Saturday, 11 August 2018

संस्थान के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान मे दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन

समाज में नैतिकता व सेवा के विस्तार के लिये हो शिक्षा का उपयोग- प्रो. त्रिपाठी


लाडनूँ, 6 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुये आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि कोरी शिक्षा सारहीन और निर्जीव होती है। शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज में नैतिकता के विस्तार और सेवा कार्य को प्रसारित करना होता है। इस सम्बंध में जैन विश्वभारती संस्थान के समाज कार्य विभाग के छात्र समाज सुधार व सेवा कार्यों में निरन्तर लगे हुये हैं तथा समाज को नशाबंदी, स्वच्छता, रोगमुक्ति आदि के कार्यक्रमों के साथ जन जागृति के उत्तम कार्य को ध्येय बनाकर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि समाज में केवल उन्हीं लोगों का लोग अनुकरण करते हैं, जो चरित्रवान होते हैं। प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान की विशेषताओं, व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं के बारे में भी बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने एम.एसडब्लू. के दो वर्षीय पाठ्यक्रम का वर्णन प्रस्तुत किया तथा कहा कि अनुशासन और मूल्यों का पालन इस संस्थान की विशेषता है। यहां नैतिक मूल्यों को शिक्षा के साथ जोड़ा गया है, जो आज समाज के लिये सबसे ज्यादा जरूरी बन गये हैं। कार्यक्रम में इन्द्रा राम पूनिया, चांदनी सिंह आदि शोधार्थी, विद्यार्थी एवं व्यख्यातागण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अंकित शर्मा ने किया।

Monday, 6 August 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा सुजानगढ की छात्राओं के लिये संस्थान द्वारा निःशुल्क बस सेवा शुरू

लाडनूँ, 6 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा सुजानगढ से आने वाली छात्राओं के लिये नई बस सेवा सोमवार को शुरू की गई है। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष नये सत्र में प्रवेश लेने वाली सभी छात्राओं के लिये एक साल तक यह बस सेवा निःशुल्क रहेगी। गौरतलब है कि संस्थान के अधीन संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की छात्राओं के लिये संस्थान में बेहतरीन सुविधाओं से युक्त छात्रावास सुविधा उपलब्ध है, वहीं विभिन्न ग्रामीण अंचलों से आने वाली छात्राओं के लिये वाहनों की सुविधा भी दी जा रही है।


Friday, 3 August 2018

नवागन्तुक विद्यार्थियों का स्वागत कार्यक्रम का आयोजन

आचार के बिना महत्वहीन है ज्ञान- डाॅ. समणी संगीतप्रज्ञा

लाडनूँ, 3 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के प्राकृत एवं संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी सगीत प्रज्ञा ने कहा है कि ज्ञान तभी सार्थक बन सकता है, जब आचार उन्नत होता है। बिना आचार के ज्ञान महत्वहीन हो जाता है। ज्ञान और आचरण दोनों के समान रूप से उन्नत होने से ही व्यक्तित्व का विकास होता है और जीवन में व्यक्ति सफल बन पाता है। वे यहां अपने विभाग के नवागन्तुक विद्यार्थियों के स्वागत के लिये किये गये आयोजन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत वार्तालाप के लिये प्रेरित किया तथा उन्होंने कहा कि जितना अध्ययन करें, वह जागरूकता पूर्वक करे, ताकि उसे अन्य के लिये भी अध्यापन में सहायक बनाया जा सके। वरिष्ठ संस्कृत विद्वान प्रो. दामोदर शास्त्री ने इस अवसर पर कहा कि जब व्यक्ति अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेता है तो उसे अपनी पूरी शक्ति को केन्द्रित करके झोंक देना चाहिये। अपनी शक्ति का विकिरण करना विद्यार्थी के लिये हानिकर सिद्ध होता है। इस अवसर पर संस्थान में शिक्षा ग्रहण करने आये विदेशी विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि यह संस्थान अपने आप में विलक्षण है, जहां विद्यार्थी शिक्षा के साथ नैतिकता सीखते हैं। कार्यक्रम में सभी नव-प्रवेशित विद्यार्थियों ने अपना परिचय प्रस्तुत किया। उन्हें भी फैकल्टी से परीचित करवाया गया। कार्यक्रम के दौरान विविध गेम्स भी खिलाये गये। कार्यक्रम का प्रारम्भ मुमुक्षु बहिनों के मंगलाचरण से किया गया। अंत में मुमुक्षु दर्शिका ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन मुमुक्षु वंदना व करिश्मा ने किया।

Thursday, 2 August 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन

जीवन में मूल्यों के धारण से निखरता है व्यक्तित्व- कक्कड़

लाडनूँ, 2 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का शुभारम्भ यहां कुलसचिव वीके कक्कड़ के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने की तथा दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, डाॅ. हेमलता जोशी व डाॅ. विनोद सियाग विशिष्ट अतिथि थे। शिविर का शुभारम्भ करते हुये कुलसचिव वीके कक्कड़ ने कहा कि व्यक्ति के जीवन का समुचित विकास तभी कहा जायेगा, जब उसका व्यक्तित्व संतुलित और निखार वाला हो। व्यक्तित्व में निखार आता है मूल्यों को जीवन में उतारने से। नैतिक मूल्यों के धारण से सम्पूर्ण मानवता पोषित होती है। व्यक्ति का दृष्टिकोण बदल जाता है। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि जीवन में उच्च चरित्र ही सफलता का मापदंड होता है। इसे ध्यान में रखते हुये इस जैन विश्वभारती संस्थान में चरित्र निर्माण पर पूरा जोर दिया गया है। उन्होंने शिविर के सम्भागियों को संस्थान में संचालित पाठ्यक्रमों, विशेषताओं, व्यवस्थाओं व सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। शिविर के समन्वयक डाॅ. अशोक भास्कर ने प्रेक्षाध्यान, योग व जीवन विज्ञान के बारे में बताया तथा इनके माध्यम से व्यक्तित्व विकास के मार्ग पर प्रकाश डाला। शुभारम्भ के पश्चात के सत्र में सभी सम्भागियों को कायोत्सर्ग का अभ्यास करवाया गया।

Saturday, 28 July 2018

संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

धर्मग्रंथ भी वृक्षों की रक्षा का संकल्प दिलाते हैं- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 28 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में शनिवार को सावन मास के प्रथम दिवस पर संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी़ के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बिल्व, नीम्बू, अनार, गुलाब आदि विभिन्न पौधों को लगाया गया। पौधों की व्यवस्था छात्राध्याओं ने स्वयं के स्तर पर की। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. त्रिपाठी़ ने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों में वृक्षों के लिये बहुत ही सकारात्मक वर्णन दिया गया है। उनकी रक्षा, पालन और यहां तक कि पीपल, बड़ आदि वृक्षों का पूजन तक इस आशय से किया गया है कि आमजन के मन में वृक्षों को बचाने की भावना व्याप्त रहे। उन्होंने विश्व स्तर पर पर्यावरण के संकट से बचने के लिये वृक्षों की उपादेयता के बारे में बताया तथा कहा कि पेड़ लगाने का एक स्वतः स्फूर्त आंदोलन होना चाहिये। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन, अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, दूरस्थ शिक्षा की उपनिदेशक नुपूर जैन, डाॅ. प्रगति भटनागर, कमल मोदी, मधुकर दाधीच, सोनिका जैन, अभिषेक चारण, सोमवीर, बलवीर, रत्ना चैधरी आदि उपस्थित थे।

