Wednesday, 19 December 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में केरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन

पूरे विश्व में फैली भारतीय योग विद्या का एक हजार बिलियन डाॅलर है व्यवसाय- डाॅ.शेखावत

लाडनूँ, 19 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने कहा है कि योग को भारतीय ऋषियों ने आत्म-उद्धार और मोक्ष प्राप्ति के साधन के रूप में आविष्कृत किया था, लेकिन आज समय के साथ उसका स्वास्थ्य बदल गया है और योग आज स्वास्थ्य प्राप्ति का साधन बन गया है। उन्होंने यहां सेमिनार हाॅल में आयोजित कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम के तहत राजकीय सुजला महाविद्यालय के विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने योग शिक्षा के उपयोग और केरियर निर्माण में सहायक की भूमिका के बारे में बोलते हुये कहा कि भारत की यह विद्या आज पूरे विश्व में फैली हुई है और एक हजार बिलियन डाॅलर का व्यवसाय केवल योग शिक्षा का है। प्रत्येक कार्यक्षेत्र में कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढाने के लिये अपने संस्थान में योग-सलाहकारों की नियुक्ति कर रहे हैं। आज लगभग हर व्यक्ति में विविध प्रकार की शारीरिक समस्यायें और तनाव की स्थिति है, जिसका एकमात्र कारण लाईफ स्टाइल बदलना है। इसे योग द्वारा फिर बदला जासकता है। योग से शरीर व मन का संतुलन बना रहता है।

प्राचार्य हुये योग शिक्षा से प्रभावित

कार्यक्रम में राजकीय सुजला महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. चतरसिंह डोटासरा ने बताया कि सुजला काॅलेज के युवा विकास केन्द्र के तहत आयोजित व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों के भ्रमण का कार्यक्रम जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का रखा गया, जिसमें उन्हें केरियर निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। उन्होंने कार्यक्रम में प्राप्त जानकारी को विद्यार्थियों के लिये लाभदायक बताया तथा कहा कि वे यहां योग शिक्षा से बहुत प्रभावित हुये हैं और स्वयं यहां योग शिविर में भाग लेने के इच्छुक हैं। कार्यक्रम में समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने एमएसडब्लू करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य और केरियर के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि यह हंड्रेड पर्सेंट जोब ओरियेंटेड कोर्स है, जो इस क्षेत्र में एकमात्र इसी विश्वविद्यालय में है।

निःशुल्क होस्टल, मेस व शिक्षण शुल्क की सुविधायें

डाॅ. रविन्द्र सिंह शेखावत ने अहिंसा एवं शांति विभाग के अन्तर्गत संचालिक विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं सुविधाओं के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि विश्वविद्यालय में एमए डिग्री के कोर्स में दो साल तक 10 हजार रूपये वार्षिक छात्रवृति देय है। इसी प्रकार एमफिल और पीएचडी में भी छात्रवृति की सुविधा देय है। इस संस्थान की अलग विषयों के कारण पृथक पहचान है और इसी कारण यहां विदेशी विद्यार्थियों के साथ विभिन्न प्रंतों के विद्यार्थी भी अध्ययनरत हैं। डाॅ. योगेश जैन ने जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन विभाग के अन्तर्गत संचालित कोर्सेंज के बारे में विवरण प्रस्तुत किया एवं उनकी उपयोगिता व उनसे मिलने वाले रोजगार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैनोलाॅजी विषय पढने वाले विद्यार्थियों को यहां छात्रावास एवं भोजन की सुविधा निःशुल्क है। इसके अलावा पीएचडी करने वाले शोधार्थियों के लिये 28 हजार रूपये सहयोग प्रदान किये जाने की सुविधा है। कार्यक्रम संयोजक डाॅ.सत्यनारायण भारद्वाज ने प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के बारे में बताया और कहा कि यहां से स्नातकोत्तर करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिये रहना-खाना और फीस सभी निःशुल्क हैं। नेट और जेआरएफ के लिये भी सुविधा उपलब्ध है तथा कम्पीटिशन की तैयारी के लिये भी निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है।

विद्यार्थियों ने किया विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन

राजकीय सुजला महाविद्यालय से युवा विकास केन्द्र के तत्वावधान में आये छात्र-छात्राओं ने यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की योग विभाग, विज्ञान संकाय आदि की विभिन्न प्रयोगशालाओं, जिम की सुविधा, छात्रावास, विभिन्न विभागों, स्मार्ट कक्षाओं, डिजीटल स्टुडियो, विशाल ग्रंथागार लाईब्रेरी, हस्तलिखित पुस्तकों, कलाकृतियों, रमणीक हरीतिमा युक्त परिसर, ध्यान केन्द्र, खेल मैदान आदि का अवलोकन किया तथा डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज एव स्थानीय स्टाफ से पूरी जानकारी प्राप्त की।

Thursday, 13 December 2018

विमल विद्या विहार में शिक्षकों के लिये 15 दिवसीय ओरियेंटेशन प्रोग्राम का आयोजन

नवीन प्रवृतियों से शिक्षा में गुणवता वृद्धि संभव- प्रो. जैन

लाडनूँ 13 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने विद्यालयी शिक्षा में नवीन प्रवृतियों के बारे में अवगत करवाते हुये कहा कि इनके बारे में सभी शिक्षकों की जानकारी होना आवश्यक है। इनसे शिक्षा की गुणवता में वृद्धि संभव हो पाती है। उन्होंने यहां विमल विद्या विहार सीनियर सैकेंडरी स्कूल में संचालित 15 दिवसीय ओरियेंटेश प्रोग्राम में छठे दिवस आयोजित कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुये बताया कि शिक्षण की नवीन प्रवृतियों में ग्रेडिंग सिस्टम, सेमेस्टर सिस्टम, क्रेडिट सिस्टम, मूल्यांकन की पद्धति आदि को विद्यार्थियों को केन्द्रित करके तैयार किया गया है। इनके द्वारा विद्यार्थी अपनी रूचि के अनुसार, अपनी क्षमताओं, योग्यताओं व दक्षताओं का विकास भरपूर ढंग से कर सकें। प्रो. जैन ने बताया कि आत स्मार्ट लर्निंग, ई-लर्निंग, सोशल मीडिया लर्निंग, मोबाईल लर्निंग का प्रचलन तेजी से बढा है, जिससे छात्रों को प्रतयेक स्थान पर अपनी शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा संभव हो पाई है। उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी ने मूक्स लर्निंग के कोर्स इन नवीन प्रवृतियों के अन्तर्गत संचालित किये हैं। इनके अलावा कौशल विकास, जीवन कौशल, सम्प्रेषण कौशल, तनाव प्रबंधन, नेतृत्व शैली, शोध लर्निंग, प्रोजेक्ट मैथड, क्रियात्मक विधि का प्रयोग, पाठ्येतर क्रियायें आदि विषयों के बारे में विस्तार से बताते हुये उन्होंने इनसे भी सभी शिक्षकों को अवगत करवाया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम में 35 शिक्षकों ने हिस्सा लेकर शिक्षण की नवीन प्रवृतियों की जानकारी प्राप्त की और इसे शिक्षा को गुणवता पूर्ण बनाने व नवीनता प्रदान करने के लिये उपयोगी बताया।

Monday, 10 December 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में विश्व मानवाधिकार दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

व्यक्ति की गरिमा व समानता का अधिकार रक्षित होना आवश्यक- प्रो. धर

लाडनूँ 10 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में मानवाधिकार दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शोध निदेशक प्रो. अनिल धर ने व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के बारे में बताते हुये राज्य व राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार आयोगों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा कर रखी है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में कहा गया है कि कुछ ऐसे मानवाधिकार हैं, जो कभी छीने नहीं जा सकते, जिनमें मानव की गरिमा है और स्त्री-पुरुष के समान अधिकार हैं। इस घोषणा के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसम्बर 1948 को मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा अंगीकार की। संयुक्त राष्ट्र संघ की समान्य सभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया। इस घोषणा से राष्ट्रों को प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और वे इन अधिकारों को अपने संविधान या अधिनियमों के द्वारा मान्यता देने और क्रियान्वित करने के लिए अग्रसर हुए। प्रो. धर ने बताया कि किसी भी इंसान की जिंदगी, आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार ही मानवाधिकार है। भारतीय संविधान इस अधिकार की न सिर्फ गारंटी देता है, बल्कि इसे तोड़ने वाले के लिये सजा का प्रावधान भी है। भारत में 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून अमल में आया और 12 अक्टूबर, 1993 में सरकार ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया। डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी पूरी जिम्मेदारी से निभाने की सलाह दी तथा कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने दायित्वों को समझ ले तो अधिकारों की रक्षा स्वतः ही हो जाती है और कानून का उपयोग ही नहीं करना पड़ता है। कार्यक्रम में हरफूल ठोलिया, राजेश माली, उषा जैन, रजनी प्रजापत, वंदना प्रजापत, आसिफ खान, शीतल प्रजापत, हंसराज कंवर, प्रतिभा कंवर, किरण बानो, सरिता लोहिया, सपना जांगिड़, हीरालाल भाकर, गजानन्द चारण, मेहरून, तमन्ना आदि उपस्थित रहे।

Saturday, 8 December 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में स्वच्छता अभियान को लेकर व्याख्यान आयोजित

स्वच्छता अभियान के प्रचारक बनें विद्यार्थी- डाॅ. शेखावत

लाडनूँ 8 सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में महात्मा गांधी के 150वीं जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष में शनिवार को सेमिनार हाॅल में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। स्वच्छता अभियान पर आधारित इस कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुये विभागाध्यक्ष एवं उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने कहा कि विद्यार्थियों को स्वच्छता अभियान के प्रचारक की भूमिका निभानी चाहिये। सफाई की शुरूआत हमें खुद से और अपने आस पास के परिसर से ही करनी होगी। अपने मौहल्ले और गांव को स्वच्छ रखने में अगर हम सफल रहे तो निश्चित मानिये कि यह पूरा देश भी स्वच्छ हो जायेगा। उन्होंने कहा कि वे कहीं भी किसी व्यक्ति के कचरा बाहर रास्ते में डालते हुये पाये जाने पर उसे रोक कर उससे कचरा लेकर कचरा पात्र या कचरा-वाहन में डालना चाहिये, ताकि उसे सीख मिले। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को लेकर छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने से बहुत सुधार किया जा सकता है। हमें व्यावहारिक रूप से सफाई के महत्व को लागू करना चाहिये। कचरे का निष्पादन करने में सूखे-ठोस व गीले कचरे को अलग-अलग एवं पैक करके डालने के महत्व को समझाया तथा कहा कि कार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों को कभी भी खुले में नहीं डालना चाहिये। डाॅ. शेखावत ने खुले में शौच एवं मूत्रादि करने से होने वाली हानियों को गिनाया तथा हाथ साफ करने, घर में जूते लेकर नहीं जाने, जल-संग्रहण को स्वच्छ बनाने, उसे ढक कर रखने आदि पारम्परिक एवं व्यावहारिक सफाई के महत्व को समझाया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अशोक भास्कर ने किया।

Thursday, 6 December 2018

उच्च शिक्षा व केरियर निर्माण जागरूकता अभियान के तहत आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा पहल

