्वरूप में स्थित है, जिसने पर्यावरण एवं पशु-पक्षियों के अस्तित्व के साथ उच्च शिक्षा के कार्य को संभाल रखा है। उन्होंने आचार्यश्री को बताया कि राष्ट्रीय प्रत्मयायन एवं मूल्यांकन परिषद नैक ने संस्थान को ‘ए’ श्रेणी प्रदान की है, जो उपलब्धि है और समाज को गौरवान्वित करने वाली है। यह संस्थान देश के उन विश्वविद्यालयों में खड़ा हो गया है, जिन्हें ‘ए’ ग्रेड प्राप्त है। उन्होंने इसे गुरूओं-अनुशास्ताओं की अनुकम्पा के रूप में लेते हुए कहा कि वे अपने ऑफिस में लगे आचार्य तुलसी, महाप्रज्ञ एवं आचार्य महाश्रमण की संयुक्त तस्वीर को नमन करके प्रतिदिन प्रवेश के साथ ही उनसे संस्थान को आगे बढाने की अर्चना करते हैं। कुलपति ने नैक टीम की रिपोर्ट के कतिपय अंशों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि उन्होंने अपने लिए भी इस संस्थान को आदर्श बताते हुए वे यहां के डॉक्युमेंटेशन की प्रतियां लेकर गए हैं, ताकि अपने संस्थान में भी उन्हें लागू किया जा सके और उनके अनुरूप परिवर्तन लाया जा सके। उन्होंने इसे प्राचीन व आधुनिक शिक्षा के अद्भुत समन्वय का संस्थान माना और नैतिक शिक्षा के प्रसार के लिए देश के अग्रणी संस्थान के रूप में स्वीकार किया। इस संस्थान को उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय मापदंडों में जैनविद्याओं के प्रसार, प्राकृत भाषा, योग व जीवन विज्ञज्ञन, अहिंसा एवं शांति के प्रसार एवं भारतीय मूल्यों के प्रसार के लिए उत्कृष्ट माना है।
महिला शिक्षा को दिया भरपूर बढावा
इस अवसर पर प्रो. समणी कुसुमप्रज्ञा ने आचार्य तुलसी के स्वप्न की साकार अभिव्यक्ति के रूप में जैविभा संस्थान को बताते हुए कहा कि वे बहुत सारी ऐसी बहिनों को जानती हैं, जिन्होंने मामूली पढी हुई होने और यहां तक कि दसवीं उतीर्ण भी नहीं होने के बावजूद इस संस्थान से शिक्षा ग्रहण की और एम.ए. तथा पीएच.डी. तक कर ली। यह संस्थान समाज के लिए गौरव की बात है। आचार्य तुलसी ने 1992 में यहां आने पर कहा था कि यहां के शिक्षक वेतन के लिए नहीं चेतन के लिए काम करें और आज हम देख रहे हैं कि यहां कुलपति से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के कर्मचारी भी समर्पित भाव से नैतिक मूल्यों के लिए काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में उन्होंने आचार्यश्री महाश्रमण से छापर के पश्चात् अपना आगामी चातुर्मास लाडनूं फरमाने का निवेदन भी किया, ताकि तेरापंथ की राजधानी लाडनूं और जैन विश्वभारती संस्थान का और विकास हो सके। इस अवसर पर जैन विश्व भारती के पूर्व अध्यक्ष डॉ. धर्मचंद लूंकड़, रमेश सी. बोहरा, कुलसचिव रमेश कुमार मेहता, डॉ. जुगल दाधीच, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, उपनिदेशक पंकज भटनागर, विताधिकारी राकेश कुमार जैन, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डॉ. युवराज सिंह खांगारोत, छा. भाबाग्रही प्रधान, डॉ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डॉ. अशोक भास्कर, मोहन सियोल, दीपाराम खोजा, डॉ. प्रगति भटनागर, डॉ. रविन्द्रसंिह राठौड़, डॉ. सतयनारायण भारद्वाज, डॉ. विनोद कुमार सैनी, आयुषी शर्मा, अभिषेक चारण, प्रकाश गिड़िया, अजयपाल सिंह भाटी, डॉ. वीरेन्द्र भाटी मंगल, राजेन्द्र बागड़ी, शरद जैन आदि उपस्थित रहे।
जैन विश्वभारती संस्थान में ‘साईबर अपराधों के प्रति जागरूकता’ विषय पर वीडियो एवं पीपीटी निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन
पीपीटी निर्माण प्रतियोगिता में नीतू और वीडियो निर्माण में प्रियंका प्रथम रही