Friday, 27 July 2018

जैन विश्वभारती संस्थान में गुरू पूर्णिमा पर कार्यक्रम का आयोजन

जैन विश्वभारती  संस्थान में गुरू पूर्णिमा पर कार्यक्रम का आयोजन

अज्ञान मिटा कर ज्ञान का दीप जलाने वाला ही गुरू- मुनि जयकुमार

लाडनूँ, 27 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती  संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में गुरू पूर्णिमा पर कार्यक्रम में मुनिश्री जयकुमार ने कहा है कि जो भीतर की गुरूता को, अन्तर की चेतना को और विवेक को जागृत करें वही गुरू होता है। वे यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के महाप्रज्ञ सभागार में नियमित ध्यान व प्रार्थना के पश्चात गुरू पूर्णिमा पर्व को लेकर समस्त स्टाफ को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरू की पहचान यह है कि वह अज्ञान को खत्म करता है, भीतर में ज्ञान के दीप को प्रज्ज्वलित करता है। गुरू अच्छे मार्ग को प्रशस्त करता है और करणीय व अकरणीय कर्म के विवेक को जागृत करता है। गुरू अपने शिष्य में भी गुरूतत्व का जागरण करता है। इससे पूर्व मुनिश्री ने सबको गहरे ध्यान के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, उप कुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, दीपाराम खोजा, डाॅ. बी. प्रधान, विजयकुमार शर्मा, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. विकास शर्मा, डाॅ. अशोक भास्कर आदि उपस्थित थे। इसके अलावा संस्थान के शिक्षा विभाग में भी गुरू पूर्णिमा पर्व मनाया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने इस अवसर पर कहा कि गुरू के विचारों को आत्मसात करें, वे हमारे संकटों में पाथेय प्रदान करेंगे। डाॅ. आभासिंह, छात्राध्यापिका कंचन कंवर, सरिता फिरौदा, पल्लवी, अंजलि, पूजा गौड़ आदि ने भी अपने विचार कविता, भाषण व कहानी के रूप में व्यक्त किये। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. गिरधारी लाल, मुकुल सारस्वतए दिव्या जांगिड़ आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन देवी लाल ने किया।

गुरू शिष्य को ढालता है - प्रो. त्रिपाठी

महर्षि वेदव्यास के जन्मजयन्ती के उपलक्ष्य में गुरू पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। वैसे पुराणों में भगवान शिव को आदि गुरू माना गया है। उन्होंने शनि और परशुराम को शिष्य के रूप में शिक्षा दी थी। इसलिये उन्हें आदि गुरू माना गया है। यह बात आचार्य कालु कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने गुरू पूर्णिमा पर्व पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कही। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरू शिष्य की बहुत ही उज्ज्वल परम्परा रही है। शंकराचार्य को भी उनके गुरू गौड़पाद ने बनाया था। रामबोला को तुलसीदास गुरू नरहरिदास ने बनाया था तथा शिवाजी प्रसिद्ध हुए अपने गुरू रामदास की शिक्षा के कारण। विवेकानन्द को भी उनके गुरू रामकृष्ण ने बनाया था। सिकन्दर ने अपने गुरू अरस्तु से एक बार कहा था कि एक अरस्तु सैकड़ों सिकन्दर बना सकता है, किन्तु सैकड़ों सिकन्दर मिलकर भी एक अरस्तु नहीं बना सकते। ऐसी होती है गुरू की महिमा। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि निर्मल भावों से गुरू का आदर और सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के हिन्दी व्याख्याता अभिषेक चारण द्वारा आदिकाल से आधुनिक काल तक गुरू के महत्त्व को व्याख्यायित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सोमवीर सागवान द्वारा किया गया।

Thursday, 26 July 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में तीन दिवसीय आमुखीकरण एवं प्रेक्षाध्यान शिविर का आयोजन

चैम्पियन बनने तक संघर्ष जारी रखें- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 26 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में गुरूवार को तीन दिवसीय आमुखीकरण एवं प्रेक्षाध्यान शिविर का शुभारम्भ कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ द्वारा किया गया। यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में आयोजित शुभारम्भ समारोह को सम्बोधित करते हुये कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने हर काम उत्साहपूर्वक करने के लिये प्रोत्साहित करते हुये कहा कि किसी का समय कभी निकलता नहीं है, बल्कि हमेशा वर्तमान समय का सुदपयोग करें। उन्होंने कहा कि तब तक लड़ना जरूरी है, जब तक कि चैम्पियन नहीं बन जावें। हारते-हारते ही शिखर पर पहुंचा जा सकता है। हर काम को तुरन्त करें, उसे टालें कभी नहीं। काम को उत्साहपूर्वक करने से ही जीवन में बदलाव आयेगा और जीवन रोमांचित बनेगा, आगे बढने में इससे मदद मिलेगी। प्रो. दूगड़ ने कहा कि जीवन में कभी भी नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करें। मूल्यों पर हमेशा अडिग रहें, तभी जल्दी विकास संभव है। उन्होंने मैत्री के विकास के सम्बंध में बताया कि कठिनाई के समय किसी के साथ खड़ा होंगे, तो वह व्यक्ति सदा के लिये आपका बन सकता है, चाहे वह आपका विरोधी भी रहा हो। उन्होंने किसी के लिये प्रतिक्रिया करने के बजाये शांत रहने व सहिष्णु बनने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि जो प्रतिक्रिया करता है, वह हमेशा पराजित होता है। शांत रहने पर सामने वाले पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव कायम होता है। उन्होंने प्रेक्षाध्यान पद्धति को ध्यान की श्रेष्ठ प्रणाली बताते हुये कहा कि विदेशों में भी प्रेक्षाध्यान के प्रशिक्षक तैयार हो रहे हैं। प्रेक्षाध्यान की देश-विदेशों में बहुत चर्चा हुई है। अमेरिका, बेल्जियम आदि देशों से विदेशी लोग यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में भी प्रेक्षाध्यान व योग सीखने के लिये आते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को ए-श्रेणी प्राप्त एक उच्च स्तर का संस्थान बताते हुये कहा कि नैतिक मूल्यों के लिये यह संस्थान विख्यात है।

हर क्रिया से मन की संगति आवश्यक

जैन विद्या एवं तुलनात्मक धम्र व दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने प्रेक्षाध्यान शिविर के तीन दिनों को जीवन को दिशा देने वाला बताया तथा कहा कि गति से अधिक दिशा महत्वपूर्ण होती है। अगर दिशा सही नहीं हो तो गति अधिक होने पर भी लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने भावक्र्रिया को ऐसी विधि बताई, जिसमें हर पल व्यक्ति ध्यान में रहता है। उन्होंने कहा कि जो भी गतिविधि करें, उसके साथ मन का जुड़ा होना जरूरी है। क्रिया के साथ मन जुड़ा रहे तो वह भावक्रिया ध्यान बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अच्छी संगति और एकाग्रता को आवश्यक बताते हुये कहा कि प्रेक्षाध्यान से एकाग्रता का विकास होता है और छात्राओं में स्मरण शक्ति भी बढती है।

प्रेक्षाध्यान से जीवन में बदलाव संभव

प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने इस अवसर पर प्रेक्षाध्यान को महाप्रज्ञ प्रणीत ध्यान की बेजोड़ प्रणाली बताया तथा कहा कि इसे विश्व भर में स्वीकारा जा गया है। इससे जीवन में बदलाव लाया जाना संभव है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रगति भटनागर ने किया। शिविर में प्रथम सत्र में प्रेक्षाध्यान व योग का अभ्यास पारूल दाधीच व निकिता उत्तम ने करवाया। अंतिम सत्र में प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने छात्राओं को संस्थान के विभागों, पाठ्यक्रमों, व्यवस्थाओं, विशेषताओं आदि की जानकारी दी। यह तीन दिवसीय शिविर नवप्रवेशित छात्राओं के आमुखीकरण के साथ उन्हें ध्यान पद्धति से परीचित करवाने के लिये किया जा रहा है।

तीन दिवसीय प्रेक्षाध्यान षिविर में दूसरे दिन व्यक्तित्व विकास को किया व्याख्यायित