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा पहल

लाडनूँ 6 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा युवावर्ग को सही दिशा प्रदान करने के लिये पहल करते हुये अपने केरियर निर्माण एवं उच्च शिक्षा परामर्श कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को केरियर निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी दी गई और उन्हें उनके अध्ययन के अनुकूल परामर्श प्रदान किया गया तथा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के सम्बंध में भी उनका मार्गदर्शन किया गया। यहां के राजकीय भूतोड़िया बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय केशरदेवी सेठी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, लाड मनोहर बालनिकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, विमल विद्या विहार उच्च माध्यमिक विद्यालय, संस्कार उच्च माध्यमिक विद्यालय, आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, कनकश्याम उच्च माध्यमिक विद्यालय, सेंट जेवियर्स पब्लिक स्कूल, सुभाष बोस शिक्षण संस्थान, सत्यम उच्च मा. विद्यालय, सैनिक वेलफेयर स्कूल, मौलाना आजाद स्कूल, मदनलाल भंवरीदेवी आर्य मेमोरियल स्कूल, दयानन्द सरस्वती स्कूल, निम्बी जोधां के नवभारत स्कूल, आदर्श विद्या मंदिर स्कूल, नवीन विद्यापीठ स्कूल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय व स्वामी विवेकानन्द राजकीय माॅडल स्कूल में डाॅ. प्रगति भटनागर, सोनिका जैन, डाॅ. बलवीर चारण, डाॅ. रत्ना चैधरी, दिव्या राठौड़, अभिषेक चारण व सोमवीर सांगवान ने अलग-अलग विद्यालयों का जिम्मा लेकर कैरियर निर्माण एवं उच्च शिक्षा जागरूकता के कार्यक्रमों का आयोजन किया तथ विद्यार्थियों में उच्च शिक्षा के प्रति एवं केरियर के सम्बंध में जानकारी प्रदान की गई।

बैठक आयोजित कर दिये निर्देश

इससे पूर्व प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने अपने आचार्यगणों की एक बैठक का आयोजन करके युवा वर्ग में उच्च शिक्षा व केरियर के प्रति जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता बताई तथा इसके लिये क्षेत्र में एक अभियान चलाया जाकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय निरन्तर विद्यार्थी जागरूकता की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत समय-समय पर विभिन्न विषयों पर व्याख्यान आयोजित करने, अनेक प्रकार की सांस्कृतिक-साहित्यिक व खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन करने, घुड़सवारी प्रशिक्षण प्रदान करने, युवा महोत्सव व मेलों का आयोजन करने, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये ज्ञान केन्द्र का संचालन करने, ज्ञान व कौशल वृद्धि के लिये विविध क्लबों का संचालन करने आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहता है।

Saturday, 1 December 2018

विश्व एड्स दिवस पर लोगों को रेड रिबन लगाकर दिया बचने का संदेश

एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति को दुत्कारें नहीं, उसे प्यार दें- डाॅ. मिश्रा

लाडनूँ, 01 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग में शनिवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा सबको रेड बिरन लगाकर जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में एड्स व रोकथाम के बारे में बताया गया। विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने बताया कि एड्स- एच.आई.वी. नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्ताह के बाद ही रक्त की जॉंच से ज्ञात होता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है, ऐसे व्यक्ति को एच.आई.वी. पोजिटिव कहते हैं। एच.आई.वी. पोजिटिव व्यक्ति कई वर्षो 6 से 10 वर्ष तक सामान्य प्रतीत होता है और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है, लेकिन दूसरो को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है। उन्होंने बताया कि एड्स का खतरा केवल उन लोगों को होता है, जो एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखता है, वेश्यावृति करने वालों से यौन सम्पर्क रखता है, इंजेक्शन द्वारा नशीली दवायें लेता है, यौनरोगों से पीड़ित है, पिता या माता के एच.आई.वी. संक्रमण के पश्चात पैदा होने वाला बच्चा और बिना जांच किया हुआ रक्त ग्रहण करने वाला व्यक्ति है। उन्होंने ऐसी किसी भी प्रवृति से बचने की सलाह दी। डाॅ. पुष्पा मिश्रा ने बताया कि एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने, एक साथ भोजन करने, एक ही घडे का पानी पीने, एक ही बिस्तर और कपडों के प्रयोग, एक ही कमरे अथवा घर में रहने, एक ही शौचालय, स्नानघर प्रयोग में लेने से, बच्चों के साथ खेलने आदि सामान्य संबंधो से यह रोग नहीं फैलता है। मच्छरों, खटमलों आदि के काटने से भी यह रोग नहीं फैलता है। उन्होंने एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति को दुत्कारने के बजाये उसे प्यार देने की आवश्यकता बताई।

लगाये रेड रिबन

संस्थान के समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों ने विश्व एड्स दिवस पर शनिवार को यहां समस्त विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों व स्टाफ को रेड रिबन लगाकर उन्हें एड्स से बचाव का संदेश दिया। इसी प्रकार उन्होंने बालसमंद गांव में मनसुखलाल सारड़ा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पहुंच कर लोगों को एड्स रोग की जानकारी दी एवं उससे बचाव के तरीके समझाये। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपप्रधानाचार्य मंजू कंवर ने एचआईवी-एड्स की वर्तमान स्थिति व फैलाव की संभावना बताई। विशिष्ट अतिथि डाॅ. बलवीर सिंह ने एड्स का इतिहास बताते हुयेे समस्या के समाधान प्रकाश डाला और जन सहयोग को जरूरी बताया। ललिता शर्मा ने विश्व एड्स दिवस 2018 की थीम ‘‘अपनी स्थिति जानें’’ के बारे में बताते हुये जागरूकता आवश्यक बताई। जितेन्द्र उपाध्याय ने एड्स के कारण व बचाव पर प्रकाश डाला। डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. पुष्पा मिश्रा व जितेन्द्र सिंह ने भी विचार व्यक्त किये। इस कार्यक्रम में रणजीत जायसवाल, फिरदौस, ममता, मुकेश,युधिष्ठिर, सुनील, चित्रा, सुनीता, राधा, दीपक आदि के अलावा विद्यालय के छात्रा व ग्रामवासी भी उपस्थित रहे।

Friday, 30 November 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में व्याख्यानमाला का आयोजन

भक्तिकालीन संत भक्ति के साथ सामाजिक बदलाव के अग्रदूत थे- चारण

लाडनूँ, 30 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालु कन्या महाविद्यालय के अन्तर्गत संचालित मासिक व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘‘भक्ति आंदोलन एवं समरसता’’ विषय पर अभिषेक चारण ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने भक्तिकाल के विभिन्न संतों का उल्लेख करते हुये उनके द्वारा जाति प्रथा, पांखड और अंधविश्वासों पर अपनी काव्य-वाणी द्वारा की गई चोटों का विवरण प्रस्तुत किया तथा लोक मानस में उनके प्रभाव का अंकन अपने व्याख्यान में किया। चारण ने संत कबीर, नामदेव, रामानन्द आदि के उदाहरण देते हुये कहा कि भक्तिकाल में पूरे देश में सामाजिक समरसता कायम करने का बीड़ा तत्कालीन संत समाज ने उठाया था, जो अद्वितीय है। उन्होंने केवल भक्ति की धारा ही समाज में प्रवाहित नहीं की बल्कि उन्होंने समाज के बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उनकी वाणी ने जनमानस को झकझोर कर रख दिया था। संतों की समरसता की वाणी आज भी उद्धृरणीय है और वह समाज को संदेश देने व बदलाव लाने में सक्षम हैं। इस अवसर पर डाॅ. प्रगति भटनागर, सोनिका जैन, रत्ना चैधरी, बलवीर चारण, डाॅ. सोमवीर सांगवान, कमल मोदी, डाॅ. मधुकर, योगेश टाक आदि ने व्याख्यान की समीक्षा एवं शोधपत्र के बिन्दुओं पर चर्चा करते हुये प्रस्तुत व्याख्यान को उच्च कोटि का बताया। अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने आभार ज्ञापन में भक्तिकालीन संतों के अवदान को राष्ट्र की एकता और अखंडता को कायम करनेवाला बताया।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. दूगड़ की प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्ति के अवसर पर समारोह का आयोजन

कर्मरत रहने से ही बढा जा सकता है आगे- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 30 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अपने प्रोफेसर पद से सेवा निवृत्ति के अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुये कहा कि हमेशा कर्म को महत्व देना चाहिये। केवल कर्म ही व्यक्ति को प्रत्येक सफलता तक पहुंचाने में समर्थ होते हैं। उन्होंने इस अवसर पर विश्वविद्यालय को दी गई अपनी सेवाओं का जिक्र करते हुये उन्हें कर्म क्षेत्र में किया गया प्रयोग बताया और कहा कि कर्मरत रहने पर ही वे निरन्तर आगे बढ पाये थे। उन्होंने अपने कर्मस्थल के प्रति निष्ठा व समर्पण की आवश्यकता बताते हुये कहा कि यह सबके लिये आवश्यक है कि वे जहां कार्य करें, उसमें पूरी लगन व समर्पण का भाव अवश्य रखें। इस अवसर पर संस्थान के शोध निदेशक प्रो. अनिल धर, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच, कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुये संस्थान की स्थापना से लेकर अब तक अनवरत दी जा रही प्रो. दूगड़ की सेवाओं की सराहना की तथा कहा कि वे प्रोफेसर पद से सेवानिवृत हो रहे हैं, लेकिन कुलपति के रूप में उनकी सेवाओं का लाभ संस्थान निरन्तर उठाता रहेगा। प्रो. दूगड़ ने इससे पूर्व जैन विश्वभारती में विराजित मुनिश्री जयकुमार एवं अन्य जैन संतों का आशीर्वाद ग्रहण किया एवं उन्हें गोचरी प्रदान की। कार्यक्रम में जैन विश्वभारती के पूर्व अध्यक्ष ताराचंद रामपुरिया, अशोक चिंडालिया, प्रो. आशुतोष प्रधान, प्रवीण बगड़िया, जीवणमल मालू, प्रो. दामोदर शास्त्री, प्रो. बीएल जैन, कनक दूगड़, डाॅ. शांता जैन, डाॅ. वीणा जैन, विजयश्री, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, सोनिका जैन, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. युवराज सिंह खांगारोत, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. विकास शर्मा, डाॅ. अशोक भास्कर, डाॅ. जसबीर सिंह आदि उपस्थित थे।

Thursday, 29 November 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में चलाया जा रहा है प्राकृतिक चिकित्सा का पाठ्यक्रम

छात्र सीख रहे हैं वाष्प स्नान, कटि स्नान, मसाज, रंग चिकित्सा के विविध प्रयोग

लाडनूँ, 29 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के अन्तर्गत एम.ए. के विद्यार्थियों को प्राकृतिक चिकित्सा की विभिन्न विधियां सिखाई जा रही है। विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने बताया कि विभाग में योग के अलावा विद्यार्थियों को प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न आयामों को भी पढ़ाया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा के विशेषज्ञ सहायक आचार्य डाॅ. अशोक भास्कर ने बताया कि पाठ्यक्रम में प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत कक्षा में भाप स्नान, मिट्टी पट्टी, मसाज, रंग चिकित्सा, कटि स्नान, उपवास आदि के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी जाती है। संस्थान में पंचकर्म सहित अन्य उपकरणों की व्यवस्था है। मसाज एक्सपर्ट विद्यार्थी विश्वजीत ने बताया कि मसाज से मांसपेशी एवं जोड़ों के दर्द सर्वाईकल आदि बीमारियां दूर हो जाती है। संस्थान के छात्र एवं छात्रायें योग के द्वारा चिकित्सा की अन्य वैकल्पिक पद्धतियां सीख रहे हैं। योग एवं वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने के संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ का मार्गदर्शन सतत् प्राप्त होता रहता है। सभी विद्यार्थी यहां से शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में अपने कॅरियर के साथ समाज सेवा से जुड़ना चाहते है।

