Saturday, 30 June 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के विद्यार्थियों ने बनाये 5 विश्व रिकाॅर्ड

लाडनूँ, 30 जुन 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) ने जहां योग व जीवन विज्ञान की शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तिमान कायम किये हैं, वहीं संस्थान के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के 4 विद्यार्थियों ने एक साथ 5 विश्व रिकाॅर्ड बनाकर मिसाल कायम करते हुये संस्थान की कीर्ति को चार चांद लगाये हैं। इनके द्वारा कायम विश्व रिकाॅर्ड को ‘‘गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकाॅर्ड’’ में दर्ज किया गया है, जिसे प्रमाण पत्र इन्हें जारी कर दिये गये हैं। ये चारों विद्यार्थी यहां दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से योग एवं जीवन विज्ञान विषय में स्नातकोततर पाठ्यक्रम कर रहे हैं। इनमें से लक्ष्मणगढ (सीकर) के पास के एक छोटे से गांव के रहने वाले जयपाल प्रजापत ने लगातार योगाभ्यास करते हुये दो विश्व रिकाॅर्ड कायम किये। जयपाल ने लगातार 2 घंटे 21 मिनट तक शीर्षासन करके विश्व रिकाॅर्ड बनाया। यह प्रदर्शन उसने छतीसगढ राज्य के भिलाई में किया था। इसके बाद जयपाल ने फिर गुजरात प्रांत के अहमदाबाद में लगातार 3 घंटा 33 मिनट तक मयूर चाल का प्रदर्शन करके दूसरा विश्व रिकाॅर्ड बनाया। इसी प्रकार संस्थान के दूसरे विद्यार्थी जोधपुर के रहने वाले ललित भारती ने योग मुद्रा में विश्व रिकाॅर्ड बनाया, जिन्होंने लगातार 1 घंटा 35 मिनट तक खेचरी मुद्रा का प्रदर्शन किया। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की दूरस्थ शिक्षा की मेड़ता रोड रहने वाली छात्रा जानकी प्रजापति ने भी योगासन में विश्व रिकाॅर्ड कायम किया, उसने लगातार 45 मिनट तक हनुमानासन में रहने का प्रदर्शन सफलता पूर्वक किया था। इसी प्रकार चैमूं के रहने वाले रामरस चैधरी ने तेजगति से लगातार एक सौ सूर्य नमस्कारों का प्रदर्शन करके फास्टेस्ट हंड्रेड सूर्यनमस्कार योगा का रिकाॅर्ड कायम किया है। चैधरी ने ये एक सौ सूर्य नमस्कार योग मात्र 7 मिनट 32 सैकंड में पूरे किये थे। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने इन तीनों विद्यार्थियों को चार विश्व रिकाॅर्ड कायम करने के लिये बधाई व शुभकामनायें प्रेषित की है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि इन विद्यार्थियों को आगामी दिनों में विश्वविद्यालय में समारोह आयोजित किया जाकर सम्मानित किया जायेगा।

Sunday, 24 June 2018

जैन विश्वभारती संस्थान द्वारा उपखंड स्तरीय योग समारोह का आयोजन

योग जीवन को बदलने वाली क्रिया - मुनि जयकुमार

लाडनूँ 21 जून 2018। विश्व योग दिवस के अवसर पर गुरूवार को जैन विश्व भारती स्थित अन्तर्राष्ट्रीय प्रेक्षा केन्द्र भवन में उपखंड स्तरीय योग समारोह का आयोजन जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा किया गया, जिसमें योग की विभिन्न क्रियायें, आसन, ध्यान व प्राणायाम आदि का सामुहिक अभ्यास किया गया। जैन विश्वभारती संस्थान, उपखंड प्रशासन एवं जैन विश्व भारती के संयुक्त तत्वावधान में एवं जैन मुनि जयकुमार के सान्निय में आयोजित इस योग समारोह की अध्यक्षता संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने की तथा मुख्य अतिथि विधायक मनोहर सिंह थे। मुनिश्री जयकुमार ने समारोह को सम्बोधित करते हुये कहा कि योग जीवन को बदलने वाली प्रक्रिया है। ध्यान व योग-साधना नियमित किये जाने पर ही उसके परिणाम सामने आते हैं तथा इसके सतत् अभ्यास से शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक शक्तियों का विकास भी संभव हो पाता है।
योग से हाती है चित्त की यात्रा
संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि योग जहां शरीरिक स्वास्थ्य का लाभ देता है, वहीं योग से मन एवं चित्त को भी साधा जा सकता है। इससे चित्त की यात्रा भी संभव होती है। उन्होंने योग से शरीर, मन और चित्त की यात्रा का वर्णन प्रस्तुत किया तथा कहा कि नियमित योगाभ्यास से चित्त की गहराइयों तक असर होता है और जो बदलाव आते हैं, वे स्थाई और अनुकरणीय बन जाते हैं। विधायक मनोहर सिंह ने इस अवसर पर योग को बढावा देने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि हर व्यक्ति को योग अपनाना चाहिये। उपखंड अधिकारी रामसिंह राजावत ने योग को विश्व स्तर पर मिली मान्यता को भारतीय संस्कृति की विजय बताया तथा कहा कि योग दिवस पर विश्व के लगभग सभी देशों के नागरिकगण योगाभ्यास में जुटे हुये हैं तथा योग की महत्ता के बारे में चर्चायें कर रहे हैं। संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अंत में आभार ज्ञापित करते हुये कहा कि योग मानव मात्र के लिये लाभदायक है, इसे किसी धर्म-सम्प्रदाय की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

योगासन व यौगिक क्रियाओं का अभ्यास
योग समारोह में संथान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने सभी सम्भागियों को यौगिक क्रियायें, योगासन, ध्यान, प्राणायाम आदि के अभ्यास करवाये। छात्रा ताम्बी दाधीच ने सबके सम्मुख सभी क्रियाओं का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर तहसीलदार आदूराम मेघवाल, ब्लाॅक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी श्याम सिंह चैहान, आयुर्वेद अधिकारी डाॅ. जेपी मिश्रा, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, चांद कपूर सेठी, लूणकरण शर्मा, सुशील पीपलवा, रमेश सिंह राठौड़, गिरधर राजपुरोहित, ललित वर्मा, नीतेश माथुर, राजेन्द्र माथुर, अंजना शर्मा, हनुमान मल जांगिड़ तथा क्षेत्र के सरकारी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी एवं नागरिकगण ने सामुहिक योगाभ्यास किया।

Thursday, 31 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग प्रदर्शन को यूजीसी ने लिया अपनी वेबसाईट पर

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग प्रदर्शन को यूजीसी ने लिया अपनी वेबसाईट पर

लाडनूँ, 31 मई 2018। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपनी वेब साईट के होम पेज पर जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा करवाये गये योगाभ्यास को महत्व दिया है। यूजीसी ने अपनी वेब साईट डब्लूडब्लूडब्लू डाॅट यूजीसी डाॅट एसी डाॅट इन(www.ugc.ac.in) के होमपेज पर दी गई स्लाइड में इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योगाभ्यास के योग-प्रदर्शन का फोटो अपलोड किया है। यह इस संस्थान के लिये गौरव समझा जा रहा है कि यूजीसी ने इसे इतना महत्व प्रदान किया है। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शिक्षित-प्रशिक्षित विद्यार्थी देश-विदेश में योग और धर्म व दर्शन का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं तथा विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में उच्च पदों पर योग-शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जिनमें पुलिस व सेना भी शामिल है। गौरतलब है कि जैन विश्वभारती संस्थान देश की संस्कृति, प्राच्य विद्याओं, धर्म व दर्शन, प्राच्य भाषा, योग व जीवन विज्ञान, अहिंसा एवं शाति आदि के अध्ययन व शोध लिये समर्पित मिशन के रूप में संचालित किया जा रहा है। राजस्थान पुलिस के पूर्व महानिदेशक डाॅ. मनोज भट्ट ने भी योग को अपना विषय चुनते हुये यहां से अपनी शोध सम्पन्न करके पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।

Wednesday, 30 May 2018

ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के लिए मंगल भावना एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित

समन्वय, व्यावहारिकता व सहनशीलता से मिलती है सफलता- कक्कड़

लाडनूँ, 30 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कॅरियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में संचालित ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के लिए प्रमाण पत्र वितरण समारोह एवं शिक्षा विभाग के तत्वावधान में मंगलभावना समारोह का संयुक्त आयोजन किया गया। बुधवार को यहां सेमिनार हाॅल में आयोजित इस कार्यक्रम में समर केम्प में आयोजित विभिन्न शाॅर्ट टर्म प्रोग्राम के प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया तथा शिक्षा विभाग की अनुसंधान पत्रिका ‘‘हंस वाहिनी’’ शैक्षित चिंतन का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा कि जीवन में समन्वय, व्यावहारिकता और सहनशीलता मूल्यवान गुण होते हैं और जीवन में सफलता के लिए इनकी आवश्यकता रहती है। फ्रेंड सर्किल का विस्तार के साथ उनके साथ नेटवर्किंग भी आवश्यक है। रिलेशन मेंटेन रखने के लिए लगातार संवाद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि समर कैम्प से नया सीखने को मिलता है, जिसमें उम्र का कोई प्रतिबंध नहीं है। इनमें सबसे छोटी उम्र के और वयोवृद्ध भी भाग ले रहे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग की बीएड छात्राओं की शिक्षा पूर्ण होने पर टीम वर्क से कार्य करने एवं सदैव अच्छे आइडियाज को ग्रहण करने और बुरे आईडियाज को उपेक्षित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि समाज में अधिकतम स्वीकार्यता का निर्माण करना चाहिए। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) केवल डिग्री कार्यक्रम का संचालन ही नहीं रकता बल्कि सम्पूर्ण समुदाय को जोड़ने का करता है। यह एक ऐसा विद्या केन्द्र है, जहां अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों व चरित्र की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि ये मूल्य जीवन के हर पड़ाव में साथ निभाते हैं। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कहा कि बिना मेहनत के सफलता नहीं मिल सकती है। डिग्रियों के साथ कौशल भी जरूरी होता है। श्रमनिष्ठा एवं कर्तव्यनिष्ठा से जीवन में आगे बढा जा सकता है। उन्होंने समर केम्प के बारे में कहा कि इसमें रूचि व क्षमता के अनुरूप अपना विकास कर पाने में व्यक्ति समर्थ होता है। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग की छात्राध्यापिकाओं धर्मशिखा सेन व प्रीति ने अपने अनुभव प्रस्तुत किये, वहीं समर केम्प की हेमलता शर्मा, टीना सेन, सोनिया इंदौरिया, ऋत्विक दुबे, प्रियंका स्वामी, कृष्णा अग्रवाल आदि ने भी अपने अनुभव साझा किये। उपरजिस्ट्रार डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने प्रारम्भ में स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन कॅरियर काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने किया।