27 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में चल रहे त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर के दूसरे दिन जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संस्थान के डिप्टी रजिस्ट्रार डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने छात्राओं को व्यक्ति जीवन में व्यक्तित्व के महत्त्व को व्याख्यायित करते हुए बताया कि व्यक्तित्व विकास में कद व सुन्दरता मायने नहीं रखती बल्कि व्यक्ति के गुण व उसकी जीवन के प्रत्येक पहलू के प्रति सकारात्मकता ही उसके सफल व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होती है, वहीं द्वितीय सत्र में शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन द्वारा ‘‘छात्राओं के व्यक्तित्व विकास में शिक्षा की भूमिका’’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन के साथ-साथ सतत् परिश्रम एक सफल व्यक्तित्व का निर्माण करता है। इस अवसर पर संस्थान के व्याख्याता अभिषेक चारण, कमल कुमार मोदी, मधुकर दाधिच, डाॅ. बलवीर सिंह, सोनिका जैन, सुश्री रत्ना चैधरी एवं नीतू सुथार आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रगति भटनागर द्वारा किया गया। शिविर में छात्राओं को प्रेक्षाध्यान एवं योग का अभ्यास जीवन विज्ञान विभाग की शोधार्थी सुश्री पारूल दाधिच एवं निकिता उत्तम द्वारा करवाया गया।

नैतिक मूल्यों के समावेश से जीवन में परिवर्तन आता है- प्रो. धर

लाडनूँ, 28 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय आमुखीकरण एवं प्रेक्षाध्यान शिविर का शनिवार को समारोह पूर्वक समापन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि शोध निदेशक प्रो. अनिल धर ने कहा कि जीवन में मूल्यों का अपना महत्व होता है। उनके बिना जीवन सारहीन बन जाता है। नैतिक मूल्यों का समावेश जीवन को आमूल-चूल रूप से बदल देता है तथा जीवन में सुदृश फूलों की खुशबू भर जाती है। समारोह के मुख्य वक्ता अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि जीवन में समय की पाबंदी को महत्व अवश्य दें। समय पर किये गये कार्य ही सुफल देने वाले होते हैं। दीर्घसूत्रता से जीवन में बिगाड़ आता है। उन्होंने कहा कि हर छात्रा को अपने आप को पहचानना चाहिये। स्व को जानने से ही उसका लक्ष्य परिपक्व हो सकता है। इससे पूर्व प्रचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने तीन दिवसीय शिविर का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा कहा कि यह शिविर छात्राओं के जीवन में सकारात्मकता भरेगा। शिविरार्थी छात्राओं सरिता शर्मा, संध्या वर्मा, शिवानी आचार्य आदि ने अपने अनुभव अन्य छात्राओं के साथ साझा किये। शिविर का अंतिम दिवस व्यक्तित्व विकास एवं आमुखीकरण पर केन्द्रित रहा। सभी शिविरार्थी छात्राओं ने इस अवसर पर वृक्षारोपण करके अपने संकल्प को मजबूत किया। शिविर के अंतिम सत्र में योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने छात्राओं को लाफिंग थैरेपी से परीचित करवाया तथा अभ्यास करवाते हुये उसके लाभ बताये। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. बलवीर सिंह चारण ने किया।

Wednesday, 25 July 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

पर्यावरण रक्षा के लिये श्रेष्ठ है वृक्षारोपण- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 25 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के तत्वावधान में बुधवार को संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के नेतृत्व में एवं विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में नीम्बू, अनार, बिल्व, गुलाब आदि विभिन्न पौधों को लगाया गया। पौधों की व्यवस्था छात्राध्यापिकाओं ने स्वयं के स्तर पर की। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दूगड़ ने छात्राओं को प्रेरणा देते हुये कहा कि वृक्ष हमारे जीवनदायी होते हैं, इनके महत्व को समझ कर हमें जीवन में वृक्षारोपण के साथ उनकी समुचित देखरेख, पोषण एवं वृक्षों को बचाने की तरफ ध्यान देना चाहिए। वैश्विक चिंता के रूप में उभरे पर्यावरण संकट से बचने का सबसे उत्तम उपाय वृक्षारोपण है। इस अवसर पर उप कुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, विताधिकारी राकेश कुमार जैन, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. भाबाग्रही प्रधान, डाॅ. आभा सिंह, सुनिता इंदौरिया, डाॅ. सरोज राय डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. गिरधारी लाल शर्मा आदि पूरे स्टाफ एवं छात्राओं ने वृक्षारोपण में अपनी सहभागिता निभाई।
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जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में कार्मिकों के लिये नियमित ध्यान का कार्यक्रम

पूर्ण चैतन्य के लिये जरूरी है प्रेक्षाध्यान- मुनि जयकुमार

लाडनूँ, 25 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के महाप्रज्ञ सभागार में मुनिश्री जयकुमार ने कहा कि ध्यान से व्यक्ति शारीरिक, मानसिक व भावात्मक रूप से स्वस्थ बनता है। इसमें कायोत्सर्ग, श्वास प्रेक्षा, अनुप्रेक्षा आदि विधियां व्यक्ति को पूर्ण चेतन बनाने में महत्वपूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस विधि से प्रतिदिन नियमित रूप से ध्यान किया जाये, तो जीवन में बदलाव आ सकते हैं। वे संस्थान के स्टाफ को नियमित ध्यान करवा रहे थे। उन्होंने विधिपूर्वक सबको प्रेक्षाध्यान का अभ्यास करवाया। संस्थान में नियमित रूप से चलने वाले ध्यान व प्रार्थना का यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के निर्देशानुसार मुनिश्री जयकुमार के सान्निध्य में शुरू किया गया है। वे हर माह 15 दिन स्वयं उपस्थित रह कर संस्थान के शैक्षणिक व शिक्षणेत्तर कार्मिकों को ध्यान करवायेंगे एवं ध्यान का महत्व समझायेंगे। संस्थान स्टाफ ने इसे अभिनव कार्यक्रम बताया है।

Friday, 20 July 2018

एमएसडब्लू के विद्यार्थियों का कैम्पस रिक्रूटमेंट का आयोजन

लाडनूँ, 20 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग में कैम्पस रिक्रूटमेंट का आयोजन किया गया। इसके लिये जोधपुर के एनजीओ उन्नत शैक्षणिक विकास संगठन की टीम ने एमएसडब्लू के 12 विद्यार्थियों का परीक्षण किया। समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने बताया कि संस्था द्वारा कुल 7 विद्यार्थियों का चयन किया जाना है, इसके लिये एनजीओ द्वारा समूह चर्चा एवं साक्षात्कार का आयोजन किया जाकर उनका परीक्षण किया गया।

Thursday, 19 July 2018

संस्थान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग तथा इंटरनेशनल स्कूल फोर जैन स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय योग एवं मेडिटेशन स्टडीज विषयक पर अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