Thursday, 15 November 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत आयोजित खेल सप्ताह का आयोजन


लाडनूँ, 15 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत आयोजित खेल सप्ताह का शुभारम्भ गुरूवार को गोला फेंक प्रतियोगिता में गोला फेंक कर की गई। संस्थान के विताधिकारी आरके जैन ने सर्वप्रथम गोला फेंका और प्रतियोगिताओं का शुभारम्भ किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि सभी विद्यार्थियों को खेलों में अपनी रूचि दिखानी चाहिये। खेल उनके सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। इससे प्रतिस्पर्धा की शक्ति विकसित होती है और शरीरिक व मानसिक विकास भी संभव होता है। संस्थान के खेल सचिव डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि संस्थान में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं में पहले दिन गोला फेंक, डिस्क थ्रो, कैरम, शतरंज व टेबिल टेनिस प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि डिस्क थ्रो में कुल 40 छात्राओं ने भाग लिया, जिनमें से प्रथम स्थान पर कीमती शर्मा, द्वितीय करिश्मा खान व तृतीय स्थान पर ललिता शर्मा रही। गोला फेंक प्रतियोगिता के छात्रा वर्ग में कुल 50 छात्राओं ने हिस्सा लिया, जिनमें से प्रथम सीमा देवी रही। द्वितीय स्थान पर सोनिका व तृतीय पूजा शर्मा रही। छात्र वर्ग में कुल 20 छात्रों ने भाग लिया, जिनमें से प्रथम विश्वजीत, द्वितीय नवीन व तृतीय आमिक रहा।

खेलों से होता है व्यक्तित्व का विकास- कक्कड़

28 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता सप्ताह के समापन पर कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ में कहा कि खेल-कूद से सर्वांगीण विकास संभव होता है। खेलों से जहां शारीरिक क्षमताओं में वृद्धि होती है, वहीं मानसिक व भावनात्मक क्षमतायें भी बलशाली बनती है। विद्यार्थी के व्यक्तित्व का विकास भी खेलों से संभव होता है। उन्होंने प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विजेता और अन्य सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। कार्यक्रम में शोध निदेशक प्रो. अनिल धर, डाॅ. विकास शर्मा, दिव्या राठौड़, मुकुल सारस्वत, रतना चैधरी उपस्थित रहे। आकाश व संजय ने सहयोग प्रदान किया। डाॅ. सरोज राय ने अंत में आभार ज्ञापित किया।

खो-खो में पूजा, कबड्डी में लीला के समूह रहे प्रथम

संस्थान के खेल प्रभारी डाॅ. रवीन्द्र सिंह राठौड़ ने प्रतियोगिताओं के परिणामों की घोषणा करते हुये बताया कि खो-खो प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर पूजा शर्मा व समूह, द्वितीय स्थान पर रिद्धि व समूह तृतीय स्थान पर किरण जुणावा और समूह रहा। कबड्डी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर लीला मण्डा और समूह, द्वितीय स्थान पर सीमा देवी और समूह, तृतीय स्थान पर हेमलता और समूह रहा। 100 मी. दौड़ प्रथम राजू जाट, द्वितीय स्थान रीता, तृतीय शारदा डारा रही। 200 मी. दिव्या पारीक प्रथम, द्वितीय मन्जू कलवानिया, तृतीय स्थान पर अन्तिमा रही। छात्रों में 100 मी. दौड़ प्रथम साकेत, द्वितीय अर्जुन, तृतीय मुक्तो रहे। 200 मी. दौड़ प्रथम अर्जुन, द्वितीय मुक्तो एवं तृतीय साकेत रहा।

बेडमिंटन में राजदीप, शतरंज में दक्षता व कैरम में प्रवीणा रही विजेता

रविन्द्र सिंह ने बताया कि प्रतियोगिताओं में पुरूष बेडमेण्टन में प्रथम राजदीप, द्वितीय साकेत, तृतीय पारस जैन रहे। छात्रा वर्ग शतरंज में प्रथम विजेता दक्षता, द्वितीय कृष्णा, तृतीय मोनालिका रही। कैरम में प्रथम स्थान प्रवीणा कंवर द्वितीय भावना भाटी, तृतीय मन्जू सैनी रही। पुरूष वर्ग में शतरंज प्रथम विपुल, द्वितीय धनराज, तृतीय विश्वजीत रहे। लम्बीकूद छात्रा वर्ग में प्रथम राजू जाट, द्वितीय रेखा परमार, तृतीय राजलक्ष्मी रही। ऊँची कूद में प्रथम राजलक्ष्मी द्वितीय राजू जाट रही। पुरूष वर्ग लम्बीकूद के प्रथम विजेता साकेत द्वितीय अर्जुन, तृतीय मुक्तो रहा। पुरूष वर्ग के ऊँची कूद के विजेता प्रथम सौरभ द्वितीय अर्जुन, तृतीय आनन्द पाल रहे। पुरूष वर्ग में कबड्डी के प्रथम विजेता नवीन सोनी, द्वितीय विजेता अर्जुन और समूह रहा। खेलकूद प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका इन्द्रा राम पूनिया व मुक्ते, तथा मनोज मण्डा ने निभाई। पुरूष वर्ग कैरम में प्रथम विजेता विश्वजीत, द्वितीय नवीन सोनी, तृतीय स्थान पर आमिक रहा। पुरूष वर्ग में टेबल-टेनिस के प्रथम विजेता विक्रम, द्वितीय महेश, तृतीय राजदीप रहे।

Wednesday, 14 November 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में बालदिवस का आयोजन

बालदिवस पर किया नेहरू को याद

लाडनूँ 14 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिवस को बालदिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुये इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच ने बताया कि पं. नेहरू हमेशा भविष्य की ओर देखते थे। इसी कारण उन्हें नई पीढी से बेहद लगाव था। वे चाहते थे कि शिक्षा का प्रसार हो और उच्च शिक्षा के लिये अधिक संख्या में छात्र आगे आयें। प्राचार्य त्रिपाठी ने नेहरू के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुये जेल से अपनी पुत्री इंदिरा को लिखे पत्रों का हवाला देते हुये एक पिता द्वारा अपनी संतान को सही मार्गदर्शन व संस्कार प्रदान किये जाने की मिसाल बताया। व्याख्याता अभिषेक चारण ने नेहरू के राजस्थान दौरे व यहां विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा की ललक से ली गई प्रेरणा के बारे में बताया। चारण ने बताया कि नेहरू ने इसका जिक्र संसद में भी किया था। कार्यक्रम में छात्रा रश्मि बोकड़िया व करिश्मा खान ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार पूरा उपस्थित रहा।

Friday, 2 November 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में दीपावली महोत्सव पर कार्यक्रम का आयोजन

सहिष्णुता व ईमानदारी से बदला जा सकता है जीवन- डाॅ. भटनागर

लाडनूँ 2 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में दीपावली उत्सव के अवसर पर शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राध्यापिकाओं एवं शिक्षकों को सम्बोधित करते हुये डाॅ. मनीष भटनागर ने दीपोत्सव पर्व पर सहिष्णुता एवं ईमानदारी जैसे गुणों को भगवान राम से ग्रहण करने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि अगर इन गुणों को जीवन में उतार लिया जाये तो पूरे समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी जा सकती है। डाॅ. गिरीराज भोजक ने दीवाली पर की जाने वाली लक्ष्मी पूजा और साधना में विधि लक्ष्मियों के बारे में बताया तथा कहा कि उलूक पर सवार लक्ष्मी से प्राप्त धन शुद्ध नहीं होता, लेकिन गजलक्ष्मी पूजन से प्राप्त धन पूरी तरह से सात्विक होता है। उन्होंने दीवाली के अवसर पर गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा दी। डाॅ. सरोज राय ने गणेश, लक्ष्मी व सरस्वती इन तीन देवी-देवताओं की पूजा का रहस्य बताया। डाॅ. भाबाग्रही प्रधान व डाॅ. विष्णु कुमार ने दीपावली के व्यावहारिक पक्ष और सैद्धांतिक पक्ष को व्याख्यायित किया और गृह-कलह को मिटाकर सुख-शांति को लाकर घर-घर में उल्लास व खुशी से त्यौंहार मनाये जाने की आवश्सकता बताई। कार्यक्रम में नीतू जोशी, मनीषा शर्मा व बादू ने भी अपने विचार एवं गीत प्रस्तु किये। कार्यक्रम का संचालन एकजा जोशी ने किया।

Wednesday, 31 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत रैली निकाली व शपथ दिलवाई एवं विभिन्न गतिविधियों का आयोजन


लाडनूँ, 31 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाई के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार मनाये जा रहे सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अन्तर्गत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसके तहत तहसील के ग्राम बाकलिया में एक विशाल जागरूकता रैली का आयोजन वहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के सहयेाग से किया गया। रैली का शुभारम्भ प्रधानाचार्य अर्जुनदेव राणा, विश्वविद्यालय की सहायक आचार्य डाॅ. प्रगति भटनागर व विकास शर्मा के नेतृत्व में किया गया। रैली में भ्रष्टाचार मिटाओ नया भारत बनाओ के नारे को महता देते हुये लोगों में जागृति पैदा की गई। विद्यालय में भ्रष्टाचार विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें एनएसएसकी रश्मि बोकड़िया व सरिता शर्मा ने अपने विचार प्रकट किये। संचालन छात्रा सुनिता ने किया।

भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिये शपथ ग्रहण

इसके अलावा यहां शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाकर छात्राओं एवं समस्त स्टाफ को नये भारत के निर्माण की दिशा में भ्रष्टाचार के उन्मूलन एवं नैतिकता के विस्तार के लिये शपथ दिलवाई गई। डाॅ. प्रगति भटनागर ने सभी शिक्षकों व छात्राओं को भावी जीवन में सभी क्षेत्रों में विशेष जागरूकता रखने के लिये शपथ दिलवाई। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में छात्राओं से हर क्षेत्र में जागरूक रहने का आह्वान करते हुये उन्हें भ्रष्टाचार से दूरी बनाये रखने के लिये प्रेरित किया। समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने कार्यक्रम में नैतिक भ्रष्टाचार को व्याख्यायित किया और उससे बचने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने केन्द्रीय सतर्कता आयोग और उसके कार्यक्रमों के बारे में बताया तथा सतर्कता जागरूकता सप्ताह के सम्बंध में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में संस्थान के सभी प्राध्यापक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

सरदार पटेल के कारण ही सुरक्षित है देश की एकता और अखंडता- प्रो. धर

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में लौह-पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म-जयंती के उपलक्ष में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के शोध-निदेशक प्रो. अनिल धर ने देश की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता को सुरक्षित रखने में सरदार पटेल की भूमिका के बारे में बताया तथा कहा कि पटेल के कारण ही आज देश संघीय ढांचे में ढला हुआ है। विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने सरदार पटेल के अंग्रजी हुकूमत के खिलाफ किये गये प्रयासों एवं आजादी के लिये संघर्ष के बारे में ब्यौरा प्रस्तुत किया तथा कहा कि वे सही मायनों में लौह-पुरूष थे। उन्होंने देश के नवनिर्माण की पृष्ठभूमि तैयार की थी। डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने सरदार पटेल के विचारों के बारे में बताते हुये उनकी उपादेयता एवं प्रसंगिता कि बारे में बताया और कहा कि देश को आज भी उनकी नीतियों और सिद्धांतों के अनुसार चलना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. विकास शर्मा ने किया।