Saturday, 26 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की सम्पर्क कक्षाओं का मंगल भावना समारोह आयोजित

समस्याओं से संघर्ष करें, पीठ न मोड़ें- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 26 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अन्तर्गत योग एवं जीवन विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की एक महिने की अवधि की सम्पर्क कक्षाओं के समापन पर यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में मंगल भावना समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों को यहां जो शिक्षा, मर्यादायें, नैतिक मूल्य सीखें हैं, उनका प्रसार वे जहां कहीं भी रहें अवश्य करें। उन्होंने जीवन में आने वाली समस्याओं व बाधाओं से हमेशा संघर्ष करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में कभी हार नहीं मानना चाहिए, बल्कि हर समस्या से लड़ कर उसका मुकाबला करते रहें। पीठ दिखाना कभी उचित नहीं होता। प्रो. त्रिपाठी ने योग की आराधना व साधना को दीपक की तरह से स्वयं जलकर दूसरों को रोशन करने की आवश्यकता बताई। समारोह के मुख्य अतिथि संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने इस अवसर पर गुरू गोविन्द सिंह पर आधारित एक पंजाबी गीत सुनाया और कहा कि यहां के हर विद्यार्थी में ऊर्जा का निरन्तर संचार रहे। समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, नुपूर जैन, डाॅ. अशोक भास्कर, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच थे। सभी अतिथियों को विद्यार्थियों ने श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तकें सम्मान-स्वरूप भेंट की।

सराहनीय रही सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

समारोह में रेखा, ने राजस्थानी गीत ‘‘ पिया आवो तो म्है मनड़ै री बात करल्यां.......’’ पर नृत्य प्रस्तुत किया। श्वेता कंवर ने लौंग और इलायची सम्बंधी प्रणय गीत पर पंजाबी नृत्य पेश किया, जिसे सबने खूब सराहा। सरिता रैवाड़ ने राजस्थानी घूमर गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर सबको मोहित किया। सुमन, प्रेम कंवर, राजीव, राहुल स्वामी ने गीत प्रस्तुत किये। सुनिता सारण, विनीता अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में गुरू वंदन व प्रेरणादायक विचार रखे। कार्यक्रम में पंकज भटनागर, हरिगोपाल, आशा पारीक, निकिता, प्रगति, पारूल, अंकिता आदि एवं सभी विद्यार्थी उपस्थित थे।

Friday, 25 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

यौन उत्पीड़न की घटनाओं के प्रति जागरूक रहें, हिचकिचायें नहीं- डाॅ. विश्नोई


लाडनूँ, 25 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में यौन उत्पीड़न, कानूनी अधिकार एवं न्यायिक संरक्षण विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। सिविल न्यायाधीश एवं प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडनायक (कनिष्ठ वर्ग) डाॅ. पवन कुमार विश्नोई ने कहा कि विधायिका ने बहुत सारे कानून बनाये हैं, लेकिन हर व्यक्ति उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं रखता, इसलिए विधिक साक्षरता आवश्यक है। उन्होंने पोक्सो कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे अपने साथ घटित किसी भी घटना के बारे में बताने से हिचकिचाते हैं, लेकिन अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार व हरकतों को देखकर उसका आभास लगाना चाहिए और उनके प्यार से पूछना चाहिए। अगर किसी बच्चे के साथ लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्हें नहीं रोका जाता है तो वे बड़े अपराध से जुड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी अश्लील साहित्य या ऐसी कोई वस्तु, शरीर का कोई अंग लैंगिक आशय से दिखाता है या इलेट्रोनिक उपकरणों से पीछा करता है तो वह यौन उत्पीड़न है और ऐसा किसी बच्चे के साथ करने पर वह बाल यौन उत्पीड़न होता है। उन्होंने वहां मौजूद विद्यार्थियों से कहा कि वे सदैव जागरूक रहें और कानून की जानकारी सबको प्रदान करें व कानून का उपयोग भी करें।

सोच बदलें, आवाज उठायें

सहायक लोक अभियोजक आनन्द व्यास ने बताया कि संविधान सबको मौलिक अधिकार देता है और न्यायपालिका उन अधिकारों का संरक्षण करती है। पूरे देश में यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ रही है, ये पिछले 10-15 सालों से अधिक है, क्योंकि अभिभावकों ने अपने बच्चों की उपेक्षा शुरू कर दी। जरूरी यह है कि बच्चों को खुलकर बताने का माहौल प्रदान करें। समय बदल रहा है और इसके साथ हमें भी बदलने की जरूरत है। आप अपने परिवार से इसकी शुरूआत करें, तो समाज तक बात पहुंचेगी और पिफर जिले व राष्ट्र में बदलाव आयेगा। सोच बदलें और सहन करने का आदत बदलें। जब तक पीड़ित स्वयं लड़ने के लिऐ तैयार नहीं होंगे तब तक न्याय नहीं मिलेगा तथा कोर्ट व कानून कुछ नहीं कर पाएंगे। कहीं भी गलत हो रहा है तो आंखें बंद करके नहीं निकलें, बल्कि सजग रह कर आवाज उठायें। यौन उत्पीड़न रोकने का सबसे बड़ा जिम्मा स्वयं पर ही होता है। उन्होंने बिना सहमति, इच्छा के विरूद्ध लैंगिक कृत्य करना, प्रयास करना या उकसाना, पीछा करना आदि सभी यौन उत्पीड़न बताया तथा कहा कि यह किसी भी आॅफिस, प्राईवेट क्षेत्र सभी जगह हो सकता है। उन्होंने छोटी हरकतों को महिलाओं द्वारा नहीं बताने व उनकी उपेक्षा करने से कृत्य करने वाला का हौसला बढ जाता है और वहबड़ा अपराध भी कारित कर देता है। इसलिए आवाज उठाने की हिम्मत करें, इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी।

नैतिक मूल्यों की शिक्षा आवश्यक

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अंत में अपने सम्बोधन में कहा कि अगर नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जावे तो इन समस्याओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने संयुक्त परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें यौन शोषण व अपराध संभव नहीं होते। बिरादरी की व्यवस्था में वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम, घरेलु नौकरों आदि की जरूरतें खत्म हो जाती है। उन्होंने नैतिक मूल्यों की शिक्षा को स्वीकार करना जरूरी बताया तथा कहा कि जीवन की अधिकांश मुश्किलों को इससे समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने किया। इस अवसर पर बार संघ के पूर्व अध्यक्ष चेतन सिंह शेखावत, छोगाराम बुरड़क, न्यायिक कर्मचारी कपिल व अजीज खां आदि मौजूद थे।

Tuesday, 22 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में : नृत्य, कंप्यूटर, योग, स्पोकन इंगलिश आदि का प्रशिक्षण

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में 337 प्रशिक्षणार्थी लाभान्वित


लाडनूँ, 22 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में कैरियर काउंसलिंग सेल के अन्तर्गत संचालित की जा रही ग्रीष्मकालीन कक्षाओं में शहर के 337 प्रशिक्षणार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों से लाभान्वित हो रहे हैं। काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने इन समर कक्षाओं का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि सेल के तहत अभिरूचि एवं व्यावसायिक कौशल की दृष्टि से तैयार किऐ गये कुल 10 समर प्रोग्रामों में से 8 प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं। इनमें इंटीरियर डिजाईन एंड डेकोरशन, हेयर एंड स्किन केयर, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, स्पोकन इंगलिश, योगा प्रशिक्षण, मार्शल आट्र्स, डांस, स्पोर्ट्स के पाठ्यक्रमों में ये प्रशिक्षणार्थी नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। डाॅ. दाधीच ने बताया कि जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कॅरियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में हर वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय का सदुपयोग करने के लिऐ तैयार शाॅर्ट टर्म प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं, जिनमें इस क्षेत्र के युवक-युवतियां बड़ी संख्या में लाभान्वित हो रहे हैं। रामनारायण गेणा ने बताया कि विषय विशेषज्ञ डाॅ. अशोक भास्कर, नीतू सुथार, नुपूर जैन, सोमवीर सागवान, महेश शर्मा, ताम्बी दाधीच, कमलेश जगवानी और रितू द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

Monday, 21 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आतंकवाद विरोधी दिवस पर शपथ दिलवाई

संविधान के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने वालों पर नियंत्रण आवश्यक- कक्कड़