चेतना के उच्च स्तर पर पहुंचाने का मार्ग है प्रेक्षाध्यान- मुनिश्री जयकुमार

लाडनूँ, 19 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग तथा इंटरनेशनल स्कूल फोर जैन स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय योग एवं मेडिटेशन स्टडीज विषयक अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला में अमेरिका से आये विद्यार्थियों को मुनिश्री जयकुमार ने आत्मा व शरीर के पृथक अस्तित्व, चेतना के उध्र्वारोहण, मोक्ष एवं प्रेक्षाध्यान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रेक्षाध्यान से व्यक्ति शरीर और आत्मा की सता को अलग-अलग अनुभव कर पाने में सक्षम हो सकता है। प्रेक्षाध्यान से चेतना के उच्च स्तर तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने जैन मान्यता के अनुसार मोक्ष और मोक्ष प्राप्ति के उपाय के बारे में भी बताया। मुनि जयकुमार ने अमेरिकन विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान भी किया। समणी विनयप्रज्ञा ने इन विद्यार्थियों ने प्रेक्षाध्यान की साधना विधि के बारे में बताया तथा कार्यशाला के सभी संभागियों को प्रेक्षाध्यान का अभ्यास करवाया। इससे पूर्व योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने संभागियों को बताया कि प्रेक्षाध्यान साधना की सरलतम विधि है, जिसके परिणाम वैज्ञानिक कसौटी पर खरे उतरे हैं। उन्होंने आसन व ध्यान के प्रयेाग करवाये तथा अमेरिका से आये इन संभागियों को लाडनूँ के प्राचीन दर्शनीय स्थल बड़ा जैन मंदिर में दर्शन करवाये। मंदिर में भूगर्भ से निकले मंदिर, सरस्वती की कलात्मक प्रतिमा आदि को देखकर अभिभूत हो गये। उन्होंने यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के हरीतिमा युक्त सुन्दर व स्वच्छ वातावरण, मयूरों के स्वच्छंद विचरण आदि को भी श्रेष्ठ बताया तथा कहा कि ध्यान व साधना के लिये यह स्थान सबसे बेहतरीन है। यहां उन्होंने आचार्य तुलसी स्मारक पर भक्तामर स्त्रोत का पाठ भी किया। कार्यशाला में भाग लेने वाले सम्भागियों में अमेरिका से आये प्रो. चैपल, डेरिया ग्रिगोरेवा, लिजाबेथ मारीक्रूज, लिडीया जेन लुसियाना, सुसान लुइस, कैथरीन फ्रांसिस वेम, केरिन एलिजाबेथ, स्टेफनी क्रिस्टीना, सुवान मेगन मेकनैली, जैसन रे व आशी शामिल थे।

योग है व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 21 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग तथा इंटरनेशनल स्कूल फोर जैन स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय योग एवं मेडिटेशन स्टडीज विषयक अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने अमेरिका से आये विद्यार्थियों से कहा कि पूरे विश्व में जैन संस्कृति के विभिन्न पहलुओं, सिद्धांतों एवं प्रेक्षाध्यान व योग के प्रति रूझान बढा है। अनेक देशों के विश्वविद्यालयों में जैन चैयर की स्थापना की गई है तथा प्रेक्षाध्यान व योग को विषय बनाया गया है। उन्होंने विश्व के अनेक विश्वविद्यालयो मेसे जैन विश्वभारती संस्थान के एमओयू के बारे में भी बताया। प्रो. दूगड़ ने योग को जीवन का ऐसा विषय बताया, जो व्यक्ति का सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होता है। उन्होंने जैन विश्वभारती संस्थान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के अन्तर्गत स्थापित विभिन्न प्रयेागशालाओं के बारे में बताया तथा उनमें किये जाने वाले प्रयोगों के आधार पर कायम तथ्यों को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यशाला के सभी संभागियों को प्रतीक चिह्न प्रदान करके सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रो. चैपल ने कुलपति को अमेरिका के लाॅस एंजिल्स स्थित लोयेला मैरीमाइंड यूनिवर्सिटी के बारे में जानकारी दी तथा कहा कि दोनों विश्वविद्यालयों के बीच जैनिज्म एवं प्राच्य विद्याओं के अध्ययन-अध्यापन को लेकर भागीदारी संभव है।

संयम से सभी समस्याओं का समाधान संभव

इससे पूर्व कार्यशाला के संभागियों ने यहां भिक्षु विहार में विराजित मुनि जयकुमार से विभिन्न समसामयिक विषयों पर चर्चा की। मुनिश्री ने उन्हें बताया कि भ्रूण हत्या, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, भोजन विवेक आदि के बारे में जैन पक्ष सबसे श्रेष्ठ कहा जा सकता है, जिसमें संयम को महत्व दिया जाता है। संयम का पालन करने से समस्यायें उत्पन्न ही नहीं होंगी। जैन धर्म हिंसा को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करता है। फिर भ्रूण हत्या को किसी भी कारण से स्वीकार नहीं हो सकती है। योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने प्रेक्षाध्यान के वैज्ञानिक पक्ष को प्रस्तुत करते हुये संभागियों को अब तक किये गये शोध कार्यों के बारे में जानकारी दी और बताया कि विभिन्न शारीरिक व मानसिक रोगों को प्रेक्षाध्यान के प्रयोगों से उपचारित किया जाना संभव है। समणी विनयप्रज्ञा ने कार्यशाला में प्रेक्षाध्यान की उपसंपदाओं के बारे में बताया। मियामी अमेरिका की फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर समणी सत्यप्रज्ञा व समणी रोहिणी प्रज्ञा ने इस अवसर पर सभी संभागियों को अमेरिका के भामास में प्रेक्षाध्यान पर होने वाली 4 दिवसीय कार्यशाला में आमंत्रित किया। उन्होंने कैलिफोर्निया में होने वाले विविध प्रेक्षाध्यान कार्यक्रमों के बारे में बताया।

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन

भारतीय चिंतन परम्परा की हर धारा में है योग का समावेश- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 19 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा है कि वैदिक व श्रमण परम्परायें भारतीय चिंतन परम्परा की दो अलग-अलग धारायें कही जाती है, लेकिन दोनों ही परम्पराओं में योग को किसी न किसी रूप में स्वीकार किया गया है। वैदिक परम्परा में वेद, उपनिषद, गीता आदि में योग सम्बंधी उद्देश्यों को प्रस्तुत करते हुये उनकी व्याख्या की गई है तथा योग का व्यवस्थित चिंतन वैदिक परम्परा में प्रस्तुत किया गया है, जिनमें योग का उद्देश्य ही नहीं योग की सार्थकता तक सम्पूर्ण अभिव्यक्ति की गई है। श्रमण परम्परा में जैन व बौद्ध दो दर्शन हैं, इनमें से जैन परम्परा में योग को मोक्ष प्राप्ति का आधार बताया गया है और बौद्ध परम्परा में समाधि योग को व्याख्यायित करते हुये अष्टांग मार्ग एवं बौद्धों के षडांग योग को स्पष्ट किया गया है। वे यहां बुधवार आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में शुरू की गई व्याख्यान-श्रृंखला के शुभारम्भ में भारतीय चिंतन परम्परा में योग का स्वरूप विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने इस अवसर पर शिक्षकों द्वारा इस सम्बंध में प्रस्तुत जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। क्षेत्र के इस एकमात्र महिला महाविद्यालय में शिक्षा के स्तर को उच्चता दिये जाने के लिये शिक्षकों में अनुसंधान प्रवृत्ति एवं गुणवत्ता की वृद्धि के लिये इस व्याख्यान श्रृंखला की शुरूआत की गई है। इसके अन्तर्गत प्रत्येक 15वें दिन में अलग-अलग विषय पर केन्द्रित व्याख्यान का प्रावधान किया गया है, जिसमें शिक्षक अपने शोधपूर्ण आलेख की प्रस्तुति देगा और उस पर सभी शिक्षक मिल कर चिंतन व चर्चा भी करेंगे। महाविद्यालय में विगत वर्ष भी यह व्याख्यान श्रृंखला सफलता पूर्वक संचालित की गई थी।

Wednesday, 11 July 2018

जैन विश्वभारती (मान्य विश्वविद्यालय) में आचार्य महाप्रज्ञ के 99वें जन्मदिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