पग-पग पर व्याप्त भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकना जरूरी- स्वामी

लाडनूँ, 1 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाई के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार मनाये जा रहे सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अन्तर्गत तहसील के ग्राम दुजार में ‘‘भ्रष्टाचार मिटाओ, नया भारत बनाओ’’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान के मार्गदर्शन में दुजार स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में अंकित शर्मा के निर्देशन में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान हुये कार्यक्रम में प्रधानाचार्य भंवर लाल स्वामी ने कहा कि भ्रष्टाचार वर्तमान में इस देश में बहुत गहराई से पैठ गया है, जिसे समूल उखाड़ फेंकने के लिये हर नागरिक और बच्चे-बच्चे को जागृत होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का अपने क्षेत्र में ही कार्यरत पटवारी, ग्रामसेवक, नर्स, एएनएम, राशन वितरक आदि से आयेदिन वास्ता पड़ता है और उन्हें भ्रष्टाचार से पग-पग पर रूबरू होना पड़ता है। समाज कार्य विभाग के सहायक आचार्य अंकित शर्मा ने अपने सम्बोधन में भ्रष्टाचार को देश के लिये अभिशाप बताया तथा कहा कि हम सब मिलकर ही इसे मिटा सकते हैं। उन्होेंने बताया कि अगर हम हमेशा जागरूक रहे और अपने आस पास के लोगों को भी जागरूक बनायेंगे तो भ्रष्टाचार का मुकाबला कर पायेंगे।

Tuesday, 30 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में एम.ए. पोलिटीकल साईंस विषय में भी पत्राचार कोर्स शुरू

लाडनूँ, 31 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के तहत अब अन्य विषयों के साथ राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर पाठ्क्रम का लाभ पत्राचार से पढने वाले विद्यार्थी उठा सकेंगे। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान में दूरस्थ शिक्षा के तहत इस सत्र से एम.ए. पोलिटीकल साईंस विषय का संचालन भी शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की बैठक में यह निर्णय पारित किया जाकर जैन विश्वभारती संस्थान को राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर का अध्ययन शुरू करवाने की स्वीकृति जारी की गई है।

जैन विश्वभारती संस्थान का 11वां दीक्षांत समारोह चैन्नई में सफलता पूर्वक आयोजित

एकजुटता से हर चुनौती का सामना संभव- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 30 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि संस्थान का 11वां दीक्षांत समारोह चैन्नई में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। यह एक ऐतिहासिक समारोह रहा, जिसमें अनेक बातें बहुत महत्वपूर्ण थी। इसमें सबसे बड़ी भूमिका संस्थान के स्टाफ की रही, जिन्होंने बहुत ही तन्मयता से समस्त तैयारियों को अंजाम दिया और समारोह को सम्पन्न करवाया। एकजुट होकर काम करने से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। वे यहां विश्वविद्यालय के सेमिनार हाॅल में आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संस्थान के स्टाफ ने प्रत्येक चुनौती को स्वीकार किया है और उसे सफलता पूर्वक सम्पन्न किया है। चाहे वह यूजीसी की टीम का अवसर हो या यूजीसी की 12 बी टीम का आगमन अथवा एक्सपर्ट टीम द्वारा निरीक्षण, सभी में कर्मचारी खरे उतरे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे समक्ष अब एक बड़ी चुनौती और है और वह है राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नेक) की टीम के निरीक्षण की। हम सब को इसमें भी खरा उतरना है। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने दीक्षांत समारोह के लिये विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय के अन्य स्टाफ के लम्बा सफर करके चैन्नई पहुंचने की सराहना की तथा कहा कि पूरी यात्रा एवं समारोह की समस्त व्यवस्थायें सराहनीय रही, चाहे वे वहां रहने-खाने की हो अथवा भ्रमण की हो। इसके लिये जैन विश्वभारती के पूर्व अध्यक्ष डाॅ. धर्मचंद लूंकड़ की उन्होंने मुक्तकंठ से सराहना की। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रो. अनिल धर, प्रो. बीएल जैन, आरके जैन, डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. युवराज सिंह खांगारोत, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, डाॅ. विकास शर्मा, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, दीपाराम खोजा आदि उपस्थित थे।

Wednesday, 24 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का 11वां दीक्षांत समारोह आयोजित

जीवन पथ को आलोकित करने वाला ज्ञान महत्वपूर्ण तत्व है- आचार्य महाश्रमण

चैन्नई, 24 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का 11वां दीक्षांत समारोह चैन्नई के माधवरम में आयोजित किया गया। समारोह वहां चातुर्मास प्रवास काल में विराजित तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में किया गया। आचार्य महाश्रमण संस्थान के तृतीय अनुशास्ता भी हैं। समारोह में संस्थान से उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अनुशास्ता महाश्रमण ने अपने सम्बोधन में कहा कि ज्ञान मनुष्य के जीवन के लिये आवश्यक तत्वों में से एक है। यह हमारे जीवनपथ को आलोकित करने वाला पवित्रतम और सर्वोपरि तत्व है। व्यक्ति को अपने आप में ज्ञान का विकास करना चाहिये तथा इसके साथ ही उसका प्रसार भी यथासंभव करना ही चाहिये। मनुष्य का कर्तव्य है कि वह अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करे, इसके लिये ज्ञान दिये का काम करता है। इसी प्रकार प्राचीन साहित्य ज्ञान को असी या तलवार भी कहा गया है यानि जो अज्ञान को काट सके वह तलवार होता है ज्ञान। उन्होंने जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय को ज्ञान के साथ आचार व संस्कारों की शिक्षा भी देता है, क्योंकि ज्ञान की निष्पत्ति आचार के साथ ही होती है।

आर्थिक शुचिता से ही बढेगा देश आगे

उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में विनय और नैतिकता अपनाने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि विनय विद्या का आभूषण होता है। जीवन में विद्या प्राप्ति के साथ ज्ञान वृद्धि के लिये निरन्तर उड़ान भरते रहना चाहिये। हमेशा अपने व्यवहार में नैतिकता रहनी आवश्यक है। नैतिकता का सबसे बड़ा अंग है आर्थिक शुचिता। जो पैसा न्याय नीति और नैतिकता से अर्जित किया जाता है, वह शुद्ध होता है और समाज का भला करने वाला होता है। राजनीति हो या शिक्षा का सभी क्षेत्रों में आर्थिक शुचिता को महत्व दिया जाना आवश्यक है, तभी हमारा देश आगे बढ पायेगा। इस संतों की भूमि में धर्म, नैतिकता व अध्यात्म का प्रभाव बढना ही चाहिये।

उपाधि केवल पड़ाव है मंजिल नहीं

इस अवसर पर साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने शिक्षा को एक पथ बताया तथा कहा कि यह केवल गंतव्य ही नहीं है। विद्यार्थी उपाधि प्राप्त करके एक पड़ाव तक पहुंचे हैं, लेकिन उनकी मंजिल यह नहीं है। शिक्षा के माध्यम से प्रसिद्धि, ऐश्वर्य, पद और सता तक प्राप्त की जा सकती है, लेकिन इनसे आगे के क्षेत्रों की तलाश को खत्म नहीं किया जाना चाहिये। जीवन को ऊपर उठाने की राह को खोलने के लिये कुछ मौलिक किया जाना चाहिये। शिक्षा से जीवन के रूपांतरण की ज्योति निकलनी चाहिये। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल थे और अध्यक्षता संस्थान की कुलाधिपति सावित्री जिन्दल ने की। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, कुल सचिव विनोद कुमार कक्कड़, जैन विश्वभारती के पूर्व अध्यक्ष रमेश बोहरा, डाॅ. धर्मचंद लूंकड़, अरविन्द संचेती, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्र सिंह शेखावत, युवराज सिंह खांगारोत, अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में इस वर्ष के शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां, एमए, एमएससी उतीर्ण विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र, उपाधियां व मैडल प्रदान किये गये।

Monday, 22 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) को मिला दर्शन के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान

लाडनूँ, 22 अक्टूबर 2018। अखिल भारतीय दर्शन परिषद ने दर्शन एवं दर्शन की विभिन्न शाखाओं के अन्तर्गत प्रसार, विकास एवं शोध सम्बंधी अद्वितीय कार्य करने के उपलक्ष में जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) वर्ष 2018 का डाॅ. श्रीप्रकाश दुबे स्मृति राष्ट्रीय दर्शन पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह राष्ट्रीय पुरस्कार संस्थान को लखनउ में आयोजित दर्शन परिषद के 63वें अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में प्रदान किया गया। इस समारोह में राज्यसभा सांसद डाॅ. अशोक वाजपेयी के मुख्य आतिथ्य एवं लखनउ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। समारोह में जैन विश्वभारती संस्थान के प्रतिनिधि के रूप में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने ग्रहण किया। डाॅ. श्रीप्रकाश दुबे राष्ट्रीय दर्शन पुरस्कार के संयोजक पंकज दुबे ने इस अवसर पर बताया कि दर्शन जगत के ख्यातनाम व्यक्तित्व एसपी दुबे की स्मृति में दिया जाता है। जो शिक्षण संस्था दर्शन के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करती है, उन्हें इससे नवाजा जाता है। यह दर्शन क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार है। राष्ट्रीय पुरस्कार निर्णायक समिति ने दर्शन विषय के उन्नयन के लिये जैन विश्वभारती संस्थान को 2018 के पुरस्कार के लिये चयन किया है। अखिल भारतीय दर्शन परिषद का दर्शन के क्षेत्र में यह विशेष पुरस्कार इससे पूर्व वाराणसी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित केन्द्रीय विश्वविद्यालय को दिया जा चुका है।

ऋषि दिखाते थे समाज को दिशा

अखिल भारतीय दर्शन परिषद के 63वें अधिवेशन के शुभारम्भ पर मुख्य अतिथि सांसद डॉ. अशोक बाजपेयी ने कहा कि पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का अलग महत्व है। प्राचीन परंपरा से ही इसमें अध्यात्म का बड़ा योगदान रहा है। हमारे ऋषि जंगलों में जाकर तपस्यायें करते थे। इसके बाद वे समाज को दिशा दिखाते थे कि क्या किया जाना चाहिए। धर्म, संस्कृति और नैतिकता एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनको अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में कट्टरता नहीं है। लचीलापन होने की वजह से समय-समय पर होने वाले अच्छे बदलाव इसका हिस्सा बने हैं। हमारी संस्कृति अक्षुण्ण है। धर्म, नैतिकता एवं सस्कृति विषय पर आधारित इस तीन दिवसीय अधिवेशन में वक्ताओं ने विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के पहले दिन शुभारंभ के अवसर पर पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। इनमें अखिल भारतीय दर्शन आजीवन परिलब्धि पुरस्कार प्रो. राजेंद्र स्वरूप भटनागर को, आचार्य राम प्रसाद त्रिपाठी स्मृति पुरस्कार-प्रो.नरेंद्र नाथ पांडेय को, स्वामी प्रणवानंद दर्शन पुरस्कार-स्व. प्रो.सत्यपाल गौतम को, श्री स्वचेंद्र सिंह नागर स्मृति पुरस्कार-डॉ.श्रीकांत सिंह को, प्रो. सोहनराज दर्शन पुरस्कार-डॉ. रमेशचंद्र वमा को, वैद्य गणपतराम गुजरात पुरस्कार-डॉ. रेणुबाला को, स्वामी दयानंद निबंध पुरस्कार-मनोज कुमार मिश्र को, कमला देवी जैन स्मृति सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार-डॉ. आलोक को तथा अखिल भारतीय युवा दार्शनिक पुरस्कार-डॉ. पवन कुमार यादव को दिया गया।

