Wednesday, 1 January 2020

आचार्य महाप्रज्ञ समाधिस्थल पर गोष्ठी व ध्यान

आचार्य महाप्रज्ञ समाधिस्थल पर गोष्ठी व ध्यान

प्राचीन ज्ञान व अर्वाचीन विज्ञान के सेतु थे महाप्रज्ञ- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 1 जनवरी 2020। आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष के अन्तर्गत जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समस्त शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कार्मिकों ने कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के नेतृत्व एवं निर्देशन में सरदार शहर स्थित आचार्य महाप्रज्ञ के समाधस्थिल ‘‘शांतिपीठ’’ में एक गोष्ठी का आयोजन करके विचारों का सम्प्रेषण किया एवं उनकी समाधि पर दर्शन व ध्यान के द्वारा शांति की प्रार्थना की। समाधिस्थल पर ध्यान व दर्शनों के दौरान कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने नववर्ष की सबको बधाई देते हुये कहा कि इस अध्यात्म शांति पीठ के दर्शन नये साल में सबके लिये प्रेरणादायी सिद्ध हों। उन्होंने ज्ञान की महता बताई और कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ बिना किसी भेदभाव के आत्मिक ज्ञान का सम्प्रेषण करते थे और समदृष्टि पूर्वक ज्ञान ग्रहण करते थे। वे भारत के प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के सेतु थे।

आज भी प्रेरित करता है महाप्रज्ञ का साहित्य

यहां आयोजित गोष्ठी में अध्यक्षता करते हुये दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने महाप्रज्ञ के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर विश्वविद्यालय के तत्वावधान में किये जाने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी और बताया कि वे ऐसे मनीषी थे, जिनकी रचनाओं एवं प्रवचनों में विश्व के लगभग सभी विषयों पर सार्थक विवेचन मिलता है। उन्होंने बताया कि वे सबके लिये प्रेरणापुंज थे और उनके लिखे शब्द आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर सोमवीर सांगवान, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, प्रगति चैरड़िया, पंकज भटनागर व डाॅ. वीरेन्द्र भाटी मंगल ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में प्रेरणादायक गीत व भजनों की प्रस्तुतियां भी दी गई। इस अवसर पर प्रो. अनिल धर, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डा. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत, डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. अशोक भास्कर, डाॅ. सतयनारायण भारद्वाज, डाॅ. सुनिता इंदौरिया, डाॅ. आभासिंह, डाॅ. विनोद कस्वां, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, प्रगति जैन, पंकज भटनागर, डाॅ. जेपी सिंह, डाॅ. बलबीर सिंह चारण, कमलकुमार मोदी, डाॅ. वीरेन्द्र भाटी, रमेशदान चारण, प्रकाश गिड़िया, जगदीश यायावर, दीपाराम खोजा, शरद जैन, पवन सैन आदि उपस्थित थे।

Wednesday, 19 June 2019

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के प्रो. दामोदर शास्त्री केन्द्र सरकार के प्राकृत भाषा बोर्ड में शामिल


प्रो. दामोदर शास्त्री केन्द्र सरकार के प्राकृत भाषा बोर्ड में शामिल

लाडनूँ, 19 जून 2019। केन्द्रीय सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय के अन्तर्गत पालि व प्राकृत भाषाओं के विकास की योजना के तहत गठित किये गये 19 सदस्यीय प्राकृत भाषा विकास बोर्ड में लाडनूँ के जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के प्रोफेसर दामोदर शास्त्री को विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्रो. शास्त्री के अलावा जैन विश्वभारती संस्थान के प्राकृत व संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके प्रो. जगतराम भट्टाचार्य को भी इस बोर्ड में विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्रो. भट्टाचार्य वर्तमान में पं. बंगाल के शांति निकेतन विश्व भारती विश्वविद्यालय के संस्कृत, पालि व प्राकृत भाष विभाग के प्रोफेसर हैं। यह समिति भारत सरकार को प्राकृत भाषा व साहित्य के प्रचार-प्रसार, संरक्षण व विकास के सम्बंध में परामर्श प्रदान करेगी।