विविधता में है सृष्टि का सौंदर्य - प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 11 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के द्वितीय अनुशास्ता एवं तेरापंथ धर्मसंघ के दसवें आचार्यश्री महाप्रज्ञ की 99वीं जयंती के अवसर पर यहां संस्थान के सेमिनार हाॅल में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन के उद्धरण व संस्मरण प्रस्तुत करते हुये कहा कि व्यक्ति में सहनशीलता का गुण आवश्यक है, क्योंकि यह सर्वमान्य तथ्य है कि जो सहता है, वही रहता है। सहन नहीं करने पर नुकसान ही होता है तथा अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिये सहने की प्रवृति आवश्यक है। उन्होंने महाप्रज्ञ के विचारों को उद्धृत करते हुये कहा कि सृष्टि का सौंदर्य विविधता में है, जबकि संकीर्णता मनुष्य की सोच होती है। इसलिये सृष्टि की देन को स्वीकार करने का मतलब अस्तित्व को स्वीकार करना होता है। उन्होंने आचार्य महाप्रज्ञ की मेधाशक्ति का जिक्र करते हुये कहा कि वे संस्कृत, प्राकृत व हिन्दी ही जानते थे, अंग्रेजी नहीं, लेकिन जब उन्होंने अंग्रेजी की व्यापकता को देखा तो आॅक्सफोर्ड डिक्सनरी को पूरा कंठस्थ कर लिया। इस अवसर पर उन्होंने अनुशास्ता की देन के महत्व को प्रस्तुत किया तथा बताया कि वे जैन विश्वभारती संस्थान जैन विद्या का केन्द्र बनाना चाहते थे। हमें इस चुनौती को स्वीकार करते हुये उसी दिशा में प्रयत्न करने चाहिये तथा जैन-स्काॅलर बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिये। कार्यक्रम में दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, शोध निदेशक प्रो. अनिल धर व शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने आचार्य महाप्रज्ञ के अनेकांत मय जीवन, उनके द्वारा प्रदत्त प्रेक्षाध्यान व जीवन विज्ञान, सापेक्ष अर्थशास्त्र, उदार प्रवृति और संत जीवन पर प्रकाश डाला और उनके विलक्षण व्यक्तित्व के बारे में बताते हुये उन्हें आधुनिक युग का विवेकानन्द बताया। कार्यक्रम के अंत में संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुये आचार्य महाप्रज्ञ की 300 से अधिक पुस्तकों की रचना, एक लाख किमी से अधिक पद यात्रा, उन्हें विश्व स्तर पर दिये गये अवार्ड आदि के बारे में जानकारी दी। डाॅ. योगेश कुमार जैन ने कार्यक्रम का संचालन किया।

Wednesday, 4 July 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अब सायंकालीन कक्षाऐं

लाडनूँ 04 जुलाई 2018। दिन में अपने व्यवसाय या सर्विस में रहने वाले व्यक्तियों के लिये भी अब अपनी नियमित कक्षाओं में उपस्थित होकर अध्ययन करना आसान हो गया है। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में इसके लिये विशेष रूप से रात्रिकालीन कक्षायें प्रारम्भ की गई है। कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने बताया कि इस सत्र से एमए स्नातकोत्तर की कक्षाओं को रात्रिकालीन किया जा रहा है, जिनसे रोजगाररत व्यक्ति नियमित अध्ययन कर पायेंगे। संस्थान के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोविन्द सारस्वत ने बताया कि ये सुविधा उनके लिए शुरू की गई है, जो कहीं सर्विस कर रहे है या स्वयं का व्यवसाय कर रहे हैं और दिन में नियमित विद्यार्थी के रूप में प्रवेश नहीं ले सकते। ऐसे विद्यार्थी नियमित छात्र के रूप मे इन सायंकालीन कक्षााओं के लिए प्रवेश ले सकते हैं। सारस्वत ने बताया कि इन रात्रिकालीन कक्षाओं में प्रवेश के लिये इच्छुक विद्यार्थियों को अपने नियोक्ता से एक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। प्रवेश के लिए स्नातक में न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य रखा गया है।

Saturday, 30 June 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के विद्यार्थियों ने बनाये 5 विश्व रिकाॅर्ड

लाडनूँ, 30 जुन 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) ने जहां योग व जीवन विज्ञान की शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तिमान कायम किये हैं, वहीं संस्थान के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के 4 विद्यार्थियों ने एक साथ 5 विश्व रिकाॅर्ड बनाकर मिसाल कायम करते हुये संस्थान की कीर्ति को चार चांद लगाये हैं। इनके द्वारा कायम विश्व रिकाॅर्ड को ‘‘गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकाॅर्ड’’ में दर्ज किया गया है, जिसे प्रमाण पत्र इन्हें जारी कर दिये गये हैं। ये चारों विद्यार्थी यहां दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से योग एवं जीवन विज्ञान विषय में स्नातकोततर पाठ्यक्रम कर रहे हैं। इनमें से लक्ष्मणगढ (सीकर) के पास के एक छोटे से गांव के रहने वाले जयपाल प्रजापत ने लगातार योगाभ्यास करते हुये दो विश्व रिकाॅर्ड कायम किये। जयपाल ने लगातार 2 घंटे 21 मिनट तक शीर्षासन करके विश्व रिकाॅर्ड बनाया। यह प्रदर्शन उसने छतीसगढ राज्य के भिलाई में किया था। इसके बाद जयपाल ने फिर गुजरात प्रांत के अहमदाबाद में लगातार 3 घंटा 33 मिनट तक मयूर चाल का प्रदर्शन करके दूसरा विश्व रिकाॅर्ड बनाया। इसी प्रकार संस्थान के दूसरे विद्यार्थी जोधपुर के रहने वाले ललित भारती ने योग मुद्रा में विश्व रिकाॅर्ड बनाया, जिन्होंने लगातार 1 घंटा 35 मिनट तक खेचरी मुद्रा का प्रदर्शन किया। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की दूरस्थ शिक्षा की मेड़ता रोड रहने वाली छात्रा जानकी प्रजापति ने भी योगासन में विश्व रिकाॅर्ड कायम किया, उसने लगातार 45 मिनट तक हनुमानासन में रहने का प्रदर्शन सफलता पूर्वक किया था। इसी प्रकार चैमूं के रहने वाले रामरस चैधरी ने तेजगति से लगातार एक सौ सूर्य नमस्कारों का प्रदर्शन करके फास्टेस्ट हंड्रेड सूर्यनमस्कार योगा का रिकाॅर्ड कायम किया है। चैधरी ने ये एक सौ सूर्य नमस्कार योग मात्र 7 मिनट 32 सैकंड में पूरे किये थे। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने इन तीनों विद्यार्थियों को चार विश्व रिकाॅर्ड कायम करने के लिये बधाई व शुभकामनायें प्रेषित की है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि इन विद्यार्थियों को आगामी दिनों में विश्वविद्यालय में समारोह आयोजित किया जाकर सम्मानित किया जायेगा।

Sunday, 24 June 2018

जैन विश्वभारती संस्थान द्वारा उपखंड स्तरीय योग समारोह का आयोजन

योग जीवन को बदलने वाली क्रिया - मुनि जयकुमार

लाडनूँ 21 जून 2018। विश्व योग दिवस के अवसर पर गुरूवार को जैन विश्व भारती स्थित अन्तर्राष्ट्रीय प्रेक्षा केन्द्र भवन में उपखंड स्तरीय योग समारोह का आयोजन जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा किया गया, जिसमें योग की विभिन्न क्रियायें, आसन, ध्यान व प्राणायाम आदि का सामुहिक अभ्यास किया गया। जैन विश्वभारती संस्थान, उपखंड प्रशासन एवं जैन विश्व भारती के संयुक्त तत्वावधान में एवं जैन मुनि जयकुमार के सान्निय में आयोजित इस योग समारोह की अध्यक्षता संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने की तथा मुख्य अतिथि विधायक मनोहर सिंह थे। मुनिश्री जयकुमार ने समारोह को सम्बोधित करते हुये कहा कि योग जीवन को बदलने वाली प्रक्रिया है। ध्यान व योग-साधना नियमित किये जाने पर ही उसके परिणाम सामने आते हैं तथा इसके सतत् अभ्यास से शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक शक्तियों का विकास भी संभव हो पाता है।
योग से हाती है चित्त की यात्रा
संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि योग जहां शरीरिक स्वास्थ्य का लाभ देता है, वहीं योग से मन एवं चित्त को भी साधा जा सकता है। इससे चित्त की यात्रा भी संभव होती है। उन्होंने योग से शरीर, मन और चित्त की यात्रा का वर्णन प्रस्तुत किया तथा कहा कि नियमित योगाभ्यास से चित्त की गहराइयों तक असर होता है और जो बदलाव आते हैं, वे स्थाई और अनुकरणीय बन जाते हैं। विधायक मनोहर सिंह ने इस अवसर पर योग को बढावा देने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि हर व्यक्ति को योग अपनाना चाहिये। उपखंड अधिकारी रामसिंह राजावत ने योग को विश्व स्तर पर मिली मान्यता को भारतीय संस्कृति की विजय बताया तथा कहा कि योग दिवस पर विश्व के लगभग सभी देशों के नागरिकगण योगाभ्यास में जुटे हुये हैं तथा योग की महत्ता के बारे में चर्चायें कर रहे हैं। संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अंत में आभार ज्ञापित करते हुये कहा कि योग मानव मात्र के लिये लाभदायक है, इसे किसी धर्म-सम्प्रदाय की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