Saturday, 20 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में प्रसार भाषण माला में समावेशी शिक्षा में मूल्य शिक्षा के योगदान पर व्याख्यान


विद्यार्थियों की व्यक्तिगत समस्या को समझ कर करें पाठ-योजना के प्रयोग- प्रो. शर्मा

लाडनूँ, 20.अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में प्रसार भाषण माला के अन्तर्गत इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) नई दिल्ली के शिक्षा संकाय के प्रो. महेश चन्द्र शर्मा ने ‘‘समावेशी शिक्षा में आईसीटी, मूल्यांकन, मूल्य शिक्षा का योगदान’’ विषय पर अपने सम्बोधन में कहा कि एक अच्छे शिक्षक को अपने विद्यार्थियों में चारित्रिक मूल्यों का विकास करना चाहिये तथा मूल्य, ज्ञान, संस्कृति, व्यवहार, आत्म-प्रेरणा तथा व्यक्तिगत समस्या को समझते हुये उदाहरण प्रस्तुत करने चाहिये। शिक्षक को अपने विद्यार्थी का मित्र, पथ-प्रदर्शक, निर्देशक की भमिका निभाने में सक्षम होना चाहिये। अगर शिक्षक इन सब पर ध्यान देगा तो विद्यार्थी उसकी कक्षा में निरन्तर सहभागी बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक को समावेशी शिक्षा में विद्यार्थियों की व्यक्तिगत समस्याओं को समझ कर अपनी पाठयोजना में आईसीटी का सशक्त रूप में प्रयोग करना चाहिये। नैतिक मूल्यों को शिक्षक को अपने विषय में समाहित कर लेना चाहिये, तभी विद्यार्थियों में इन नैतिक मूल्यों को विकसित किया जा सकेगा। विषयों से जुड़े हुये मूल्य आधारित उदाहरण प्रस्तुत करके विद्यार्थी के समक्ष अगर पाठ को रखा जायेगा तो विद्यार्थी मूल्यों को आसानी से ग्रहण कर पायेगा। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बनवारी लाल जैन ने प्रारम्भ में व्याख्यानकर्ता का परिचय प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभा सिंह, डाॅ. विष्णु कुमार तथा अन्य संकाय सदस्य व छात्राध्यापिकायें उपस्थि रही।

Wednesday, 17 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा से बी.ए. तथा एम.ए. करने आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 तक

लाडनूँ, 17 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अन्तर्गत बी.ए. तथा एम.ए. कोर्स पत्राचार से करने के इच्छुक अभ्यर्थी 20 अक्टूबर तक अपने आवेदन कर सकते हैं। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि दूरस्थ शिक्षा से घर बैठे स्नातक व स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिये जैन विश्वभारती संस्थान में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अन्तर्गत अंतिम तिथि 20 अक्टूुबर तक इच्छुक आवेदक अपने आवेदन पत्र जमा करवा कर प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं।

Monday, 15 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में गरबा नृत्य का शानदार आयोजन

गरबा में होती है नारी शक्ति की भावनायें अभिव्यक्त- कक्कड़

लाडनूँ, 15 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय एवं कैरियर काउंसलिंग सेल के संयुक्त तत्वावधान में नवरात्रा के अवसर पर संस्थान परिसर में डांडिया नृत्य (गरबा) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर भर की महिलाओं की भीड़ उमड़ी। कनक दूगड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस गरबा नृत्य कार्यक्रम में अंजम बैद मुख्य अतिथि थी। कुलसचिव कक्कड़ ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को हम स्वयं उस पर अमल करके ही संभाल कर रख सकते हैं। नवरात्रा का पर्व पवित्रता के साथ महिला शक्ति का समर्थक पर्व है, जिसमें नारी को शक्ति का रूप मान कर उसकी पूजा किये जाने का विधान है। गरबा नृत्य में महिलायें उन्मुक्त रूप से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं, लेकिन मर्यादित स्वरूप में ही। यही इस पर्व की विशेषता है। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने गरबा को नारी-गौरव का प्रतीक बताया तथा कहा कि गरबा में नृत्य की कला के साथ विभिन्न भाव-भंगिमायें नारी के महत्व को प्रतिपादित करती है। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुये संस्थान में हर साल होने वाले गरबा कार्यक्रम के बारे में बताया। कैरियर काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच ने कहा कि डांडिया नृत्य के माध्यम सेे यहां अध्ययनरत छात्राओं के अलावा उनकी माताओं व अभिभावकों का भी संस्थान के साथ गहरा जुड़ाव होता है। विभिन्न पारम्परिक वेशभूषा में सजी-धजी छात्राओं के सभी दस समूहों के गरबा नाच के अलावा कार्यक्रम में समागत अभिभावकों ने भी अपने गरबा नृत्य का प्रस्तुतिकरण सामूहिक रूप से किया।

दस समूहों ने किया गरबा नृत्य

कार्यक्रम में गरबा में भाग लेने वाली छात्राओं के 10 समूह गठित किये गये। इन समूहों द्वारा बारी-बारी से गरबा नृत्यों का प्रदर्शन किया, जिनके आधार पर निर्णायकगणों ने मूल्यांकन करके विजेता घोषित किये। इनमें प्रथम स्थान पर मुस्कान एवं समूह रहा। इस समूह में महिमा, योगिता, सृष्टि, कीमती, स्नेहा, मुस्कान, रश्मि व मानसी शामिल थी। द्वितीय स्थान पर ताम्बी एवं समूह रहा, जिसमें ताम्बी, ज्योति, मधु, जयश्री, नीतू, सरिता, विमला व कीर्ति शामिल थी। तृतीय स्थान पर दीप्ति एवं समूह रहा, जिसमें छात्रा दीप्ति, वसुंधरा, तब्बसुम, यास्मीन, निलोफर, किरण, रोहाना व कोमल शामिल थी। विजेता रहे सभी समूहों की छात्राओं को कार्यक्रम के अंत में पुरस्कार प्रदान किये गये। इन छात्राओं के अलावा अभिभावकों में से गरबा खेलने वालों को विशिष्ट पुरस्कार भी प्रदान किये गये, जिनमें सुजानगढ के सुरेश, सोनिका जैन व रश्मि बोकड़िया को पुरस्कृत किया गया।

Saturday, 6 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शिक्षा के साथ-साथ लड़कियां सीखती है घुड़सवारी भी

घोड़े पर बैठ कर दौड़ लगाती है यहां हर शनिवार काॅलेज की लड़कियां

लाडनूँ, 6 अक्टूबर 2018। लड़कियां और घुड़सवारी, यह सुनने में थोड़ा सा अजीब लग सकता होगा, लेकिन यहां आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में हर शनिवार को लड़कियां घोड़े पर बैठ कर दौड़ लगाती है। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में परिसर के अन्दर शनिवार को लड़कियां घाडे़ पर सवार होने के लिये अपनी बारी का इंतजार करती है। शैक्षेणेत्तर गतिविधियों के अन्तर्गत गठित यहां रानी लक्ष्मी बाई क्लब में शामिल लड़कियों को घुड़सवारी सिखाई जाती है। यहां घुड़सवारी में रूचि रखने वाली लड़कियों के लिये घुड़सवारी का प्रशिक्षण निःशुल्क रखा गया है। कुशल प्रशिक्षक हर शनिवार को अपना घोड़ा लेकर यहां आता है और इन लड़कियों को घोड़े पर बैठने से लेकर लगाम थामना, उसे चलाना और दौड़ाना सभी कुछ सिखाया जाता है। इस समय इस महाविद्यालय में पढने वाली कुल 20 लड़कियां रानी लक्ष्मीबाई क्लब में शामिल होकर घुड़सवारी सीख रही है।

काफी पसंद कर रही है लड़कियां

प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में छात्राओं के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुये संचालित की जाने वाली विविध गतिविधियों में घुड़सवारी को काफी पसंद किया जा रहा है। इस गतिविधि को महाविद्यालय में सतत जारी रखा जायेगा। छात्रायें इसके लिये काफी उत्सुक है, लेकिन एक समूह को अच्छी तरह से तैयार करने के बाद दूसरे समूह को भी तैयार किया जायेगा। उन्होंने बताया कि छात्राओं को यहां घुड़सवारी का प्रशिक्षक प्रदान करने के लिये प्रसिद्ध घुड़सवार अशोक भार्गव की सेवायें ली जा रही है। महाविद्यालय में रानी लक्ष्मीबाई क्लब का प्रभारी अपूर्वा घोड़ावत व योगेश टाक को बनाया गया है। ये दोनों अपनी देखरेख में लड़कियों को घुड़सवारी सिखाने के लिये कार्य कर रहे हैं। घोड़े को दौड़ाने के लिये जैन विश्वभारती संस्थान का परिसर पर्याप्त है। यहां बहुत लम्बी-चैड़ी खुली जगह होने से प्रशिक्षक और प्रशिक्षणार्थी लड़कियों किसी को भी इसमें परेशानी नहीं होती है।

जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में अन्तर्महाविद्यालय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन

अन्तर्महाविद्यालयी सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में काॅमर्स संकाय की छात्रायें रही विजेता

लाडनूँ, 6 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में विवेकानन्द क्लब के तत्वावधान में अन्तर्महाविद्यालय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन शनिवार को किया गया। प्रतियोगिता में महाविद्यालय की विज्ञान, वाणिज्य एवं कला तीनों वर्गों की छात्राओं ने अपनी-अपनी टीम बनाकर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में चार टीमें गठित की गई, जिनमें काॅमर्स की छात्राओं की सी-टीम विजेता रही। उप विजेता के रूप में डी-टीम की विज्ञान संकाय की छात्रायें रहीं। चिजेता व उप विजेता रही दोनों समूहों की समस्त छात्राओं को प्राचार्य आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने पुरस्कृत किया। इस प्रतियोगिता का आयोजन, संचालन आदि सभी छात्राओं द्वारा ही किया गया। विवेकानन्द क्लब के प्रभारी अभिषेक चारण के निर्देशन में क्लब की छात्रा सचिव कंचन स्वामी एवं सरिता शर्मा ने सभी टीमों से सवाल पूछे तथा मेहनाज बानो ने संचालन किया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि महाविद्यालय में हर शनिवार को नियमित रूप से विभिन्न गैर शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन किया जाता है, जिसके लिये अलग-अलग रूचि की छात्राओं के लिये अलग-अलग क्लब बनाये गये हैं। इन क्लबों द्वारा अनेक प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहता है। इससे छात्राओं में हुनर पनपता है और वे अपने रूचि के विषय में पारंगत हो जाती है। कार्यक्रम में अभिषेक चारण, डाॅ. प्रगति भटनागर, डाॅ. बलवीर चारण, डाॅ. सोमवीर सांगवान, कमल मोदी, सोनिका जैन, रत्ना चैधरी, मुकुल सारस्वत, मधुकर दाधीच, अपूर्वा घोड़ावत आदि भी उपस्थित रहे।