लाडनूँ, 21 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा है कि देश का सम्पूर्ण ताना-बाना हमारे संविधान के अन्तर्गत निहित है। इस ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का कार्य ही आतंकवाद है। देश कानून या संविधान के दायरे में ही कार्य करता है, अगर उसी को छिन्न-भिन्न कर दिया जाता है तो फिर कोई नियंत्रण ही नहीं रह पायेगा। वे यहां राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने देश के हर नागरिक के लिए सजग व सर्तक रहना आवश्यक बताते हुऐ कहा कि बस या ट्रेन से सफर करने पर किसी भी लावारिश वस्तु या सामान होने पर तत्काल उसकी सूचना पुलिस को दें। जागरूकता हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है, हमें केवल सीसी टीवी कैमरों के भरोसे नहीं रहना चाहिऐ, बल्कि अपनी स्वयं की भूमिका अवश्य समझनी और निभानी चाहिऐ। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि केवल सैनिक ही आतंकवाद से निपटते रहें, यह नहीं होकर हर नागरिक को अपना कर्तव्य समझना होगा और अपने स्तर पर आतंकवाद से निपटने और उसके विरोध में भूमिका तय करनी होगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ को आतंकवाद का डटकर विरोध करने, सामाजिक सद्भाव व सूझबूझ कायम रखने, मानवीय मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की शपथ दिलवाई गई। कार्यक्रम में आर.के. जैन, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. युवाराज सिंह खंगारोत, मोहन सियोल, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. गोविन्द सारस्वत, प्रो. बीएल जैन, डाॅ. जसबीर सिंह, रमेशदान चारण आदि उपस्थित थे। इससे पूर्व शिक्षा विभाग में भी आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया गया तथा समस्त छात्राध्यापिकाओं एवं स्टाफ को भी शपथ दिलवाई गई। इस अवसर पर बीएड की छात्राओं अंजू, प्रीति स्वामी, भव्या ने आतंकवाद दिवस मनाए जाने के कारण, आतंकवाद के दुष्परिणामों एवं आतंकवाद से निपटने के उपायों के बारे में बताया। कुलसचिव विनोद कुमार कककड़ ने संविधान की रक्षा को आवश्यक बताया तथा संविधान विरोधी हरकतों से निपटना आवश्यक बताया। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने आतंकवाद को पनाह देने वालों को गलत बताया तथा कहा कि आतंकवादी किसी के नहीं होते, ये समस्त मानव जीवन के लिऐ खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने आतंकवादियों के बारे में जानकारी तत्काल पुलिस को देने की जरूरत बताई।

Wednesday, 16 May 2018

देश का अनूठा विश्वविद्यालय, जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) जहां हर चीज अलहदा है

वृद्धों व साधुओं को शिक्षा, योग व जीवन विज्ञान से व्यक्तित्व विकास, जीवन मूल्यों व मानव कल्याण को प्राथमिकता, संस्कार व कॅरियर निर्माण को बनाया शिक्षा के साथ आवश्यक

लाडनूँ, 16 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) पूरे देश में एक अनोखा विश्वविद्यालय कहा जा सकता है। यहां अन्य विश्वविद्यालयों से बिलकुल अलग माहौल है, जहां अनुशासन, चरित्र, शांति और सुरम्यता का वास मिलेगा। विद्यार्थियों में कहीं कोई उच्छृंखलता, असौम्यता या आवेश देखने को नहीं मिलेगा। सभी बिल्कुल शांत, अनुशासित व सद्प्रवृतियों से युक्त मिलेंगे। यहां का हरीतिमा युक्त प्राकृतिक, शांत, मनोरम व आध्यात्मिक वातावरण बरबस ही लोगों को आकर्षित करने में सक्षम है। जैन विद्या व प्राच्य दर्शन के विकास, प्रसार, अध्ययन व शोध के उद्देश्य से संस्थापित इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में प्राकृत, संस्कृत, योग व जीवन विज्ञान, अहिंसा एवं शांति के साथ अन्य समस्त आवश्यक शैक्षणिक विषयों एवं स्किल डेवलपमेंट के विषयों का अध्ययन भी करवाया जाता है। यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) मूल्यपरक शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए समर्पित है। इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की विशेषताओं पर गौर करेंगे तो आश्चर्य अवश्य होगा कि इस युग में भी कोई इस तरह का शिक्षण केन्द्र होगा जो प्राचीन गुरूकुलों और आधुनिक शिक्षण प्रणाली का समन्वित स्वरूप हों। इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की विशेषता है कि यहां जीविकोपार्जन के साथ जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है। इसकी गतिविधियां लाभ के लिए संचालित नहीं होकर मानव कल्याण के निमित संचालित होती है।

ध्यान व प्रार्थना से शुरू होते हैं कार्य

इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में चाहे विद्यार्थी हों या शिक्षक अथवा गैर शैक्षणिक कर्मचारी - सभी अपना कार्य नियमित प्रार्थना व ध्यान से शुरू करते हैं। यहां प्रतिदिन समस्त कर्मचारियों को प्रार्थना व ध्यान करने होते हैं तथा इसके पश्चात उनकी कार्यस्थल की दिनचर्या शुरू की जाती है। यही कारण है कि यहां का समस्त स्टाफ स्वभाव से विनम्र, अनुशासित, शांत व व्यवहारिक है। नियमित ध्यान के कारण उनके स्वभाव, व्यवहार व जीवनचर्या में बदलाव आता है और वह उनके कार्य में परिलक्षित होता है। जब स्टाफ या शिक्षक संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नम्र व शांत होंगे तो उनके आचरण को देखकर संस्कारित होने वाले विद्यार्थी भी निश्चित रूप से उनके अनुरूप ही होंगे।

अध्यात्मिक अनुशासन और दिशा-निर्देशन

यह देश का पहला संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) होगा, जिसमें कुलपति एवं कुलाधिपति के अतिरिक्त एक पद और तय किया गया है, और वह है अनुशास्ता का पद। यह पद संस्थान का संवैधानिक पद है। अनुशास्ता के पद पर धर्माचार्य होते हैं, जो संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) को अपने नैतिक निर्देशों से लाभान्वित करते हैं। जैन श्वेताम्बर तेरापथ धर्मसंघ के नौंवे आचार्य आचार्यश्री तुलसी यहां इसके अनुशास्ता थे। उनके बाद द्वितीय अनुशास्ता के रूप में आचार्यश्री महाप्रज्ञ रहे और वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अनुशास्ता है। इनकी आध्यात्मिक वैचारिक रश्मियों से सम्पूर्ण संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) आलोकित होता है और उनकी तेजस्विता से प्रभावित होता है। यह उनका ही प्रभाव है कि यहां आने वाला हर विद्यार्थी स्वतः ही अपने स्वभाव में परिवर्तन पाता है। संस्थान के समस्त शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी इन धर्मगुरूओं के प्रभामंडल से ओजस्वित रहते हैं।

प्रोफेसरों व व्याख्याताओं की मानद सेवायें

इस मायने में भी यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) सबसे अलहदा है कि यहां अपनी मानद सेवायें प्रदान करने वाले प्रोफेसरों व व्याख्याताओं की तादाद काफी है। यहां उच्च शिक्षा प्राप्त पीएचडी व नेट किये हुए समण-समणियां भी अपनी अध्यापन सेवायें प्रदान करते हैं। उनकी निःशुल्क सेवाओं का लाभ यहां संस्थान को लगातार मिलता रहा है। उनके द्वारा शिक्षण कार्य करवाये जाने से विद्यार्थियों में स्वतः ही अनुशासन, समयबद्धता, चरित्र, सामाजिक समर्पण आदि गुणों का विकास संभव हो पाता है। समणियों की निःस्वार्थ भाव से की जाने वाली संस्थान  की सेवा अपने आप में अनूठी है। इनकी सेवायें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मापदंडों पर भी खरी उतरती है।

चारित्रिक व नैतिक वार्तालाप-व्याख्यान

संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समय-समय पर विभिन्न धर्मगुरूओं, संत-महात्माओं एवं महत्वपूर्ण हस्तियों-विद्वानों के प्रवचन-व्याख्यान, वार्तालाप, चर्चा आदि का आयोजन किया जाता है, जिससे संस्थान को चारित्रिक व नैतिक सम्बल प्राप्त होता है। जीवन के प्रति दृष्टिकोण, नैतिकता के प्रसार, चारित्रिक क्षमता वृद्धि आदि का लाभ इनसे विद्यार्थी उठा पाते हैं। इससे उनमें सम्मान की भावना, सांस्कृतिक मूल्यों का विकास और जीवन मूल्यों का समावेश संभव होता है। यहां संचालित विभिन्न व्याख्यानमालाओं में विभिन्न विद्वानों द्वारा दिया जाने वाला प्रस्तुतिकरण विद्यार्थियों में ज्ञान वृद्धि के साथ उनके जीवन में उपयोगी सिद्ध होने वाला होता है।

मूल्यपरक शिक्षा के लिये समर्पित संस्थान

इस संस्थान की स्थापना के पीेछे आचार्य तुलसी की दूरदृष्टि रही थी और नैतिक जीवन मूल्यों की समाज में पुनर्स्थापना को मुख्य उद्देश्य बनाकर ही इसे शुरू किया गया था। अपनी संस्थापना से लेकर आज तक यह संस्थान मूल्यपरक शिक्षण-प्रशिक्षण के लिये समर्पित है। यहां जीवन विज्ञान की शिक्षा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है तथा पृथक विषय के रूप में भी जीवन विज्ञान की डिग्री दी जाती है। जीवन विज्ञान में जीवन मूल्यों पर पूरा ध्यान दिया जाता है। यहां का आध्यात्मिक वातावरण, संतों का सामीप्य और विद्यार्थी-निमित तय मर्यादाओं के पालन से विद्यार्थियों में चारित्रिक विकास एवं मूल्यों का समावेश होने से उनका जीवन उज्जवल बन पाता है। इस संस्थान का ध्येय वाक्य है- ‘णाणस्स सार मायारो‘ अर्थात ज्ञान का सार आचार है। इस ध्येय वाक्य के अनुरूप यहां दुनियावी शिक्षा के साथ व्यक्तिगत आचरण की शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