योगासन व यौगिक क्रियाओं का अभ्यास
योग समारोह में संथान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने सभी सम्भागियों को यौगिक क्रियायें, योगासन, ध्यान, प्राणायाम आदि के अभ्यास करवाये। छात्रा ताम्बी दाधीच ने सबके सम्मुख सभी क्रियाओं का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर तहसीलदार आदूराम मेघवाल, ब्लाॅक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी श्याम सिंह चैहान, आयुर्वेद अधिकारी डाॅ. जेपी मिश्रा, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, चांद कपूर सेठी, लूणकरण शर्मा, सुशील पीपलवा, रमेश सिंह राठौड़, गिरधर राजपुरोहित, ललित वर्मा, नीतेश माथुर, राजेन्द्र माथुर, अंजना शर्मा, हनुमान मल जांगिड़ तथा क्षेत्र के सरकारी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी एवं नागरिकगण ने सामुहिक योगाभ्यास किया।

Thursday, 31 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग प्रदर्शन को यूजीसी ने लिया अपनी वेबसाईट पर

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग प्रदर्शन को यूजीसी ने लिया अपनी वेबसाईट पर

लाडनूँ, 31 मई 2018। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपनी वेब साईट के होम पेज पर जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा करवाये गये योगाभ्यास को महत्व दिया है। यूजीसी ने अपनी वेब साईट डब्लूडब्लूडब्लू डाॅट यूजीसी डाॅट एसी डाॅट इन(www.ugc.ac.in) के होमपेज पर दी गई स्लाइड में इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योगाभ्यास के योग-प्रदर्शन का फोटो अपलोड किया है। यह इस संस्थान के लिये गौरव समझा जा रहा है कि यूजीसी ने इसे इतना महत्व प्रदान किया है। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शिक्षित-प्रशिक्षित विद्यार्थी देश-विदेश में योग और धर्म व दर्शन का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं तथा विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में उच्च पदों पर योग-शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जिनमें पुलिस व सेना भी शामिल है। गौरतलब है कि जैन विश्वभारती संस्थान देश की संस्कृति, प्राच्य विद्याओं, धर्म व दर्शन, प्राच्य भाषा, योग व जीवन विज्ञान, अहिंसा एवं शाति आदि के अध्ययन व शोध लिये समर्पित मिशन के रूप में संचालित किया जा रहा है। राजस्थान पुलिस के पूर्व महानिदेशक डाॅ. मनोज भट्ट ने भी योग को अपना विषय चुनते हुये यहां से अपनी शोध सम्पन्न करके पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।

Wednesday, 30 May 2018

ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के लिए मंगल भावना एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित

समन्वय, व्यावहारिकता व सहनशीलता से मिलती है सफलता- कक्कड़

लाडनूँ, 30 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कॅरियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में संचालित ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के लिए प्रमाण पत्र वितरण समारोह एवं शिक्षा विभाग के तत्वावधान में मंगलभावना समारोह का संयुक्त आयोजन किया गया। बुधवार को यहां सेमिनार हाॅल में आयोजित इस कार्यक्रम में समर केम्प में आयोजित विभिन्न शाॅर्ट टर्म प्रोग्राम के प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया तथा शिक्षा विभाग की अनुसंधान पत्रिका ‘‘हंस वाहिनी’’ शैक्षित चिंतन का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा कि जीवन में समन्वय, व्यावहारिकता और सहनशीलता मूल्यवान गुण होते हैं और जीवन में सफलता के लिए इनकी आवश्यकता रहती है। फ्रेंड सर्किल का विस्तार के साथ उनके साथ नेटवर्किंग भी आवश्यक है। रिलेशन मेंटेन रखने के लिए लगातार संवाद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि समर कैम्प से नया सीखने को मिलता है, जिसमें उम्र का कोई प्रतिबंध नहीं है। इनमें सबसे छोटी उम्र के और वयोवृद्ध भी भाग ले रहे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग की बीएड छात्राओं की शिक्षा पूर्ण होने पर टीम वर्क से कार्य करने एवं सदैव अच्छे आइडियाज को ग्रहण करने और बुरे आईडियाज को उपेक्षित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि समाज में अधिकतम स्वीकार्यता का निर्माण करना चाहिए। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) केवल डिग्री कार्यक्रम का संचालन ही नहीं रकता बल्कि सम्पूर्ण समुदाय को जोड़ने का करता है। यह एक ऐसा विद्या केन्द्र है, जहां अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों व चरित्र की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि ये मूल्य जीवन के हर पड़ाव में साथ निभाते हैं। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कहा कि बिना मेहनत के सफलता नहीं मिल सकती है। डिग्रियों के साथ कौशल भी जरूरी होता है। श्रमनिष्ठा एवं कर्तव्यनिष्ठा से जीवन में आगे बढा जा सकता है। उन्होंने समर केम्प के बारे में कहा कि इसमें रूचि व क्षमता के अनुरूप अपना विकास कर पाने में व्यक्ति समर्थ होता है। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग की छात्राध्यापिकाओं धर्मशिखा सेन व प्रीति ने अपने अनुभव प्रस्तुत किये, वहीं समर केम्प की हेमलता शर्मा, टीना सेन, सोनिया इंदौरिया, ऋत्विक दुबे, प्रियंका स्वामी, कृष्णा अग्रवाल आदि ने भी अपने अनुभव साझा किये। उपरजिस्ट्रार डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने प्रारम्भ में स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन कॅरियर काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने किया।

Saturday, 26 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की सम्पर्क कक्षाओं का मंगल भावना समारोह आयोजित

समस्याओं से संघर्ष करें, पीठ न मोड़ें- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 26 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अन्तर्गत योग एवं जीवन विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की एक महिने की अवधि की सम्पर्क कक्षाओं के समापन पर यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में मंगल भावना समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों को यहां जो शिक्षा, मर्यादायें, नैतिक मूल्य सीखें हैं, उनका प्रसार वे जहां कहीं भी रहें अवश्य करें। उन्होंने जीवन में आने वाली समस्याओं व बाधाओं से हमेशा संघर्ष करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में कभी हार नहीं मानना चाहिए, बल्कि हर समस्या से लड़ कर उसका मुकाबला करते रहें। पीठ दिखाना कभी उचित नहीं होता। प्रो. त्रिपाठी ने योग की आराधना व साधना को दीपक की तरह से स्वयं जलकर दूसरों को रोशन करने की आवश्यकता बताई। समारोह के मुख्य अतिथि संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने इस अवसर पर गुरू गोविन्द सिंह पर आधारित एक पंजाबी गीत सुनाया और कहा कि यहां के हर विद्यार्थी में ऊर्जा का निरन्तर संचार रहे। समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, नुपूर जैन, डाॅ. अशोक भास्कर, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच थे। सभी अतिथियों को विद्यार्थियों ने श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तकें सम्मान-स्वरूप भेंट की।