Friday, 5 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ कार्यक्रम का आयोजन

सबका साथ सबका विकास भावना से कार्य करना आवश्यक- प्रो. जैन

लाडनूँ, 5 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में ‘‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कहा कि सबका साथ सबका विकास की भावना से कार्य करने पर ही देश को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है। हम सभी देशवासियों को देश की एकता कायम रखने और उसे महान राष्ट्र के रूप में प्रतिस्थापित करने की दिशा में सदैव सजग रह कर कर्मशील रहना चाहिये। उन्होंने कहा कि जब तक हम केवल अर्जन में विश्वास रखेंगे तब तक देश का चिंतन नहीं कर सकते हैं, इसके लिये विसर्जन की भावना आनी आवश्यक है। आत्म-प्रशंसा की भावना के बजाये हर व्यक्ति को राष्ट्र-सेवा को सर्वोपरि रखना चाहिये। डाॅ. विष्णु कुमार ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुये कहा कि उनके सिद्धांतों पर चल कर हम अपने देश को श्रेष्ठ भारत के रूप में स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने उच्च या निम्न वर्ग की सोच को बदलने और हर नागरिक को एक समान भाव से माने जाने को बल देने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. आभा सिंह, डाॅ. गिरधारी लाल शर्मा, मुकुल सारस्वत, देवीलाल, दिव्या राठौड़ आदि एवं सभी छात्राध्यापिकायें उपस्थित थी।

Tuesday, 2 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान में महात्मा गांधी के 150वें जयंती दिवस पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन

जरूरतों और आय के संतुलन से ही दूर होगी आर्थिक असमानता- कक्कड़

लाडनूँ, 2 अक्टूबर 2018। महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष के अवसर पर जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। संस्थान के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में यहां आचार्य महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने आवश्यकता और आय के संतुलन को आवश्यक बताते हुये कहा कि महात्मा गांधी का यह मुख्य सिद्धांत था कि अपनी जरूरत के लिये आमदनी करनी चाहिये, लेकिन अपनी आमदनी के लिये जरूरतों को बढाना नहीं चाहिये। उन्होंने देश की आबादी के एक प्रतिशत के पास आय का एकत्रिकरण और 75 प्रतिशत आबादी की आवश्यकतायें तक पूरी नहीं हो पाने को अनुचित व असंतुलन बताते हुये कहा कि इससे जो आम नागरिक की प्रति व्यक्ति आय का औसत निकाला जाता है, वह कभी सही नहीं कहा जा सकता है। महात्मा गांधी ने इसी कारण जरूरतों के हिसाब से आय को बढाने की आवश्यकता बताई, ताकि आय का वितरण आम आदमी तक पहुंचना समान रूप से संभव हो सके। कक्कड़ ने यह भी बताया कि महात्मा गांधी ने अहम के त्याग को महत्व दिया था, क्योंकि अहम के कारण ही हिंसा का जन्म होता है। अहम व्यक्तियों को परस्पर एक दूसरे से दूर करता है और हिंसा का पैदा करता है। कोई भी व्यक्ति कोई पद ग्रहण करता है तो उसे अहम को छोड़ कर पद की गरिमा को बनाये रखना चाहिये। इससे छोटी-मोटी समस्यायें तो स्वतः ही दूर हो जाती है।

गांधी प्रतिपादित मूल्यों को अपनाने की जरूरत

कार्यक्रम में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने महात्मा गांधी के जीवन के अनेक अछूते प्रसंगों का उल्लेख किया तथा उनके द्वारा प्रतिपादित जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत भारत सरकार ने स्वच्छ भारत का नारा देकर महात्मा गांधी के आदर्शों को क्रियान्वित करना शुरू किया है और इस मुहिम में पूरा देश खुले में शौच मुक्त होने जा रहा है और पूर्ण स्वच्छता की ओर संकल्पबद्ध होकर आगे बढ रहे हैं। शोध निदेशक प्रो. अनिल धर ने महात्मा गांधी के बताये मूल्यों पर चलने की आवश्यकता बताई। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने बताया कि गांधी ने सर्वांगीण शिक्षा पर जोर दिया था तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास की आवश्यकता बताई। योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने गांधी के आदर्शाें पर चलते हुये दलितों से दूरियां घटाने पर बल दिया। अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत ने गांधी के सत्य व अहिंसा के रास्ते में समस्त समस्याओं के समाधान का मार्ग बताया और वंचितों के उत्थान पर ध्यान देने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में मुमुक्षु सारिका, छात्र पारस जैन व मेहनाज बानो ने भी अपने विचार प्रकट किये। डाॅ. प्रगति भटनागर ने अंत में आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रो. रेखा तिवाड़ी, आरके जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, डाॅ. योगेश जैन, डाॅ. विकास शर्मा, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. अशेाक भास्कर, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, अभिषेक चारण, सोनिका जैन आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगलकिशोर दाधीच ने किया।

रैली निकाल कर दिया जागरूकता का संदेश

इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की दोनों इकाइयों की स्वयंसेविकाओं ने जन-जागरूकता रैली का आयेाजन किया। रैली में छात्राओं ने विविध नारे लिखी तख्तियां लेकर एवं नारे लगाते हुये महात्मा गांधी के संदेशों को आम जन तक पहुंचाया। रैली को मंगलवार को प्रातः संस्थान परिसर से आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। इस अवसर पर प्रो. अनिल धर, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, डाॅ. प्रगति भटनागर, सोनिका जैन आदि उपस्थित रही। एनएसएस ने गत 15 सिसतम्बर से एक पखवाड़े का आयेाजन करके विविध कार्यक्रमों व प्रतियागिताओं का आयोजन किया। इनमें सम्पूर्ण परिसर की साफ-सफाई, स्वच्छमा से सम्बद्ध प्रतियागिताओं में निबंध लेखन, गायन व पोस्टर प्रतियोगिता शामिल थी। मंगलवार को गांधी जयंती के अवसर पर विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। निबंध प्रतियोगिता में प्रथम सरिता शर्मा, द्वितीय महिमा प्रजापत व तृतीय नर्मदा धेतरवाल रही। पोस्टर प्रतियोगिता में मनोज दुसाद प्रथम एवं बीनू द्वितीय रही। गायन में अर्चना शर्मा प्रथम, निलोफर व प्रियंका सोनी द्वितीय तथा सरिता शर्मा तृतीय रही। एनएसएस की समस्त छात्राओं को स्वच्छता की डाॅक्यमेंटरी फिल्म दिखाई गई। मंगलवार को समस्त विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये गये। इस पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने की। मुख्य अतिथि जगदीश यायावर थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. जुगल किशोर दाधीच व डाॅ. प्रगति भटनागर ने किया।

प्रतियेागिताओं का आयोजन

संस्थान में महात्मा गांधी जयंती के 150वें जयंती उत्सव के तत्वावधान में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें भजन प्रतियोगिता में 28 प्रतिभागी छात्राओं ने भाग लिया, जिनमें से प्रथम स्थान पर पूजा कुमारी रही। द्वितीय स्थान पर मुमुक्षु आरती व तृतीय स्थान पर मुमुक्षु सारिका रही। नाटक प्रतियोगिता में सम्भागी रहे 20 प्रतिभागियों में से रश्मि एवं समूह ने प्रथम स्थान और नन्दिनी एवं समूह ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इन दोनों प्रतियोगिताओं में निर्णाक डाॅ. पुष्पा मिश्रा व डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा थे। पोस्टर प्रतियोगिता में संस्थान की कुल 23 विद्यार्थी प्रतिभागी रही, जिनमें से प्रथम स्थान पर मनोज, द्वितीय किरण एवं तृतीय रीतिका दाधीच व प्रीति फुलफगर रही। श्लोगन प्रतियोगिता में 13 प्रतिभागियों में से पहले स्थान पर यास्मीन बानो, द्वितीय पारस जैन व तृतीय स्थान पर रूचिका दाधीच व रीतिका दाधीच रही। इन प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में अपूर्वा व मुकुल सारस्वत रही।

छात्राओं व शिक्षकों ने मिल कर की सफाई

संस्थान के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विभाग के विभिन्न परिसरों की साफ-सफाई का विभाग के शिक्षकों डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. गिरधारी लाल शर्मा, दिव्या राठौड़, मुकुल सारस्वत आदि ने छात्राओं के साथ मिलकर सफाई-कार्य में अपना श्रमदान किया।

Monday, 1 October 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

सेना की बदौलत ही सुरक्षित हैं हम और देश की सीमायें- प्रो. जैन

लाडनूँ, 1 अक्टूबर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में सर्जिकल स्ट्राइक दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाकर जवानों की कीर्ति का स्मरण किया गया तथा छात्राओं को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा प्रदान की गई। विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कार्यक्रम में बताया कि भारतीय सेना ने आतंकवादियों के सीमा-पार स्थित ठिकानों को नष्ट करने के लिये सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक को गोपनीय तरीके से केवल चुनिन्दा लोगों तक सीमित जानकारी के साथ किया गया आकस्मिक हमले के रूप में क्रियान्वित किया जाता है, जिसमेें आंतकियों के छिपे ठिकानों को लक्ष्य बनाया जाता है। इसमें किसी भी नागारिक या अन्य किन्हीं लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है। प्रो. जैन ने बताया कि हम सभी नागरिगण एवं देश की सीमायें सैनिकों की देशभक्ति के कारण ही सुरक्षित हैं। हमें भी उनके शहीद हो जाने की स्थिति में उनके परिवार जनों की सहायता व सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिये। कार्यक्रम में सभी छात्राध्यापिकायें एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

Wednesday, 26 September 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के पदाधिकारियों ने किया जैविभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष व मंत्री का स्वागत समारोह आयोजित

जैन विश्वभारती के नवनिर्वाचित अध्यक्ष व मंत्री ने किया दायित्व ग्रहण

लाडनूँ 26 सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती के नवनिर्वाचित अध्यक्ष, मुख्य ट्रस्टी व अन्य पदाधिकाारियों के बुधवार को यहां दायित्व ग्रहण के लिये आने पर यहां उनका भावभीना स्वागत किया गया। जैन विश्वभारती के पहली पट्टी गेट पर जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ व स्टाफ तथा निवर्तमान अध्यक्ष रमेश बोहरा आदि ने उन्हें तिलक करके एवं साफे पहना कर स्वागत किया। उन्हें ढोल-नगाड़े के साथ जैन विश्वभारती में प्रवेश करवाया गया। सभी नये पदाधिकारियों ने जैन विश्वभारती में स्थित आचार्य तुलसी स्मारक पर दर्शन व पूजा-अर्चना की तथा मुनि चमपालाल भाईजी महाराज की समाधि पर दर्शन किये। इसके बाद वे सभी यहां भिक्षु विहार में विराजित मुनिश्री जयकुमार के दर्शनों के लिये पहुंचे तथा उनसे सभी ने आर्शीवाद प्राप्त किया। इसके बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष अरविन्द संचेती व अन्य पदाधिकारियों परिसर में स्थित 108 फुट ऊंचे जैन-ध्वज को रिमोट से बटन दबा कर फहराया। इसके बाद उन्होंने सचिवालय में पहुंच कर अपना दायित्व ग्रहण किया। नवनिर्वाचित अध्यक्ष अरविन्द संचेती के साथ मुख्य ट्रस्टी मनोज लूणिया, उपाध्यक्ष अरूण संचेती, मंत्री गौरव जैन, सहमंत्री अशोक चिंडालिया व जहवन मल मालू, कार्यकारिणी सदस्य मूलचंद बैद व उम्मेद कोचर थे। इन सबका स्वागत कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, निवर्तमान अध्यक्ष रमेश बोहरा, निवर्तमान मुख्य ट्रस्टी भागचंद बरडिया, प्रो. बीएल जैन, प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, डाॅ. प्रद्युम्र सिंह शेखावत, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. जसबीर सिंह, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान आदि उपस्थित थे।