भोजन एवं आवास की निःशुल्क सुविधा

संभवतः यह पहला संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) होगा, जहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ निःशुल्क छात्रावास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध है। यहां जैन विद्या, प्राकृत एवं संस्कृत भाषा में स्नातकोत्तर करने के लिए प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को यह सुविधा दी जाती है। इनमें अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिये यहां अध्ययन की सुविधा भी पूर्ण रूप से निःशुल्क है। अन्य पाठ्यक्रमों में भी शुल्क अतिन्यून होने व छूट उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को आर्थिक दृष्टि से नहीं सोचना पड़ता, फिर यहां छात्रवृति की सुविधा भी होने से विद्यार्थियों को पढाई बोझ नहीं लग पाती है।

शोध-परियोजनाओं के लिये खर्च की व्यवस्था

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शोध को विशेष महत्व दिया जाता है, इसके लिये विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का संचालन भी संस्थान द्वारा किया जाता रहा है। नवाचारी शोध प्रोजेक्ट के तहत पायलट प्रोजेक्ट के लिये 50 हजार, माइनर प्रोजेक्ट के लिये 2 लाख, और मेजर प्रोजेक्ट के लिये 10 लाख रूपयों का वितीय सहयोग संस्थान की ओर से उपलब्ध करवाया जाता है। इस राशि का उपयोग शोधकर्ता अपने शोध कार्य के लिये उपकरण, पुस्तकें, जर्नल, स्टेशनरी, प्रिंटिंग, विश्लेषण सेवायें प्राप्त करने तथा आवश्यक यात्रा, फील्ड वर्क, सेमिनार, वर्कशाॅप आदि के लिये कर सकता है। कोई संस्थान अपने खर्च से शोध परियोजनाएं संचालित करें, दुर्लभ है।

वृद्धों व साधुओं के लिए भी पढाई की व्यवस्था

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) ने जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके लोगों में भी पढाई के प्रति ललक जगा दी है। यहां के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से बड़ी संख्या में देश भर के बड़ी आयु के लोग बीए से लेकर एमए और पीएचडी तक का अध्ययन व शोध कर रहे हैं एवं डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। यहां 60 से 80 वर्ष की आयु में भी पढने वाले विद्यार्थी लगातार रहे हैं। इनके अलावा यहां अपरिग्रही साधु-साध्वियों के लिये निःशुल्क शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध हैं वे देश में कहीं भी भ्रमण करते हुये अपनी पढाई जारी रख सकते हैं। बड़ी संख्या में साधु-साध्वियों ने यहां से उच्च शिक्षा प्राप्त करके डिग्रियां हासिल की हैं। पढाई को किसी भी कारण से बीच में छोड़ देने वाले जीवन के किसी भी हिस्से में अपनी पढाई वापस शुरू कर सकते हैं।

स्किल बेस्ड ट्रेनिंग व रोजगार निर्देशन

यहां संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में स्किल डेवलेपमेंट की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। योग, प्राकृतिक चिकित्सा के लिये यहां 3 माह का प्रमाण पत्र कार्यक्रम संचालित किया जाता है। इसके अलावा ब्यूटी कल्चर कार्यक्रम में ब्यूटी पार्लर खोलने, केश सज्जा करने, दुल्हन तैयार करने आदि का कोर्स करवाया जाता है। इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों की मरम्मत व रखरखाव सम्बंधी प्रमाण पत्र कार्यक्रम भी युवाओं को निःशुल्क प्रदान करने की व्यवस्था है। यहां समर प्रोग्राम के अन्तर्गत शोर्ट टर्म कोर्सेज करवाये जाते हैं, जिनमें कुकिंग प्रशिक्षण, योगा ट्रेनिंग, इंटीरियर डिजाईन, क्राफ्टिंग एंड पेंटिंग, स्पोर्टस ट्रेनिंग, बेसिक कम्प्यूटर, हेयर एंड स्किन केयर, स्पोकन इंगलिश, डांस व मार्शल आर्ट के कोर्स शामिल हैं। यहां समाज कार्य विभाग के अन्तर्गत एम.एस.डब्लू. का दो वर्षीय स्नातकोतर कोर्स तो शत प्रतिशत प्लसमेंट वाला है। बीएड व एमएड के कोर्स भी कॅरियर के लिये बेहतरीन सिद्ध हो रहे हैं। इनके अलावा कॅरियर काउंसलिंग, गाईडेंस, कॅरियर व्याख्यान, ज्ञान केन्द्र में रोजगार सम्बंधी सहायता आदि के माध्यम से विद्यार्थियों को कॅरियर निर्माण की दिशा में सहायता मिलती है।

अंग्रेजी संवाद एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण में दक्षता

यहां सभी के लिये अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्प्रेषणता की तरफ पूरा ध्यान दिया जाता है। विद्यार्थियों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिये तैयार करने के लिये अंग्रेजी व कम्प्यूटर में दक्षता आवश्यक होती है और इन दोनों ही विधाओं पर यहां पूरा जोर दिया जाता है। यहां हर विद्यार्थी के लिये अंग्रेजी माध्यम नहीं होने पर भी अंग्रेजी का ज्ञान व संवाद विधा अवश्य सिखाई जाती है। इसी तरह से कंप्यूटर का ज्ञान भी सबको करवाया जाता है, ताकि विद्यार्थी कहीं भी पीछे नहीं रह पाये।

महिला शिक्षा महत्वपूर्ण

यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एक तरह से महिला शिक्षा को समर्पित कहा जा सकता है। यहां महिला शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है। संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में बीए, बीकाॅम, बीएससी के पाठ्यक्रमों में केवल बालिकाएँ ही प्रवेश ले सकती हैं। इसी प्रकार यहां शिक्षा विभाग में संचालित बीएड, एमएड, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड पाठ्यक्रमों में भी केवल कन्याओं के लिये ही प्रवेश रक्षित है। आचार्य तुलसी की सोच के अनुरूप इस संस्थान में महिला शिक्षा को ही प्राथमिकता दी जाती है। यहां बालिकाओं की शिक्षा के साथ सुरक्षा, आत्मरक्षा, उचित देखभाल एवं उनके सर्वांगीण विकास पर पूरा ध्यान दिया जाता है।

Thursday, 10 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में निःशुल्क योग कक्षाओं का आयोजन

घुटनों के दर्द से बचना है तो पानी बैठ कर पीयें- डाॅ. माहेश्वरी

लाडनूँ, 10 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) अपने नित नये प्रयोगों और रचनात्मक चिंतन व कार्यों के लिए विख्यात है। संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित योग व ध्यान की निःशुल्क कक्षाओं का शुभारम्भ गुरूवार को सुबह प्रारम्भ किया गया। योग-कक्षा का संचालन करते हुये प्रशिक्षक डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने कहा कि व्यक्ति को पानी हमेशा बैठ कर ही पीना चाहिए। इससे अनेक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। योग एवं ध्यान की इस कक्षा में सम्भागियों को प्रशिक्षण प्रदान करते हुए उन्होंने बताया कि पानी सदैव धीरे-धीरे अर्थात घूँट-घूँट कर पीना चाहिए और बैठकर पीना चाहिए। कभी भी खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए। बैठक कर पानी पीने से घुटनों के दर्द से बचा जा सकता है। इसी प्रकार कभी भी बाहर से आने पर जब शरीर गर्म हो या श्वाँस तेज चल रही हो, तब थोड़ा रुककर, शरीर का ताप सामान्य होने पर ही पानी पीना चाहिए। खड़े होकर पानी पीने से गुर्दा, गठिया व जोड़ों के दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ये कक्षाएं संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा अपने शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ के लिए निःशुल्क आयोजित की जा रही हैं। कक्षाएं प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक एक घंटे संचालित की जायेगी। अपने समस्त कार्मिकों के उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य व मानसिक विकास के लिए इन कक्षाओं का आयोजन ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय शुरू किया गया है। गुरूवार को इन कक्षाओं में ध्यान के बाद शरीर के समस्त जोड़ों के संचालन की विविध क्रियाओं का अभ्यास करवाया गया तत्पश्चात कायोत्सर्ग और कमर, घुटने, गर्दन आदि के व्यायाम करवाए गए।

नियमित योगासनों से अनेक बीमारियों का निरोध संभव- डाॅ. शेखावत

लाडनूँ, 11 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने यहां संचालित की जा रही योग कक्षा में सम्भागियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं ध्यान के प्रयोग करवाए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग के इन आसनों एवं क्रियाओं का नियमित अभ्यास करने से कमर दर्द, ब्लड प्रेशर, गर्दन का दर्द, सिरदर्द आदि नहीं रहते तथा अनेक बीमारियों का शरीर में प्रवेश ही नहीं हो पाता। उन्होंने वस्त्र को स्वच्छ बनाने के लिए जो धोने की क्रिया होती है, वैसे ही शरीर की मांसपेशियों को शुद्ध करने के लिए यौगिक क्रिया आवश्यक है।

योग से स्वास्थ्य लाभ के साथ होता है कार्यशैली में परिवर्तन- प्रो. दूगड़
लाडनूँ, 14 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि योग से व्यक्ति स्वस्थ रहता है तथा उसकी कार्यशैली में परिवर्तन आता है। योगसनों और क्रियाओं का लाभ तभी मिल पाता है, जब उन्हें नियमित रूप से लगातार किया जाता रहे। वे यहां लगाई जा रही योग कक्षा का अवलोकन कर रहे थे। उन्होंने सम्भागियों को सम्बोधित करते हुए नियमित रूप से प्राणायाम व योगासन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बताया कि संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समस्त स्टाफ के लिए अनिवार्य रूप से शुरू की गई योग कक्षा का लाभ सभी को प्राप्त करना चाहिए। योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने योग कक्षा में सम्भागियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं प्राणायम के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अपने स्वास्थ्य को सुधारने एवं मोटापा घटा कर शरीर को संतुलित बनाने के लिए भोजन का पूर्ण बनाना आवश्यक है। इसमें यथासंभव साबुत अन्न व फलों का प्रयोग करना चाहिए। फलों का जूस पीने के बजाये उन्हें खाने से शरीर को आवश्यक फाईबर और तत्व मिल पाते हैं। इसी प्रकार रिफाुइंड तेल के बजाये देसी घी अघिक लाभदायक होता है। भोजन के साथ शरीरिक मेहनत पर भी पूरा जोर देना चाहिए। जो व्यक्ति खाने-पीने पर पूरा ध्यान देता है और शरीर से कैलोरी जलाने पर भी ध्यान देता है, वह स्वस्थ रहता है तथा लम्बी आयु को प्राप्त होता है।