लाडनूँ, 11 नवम्बर 2021। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्देशित ‘साईबर सुरक्षा कार्यक्रम’ के अन्तर्गत जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय में ‘साईबर अपराधों के प्रति जागरूकता’ विषय पर वीडियो एवं पीपीटी निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रभारी प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी व प्रो. बीएल जैन ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य वर्तमान में बढते जा रहे साईबर अपराधों के प्रति विद्यार्थियों में जागृति पैदा करना है। उन्होंने प्रतियोगिता के परिणामों के बारे में बताया कि प्रतियोगिता में संस्थान के विद्यार्थियों ने बढ-चढ कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में पीपीटी निर्माण में नीतू जोशी प्रथम रही और निरंजन कंवर द्वितीय व भूमिका सोनी तृतीय रही। वीडियो निर्माण में प्रथम स्थान पर प्रियंका सोनी रही और द्वितीय आयशा परवीन च तृतीय अमीषा पूनिया रही। प्रतियोगिताओं की निर्णायक डा. सरोज राय और प्रमोद ओला थी। कार्यक्रम के संयोजक डा. गिरधारीलाल शर्मा व डा. बलवीर सिंह चारण थे।
Tuesday, 9 November 2021
संस्थान को "A" ग्रेड मिलने पर कार्यक्रम का आयोजन
मूल्य-आधारित शिक्षा की नीतिगत विशेषता रखता है जैविभा विश्वविद्यालय- कुलपति
जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय को ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा ‘ए’ ग्रेड प्रदान किए जाने पर यहां सेमिनार हॉल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने सभी शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कार्मिकों को बधाई देते हुए बताया कि यह सबकी मेहनत और सामूहिक प्रयासों से हुआ है। उन्होंने इस संस्थान को ‘ए-प्लस’ ग्रेड मिलने की उम्मीद जताते हुए बताया कि हमें ‘ए’ ग्रेड मिलने पर ही संतोष नहीं करना है और लगातार प्रयासों और सुधारों पर ध्यान देकर अगली बार ‘ए-प्लस’ ग्रेड प्राप्त करनी है। सभी संस्थान सदस्यों में परस्पर जुड़ाव बना रहने पर ही परिणाम की उत्कृष्टता बनती है। उन्होंने कहा कि ‘ए’ ग्रेड मिलने पर भी सबको हर्ष हुआ है और जश्न का माहौल बना है, लेकिन इससे भी आगे निकलने की उम्मीद हमें निरन्तर रखनी होगी। संस्थान के इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छता ने यहां आई नैक की टीम को सबसे अधिक आकर्षित किया। हमारे सभी प्रस्तुतिकरण भी श्रेष्ठ थे और लाईब्रेरी और पांडुलिपि संरक्षण कार्य की टीम द्वारा अत्यधिक प्रशंसा की गई। टीम के सदस्यों ने उनके रिकॉर्डिंग तक अपने विश्वविद्यालयों के लिए साथ ले गए और अपने व्यक्तियों को प्रशिक्षण के लिए भी यहां भिजवाने की बात कही है।
ए-ग्रेड प्राप्त ड्यूल मोड वाला देश का पहला विश्वविद्यालय
दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने नैक टीम के सदस्यों की भावनाओं के बारे में बताया तथा कहा कि जैन विश्वभारती संस्थान ड्युअल मोड में मूल्यांकित होने वाला देश का प्रथम विश्वविद्यालय है, जिसे ‘ए’ ग्रेड प्राप्त हुआ है। यह संस्थान देश के श्रेष्ठ ‘ए’ ग्रेड स्तर के चुनिन्दा विश्वविद्यालयों में सम्मिलित हो चुका है। उन्होंने बताया कि नैक टीम भी यह मानती है कि इस संस्थान को जैन विद्या एवं योग के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तरीय ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ केन्द्र के रूप में मान्यता दिए जाने की आवश्यकता है। इस संस्थान को उन्होंने प्राचीन भारतीय पाण्डुलिपियों का अन्तर्राष्ट्रीय सन्दर्भ केन्द्र बनने की पूर्ण अर्हता सम्पन्न माना है और कहा है कि संस्थान जैन आगमों पर आधारित पांडुलिपियों में निहित प्रमुख ज्ञान-भंडार का पता लगाकर वैश्विक जगत् को समृद्ध कर सकता है।