संगठित टीम के सहयोग से देंगे संस्था को नई उंचाईयां- संचेती

लाडनूँ, 27 सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अरविन्द संचेती ने कहा है कि तेरापंथ धर्मसंघ के महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का नाम हम गौरव के साथ ले सकते हैं। आचार्य तुलसी ने इसे समाज की कामधेनु कहा था। आचार्य महाप्रज्ञ व आचार्य महाश्रमण ने भी इस संस्थान को महत्वपूर्ण और जनमानस में चरित्र-निर्माण का संस्थान कहा था। तीन आचार्यों का आशीर्वाद साथ लिये यह संस्थान निरन्तर उन्नति कर रहा है। जैन विश्व भारती का अध्यक्ष पद संभालने से इस संस्थान से जुड़ने का सुअवसर भी मिला है। इसका वे पूरा सदुपयोग करेंगे। उन्होंने यहां आचार्य महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में संस्थान द्वारा उनके दायित्व ग्रहण के पश्चात आयोजित सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। समारेाह के मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने संस्थान को निरन्तर सहयोग की भावना अभिव्यक्त की तथा कहा कि उन्हें संगठित टीम का साथ मिला है, इन सबके निरन्तर सहयोग से वे अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन कर पायेंगे। निवर्तमान अध्यक्ष रमेश बोहरा ने संस्था की नई टीम को बधाई देते हुये कहा कि सामने आचार्य महाप्रज्ञ का रजत जयंती वर्ष और जैन विश्व भारती का स्वर्ण जयंती वर्ष की समस्त जिम्मेदारी इस टीम पर है।

नई सोच व क्षमतावान है नई सोच

समारोह की अध्यक्षता करते हुये कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने जैन विश्व भारती की स्थापना से लेकर वर्तमान स्वरूप तक के सफर का विवरण प्रस्तुत करते हुये स्थापना और विकास के कार्य में सहयोगी रहे सभी जनों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि समय बदलने से विकास की संभावनाओं में परिवर्तन आया है। मातृसंस्था जैन विश्व भारती का सतत सहयोग संस्थान को मिलता रहा है। आचार्यों ने भी कहा था कि समाज और मातृसंस्था को संस्थान पर बराबर ध्यान देते रहना चाहिये। उन्होंने पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र चैरड़िया, डाॅ. धर्मचंद लूंकड़ व रमेश बोहरा का उल्लेख उनके कार्यों व विशेषताओं का हवाला देते हुये संस्था की प्रगति में दिये गये योगदान के लिये किया तथा मुख्य ट्रस्टी भागचंद बरड़िया का योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिये चिंतन की मूक भूमिका के लिये उल्लेख किया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों में अध्यक्ष अरविन्द संचेती को क्षमतावान व नई सोच का व्यक्तित्व बताया। मंत्री गौरव जैन को आज तक का सबसे युवा मंत्री बताते हुये कहा कि उनका बड़े कारोबारियों से उच्च सम्पर्क हैं तथा नवीन तकनीक को सबसे पहले आजमाने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने प्रधान ट्रस्टी मनोज लूणियां सहित पूरी टीम को श्रेष्ठ संयोग व क्षमतावान बताया तथा कहा कि इनसे संस्था को बल व विकास मिलेगा, संस्था नई उंचाइयों तक पहुंच पायेगी। उन्होंने बताया कि जैन विश्व भारती की स्थापना के 50 वर्ष इनके कार्यकाल में होने जा रहे हैं, तो इनकी जिम्मेदारियां अधिक बढ गई हैं।

बेहिचक सुझाव दें लाडनूँवासी

नवनिर्वाचित प्रधान ट्रस्टी मनोज लूणियां ने कहा कि समाज और गुरू ने उन पर जो विश्वास किया है, उसे वे कायम रखेंगे। उन्होंने लाडनूँवासियों से संस्था के हित में बेहिचक सुझाव देने की अपील की तथा कहा कि वे उन पर अमल करने में कोई संकोच नहीं करेंगे। उन्होंने जैन विश्व भारती एवं जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) को एक-दूसरे का पूरक बताया और कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्थान जो काम कर रहा है, उसके कारण कहीं भी इसका नाम लेने पर भी गौरव की अनुभूति होती है। नव निर्वाचित मंत्री गौरव जैन ने कार्यकर्ता के रूप में काम करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम में विमल विद्या विहार सीनियर सैकेंडरी स्कूल की प्राचार्य वनिता धर, नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष अरूण संचेती, मुमुक्षु प्रेक्षा व मुमुक्षु सरिता ने भी अपने विचार व्यक्त किये। प्रारम्भ में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया।

इन्होंने किया स्वागत-सम्मान

समारोह में नवनिर्वाचित टीम के अध्यक्ष अरविन्द संचेती, उपाध्यक्ष अरूण संचेती, मंत्री गौरव जैन, सहमंत्री अरूण चिंडालिया, जीवन मल मालू, कार्यकारिणी सदस्य मूलचंद बैद व उम्मेद कोचर एवं निवर्तमान मुख्य ट्रस्टी भागचंद बरड़िया का शाॅल, स्मृति चिह्न व पुष्प गुच्छ प्रदान करके सम्मान किया गया। नई टीम को सम्मान करने वालों में निवर्तमान अध्यक्ष रमेश बोहरा, कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, ओसवाल पंचायत के प्रमुख सरपंच नरेन्द्र सिंह भूतोड़िया, विजय सिंह कोठारी, शांतिलाल बैद, व्यापार मंडल के अध्यक्ष हनुमान मल जांगिड़, कांग्रेस अध्यक्ष रामनिवास पटेल, भारत विकास परिषद के संरक्षक रमेश सिंह राठौड़, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के मंत्री राजेश खटेड़, ओसवाल सभा के अध्यक्ष छतरसिंह बैद, सैनी समाज के अध्यक्ष मुरली मनोहर टाक, मंत्री महावीर प्रसाद तंवर, बृजेश माहेश्वरी, अभय नारायण शर्मा, अरविन्द नाहर आदि शामिल रहे। अंत में विजयश्री ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन दूरस्थ शिक्षा की सहायक निदेशक नुपूर जैन ने किया।

Monday, 24 September 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में ‘‘भारतीय संस्कृति का भविष्य’’ विषयक व्याख्यान आयोजित

विश्व के अस्तित्व की सुरक्षा भारतीय संस्कृति से ही संभव- डाॅ. गुप्ता

लाडनूँ 24, सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की महादेवलाल सरावगी अनेकांत शोध पीठ के तत्वावधान में आचार्य तुलसी श्रुत-संवर्द्धिनी व्याख्यानमाला के अन्तर्गत सोमवार को यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में ‘‘भारतीय संस्कृति का भविष्य’’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुनिश्री जयकुमार के सान्निध्य में आयोजित इस व्याख्यान कार्यक्रम में व्याख्यानकर्ता आरएसएस के उत्तर क्षेत्र संघचालक डाॅ. बजरंगलाल गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति से ही यह देश सुरक्षित है। विश्व के भविष्य के लिये भारत का रहना आवश्यक है और भारत के लिये भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना होगा। भारत का प्राण तत्व इसकी संस्कृति ही है। केवल भौतिक रूप से अस्तित्व अलग है, लेकिन असली पहचान संस्कृति से ही होती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के लिये कहा कि यह पुरातन है, लेकिन नित्य नूतन भी है। यह सनातन, शाश्वत, चिरन्तन है और निरन्तर विकासमान, नैतिक मूल्यों का प्रवाह है। यहां हर युग में मनीषी व आचार्य होते आये हैं और इसे सदैव नवीनता प्रदान करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज की मुख्य समस्या है कि संवेदना लुप्त होती जा रही है। इस पर ध्यान देना आवश्यक है। डाॅ. गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति को मातृत्व व देवत्व के रूप में लिया जाता है, जबकि पश्चिमी संस्कृति में प्रकृति को दासी स्वरूप में लेकर उसका उपयोग करते हैं। हम प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि दोहन करते हैं, लेकिन इसमें देने व लेने का क्रम नहीं टूटने देते। यहां गीता के अनुुसार सृष्टि चक्र, यज्ञ चक्र व प्रकृति चक्र की अवधारणा का पालन किया जाता है। उन्होंने भारत के जैविक परिवार, सर्वमंगलकारी चिंतन, विविधता में एकता, धर्म व नैतिकता आदि के बारे में विस्तार से बताते हुये भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।

देश को बदलने के लिये नौजवान आगे आयें-सांसद मदनलाल सैनी

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सांसद मदनलाल सैनी ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय संस्कृति अनेक विशेषताओं वाली संस्कृति है। यहां सामाजिक दायित्वों के बारे में व्यक्ति जिम्मेदार होता है और उस व्यक्ति के लिये समाज खड़ा हो जाता है। केवल अपनी ही सोचने वालों के बारे में समाज भी नहीं सोचा करता है। मंदिर में झुकने पर उस व्यक्ति का अहं तिरोहित हो जाता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि आज देश को तोड़ने वाली शक्तियां सक्रिय है। आतंकवाद को पैसा और पनाह देने वालों से सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने नौजवानों से आह्वान किया कि वे ही इस देश को बदल सकते हैं। उन्होंने शिक्षा को डिग्री के लिये नहीं बल्कि देश की सेवा की शिक्षा भी जरूरी बताई। सैनी ने गाय के विनाश पर भी चिंता जताई तथा कहा किजैन समाज ने गाय की रक्षा का संकल्प लिया है और बहुत बड़ा काम हाथ में लिया है जो सराहनीय है। उन्होंने आचार्य तुलसी प्रणीत अणुव्रतों का उल्लेख करते हुये कहा कि उनके द्वारा दिखाई गई दिशा को अगर थोड़ा सा भी ग्रहण किया जावे तो जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।

भारतीय संस्कृति पुरातन है, पर सनातन है

व्याख्यानमाला को सान्निध्य प्रदान करते हुये मुनिश्री जयकुमार ने कहा कि हमारी संस्कृति अतीत, वर्तामान व अनागत तीनों को समाहित रखती है। यह संस्कृति कभी समाप्त नहीं हो सकती। इसमें परिवर्तन, परिवर्द्धन व परिशोधन की संभावना हमेशा रहती है। जहां अनाग्रह पूर्वक परिवर्तन की प्रक्रिया चलती है, उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता है। भारत में चाहे कोई युग रहा हो, यहां के संस्कार कभी समाप्त नहीं हो पाये हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति पुरातन है, लेकिन सनातन है। हमारी संस्कृति मिलन की, साथ बैठने की, साथ चिंतन करने की और साथ में निर्णय लेने की संस्कृति है।