Monday, 17 June 2019


जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के पाण्डुलिपि संरक्षण केन्द्र द्वारा किया जा रहा है यत्र-तत्र फैली पांडुलिपियों का सूचीकरण व ट्रीटमेंट


लाडनूँ, 17 जून 2019। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में स्थापित पाण्डुलिपि संरक्षण केन्द्र में भारतीय संस्कृति की धरोहर कहे जाने वाले पुरालिपियों में निबद्ध प्राचीन भारतीय साहित्य को संरक्षित करने एवं पाण्डुलिपियों को सुरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। संस्थान में लगभग छह हजार बहुमूल्य पाण्डुलिपियां हैं, जिनमें से अधिकतर अप्रकाशित हैं। इन सबका संरक्षण कार्य इस केन्द्र द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही लाडनूँ क्षेत्र के आसपास मंदिरों, सामुदायिक वाचनालयों, व्यक्तिगत पुस्तकालयों एवं घरों में संपर्क करके जहां-जहां भी पाण्डुलिपियां सुरक्षित हैं, वहां पहुंचकर उन पाण्डुलिपियों को आवश्यकतानुसार सुरक्षित करना अथवा उन्हें संरक्षण केन्द्र लाकर उचित ट्रीटमेंट देकर ठीक करना एवं पुनः उन्हें वापिस लौटाना आदि कार्य भी इस केन्द्र द्वारा किये जायेंगे।

इस प्रकार की जाती है पांडुलिपियां सुरक्षित

केन्द्र में नियुक्त किये गये विशेषज्ञ कार्यकर्ताओं द्वारा पाण्डुलिपियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है, जिनमें मुख्य रूप से प्रत्येक पाण्डुलिपि के पन्नों में नमी होने पर उन्हें प्राकृतिक तरीके से अथवा आवश्यक केमीकल के द्वारा दूर किया जाता है और यदि यदि पन्ने फट गये हों अथवा कीड़े लग गये हों तो उनमें आवश्यकतानुसार हस्त निर्मित कागज को जोड़कर सम आकार का किया जाता है। साथ ही केन्द्र में प्राप्त की गई प्रत्येक पाण्डुलिपि का विस्तृत रिकार्ड रखा जाता है। इन संरक्षित की गई सभी पांडुलिपियों को अंत में विशेष गत्ते को लगाकर उसे लाल रंग के सूती कपड़े में बांधा जाता है, जिससे पुनः उसमें नमी एवं कीडे़ आदि ना लगे। ये सभी कार्य संस्थान के पाण्डुलिपि संरक्षण केन्द्र में केन्द्र के समन्वयक एवं जैनविद्या विभाग के सहायक आचार्य डाॅ. योगेश कुमार जैन के निर्देशन में किये जा रहे हैं।

राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन से मिली सहायता

इस पांडुलिपि संरक्षण केन्द्र की स्थापना राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन नई दिल्ली के सौजन्य से की गई है। राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन नई दिल्ली के प्रयासों से देश में पाण्डुलिपियों के संरक्षण, संवर्द्धन एवं रखरखाव के साथ उनके सूचीकरण का महनीय कार्य मिशन के द्वारा निरन्तर किया जा रहा है। लेकिन अब तक केवल 30 प्रतिशत पाण्डुलिपियों का ही संरक्षण संभव हो पाया है। संरक्षण एवं सूचीकरण की श्रृंखला को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मिशन के सौजन्य से जैन विश्वभारती संस्थान में इस केन्द्र की स्थापना की गई है। राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन द्वारा इस कार्य के लिये जैविभा संस्थान को सहयोग प्रदान किया गया है। पूर्व में संस्थान ने पाण्डुलिपि के पठन-पाठन को सरल बनाने के लिये इक्कीस दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था तथा इस कार्यशाला की सफलता के परिणाम स्वरूप मिशन ने संस्थान में पांडुलिपि संरक्षण केन्द्र खोले जाने की स्वीकृति प्रदान की थी।