गुणवतापरक शोध पर ध्यान दें
प्रो. नलिन के. शास्त्री ने विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि के बाद हमें अगले पांच साल के लिए निश्चिंत होकर बैठ नहीं जाना है, बल्कि यूजीसी के मानक पर अपने-अपने विभागों को सतत गति देते रहना है। हमें पांचवर्षीय परियोजना पर अपना ध्यान केन्द्रित करके अनवरत क्रियाशील व गतिशील रहना है। हमें गुणवतापरक शोध पर विशेष ध्यान देना होगा तथा पांच साल बाद ‘ए-प्लस’ ग्रेड हासिल करनी है। कार्यक्रम को प्रो. दामोदर शास्त्री, प्रो. अनिल धर, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डॉ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डॉ. पुष्पा मिश्रा, श्वेता खटेड़, प्रमोद ओला, दीपाराम खोजा आदि ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में संस्थान के शैक्षणिक च गैर शैक्षणिक सभी कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. युवराजसिंह खांगारोत ने किया।
संस्थान को NAAC से मिला "A" ग्रेड
ड्यूल मोड में मूल्यांकित होने वाला देश का प्रथम विश्वविद्यालय
भारत सरकार द्वारा देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के मूल्यांकन के लिए गठित ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायान परिषद (नैक)’ की पांच सदस्यीय टीम ने यहां जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय का दौरा करके निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के बाद नैक ने जैन विश्वभारती संस्थान को ‘ए’ ग्रेड प्रदान किया है। इस ‘ए-ग्रेड’ प्राप्त होने के बाद यह संस्थान देश के श्रेष्ठ ‘ए’ ग्रेड स्तर के चुनिन्दा विश्वविद्यालयों में सम्मिलित हो गया है। जैन विश्वभारती संस्थान ड्यूल मोड में मूल्यांकित होने वाला देश का प्रथम विश्वविद्यालय है। संस्थान के नैक एक्रीडिशन में ए-ग्रेड प्राप्त होने पर यहां संस्थान में खुशियां मनाई गई।
राष्ट्रीय केन्द्र ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बने
कुलसचिव रमेश कुमार मेहता ने बताया कि नैक टीम ने अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट में संस्थान के बारे में अपनी राय देते हुए लिखा है- जैन विद्या एवं योग के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तरीय ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ केन्द्र के रूप में जैन विश्वभारती संस्थान को मान्यता दिए जाने की आवश्यकता है। संस्थान प्राचीन भारतीय पाण्डुलिपियों का अन्तर्राष्ट्रीय सन्दर्भ केन्द्र बनने की पूर्ण अर्हता रखता है। संस्थान जैन आगमों पर आधारित पांडुलिपियों में निहित प्रमुख ज्ञान-भंडार का पता लगाकर वैश्विक जगत् को समृद्ध कर सकता है। नैक रिपोर्ट के अनुसार इस संस्थान का विजन, मिशन, नीतियां और व्यावहारिक प्रक्रियाएं भारतीय मूल्यों, संस्कृति तथा अनुशास्ताओं की परम्पराओं पर आधारित है। संस्थान के पाठ्यक्रमों को शिक्षा के माध्यम से समग्र मानवता के विकास के लिए समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप विकसित किया गया है। अहिंसा और शांति के क्षेत्र में विशिष्ट शिक्षण, अनुसंधान और प्रचार-प्रसार इस संस्थान के विशिष्ट पदचिह्नों को निर्मित करता है। संस्थान सूचना प्रौद्योगिकी के उच्च स्तर के अनुप्रयोगों के साथ आधुनिक और पारम्परिक शिक्षा प्रणाली का एक आदर्श मिश्रण है।