विपरीत परिस्थितियों में भी योग से पूर्ण स्वास्थ्य लाभ संभव- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 15 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि योग से मनुष्य अपने किसी भी क्षेत्र में कार्य करते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रख सकता है। योग को आवश्यक रूप से प्रतिदिन नियमित रूप से करना चाहिये। उन्होंने यहां संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में चल रही कार्मिकों की योग कक्षा के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योगमय जीवन शैली को अपनाने से व्यक्ति अपने प्रकार की व्याधियों से मुक्त रह पाता है। उन्होंने कहा कि जो यौगिक क्रियायें, योगासनों एवं प्राणायाम के प्रयोग बताये हैं, उन्हें अपने घर पर नियमित अभ्यास का हिस्सा बनायें, ताकि उनका वास्तविक लाभ उठाया जा सके। योग प्रशिक्षक डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने योग कक्षा में शामिल सभी सम्भागियों को आंख, कान, गर्दन, कमर, घुटनों आदि के स्वास्थ्य केे लिये विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं प्राणायम के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग से शरीर के समस्त अवयव सक्रिय हो जाते हैं और वे सही रूप में कार्य करने लगते हैं। छोटी-छोटी क्रियायें नियमित रूप से करने पर उनका व्यापक शारीरिक लाभ मिलता है। इसलिये योगाभ्यास का आलस नहीं रखना चाहिये।

Wednesday, 9 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अंग्रेजी सम्प्रेषण दक्षता निखारने हेतु कार्यशाला का आयोजन

सम्भागियों को बताये विभिन्न परिस्थितियों में अंग्रेजी संवाद कायम करने के तरीके

लाडनूँ, 9 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्पर्क कला कार्यशाला में मंगलवार को विभिन्न काल्पनिक परिस्थियों का नाट्य प्रस्तुतिकरण करवाते हुए मनोरंजक ढंग से अंग्रेजी सम्भाषण को परिपक्व बनाया गया। विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में लाडनूँ के पर्यटन व धार्मिक स्थलों के सम्बंध में गाइड व पर्यटकों के बीच वार्ता, रोगी व चिकित्सक के बीच के संवाद, जन्मदिन पर पार्टी आयोजित करने के लिए मित्रों के दबाव का वार्तालाप, लड़के व लड़की के रिश्ते के सम्बंध में दोनों पक्षों के बीच परस्पर सम्पर्क-संवाद तथा ट्रेन में बिना टिकिट के पकड़े गये यात्री एवं टिकिट चैकर के बीच की वार्ता को नाट्य-रूपान्तरित किया गया। कार्यशाला में निर्देशक डाॅ. गोविन्द सारस्वत व प्रो. रेखा तिवाड़ी ने सभी प्रतिभागियों को संवाद की कुशलता, शब्दों के चयन, व्याकरण के प्रयोग एवं बेझिझक अंग्रेजी वार्तालाप करने के नुस्खे बताये। गौरतलब है कि संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक स्टाफ को अविरल अंग्रेजी संवाद के लिए तैयार करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह निःशुल्क कार्यशाला एक माह तक संचालित की जायेगी।

झिझक दूर होने पर अंग्रेजी बोलना सरल- डाॅ. सारस्वत

लाडनूँ, 15 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अंग्रेजी भाषा विभाग के तत्वावधान में विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक कार्मिकों के लिए आयोजित की जा रही अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्पर्क कला के विकास के लिए निःशुल्क कार्यशाला का मंगलवार को समापन किया गया। इस अवसर पर विभागध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत ने कहा कि अंग्रेजी को अपने कार्यस्थल व रोजमर्रा के जीवन की भाषा बनाने के लिए आवश्यक है कि अपनी दिनचर्या के हिस्सों में आवश्यक छोटे-छोटे वाक्यांश को प्रयोग में लाया जावे। जब तक अंग्रेजी बोलने की झिझक नहीं मिटेगी, उसे सरलता से नहीं बोला जा सकेगा। इसलिए नियमित अभ्यास को जारी रखा जाना चाहिए। कार्यशाला के सम्भागियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व अनुभव अंग्रेजी में साझा किये तथा कुछ सम्भागियों ने वार्तालाप के जरिये अपनी भावनायें व्यक्त की। विजय कुमार शर्मा, मुकुल सारस्वत, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. हेमलता जोशी, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, गीता पूनिया, डाॅ. बीएल जैन, सोनिका जैन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, कमल कुमार मोदी, डाॅ. विवेक माहेश्वरी, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, डाॅ. वीरेन्द्र भाटी, डाॅ. अमिता जैन आदि ने इन कक्षाओं को लाभदायक बताया तथा कहा कि इससे सम्भागियों की अंग्रेजी बोलने की झिझक दूर हुई है।

अब विदेशों में भी अध्ययन कर पायेंगे जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के विद्यार्थी

जैन विश्वभारती संस्थान का देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से एमओयू

लाडनूँ, 9 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) निरन्तर वैश्विक स्तर पर अग्रसर हो रहा है। इसके अन्तर्गत दो विदेशी विश्वविद्यालयों से उसके एमओयू/एग्रीमेंट्स हैं। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वीके कक्कड़ ने बताया कि देश-विदेश के 9 विश्वविद्यालयों से जैन विश्वभारती संस्थान के साथ एमओयू हुये हैं, जिनमें विद्यार्थियों एवं फेकल्टी का एक्सचेंज कार्यक्रम तय किए गए हैं। इन शिक्षण संस्थानों व विश्वविद्यालयों से अन्तर्सम्बंधों के कारण जहां इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को विदेशों के विश्वविद्यालयों में नवीन शिक्षण पद्धतियों एवं तकनीकों को सीखने का अवसर मिलेगा, वहीं विदेशी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को यहां आकर जैन विद्या, योग व जीवन विज्ञान, संस्कृत व प्राकृत भाषा, भारतीय संस्कृति, पाठ्यक्रमों एवं पद्धतियों को नजदीकी से देखने-समझने एवं सीखने का अवसर मिल पायेगा। कुलसचिव कक्कड़ ने बताया कि सिंगापुर की प्रज्ञा योग, बेल्जियम की घेंट यूनिवर्सिटी, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी जयपुर, स्वार्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी गांधीनगर, कोबा की प्रेक्षाध्यान एकेडमी एवं स्वामी विवेकानन्द योग अनुसंधान विश्वविद्यालय बैंगलोर के साथ अन्तर्सम्बंध स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ इस विश्वविद्यालय के साथ अन्तर्सम्बंध रहे हैं।

Saturday, 5 May 2018

कॅरियर काउंसलिंग एवं चरित्र निर्माण पर व्याख्यान आयोजित

राजकीय कन्दोई बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुजानगढ़ में कॅरियर काउंसलिंग एवं चरित्र निर्माण पर एक विशेष सत्र आयोजित



सुजानगढ़, 5 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा विभाग की सहायक निदेशिका नुपुर जैन ने छात्राओं को उच्च शिक्षा हेतु प्रेरित करते हुये कहा कि उज्ज्वल भविष्य के लिये उच्च शिक्षा के साथ व्यक्ति का सच्चरित्र होना आवश्यक है और इन दोनों के लिए अच्छे संस्थान से शिक्षा ग्रहण करनी आवश्यक है। उन्होंने यहां राजकीय कन्दोई बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुजानगढ़ में शनिवार को आयोजित कॅरियर काउंसलिंग एवं चरित्र निर्माण पर एक विशेष सत्र में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि इन दोनों ही साध्यों को प्राप्त करने के लिए जैन विश्वभारती संस्थान से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता क्योंकि वहां उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के साथ-साथ साध्वीयों के सान्निध्य में उच्च नैतिक चरित्र का निर्माण भी किया जाता है। इस अवसर पर संस्थान के हिन्दी व्याख्याता अभिषेक चारण ने आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में समाहित विशेषताओं से परिचय करवाते हुए छात्राओं को बताया कि आधुनिक शिक्षा शैली को अपने में आत्मसात किये हुए यह महाविद्यालय सभी कक्षा में स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध करवाता है ताकि छात्राएं शिक्षा के इन आधुनिक उपकरणों का अधिकतम उपयोग कर सके। संस्थान की इतिहास व्याख्याता सुश्री रत्ना चौधरी ने महाविद्यालय की विशेष गतिविधियों से छात्राओं को अवगत करवाया जो संस्थान को अन्य महाविद्यालयों से श्रेष्ठ साबित कराता है। संस्थान की मुमुक्षों बहिनों क्रमशः श्वेता और प्रेक्षा द्वारा विद्यालय की छात्राओं के साथ जैन विश्वभारती संस्थान से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। इस अवसर पर अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत द्वारा छात्राओं से फीडबेक फाॅर्म भरवाये गये एवं छात्राओं को विश्वविद्यालय में प्रवेश हेतु प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अन्त में घोषणा की कि सत्र 2018-19 में सुजानगढ़ की छात्राओं के लिए निःशुल्क वाहन सुविधा की जायेगी, ताकि बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन मिल सके। इस अवसर पर संस्थान परिवार की ओर से कन्दोई बालिका विद्यालय की प्राचार्य सरोज पूनिया एवं व्याख्याता लक्ष्मण खत्री को संस्थान का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय शिक्षिका मंजू ढाका द्वारा किया गया। इस अवसर पर समस्त विद्यालय परिवार एवं डाॅ. घनश्यामनाथ कच्छावा सहित शहर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