Friday, 24 May 2019

नियमित के मुकाबले सक्षम सिद्ध हुई है दूरस्थ शिक्षा

नियमित के मुकाबले सक्षम सिद्ध हुई है दूरस्थ शिक्षा - प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 24 मई 2019। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा है कि आज की अर्थप्रधान एवं व्यस्ततम जिंदगी में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिये दूरस्थ शिक्षा का महत्व बहुत अधिक बढ गया है। घर बैठे, अपने व्यवसाय या नौकरी करते हुये शिक्षा को सतत बनाये रखने में दूरस्थ शिक्षा की भूमिका महती है। आज तो यह नियमित अध्ययन का मुकाबला करने में सक्षम हो चुकी है। घर बैठे अध्ययन की यह सुविधा देश में उच्च शिक्षा में कीर्तिमान कायम कर रही है। नौकरीपेशा लोगों के लिये तो यह बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो रही है। वे यहां दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की दूरस्थ शिक्षा में प्रवेश सम्बंधी व्यवस्थाओं को लेकर आहूत बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन विश्वभारती संस्थान मे दूरस्थ शिक्षा में प्रवेश प्रारम्भ हो चुका है। यहां बी.ए., बी.काॅम. और एम.काॅम. के लिये आवेदन भरे जा रहे हैं। इनमें पोस्ट ग्रेजुयेट कोर्स में जैनालोजी, योग एवं जीवन विज्ञान, हिन्दी, अंग्रेजी तथा राजनीति विज्ञान विषयों में प्रवेश की सुविधा है। इस बैठक में सेक्शन इंचार्ज पंकज भटनागर, समन्वयक जेपी सिंह, मयंक जैन, ओमप्रकाश सारण, करण गुर्जर, कृष्णा, सुरेश पारीक, मदनसिंह, अंजुला जैन आदि उपस्थित थे।

Tuesday, 14 May 2019

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में महिला शिक्षा के बढते कदम पुस्तिका का विमोचन

बालिकाओं को उच्चतम शिक्षा दिलवाकर प्रतिभाओं को बढने का मौका दें- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 14 मई 2019। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा प्रकाशित ‘‘महिला शिक्षा के बढते कदम’’ पुस्तिका का विमोचन मंगलवार को महाविद्यालय के सेमीनार हाॅॅल में प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में प्राचार्य प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने पुस्तिका की विशेषताओं और उपयोगिता के बारे में बताते हुये बताया कि यह पुस्तिका कन्या शिक्षा के क्षेत्र में बहुत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि आज सब जगह कन्यायें अपना परचम फहरा रही है। लड़कियों की काबिलियत के सभी कायल हैं, ऐसे में आवश्यकता यह है कि कहीं ऐसा न हो कि उनकी शिक्षा में कोई अड़चन पैदा हो और प्रतिभा को फलने-फूलने से रोक दिया जावे। अपने क्षेत्र में उच्चतम शिक्षा की व्यवस्था करने एवं बालिकाओं को शिक्षा के साथ संस्कारवान, चरित्रवान और नैतिक मूल्यों से सराबोर बनाने का काम इस क्षेत्र में महिला शिक्षा को निरन्तर बढावा दे रहा है यह आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय। यहां अध्ययनरत छात्राओं के सर्वांगीण विकास की ओर पूरा ध्यान दिया जाता है। यहां शैक्षणेत्तर गतिविधियों का संचालन विविध क्लबों का गठन किया जाकर किया जाता है, जिनमें व्यक्तित्व विकास, वक्तृत्व कला, लेखन कला, नृत्य व संगीत, विविध खेल अभ्यास व स्पर्धायें, ध्यान, घुड़सवारी आदि कार्यक्रम निरन्तर करवाये जाते हैं। इनके अलावा एनएसएस, एनसीसी की इकाइयों के संचालन से भी उनका विकास किया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये भी यहां विशेष व्यवस्था उपलब्ध है। इस महाविद्यालय में उत्कृष्ट व्यवस्था व सुविधाओं वाला छात्रावास, स्वास्थ्यदायी भोजन व्यवस्था, सुदूर गांवों तक बसों की व्यवस्था, पूरे परिसर में वाई-फाई की सुविधा आदि उपलब्ध है। इस अवसर पर डाॅ. प्रगति भटनागर, कमल कुमार मोदी, अभिषेक चारण, रत्ना चैधरी, बलबीर सिंह चारण, योगेश टाक, घासीलाल शर्मा आदि उपस्थित रहे।