दूरदृष्टि व नवाचारों से आया बदलाव
कुलसचिव मेहता के अनुसार यह सब उपलब्धि कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ द्वारा दूरदृष्टिपूर्ण निर्णयों एवं विकास के लिए नवीन आयाम स्थापित करने से हासिल हो पाई है। उनके प्रयासों के कारण ही आज यह विश्वविद्यालय पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बन पाया है। उन्होंने बताया कि कुलपति प्रो. दूगड़ ने एक अभिभावक के रूप में पूरे स्टाफ और विद्यार्थी वर्ग के साथ अपना रवैया व सम्बंध बनाए रखे और उनकी अपनी प्रगति के लिए उनमें रूचि का जागरण किया। इसके लिए उनके द्वारा शुरू किए गए नवाचार कहीं अन्यत्र नहीं मिल सकते। यहां विदेशों के विश्वविद्यालयों से अध्ययन के लिए काफी विद्यार्थी आते रहे हैं। वहां के विश्वविद्यालयों से इसका एमओयू है। विश्वविद्यालय अपने अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप को बनाए रखकर यहां मरूभूमि क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाए हुए है, जो विशेष बात है।
जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति को पद्मश्री पुरस्कार मिलने पर हर्ष
गांधीवाद के प्रखर प्रचारक सर्वोदय विचारक डॉ. रामजी सिंह को राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री
लाडनूँ, 09 नवम्बर 2021। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रामजी सिंह को समाजसेवा के लिये राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किये जाने पर यहां हर्ष जताया गया और उनकी स्वस्थता पूर्वक दीर्घायु के लिये कामनायें व्यक्त की गई। प्रो. रामजी सिंह को हालही में 8 नवम्बर को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में पद्मश्री पुरस्कार प्रदान करके राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सम्मानित किया था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को देश-विदेश में फैलानेवाले सर्वोदय विचारक 94 वर्षीय डॉ. रामजी सिंह वर्ष 1992 से 94 तक जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति रहे थे। उन्होंने 1993 में शिकागों में आयोजित हुए विश्व धर्म संसद में जैनिज्म पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने बताया कि प्रो. रामजी सिंह सादगी की प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने अथक प्रयास करके संपूर्ण भारत में गांधी विचार की पढ़ाई शुरू कराई। वे बिहार के भागलपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे हैं। देश के पहले गांधी विचार विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले और विभाग के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. रामजी सिंह रहे हैं। मूल रूप से बिहार के भागलपुर के रहने वाले प्रो. रामजी सिंह के प्रयासों से देश के पहले गांधी विचार विभाग का उद्घाटन दो अक्टूबर 1980 को भागलपुर विश्वविद्यालय में किया गया था। तब यह देश का इकलौता विभाग था, जहां गांधी विचार की पढ़ाई शुरू हुई थी। इन्होने इसके लिये अपनी महत्वपूर्ण व दुर्लभ कही जानेवाली 5 हजार पुस्तकें दान कर दी थी। आज 25 विश्वविद्यालयों में गांधी विचार विभाग की पढ़ाई हो रही है। पद्मश्री का पुरस्कार के बारे में उनका कहना था कि यह पुरस्कार उन्हें नहीं बल्कि समाज के लिए काम करने वाले लोगों को समर्पित है।