Friday, 4 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में मुख्यमंत्री का स्वागत

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने शाॅल ओढा कर किया सम्मान


लाडनूँ, 4 मई 2018। राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे दिनांक 4 मई 2018 गुरूवार को जैन विश्वभारती संस्थान पहुंची। उनके यहां पहुंचने पर संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने उनका शाॅल ओढाकर सम्मान किया। इस अवसर पर जैन विश्वभारती के ट्रस्टी भागचंद बरड़िया व जीवन मल मालू भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने संस्थान के कुलपति सेमिनार हाॅल में जिले के अधिकारियों की बैठक ली। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में उन्होंने समस्त प्रगतिरत योजनाओं की पूर्ण जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने यहीं पर भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों की भी बैठक ली। अगले दिन सुबह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने यहां जैन विश्व भारती के भिक्षु विहार में विराजित तपस्वी जैन मुनि जयकुमार के दर्शन किए तथा उनसे मंगलपाठ सुना व आशीर्वाद प्राप्त किया।

Thursday, 3 May 2018

जैन मुनि ने किया जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का अवलोकन

संस्थान को बताया विश्व-स्तरीय संसाधनों से परिपूर्ण


लाडनूँ, 3 मई 2018। तेरापंथ धर्मसंघ के तपस्वी मुनिश्री जयकुमार ने गुरूवार को जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) का अवलोकन किया। उन्हें विश्वविद्यालय का योग एवं जीवन विज्ञान विभाग, महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम, कम्प्यूटर लेब., जिम्नेजियम, डिजीटल स्टुडियो, केन्द्रीय पुस्तकालय, शिक्षा विभाग एवं विज्ञान प्रयोगशालाओं का मुआयना किया। आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशालाओं, विभिन्न विभागों की व्यवस्थाओं आदि को देखने के बाद मुनिश्री ने कहा कि यह संस्थान विश्व में अपनी पहचान रखता है और उसी के अनुरूप यहां समस्त संसाधन-सुविधायें उपलब्ध हैं। उन्होंने जैन विद्या एवं प्राकृत भाषा के लिए करवाये जा रहे कोर्सेज एवं प्रचार-प्रसार पर भी संतोष व्यक्त किया। संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, प्रो. बीएल जैन, प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, नुपूर जैन, प्रकाश गिड़िया, डाॅ. जसबीर सिंह, डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़, जेपी सिंह आदि ने इन सभी विभागों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

Tuesday, 1 May 2018

योग व जीवन विज्ञान की प्रशिक्षण एवं सम्पर्क कक्षाओं का शुभारम्भ

इक्कीसवीं सदी में योग सबसे श्रेष्ठ माध्यम- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ 1 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के एम.ए. एवं एम.एससी. के योग एवं जीवन विज्ञान विषय के विद्यार्थियों के लिये एक माह की प्रशिक्षण एवं सम्पर्क कक्षाओं के शुभारम्भ पर सम्बोधित करते हुये निदेश प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि 21वीं सदी योग की सदी है, इसलिए जो योग में जितना अधिक दक्ष होगा, वही आगे बढ पायेगा। आज केरियर बनाने के लिए योग सबसे अच्छा माध्यम है। योग में समस्त बीमारियों का इलाज होने से आज के समय में बढ रही अनिद्रा, बीपी, हृदयरोग, मधुमेह, जोड़ों के दर्द आदि के योग से दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग एक ऐसी विद्या है, जो विमुक्ति व नियुक्ति दोनों के लिए मददगार है। उन्होंने योग के आसनों, प्राणायाम, ध्यान आदि का गहरा अभ्यास करने की आवश्यकता बताई और जीवन में प्रामाणिकता, नैतिकता व चरित्रशुद्धि को आवश्यक बतातेे हुए कहा कि इस पाठ्यक्रम में ये सब विषय समाहित हैं। उन्होंने एक महिने की प्रशिक्षण एवं सम्पर्क कक्षाओं के नियमित कार्यक्रम के अलावा बाहर से आये समस्त विद्यार्थियों के रहने, खाने आदि की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जगदीश यायावर ने अपने सम्बोधन में योग को सबसे बेहतरीन विषय बताया तथा कहा कि योग से अपने शारीरिक, मानसिक व भावात्मक स्वास्थ्य के सुधार के साथ अपने परिवार, समाज व अन्य लोगों को भी सही राह पर चलने व स्वस्थ बनाने में योग सक्षम है। उन्होंने अपने समय का अधिकतम सदुपयोग करते हुए योग में पूर्ण दक्षता हासिल करने की आवश्यकता बताई। समन्वयक जेपी सिंह ने अंत में आभार ज्ञापित करते हुये नियमित कक्षाओं व शिक्षकों आदि के बारे में जानकारी दी।

Friday, 27 April 2018

आकर्षक सम्प्रेषण शिक्षण के साथ व्यावहारिक जीवन में भी उपयोगी

लाडनूँ, 27 अप्रेल 2018। मोदी यूनिवर्सिटी आफ साईंस एंड टेक्नोलोजी सीकर के सह आचार्य डाॅ. अशोक एस. राव ने पढाने के तरीकों को सहज बनाने एवं अध्यापक के लिए आवश्यक गुणों के विकास के बारे में यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए बताया; उन्होंने यहां सेमिनार हाॅल में विश्वविद्यालय के अंगे्रजी विभाग के तत्वावधान में आयोजित अंग्रेजी भाषा की सम्प्रेषण दक्षता को विकसित करने सम्बंधी कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अध्यापक को अपने विषय में गहरी जानकारी हासिल करने के लिए नियमित अध्ययन आवश्यक होता है। अध्यापक का विद्यार्थियों के सामने संतुलित व सहज व्यवहार, अनुशासन प्रियता, समय की प्रतिबद्धता आदि पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने सीखने-सिखाने के तरीकों को रोचक बनाने के उपाय बताऐ तथा कहा कि आकर्षक सम्प्रेषण से व्यावहारिक जीवन में बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। उन्होंने इस अवसर पर अंग्रेजी भाषा में सम्प्रेषण दक्षता प्राप्त करने के सम्बंध में यहां विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक व मंत्रालयिक कर्मचारियों को अंग्रेजी भाषा की सरलता को रेखांकित करते हुए महत्वपूर्ण टिप्स भी बताये। कार्यशाला के प्रारम्भ में प्रो. रेखा तिवाड़ी ने डाॅ. राव का परिचय प्रस्तुत किया तथा अंत में विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत ने आभार ज्ञापित किया।

Friday, 20 April 2018

जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन एवं अंग्रेजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विदाई समारोह का आयोजन

जीवन में पांच H का होना आवश्यक है - प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा

लाडनूँ, 20 अप्रेल 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन विभाग एवं अंग्रेजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म एवं दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने कहा कि जीवन में पांच H का होना आवश्यक है -
H = Healthy यानि शरीर, मन व भावानात्मक रूप से स्वस्थ रहें।
H = Happy यानि हर अनुकूलता या प्रतिकूलता में खुश रहे।
H = Humble यानि विनम्र रहें।
H = Honest यानि प्रामाणिक व नैतिक रहें ।
H = High Thinking यानि सोच हमेशा उंची रखें।
जो कुछ है वह सोच के कारण है और जो कुछ बनोगे वह सोच के कारण ही बनोगे। अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत ने जीवन के बदलाव में अपनी क्षमताओं को पहचानने की जरूरत पर बल दिया।
कार्यक्रम में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि कभी संवेदनाओं के स्रोत को सूखने नहीं दें, क्योंकि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः की रही है। उन्होंने स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिऐ मंगलभावना प्रकट करते हुये उन्हें जीवन में आदि शंकराचार्य के जीवन-दर्शन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता बताते हुये कहा कि उन्होंने मात्र 8 वर्ष की उम्र में वेद पढ लिऐ थे और 16 वर्ष की आयु में अपने समस्त ग्रंथों की रचना कर दी थी। उनकी आयु मात्र 32 वर्ष रही, लेकिन इसमें भी उन्होंने इतना कार्य किया कि पूरा विश्व उन्हें याद करता है।
प्रो. दामोदर शास्त्री ने कहा कि ज्ञान दिया नहीं जाता, बल्कि वो तो अंदर ही होता है, केवल उस पर से आवरण को हटाने की जरूरत होती है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा के वाक्य-विन्यास को विलक्षण बताया तथा कहा कि भाषा के सौंदर्य को पढना चाहिये।
कार्यक्रम में उदय चैगले, माया, मुमुक्षु सोनम, कंचन शर्मा, विनय आदि ने अपने अनुभव, विचार एवं गीत प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का प्रारम्भ मंगलाचरण से किया गया। संचालन प्रासुक व प्रज्ञा शर्मा ने किया।