Saturday, 4 May 2019

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में व्याख्यानमाला आयोजित

दलित समाज में जागृति की ज्वाला लेकर आये बाबू जगजीवन राम

लाडनूँ, 4 अप्रेल 2019। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में प्राचार्य प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में मासिक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस बार ‘‘अनुसुचित जाति समुदाय के सशक्तिकरण में बाबू जगजीवन राम का योगदान’’ विषय पर वाणिज्य संकाय की व्याख्याता अपूर्वा घोड़ावत द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। घोड़ावत ने अपने व्याख्यान में बताया कि पांच दशक तक सक्रिय राजनीति में बाबू जगजीवनराम जी ने अपना पूर्ण जीवन देश की सेवा व दलितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनके प्रयासों के कारण ही दलितों को आरक्षण मिला, शिक्षा और नौकरी मिली तथा बराबरी वाले समाज में बराबर उठने-बैठने की महत्ता मिली। बाबूजी दलित समाज की एक ऐसी चिन्गारी के रूप में उभरे जिसमें समूचे दलित समाज में जागृति की ज्वाला जगा दी और दलित समाज को पंक से निकाल कर प्रतिष्ठा तक पहुंचा दिया। इस व्याख्यानमाला में महाविद्यालय के व्याख्याता डाॅ. प्रगति भटनागर, कमल कुमार मोदी, अभिषेक चारण, रत्ना चैधरी, बलबीर सिंह चारण, सोनिका जैन, योगेश टाक आदि उपस्थित रहे। व्याख्यानमाला का संचालन सोमवीर सांगवान द्वारा किया गया।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अल्पकालीन अंग्रेजी सम्भाषण कोर्स का समापन

जीवन में आवश्यक बन गई है अंग्रेजी सम्भाषण कला- शर्मा

लाडनूँ, 4 अप्रेल 2019। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में कौशल विकास के लिये संचालित अल्पकालीन कोर्सेज के अन्तर्गत इंग्लिश स्पोकन कोर्स का समापन गुरूवार को किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये समन्वयक विजयकुमार शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी भाषा की जानकारी आज वैश्विक जरूरत बन चुकी है। अंग्रेजी सम्भाषण कला सीखने के बाद व्यक्ति विश्व में कहीं भी जाये तो उसे भाषा की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विविध अल्पकालीन पाठ्यक्रमों की जानकारी दी और ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान उनमें प्रवेश लेकर कौशल सीखने के लिये प्रेरित किया। प्रशिक्षक डाॅ. सोमवीर सांगवान ने बेहिचक अंग्रेजी बोलने के लिये प्रेरित किया और कहा कि अंग्रेजी आज देश-विदेश में सम्प्रेषण की भाषा बन चुकी है। डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने अंग्रेजी सीखने की आवश्यकता को प्रतिपादित किया। डाॅ. विकास शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी को हुनर सीखने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि प्रत्येेक सीखी हुई विद्या जीवन भर काम आती है। डाॅ. जगदीश यायावर व अजयपाल सिंह भाटी ने भी अंग्रेजी को अपने रोजमर्रा काम में लेकर इसमें पारंगत बनने की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर प्रशिक्षु भूमिका सोनी, लीला मंडा, वेदिका स्वामी, विकास ढाका, धीरज स्वामी, महेन्द्र जांगिड़ आदि ने अपने कक्षा में सीखे हुये ज्ञान के बारे में अनुभव साझा किये तथा अंग्रेजी में वक्तव्य देते हुये बताया कि यहां वे बहुत ही आसानी से अंग्रेजी बोलना सीख पाये। इस अवसर पर सभी प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किय गये।