सराहनीय रही सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

समारोह में रेखा, ने राजस्थानी गीत ‘‘ पिया आवो तो म्है मनड़ै री बात करल्यां.......’’ पर नृत्य प्रस्तुत किया। श्वेता कंवर ने लौंग और इलायची सम्बंधी प्रणय गीत पर पंजाबी नृत्य पेश किया, जिसे सबने खूब सराहा। सरिता रैवाड़ ने राजस्थानी घूमर गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर सबको मोहित किया। सुमन, प्रेम कंवर, राजीव, राहुल स्वामी ने गीत प्रस्तुत किये। सुनिता सारण, विनीता अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में गुरू वंदन व प्रेरणादायक विचार रखे। कार्यक्रम में पंकज भटनागर, हरिगोपाल, आशा पारीक, निकिता, प्रगति, पारूल, अंकिता आदि एवं सभी विद्यार्थी उपस्थित थे।

Friday, 25 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

यौन उत्पीड़न की घटनाओं के प्रति जागरूक रहें, हिचकिचायें नहीं- डाॅ. विश्नोई


लाडनूँ, 25 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में यौन उत्पीड़न, कानूनी अधिकार एवं न्यायिक संरक्षण विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। सिविल न्यायाधीश एवं प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडनायक (कनिष्ठ वर्ग) डाॅ. पवन कुमार विश्नोई ने कहा कि विधायिका ने बहुत सारे कानून बनाये हैं, लेकिन हर व्यक्ति उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं रखता, इसलिए विधिक साक्षरता आवश्यक है। उन्होंने पोक्सो कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे अपने साथ घटित किसी भी घटना के बारे में बताने से हिचकिचाते हैं, लेकिन अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार व हरकतों को देखकर उसका आभास लगाना चाहिए और उनके प्यार से पूछना चाहिए। अगर किसी बच्चे के साथ लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्हें नहीं रोका जाता है तो वे बड़े अपराध से जुड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी अश्लील साहित्य या ऐसी कोई वस्तु, शरीर का कोई अंग लैंगिक आशय से दिखाता है या इलेट्रोनिक उपकरणों से पीछा करता है तो वह यौन उत्पीड़न है और ऐसा किसी बच्चे के साथ करने पर वह बाल यौन उत्पीड़न होता है। उन्होंने वहां मौजूद विद्यार्थियों से कहा कि वे सदैव जागरूक रहें और कानून की जानकारी सबको प्रदान करें व कानून का उपयोग भी करें।

सोच बदलें, आवाज उठायें

सहायक लोक अभियोजक आनन्द व्यास ने बताया कि संविधान सबको मौलिक अधिकार देता है और न्यायपालिका उन अधिकारों का संरक्षण करती है। पूरे देश में यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ रही है, ये पिछले 10-15 सालों से अधिक है, क्योंकि अभिभावकों ने अपने बच्चों की उपेक्षा शुरू कर दी। जरूरी यह है कि बच्चों को खुलकर बताने का माहौल प्रदान करें। समय बदल रहा है और इसके साथ हमें भी बदलने की जरूरत है। आप अपने परिवार से इसकी शुरूआत करें, तो समाज तक बात पहुंचेगी और पिफर जिले व राष्ट्र में बदलाव आयेगा। सोच बदलें और सहन करने का आदत बदलें। जब तक पीड़ित स्वयं लड़ने के लिऐ तैयार नहीं होंगे तब तक न्याय नहीं मिलेगा तथा कोर्ट व कानून कुछ नहीं कर पाएंगे। कहीं भी गलत हो रहा है तो आंखें बंद करके नहीं निकलें, बल्कि सजग रह कर आवाज उठायें। यौन उत्पीड़न रोकने का सबसे बड़ा जिम्मा स्वयं पर ही होता है। उन्होंने बिना सहमति, इच्छा के विरूद्ध लैंगिक कृत्य करना, प्रयास करना या उकसाना, पीछा करना आदि सभी यौन उत्पीड़न बताया तथा कहा कि यह किसी भी आॅफिस, प्राईवेट क्षेत्र सभी जगह हो सकता है। उन्होंने छोटी हरकतों को महिलाओं द्वारा नहीं बताने व उनकी उपेक्षा करने से कृत्य करने वाला का हौसला बढ जाता है और वहबड़ा अपराध भी कारित कर देता है। इसलिए आवाज उठाने की हिम्मत करें, इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी।

नैतिक मूल्यों की शिक्षा आवश्यक

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अंत में अपने सम्बोधन में कहा कि अगर नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जावे तो इन समस्याओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने संयुक्त परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें यौन शोषण व अपराध संभव नहीं होते। बिरादरी की व्यवस्था में वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम, घरेलु नौकरों आदि की जरूरतें खत्म हो जाती है। उन्होंने नैतिक मूल्यों की शिक्षा को स्वीकार करना जरूरी बताया तथा कहा कि जीवन की अधिकांश मुश्किलों को इससे समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने किया। इस अवसर पर बार संघ के पूर्व अध्यक्ष चेतन सिंह शेखावत, छोगाराम बुरड़क, न्यायिक कर्मचारी कपिल व अजीज खां आदि मौजूद थे।

Tuesday, 22 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में : नृत्य, कंप्यूटर, योग, स्पोकन इंगलिश आदि का प्रशिक्षण

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में 337 प्रशिक्षणार्थी लाभान्वित


लाडनूँ, 22 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में कैरियर काउंसलिंग सेल के अन्तर्गत संचालित की जा रही ग्रीष्मकालीन कक्षाओं में शहर के 337 प्रशिक्षणार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों से लाभान्वित हो रहे हैं। काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने इन समर कक्षाओं का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि सेल के तहत अभिरूचि एवं व्यावसायिक कौशल की दृष्टि से तैयार किऐ गये कुल 10 समर प्रोग्रामों में से 8 प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं। इनमें इंटीरियर डिजाईन एंड डेकोरशन, हेयर एंड स्किन केयर, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, स्पोकन इंगलिश, योगा प्रशिक्षण, मार्शल आट्र्स, डांस, स्पोर्ट्स के पाठ्यक्रमों में ये प्रशिक्षणार्थी नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। डाॅ. दाधीच ने बताया कि जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कॅरियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में हर वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय का सदुपयोग करने के लिऐ तैयार शाॅर्ट टर्म प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं, जिनमें इस क्षेत्र के युवक-युवतियां बड़ी संख्या में लाभान्वित हो रहे हैं। रामनारायण गेणा ने बताया कि विषय विशेषज्ञ डाॅ. अशोक भास्कर, नीतू सुथार, नुपूर जैन, सोमवीर सागवान, महेश शर्मा, ताम्बी दाधीच, कमलेश जगवानी और रितू द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

Monday, 21 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आतंकवाद विरोधी दिवस पर शपथ दिलवाई

संविधान के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने वालों पर नियंत्रण आवश्यक- कक्कड़