Wednesday, 18 April 2018

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में विदाई समारोह आयोजित

धैर्य के साथ प्रयास करने पर मिलती है सफलता- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 18 अप्रेल 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि जीवन में हमेशा धीरज रखना चाहिये। धैर्य खोने से नुकसान उठाना पड़ता है; असफलता आये तो हताश-निराश नहीं होना चाहिये। गुच्छे की आखिरी चाबी भी कई बार ताले को खोल देती है, उसी प्रकार कोई न कोई प्रयास सफलता अवश्य ही दिलवाता है। सदैव प्रयासरत रहना चाहिये और अच्छे बनने का प्रयास करना चाहिये। हर व्यक्ति को अच्छे आदमी की तलाश रहती है। हम भी बाहर अच्छे व्यक्ति को खोजते हैं, लेकिन हमें स्वयं अच्छा बनना चाहिये, ताकि हम किसी की खोज को पूरी कर पायें। स्वयं मिसाल बनें व दूसरों की तलाश को पूरा करें। वे यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में आयोजित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के मंगलभावना समारोह के रूप में आयोजित विदाई समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने इस अवसर पर छात्राओं को शुभकामनायें देते हुये कहा कि यहां उच्च महिला शिक्षा गुरूदेव तुलसी की देन है। यहां केवल डिग्रियों के लिये ही शिक्षा नहीं दी जाती, बल्कि यहां व्यक्तित्व को तराशने का काम किया जाता है। उन्होंने स्मार्ट क्लासेज, डिजीटल स्टुडियो, केरयिर काउंसलिंग, मार्शल आर्ट प्रशिक्षण, क्लबों द्वारा सहशैक्षणिक गतिविधियों में प्रतिभाओं को दक्ष बनाने आदि की जानकारी भी प्रदान की। अभिषेक चारण ने प्रारम्भ में महाविद्यालय के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।
इस अवसर पर महाविद्यालय की विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ रही छात्राओं, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों तथा क्षेत्र के विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रधानों का भी सम्मान किया। समारोह में कुलपति प्रो. दूगड़ व प्राचार्य प्रो. त्रिपाठी ने विशिष्ट अतिथियों के रूप में शामिल क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों व निदेशकों का सम्मान किया गया, जिनमें लाड मनोहर बाल निकेतन की प्राचार्या कंचनलता शर्मा, सैनिक स्कूल के निदेशक केशाराम हुड्डा, राजकीय केशरदेवी सेठी बालिका विद्यालय की प्राचार्या अलका रानी गुहराय, सुभाष बोस सीनियर सैकेंडरी स्कूल के भंवर लाल मील, विमल विद्या विहार स्कूल की विनीता धर, मौलाना आजाद स्कूल के बहादुर खां मोयल, आदर्श विद्या मंदिर स्कूल के राजूराम पारीक, राजकीय भूतोड़िया बालिका स्कूल की डाॅ. नीता चैहान, संस्कार सीनियर सैकेंडरी स्कूल की डाॅ. सुमन चैधरी, राजकीय जौहरी स्कूल की प्राचार्या रमा देवी, दयानन्द स्कूल के हरेकृष्ण शर्मा, मदनलाल भवंरीदेवी आर्य मैमोरियल स्कूल की कंचनलता आर्य, सत्यम स्कूल के राजकुमार व बापूजी काॅलेज आफ नर्सिंग के ओमप्रकाश गुर्जर शामिल थे। कुलपति प्रो. दूगड़ ने इनके अलावा महाविद्यालय द्वारा आयोजित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया, जिनमें लक्ष्मी भाटी सुजानगढ को पहला पुरस्कार, ज्योति जांगिड़ सुजानगढ को द्वितीय पुरस्कार, दयानन्द स्कूल के नत्थूराम मौर्या को तृतीय पुरस्कार एवं मुरारी रांकावत निम्बी जोधां व मनोज रतावा निम्बी जोधां को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया। इनके अलावा महाविद्यालय की श्रेष्ठ छात्रा के रूप में ज्योति नागपुरिया को, बेहतरीन एकरिंग के लिये हेमलता शर्मा व दीपिका राजपुरोहित को, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अग्रणी रहने पर किरण बानो को, एनसीसी में उपलब्धि के लिये मानसी बुगालिया को सम्मानित किया गया।
समारोह में छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम का प्रारम्भ गणेश वंदना पर रश्मि व संध्या ने नृत्य के साथ किया गया। सरिता शर्मा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। गीता प्रजापत के ‘‘घूमर घूमर घूमै......’’ पर किये गये नृत्य को सभी ने सराहा। ज्योति नागपुरिया ने ‘यारा तेरी यारी को मैंने तो खुदा माना.....’ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रचना सैनी व अन्य छात्राओं ने योगासनों एवं यौगिक क्रियाओं का शानदार प्रदर्शन किया। छात्राओं ने कठपुतली नृत्य प्रस्तुत करके लोगों को आकर्षित किया। कार्यक्रम में पलक एवं समूह, महिमा प्रजापत एवं समूह, पूजा, रश्मि, राजलक्ष्मी, प्रतिष्ठा कोठारी, पलक सैनी, प्रीति, किरण, प्रिया राजपुरोहित, दीपिका आदि ने भी अपने समूहों के साथ नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। इस अवसर पर अंतिम वर्ष की छात्राओं को द्वितीय वर्ष की छात्राओं द्वारा उपहार देकर विदाई दी गई। कार्यक्रम में प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, डाॅ. समणी मल्लिप्रज्ञा, प्रो. समणी संगीत प्रज्ञा, डाॅ. अमिता जैन, सानिका जैन, प्रगति भटनागर आदि उपस्थित थे।
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जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में भगवान परशुराम जयंती पर्व का आयोजन

लाडनूँ, 18 अप्रेल 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में भगवान परशुराम जयंती पर्व मनाया गया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि भगवान परशुराम जो सोच लेते थे, उसे अपने पूरे प्राण-प्रण से करते थे। वे विष्णु के छठे अंश अवतार माने जाते हैं। अक्षय तृतीया के दिन उनकी जयंती देश भर में मनाई जाती है। परशुराम ने इस धरती को 21 बार क्षत्रिय विहीन कर दिया था। अभिषेक चारण ने कहा कि भगवान परशुराम जमदग्नि महर्षि के पुत्र थे। एक राजा द्वारा उनके पिता जमदग्नि का वध कर दिये जाने से उन्होंने क्रुद्ध होंकर पृथ्वी को 21 बार दुष्ट राजाओं से मुक्त किया था। वे भगवान शिव के फरसे को धारण करते थे, जिससे उनका नाम परशुराम पड़ा था। कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्रायें व स्टाफ उपस्थित रहे।

Tuesday, 17 April 2018

यूजीसी की 12बी टीम की रिपोर्ट पर बैठक आयोजित

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शुरू किये जायेंगे रोजगार-परक पाठ्यक्रम- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 17 अप्रेल 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि विश्वविद्यालय में शीघ्र ही नैचुरोपैथी व योग, आयुर्वेद पर कोर्सेज शुरू किये जायेंगे। इनके अलावा अब यहां विभिन्न प्रकार के रोजगार परक पाठ्यक्रम भी शुरू किये जायेंगे। इनमें स्थानीय उद्योगों की आवश्यकताओं को देखते हुये उनके अनुकूल स्किल डेवलेपमेंट कोर्स बनाये जायेंगे। यहां पर केरियर काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट के कार्यक्रमों को अधिक सक्षम बनाया जायेगा ताकि उनका पूरा लाभ विद्यार्थियों को मिल सके। वे यहां यूजीसी की 12 बी की टीम द्वारा यूजीसी को दी गई रिपोर्ट के बारे में जानकारी देते हुये उनके द्वारा दिये गये सुझावों को लागू करने के बारे में बता रहे थे। उन्होंने सम्पूर्ण शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ की बैठक में बताया कि सबकी सुविधा के लिये विश्वविद्यालय परिसर में शाॅपिंग सेंटर का निर्माण किया जायेगा। इसके लिये वर्तमान में तात्कालिक रूप में यहां चल रही केंटीन के अंदर समस्त खरीदारी की सुविधा उपलब्ध करवाई जायेगी। प्रो. दूगड़ ने बताया कि यह विश्वविद्यालय जैन दर्शन पर आधारित है। इसलिये यहां जैन दर्शन के सम्बंध में ऐसे कोर्स डेवलप किये जायेंगे, जों छात्रों को रोजगार भी उपलब्ध करवा सके। इन सभी को लागू करने के लिये उन्होंने समय-सीमा तय की तथा अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी।
उन्होंने बताया कि यूजीसी की 12 बी टीम द्वारा दी गई रिपोर्ट पूरी तरह से संस्थान के पक्ष में की गई सिफारिश के रूप में है, जिसमें उनके द्वारा किये गये अवलोकन में विश्वविद्यालय के भैतिक संसाधनों को श्रेष्ठ बताया है। परिसर को साफ-सुथरा व पर्यावरण के अनुकूल बताया। यहां के शैक्षणिक स्टाफ को अच्छा तथा विद्यार्थियों में हिंसा रहित व अनुशासित बताया गया है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्थाओं को किसी वैधानिक संस्था की तरह संचालित की जाना तथा छात्रावास व स्टाफ के आवास की व्यवस्थाओं की भी रिपोर्ट में तारीफ की गई है। प्रो. दूगड़ ने जानकारी दी कि रिपोर्ट में इस डीम्ड विश्वविद्यालय को अपने उद्देश्यों के अनुकूल एवं जैन दर्शन को समर्पित जैन साहित्य, अनुवाद आदि पर फोकस बताया तथा प्राकृत भाषा व उसके डिजीटाईजेशन आदि पर भी संतोष व्यक्त किया गया। टीम ने महिला शिक्षा पर आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के माध्यम से अच्छा कार्य करना बताया गया है। कुलपति ने इसके लिये समस्त स्टाफ द्वारा की गई मेहनत को श्रेय देते हये कहा कि आने वाले समय में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की टीम विश्वविद्यालय का दौरा करेगी, जिसमें भी सबको पूर्ववत ही अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना है। बैठक में प्रो. रेखा तिवाड़ी, प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बीएल जैन, अभिषेक चारण आदि ने इस सफलता के लिये कुलपति के नेतृत्व की सराहना की तथा नेक की टीम के समक्ष भी इसी तरह से श्रेष्ठ प्रदर्शन की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में प्रो. दामोदर शास्त्री, प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा, प्रो. समणी संगीत प्रज्ञा, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. रविन्द्र सिंह शेखावत, डाॅ. युवराज सिंह खांगारोत, डाॅ. अशोक भास्कर, डाॅ. विवेक माहेश्वरी, निरन्जन सांखला, दीपक माथुर, नुपूर जैन, सोनिका जैन, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, सुनीता इंदौरिया, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. समणी अमल प्रज्ञा, प्रगति भटनागर, डाॅ. जसबीरसिंह आदि उपस्थित थे।