जहां कर्मवाद और पुरूषार्थवाद हो वहां निराशा नहीं आती

संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार धर्म है। धर्म शाश्वत है इसलिये भारतीय संस्कृति भी शाश्वत है। इस संस्कृति में सुव्यवस्था है। चाहे आश्रमवाद हो, कर्मवाद व पुनर्जन्मवाद हो, यह व्यवस्था निरन्तर संस्कृति को पोषण देती है और विकसित करती है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति आशावाद से ओतप्रोत है। इसमें जो कर्मवाद और पुरूषार्थवाद की धारा बहती है, उससे निराशावाद कभी नहीं आ सकता है। हम दूसरों को आत्मसात करने की परम्परा रखते हैं, हम दूसरों के विकास में बाधक नहीं बनते हैं। हम हर परिवर्तन को समावेश करके आगे बढ रहे हैं। हम प्रेय के बजाये श्रेय को महत्व देते हैं। त्याग, धैर्य और संतुलन जिस संस्कृति में समाविष्ट हो, वह संस्कृति कभी काल-कवलित नहीं हो सकती है। प्रारम्भ में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने व्याख्यानमाला की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में जैन विश्वभारती के मुख्य ट्रस्टी भागचंद बरड़िया व जीवनमल मालू विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचस्थ थे। इस अवसर पर प्रभारी डाॅ. योगेश कुमार जैन, रजिस्ट्रार विनोद कुमार कक्कड़, उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, शोध निदेशक प्रो. अनिल धर, प्रो. दामोदर शास्त्री, प्रो. बीएल जैन, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, डाॅ. गोविन्द सारस्वत, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, हरीश शर्मा, अशोक सुराणा, सागरमल नाहटा आदि उपस्थित थे।

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में एनएसएस दिवस मनाया

सेवा से जीवन में ताजगी आती है- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 24 सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की दोनों इकाईयों के संयुक्त तत्वावधान में एनएसएस दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि सेवा की भावना होने से ही जीवन की सफलता कही जा सकती है। सेवा हमेशा निःस्वार्थ होती है, जिसमें एक हाथ से सेवा करें तो दूसरे हाथ को आभास तक नहीं हो। सेवा का ढिंढोरा पीटना तो सेवा नहीं बल्कि केवल प्रदर्शन होता है। सेवा संवेदना के बिना संभव नहीं है। संवेदना से किसी के प्रति करूणा भाव जागृत होता है और सेवा के लिये व्यक्ति तत्पर हो जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन का महत्वपूर्ण गुण गतिशीलता सेवा से आता है। इससे जीवन में झरने की भांति ताजगी और पारदर्शिता रहती है। जिस प्रकार गतिहीनता के कारण ठहरा हुआ पानी सड़ जाता है, वहीं व्यक्ति गति के बिना किसी महत्व का नहीं रहता है। डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने कहा कि छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से जीवन में सेवा भाव को सहज रूप से विकसित किया जा सकता है। सेवाभाव के जीवन में आने से व्यक्ति सरल, सहज, उदार, करूणामयी और सामाजिक बन जाता है। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की एनएसएस इकाई की समन्वयक डाॅ. प्रगति भटनागर ने एनएसएस के स्थापना के समय से लेकर वर्तमान तक की गतिविधियों आदि पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में स्वयं सेविका माधुरी सोनी ने राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्य, कार्यक्रमों एवं सेवा कार्यों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी प्रस्तुत की। प्रारम्भ में सरिता शर्मा ने एनएसएस गीत प्रस्तुत किया।

एकल गायन प्रतियोगिता का आयोजन

इस अवसर पर एकल गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रथम स्थान पर अर्चना शर्मा रही। द्वितीय स्थान पर सरिता शर्मा और तृतीय स्थान पर निलोफर व प्रियंका सोनी रही। कार्यक्रम में कमल कुमार मोदी, रत्ना चैधरी, सोमवीर सांगवान, डाॅ. बलवीर सिंह, योगेश टाक, अपूर्वा घोड़ावत आदि उपस्थित थे।

Sunday, 23 September 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

सीखने की शैली ही नवीन ज्ञान की रचना को संभव बनाती है- प्रो. ज्ञानानी

लाडनूँ 23 सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारम्भ सत्र में शिक्षण शैली के सम्बंध में बोलते हुये मुख्य अतिथि प्रो. टीसी ज्ञानानी ने कहा है कि प्राच्य कक्षा शिक्षण विधि में केवल व्याख्यान व प्रवचन ही शामिल थे, लेकिन अब इसमें गतिविधि व प्रबंधन के सिद्धांत भी शामिल कर लिये गये हैं। शिक्षण की विभिन्न विधियों में एक नयी संकल्पना रचनावाद को लेकर आई है। इसमें विद्यार्थी द्वारा निरन्तर सीखने, अपने ज्ञान में वृद्धि करने, उसमें विस्तार व प्रसार करने तथा संशोधन करने की प्रक्रिया लगातार जारी रखता है, कक्षा प्रबंधन के अन्तर्गत विद्यार्थी के सीखने की शैली को समझने की जरूरत है, क्योंकि सीखने की शैली ही नवीन ज्ञान की रचना संभव बनाती है। बच्चों के ज्ञानात्मक व्यवहार में निरन्तर अंतर आया है। स्मार्ट फोन जैसे आविष्कारों ने शिक्षण शँैली को बदला है। कक्षा के वातावरण का प्रबंध छात्रों के सीखने पर पूरा प्रभाव डालता है।

प्रभावी शिक्षण के लिये प्रभावी संचार जरूरी

सत्र की अध्यक्षता करते हुये रजिस्ट्रार विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा कि शिक्षण की तकनीक निरन्तर बदलती रहती है। इस प्रकार का बदलाव हर प्रबंधन एवं कार्य में आता है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि हम इस बदलाव में अपने आप को कैसे ढालें। उन्होंने मनोवैज्ञानिक रूप से विद्यार्थियों में आने वाले अन्तर को समझ कर उनमें ज्ञान का संचार करने पर जोर दिया तथा कहा कि जब तक हमारे द्वारा सिखाई गई बात विद्यार्थी के मन-मस्तिष्क तक नहीं समाती तो वह सही संख्या नहीं कहा जा सकता। शिक्षा का प्रस्तुतिकरण एवं उसका छात्र में ग्रहण दोनों ही प्रभावी होने आवयश्क है और ऐसी पद्धति ही शिक्षण की श्रेष्ठ प्रणाली कही जा सकती है। विशिष्ट अतिथि प्रो. गोपीनाथ शर्मा ने संगोष्ठी में कहा कि जहां हमें ज्ञान से अपने असाचरण में बदलाव करना चाहिये, वैसे ही हमें अपने आचरण, व्यवहार और शब्द प्रयोग से विद्यार्थी में सिखाने का काम भी करना चाहिये।

सूचना और ज्ञान के अंतर को समझना आवश्यक

विशिष्ट अतिथि प्रो. संतोष मित्तल ने अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा के लिये सम्प्रेषण महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे समय, परिस्थितियां बदलती है, वैसे-वैसे आवश्यकतायें बदलती है और आवश्यकतायें बदलने से शिक्षा के तरीकों में भी बदलाव आते हैं। हमें हमेशा शिक्षण को प्रभावी बनाने का प्रयास करना चाहिये। विषय, टॉपिक, परिवेश, विश्वविद्यालय के उद्देश्य, सीखने वाले छात्र आदि के आधार पर हमारे द्वारा शिक्षण कार्य करवाने की विधि में बदलाव आता है। उन्होंने शिक्षण की सुविधा पद्धति, तुलनात्मक पद्धति, सहकारी पद्धति आदि के बारे में बताया तथा कहा कि शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिये हमें खुद भी निरन्तर पढना होगा और अपनी समीक्षा भी करते रहना होगा। उन्होंने सूचना और ज्ञान के अंतर को भी समझाया और कहा कि दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है। ज्ञान की क्रियान्विति व्यवहार में होनी आवश्यक है। सत्र के प्रारम्भ में शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने अतिथियों का परिचय करवाया। डाॅ. मनीष भटनागर ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्देश्यो ंपर प्रकाश डाला। डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. गिरधारीलाल, डाॅ. सरोज राय व डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। प्रारम्भ में छात्राओं ने मंगलाचरण व स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अंत में डाॅ. भाबाग्रही प्रधान ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अमिता जैन ने किया। संगोष्ठी में डाॅ. प्रद्युम्र सिंह शेखावत, डाॅ. सावित्री शर्मा, डाॅ. संतोष शर्मा, शिवानी भेाजक, मनीष चैधरी, भावना पारीक, प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, डाॅ. आभासिंह, डाॅ. जुगलल किशोर दाधीच, जेपी सिंह आदि राज्य भर से आये शिक्षक उपस्थित थे।

तकनीकी ज्ञान के साथ संस्कारों का बीज-वपन आवश्यक- प्रो. ऋजुप्रज्ञा

24 सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुये प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि वर्तमान में उस शिक्षणशैली की आवश्यकता है, जो विद्यार्थियों में ज्ञानवृद्धि के साथ संस्कारों के बीज भी बो सके। उन्होंने शिक्षण में तकनीक के प्रयेाग को वर्तमान की आवश्यकता बताते हुये कहा कि शिक्षक को तकनीकी संसाधनों पर अपनी निर्भरता कायम नहीं करनी चाहिये। उन्होंने कहा कि शिक्षण शैली वह बेहतरीन है, जिसमंे कक्षा में सरसता बनी रहें, विद्यार्थियों को पढने में आनन्द आये और वे पढाई को बोझ या बोर करने वाला नहीं समझे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. दामोदर शास्त्री ने कहा कि विश्व का कोई भी मूल्य अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि उसका उपयेाग हम किस रूप में कर रहे हैं और परिस्थितियां कैसी है, इन पर निर्भर करता है। उन्होंने शिक्षण के साथ क्रियात्मकता जरूरी बताते हुये कहा कि क्रियाकलाप शिक्षण को प्रभावी बना देते हैं। अभिज्ञान शाकुन्तलम, गीता आदि ग्रंथों मे आये सरस प्रसंगों को शिक्षणशैली में शामिल करके शिक्षण को रूचिकर, सरस व प्रभावी बनाया जा सकता है। संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन की सराहना की तथा कहा कि समस्त शिक्षकों एवं छात्राध्यापिकाओं को इस संगोष्ठी का लाभ मिलेगा तथा इससे शिक्षण शैली में व्यापक सुधार की गुंजाइश बनेगी। संगोष्ठी में राजस्थान व अन्य प्रांतों के विभिन्न महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों से शिक्षकों ने भाग लिया; संगोष्ठी के सम्भागी शिवम मिश्रा व रवीन्द्र मारू ने जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) और राष्ट्रीय संगोष्ठछी की सराहना की। कार्यक्रम का प्रारम्भ मंगलाचरण से किया गया। अतिथियों के स्वागत में मोनिका व समूह ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का परिचय डाॅ. गिरीराज भोजक ने प्रस्तुत किया। डाॅ. भाबाग्रही प्रधान ने राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपोर्ट पेश की। अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा ने किया। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. आभा सिंह, मुकुल सारस्वत, देवीलाल कुमावत, दिव्याराठौड़ आदि उपस्थित थे।