Monday, 16 April 2018

शोध-अध्येताओं के लिये कोर्स वर्क एंड रिसर्च मैथडोलोजी पर व्याख्यान का आयोजन

शोध में कट-पेस्ट को हटाकर स्तर सुधारने की जरूरत- प्रो. व्यास

लाडनूँ, 16 अप्रेल 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शोध-अध्येताओं के लिये कोर्स वर्क एंड रिसर्च मैथडोलोजी पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। संस्थान के शोध निदेशक प्रो. अनिल धर की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. के.एन. व्यास ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोध में पुनरावृति नहीं होने देने का जरूरी बताते हुये कहा कि रिसर्च में कट एंड पेस्ट की आदत भी ठीक नहीं है; प्लेगेरिज्म का होना एक अपराध है, इसलिये इससे बचना चाहिये तथा जो उद्धरण लिया जा रहा है, उसका रेफरेंस अवश्य उल्लेख करना चाहिये। प्रो. व्यास ने इस बात पर दुःख जताया कि देश में शोध का स्तर गिरता जा रहा है। पहले जो शोध की प्रतिष्ठा थी, वह अब नहीं रही। शोध के स्तर को उच्च बनाने के लिये उन्होंने शोधार्थियों के लिये पूर्व तैयारी को आवश्यक बताया। उन्होंने शोध का अर्थ बताते हुये कहा कि इसमें नये तथ्यों की खोज, पुराने तथ्यों का पुनर्परीक्षण और कार्य-कारण के अन्तर्सम्बंधों का पता लगाना समाहित है। शोध के लिये विषय की खोज में जरूरी है कि विषय नया, रूचिकर और उत्तरदाताओं से सीधा सम्बंधित हो। इसके बाद उपलब्ध सम्बंधित साहित्य का अध्ययन करना होता है, जिसके लिये पुस्तकालय, इंटरनेट एवं ई-लाईब्रेरी का सहयोग लिया जा सकता है। इसके बाद उपकल्पना का निर्धारण करना होता है। उन्होंने बताया कि उपकल्पना ऐसा दिशासूचक होती है, जो शोधकर्ता को दिशा देता है। इससे समय, धन व शक्ति का अपव्यय रूकता है। उपकल्पना को स्रोत व्यक्त्गित अनुभव, सामान्य संस्कृति, सादृश्यता एवं वैज्ञानिक सिद्धांत होते हैं। उपकल्पना उपलब्ध प्रविधियों, साधनों के अनुकूल हो, जिसमें टूल एंड टेक्नीक का उपयोग हो सके तथा वह वैज्ञानिक सिद्धांत के अनुकूल भी हो। उन्होंने शोध तैयार करने की विधियों के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। प्रारम्भ में प्रो. धर ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर डाॅ. रविन्द्र सिंह, डाॅ. जसबीर सिंह एवं शोधार्थी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने किया।

Friday, 13 April 2018

शिक्षा विभाग में अंबेडकर जयंती पर ‘सामाजिक समरसता’ कार्यक्रम आयोजित

बाबा साहेब का संपूर्ण कृतित्व अनुकरणीय- प्रो. जैन

लाडनूँ, 13 अप्रेल, 2018 डाॅ. अंबेडकर का संपूर्ण जीवन समाज, राष्ट्र तथा मानवीयता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने दलितों के सामाजिक पुनरूत्थान, मानव सेवा तथा भारतीय लोकतंत्र की सफल स्थापना हेतु अपना महती योगदान दिया। डाॅ. अंबेडकर के जीवन एवं कृतित्व से हम सभी को प्रेरणा लेते हुए भारतीय समाज में व्याप्त विसंगतियों लैंगिक असमानता, छूआछूत, धार्मिक आधार पर भेदभाव आदि को दूर कर अखण्ड भारत के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग के अन्तर्गत आयोजित अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। कार्यक्रम के प्रभारी डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा ने भीमराव अंबेडकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में बताते हुए कहा कि बाबा साहेब ने जीवन पर्यंत बहुजन हिताय एवं बहुजन सुखाय की दिशा में कार्य किया और भारतीय लोकतंत्र के विशाल संविधान के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में मुख्यतः बी.एड. एवं बी.एस.सी. छात्राओं ने विचार व्यक्त किये और भीमराव अम्बेडकर के जीवन संबंधी मूल्यों, विद्यालय की घटनाओं तथा शैक्षिक जीवन के बारे में सभी श्रोताओं को अवगत करवाया। कार्यक्रम में अंबिका शर्मा ने एक कविता के माध्यम से डाॅ. अंबेडकर का संक्षिप्त कृतित्व प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सरिता फिड़ौदा ने अनेक संस्मरणों के माध्यम से बाबा साहेब के अछूते पहलुओं पर प्रकाश डाला। सुविधा जैन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन तथा संविधान निर्माण में अंबेडकर जी के महनीय कार्यों की झलकियां प्रस्तुत की।
इस अवसर पर विभाग में सभी छात्राओं एवं संकाय सदस्यों द्वारा ‘सामाजिक समरसता’ कार्यक्रम की आयोजना की गई जिसका प्रमुख उद्देश्य धर्म, जाति, क्षेत्रीयता पर आधारित भेदभाव को भुलाकर सामूहिक रूप से भोजन ग्रहण किया। इस कार्यक्रम द्वारा सभी भावी शिक्षकों को समानता, बंधुत्व एवं धर्मनिरपेक्षता के मूल्य अपनाने की प्रेरणा प्राप्त हुई। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. गिरधारीलाल शर्मा ने किया। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भट्नागर, डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. गिरिराज भोजक, डाॅ. आभा सिंह, सुश्री मुकुल शर्मा आदि उपस्थित रहे।

Workshop Report "Connecting and Engaging Jain Institutions for a Better Tomorrow".






संस्थान में अभिनन्दन एवं मंगलभावना समारोह आयोजित

विकास के लिये आवश्यक हैं शीतलता, गांभीर्य व पुरूषार्थ के गुण - मुनि जयकुमार

लाडनूँ, 31 मार्च 2018। मुनिश्री जयकुमार ने कहा है कि हर व्यक्ति विकास की दौड़ में लगा हुआ है, लेकिन विकास के पैमाने के बारे में भी सोचा जाना चाहिये। कोई आर्थिक विकास और कोई भौतिक विकास को ही विकास मान कर चल रहा है। इस तकनीक के युग में होने वाला यह विकास व्यक्ति का उध्र्वारोहण करता है या नहीं अथवा यह केवल शारीरिक व मानसिक शोषण का कारण ही बन रहा है। चेतना को पतन की ओर नहीं ले जाना चाहिये। स्वयं के विकास के लिये तय पैमाने के अनुसार व्यक्ति को शीतल, पराक्रमी और गंभीर होना चाहिये। वे यहां संस्थान के सेमिनार हाॅल में आयोजित अभिनन्दन एवं मंगलभावना समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने को केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखें। भीतर की प्रज्ञा का जागरूक बनना आवश्यक है। व्यक्ति चन्द्रमा की तरह से शीतल और शांत होना चाहिये। व्यक्ति भीतर से शीतल होगा व भावनायें शांत होंगी तो उसके सोचने की शक्ति दुगुनी हो जाती है। चिंतायें व तनाव विकास में बाधक बनती हैं। व्यक्ति सूर्य की भांति तेजस्विता, पराक्रमी और पुरूषार्थी होना चाहिये। अगर कोई पुरूषार्थ नहीं करता है तो वह स्वयं को धोखा देता है। इसके अलावा व्यक्ति को सागर की तरह से गहरा व गंभीर होना चाहिये। अगर भीतर गंभीरता नहीं होगी तो विश्वसनीयता नहीं रह सकती। मर्यादा, अनुशासन एवं गंभीरता हो तो तभी शिक्षा का महत्व होता है।
संस्थान के कुुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने इस अवसर पर मुनिश्री जयकुमार का स्वागत करते हुये बताया कि वे ऐसे तपस्वी व साधक संत हैं, जिन्होंने अपने साधना-काल में बरसों तक लेट कर शयन नहीं किया। वे आराम के लिये केवल बैठ कर ही विश्राम करते रहे हैं। उन्होंने मुनिश्री जयकुमार को सरल प्रवृति का बताया तथा कहा कि उनका यहां सेवा केन्द्र के व्यवस्थापक के रूप में लाडनूँ विराजना काफी आह्लादकारी है तथा यह विकास का कारण बनेगा। मुनि स्वस्तिक कुमार ने कहा कि संत किसी समाज से बंधकर नहीं चलते। समाज उनकी व्यवस्थायें करते हैं, लेकिन संत समस्त संसार के लिये होते हैं। मुनि मुदित कुमार व मुनि सुपारस कुमार ने व्यक्ति को सदैव गतिशील रहने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में जैन विश्व भारती के ट्रस्टी भागचंद बरड़िया, जीवन मल मालू, निदेशक राजेन्द्र खटेड़, संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, प्रो. दामोदर शास्त्री, वित्ताधिकारी आरके जैन, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी आदि ने सम्बोधित किया तथा संतों को सदैव चलने वाला और सम्पूर्ण मानवता के लिये समर्पित बताया। कार्यक्रम में डाॅ. जसबीर सिंह, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, प्रगति भटनागर, सोनिका जैन, दीपक माथुर, नुपूर जैन आदि उपस्थित रहे।