लाडनूँ, 21 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा है कि देश का सम्पूर्ण ताना-बाना हमारे संविधान के अन्तर्गत निहित है। इस ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का कार्य ही आतंकवाद है। देश कानून या संविधान के दायरे में ही कार्य करता है, अगर उसी को छिन्न-भिन्न कर दिया जाता है तो फिर कोई नियंत्रण ही नहीं रह पायेगा। वे यहां राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने देश के हर नागरिक के लिए सजग व सर्तक रहना आवश्यक बताते हुऐ कहा कि बस या ट्रेन से सफर करने पर किसी भी लावारिश वस्तु या सामान होने पर तत्काल उसकी सूचना पुलिस को दें। जागरूकता हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है, हमें केवल सीसी टीवी कैमरों के भरोसे नहीं रहना चाहिऐ, बल्कि अपनी स्वयं की भूमिका अवश्य समझनी और निभानी चाहिऐ। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि केवल सैनिक ही आतंकवाद से निपटते रहें, यह नहीं होकर हर नागरिक को अपना कर्तव्य समझना होगा और अपने स्तर पर आतंकवाद से निपटने और उसके विरोध में भूमिका तय करनी होगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ को आतंकवाद का डटकर विरोध करने, सामाजिक सद्भाव व सूझबूझ कायम रखने, मानवीय मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की शपथ दिलवाई गई। कार्यक्रम में आर.के. जैन, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. युवाराज सिंह खंगारोत, मोहन सियोल, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. गोविन्द सारस्वत, प्रो. बीएल जैन, डाॅ. जसबीर सिंह, रमेशदान चारण आदि उपस्थित थे। इससे पूर्व शिक्षा विभाग में भी आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया गया तथा समस्त छात्राध्यापिकाओं एवं स्टाफ को भी शपथ दिलवाई गई। इस अवसर पर बीएड की छात्राओं अंजू, प्रीति स्वामी, भव्या ने आतंकवाद दिवस मनाए जाने के कारण, आतंकवाद के दुष्परिणामों एवं आतंकवाद से निपटने के उपायों के बारे में बताया। कुलसचिव विनोद कुमार कककड़ ने संविधान की रक्षा को आवश्यक बताया तथा संविधान विरोधी हरकतों से निपटना आवश्यक बताया। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने आतंकवाद को पनाह देने वालों को गलत बताया तथा कहा कि आतंकवादी किसी के नहीं होते, ये समस्त मानव जीवन के लिऐ खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने आतंकवादियों के बारे में जानकारी तत्काल पुलिस को देने की जरूरत बताई।

Wednesday, 16 May 2018

देश का अनूठा विश्वविद्यालय, जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) जहां हर चीज अलहदा है

वृद्धों व साधुओं को शिक्षा, योग व जीवन विज्ञान से व्यक्तित्व विकास, जीवन मूल्यों व मानव कल्याण को प्राथमिकता, संस्कार व कॅरियर निर्माण को बनाया शिक्षा के साथ आवश्यक

लाडनूँ, 16 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) पूरे देश में एक अनोखा विश्वविद्यालय कहा जा सकता है। यहां अन्य विश्वविद्यालयों से बिलकुल अलग माहौल है, जहां अनुशासन, चरित्र, शांति और सुरम्यता का वास मिलेगा। विद्यार्थियों में कहीं कोई उच्छृंखलता, असौम्यता या आवेश देखने को नहीं मिलेगा। सभी बिल्कुल शांत, अनुशासित व सद्प्रवृतियों से युक्त मिलेंगे। यहां का हरीतिमा युक्त प्राकृतिक, शांत, मनोरम व आध्यात्मिक वातावरण बरबस ही लोगों को आकर्षित करने में सक्षम है। जैन विद्या व प्राच्य दर्शन के विकास, प्रसार, अध्ययन व शोध के उद्देश्य से संस्थापित इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में प्राकृत, संस्कृत, योग व जीवन विज्ञान, अहिंसा एवं शांति के साथ अन्य समस्त आवश्यक शैक्षणिक विषयों एवं स्किल डेवलपमेंट के विषयों का अध्ययन भी करवाया जाता है। यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) मूल्यपरक शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए समर्पित है। इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की विशेषताओं पर गौर करेंगे तो आश्चर्य अवश्य होगा कि इस युग में भी कोई इस तरह का शिक्षण केन्द्र होगा जो प्राचीन गुरूकुलों और आधुनिक शिक्षण प्रणाली का समन्वित स्वरूप हों। इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की विशेषता है कि यहां जीविकोपार्जन के साथ जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है। इसकी गतिविधियां लाभ के लिए संचालित नहीं होकर मानव कल्याण के निमित संचालित होती है।

ध्यान व प्रार्थना से शुरू होते हैं कार्य

इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में चाहे विद्यार्थी हों या शिक्षक अथवा गैर शैक्षणिक कर्मचारी - सभी अपना कार्य नियमित प्रार्थना व ध्यान से शुरू करते हैं। यहां प्रतिदिन समस्त कर्मचारियों को प्रार्थना व ध्यान करने होते हैं तथा इसके पश्चात उनकी कार्यस्थल की दिनचर्या शुरू की जाती है। यही कारण है कि यहां का समस्त स्टाफ स्वभाव से विनम्र, अनुशासित, शांत व व्यवहारिक है। नियमित ध्यान के कारण उनके स्वभाव, व्यवहार व जीवनचर्या में बदलाव आता है और वह उनके कार्य में परिलक्षित होता है। जब स्टाफ या शिक्षक संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नम्र व शांत होंगे तो उनके आचरण को देखकर संस्कारित होने वाले विद्यार्थी भी निश्चित रूप से उनके अनुरूप ही होंगे।

अध्यात्मिक अनुशासन और दिशा-निर्देशन

यह देश का पहला संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) होगा, जिसमें कुलपति एवं कुलाधिपति के अतिरिक्त एक पद और तय किया गया है, और वह है अनुशास्ता का पद। यह पद संस्थान का संवैधानिक पद है। अनुशास्ता के पद पर धर्माचार्य होते हैं, जो संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) को अपने नैतिक निर्देशों से लाभान्वित करते हैं। जैन श्वेताम्बर तेरापथ धर्मसंघ के नौंवे आचार्य आचार्यश्री तुलसी यहां इसके अनुशास्ता थे। उनके बाद द्वितीय अनुशास्ता के रूप में आचार्यश्री महाप्रज्ञ रहे और वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अनुशास्ता है। इनकी आध्यात्मिक वैचारिक रश्मियों से सम्पूर्ण संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) आलोकित होता है और उनकी तेजस्विता से प्रभावित होता है। यह उनका ही प्रभाव है कि यहां आने वाला हर विद्यार्थी स्वतः ही अपने स्वभाव में परिवर्तन पाता है। संस्थान के समस्त शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी इन धर्मगुरूओं के प्रभामंडल से ओजस्वित रहते हैं।

प्रोफेसरों व व्याख्याताओं की मानद सेवायें

इस मायने में भी यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) सबसे अलहदा है कि यहां अपनी मानद सेवायें प्रदान करने वाले प्रोफेसरों व व्याख्याताओं की तादाद काफी है। यहां उच्च शिक्षा प्राप्त पीएचडी व नेट किये हुए समण-समणियां भी अपनी अध्यापन सेवायें प्रदान करते हैं। उनकी निःशुल्क सेवाओं का लाभ यहां संस्थान को लगातार मिलता रहा है। उनके द्वारा शिक्षण कार्य करवाये जाने से विद्यार्थियों में स्वतः ही अनुशासन, समयबद्धता, चरित्र, सामाजिक समर्पण आदि गुणों का विकास संभव हो पाता है। समणियों की निःस्वार्थ भाव से की जाने वाली संस्थान  की सेवा अपने आप में अनूठी है। इनकी सेवायें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मापदंडों पर भी खरी उतरती है।

चारित्रिक व नैतिक वार्तालाप-व्याख्यान

संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समय-समय पर विभिन्न धर्मगुरूओं, संत-महात्माओं एवं महत्वपूर्ण हस्तियों-विद्वानों के प्रवचन-व्याख्यान, वार्तालाप, चर्चा आदि का आयोजन किया जाता है, जिससे संस्थान को चारित्रिक व नैतिक सम्बल प्राप्त होता है। जीवन के प्रति दृष्टिकोण, नैतिकता के प्रसार, चारित्रिक क्षमता वृद्धि आदि का लाभ इनसे विद्यार्थी उठा पाते हैं। इससे उनमें सम्मान की भावना, सांस्कृतिक मूल्यों का विकास और जीवन मूल्यों का समावेश संभव होता है। यहां संचालित विभिन्न व्याख्यानमालाओं में विभिन्न विद्वानों द्वारा दिया जाने वाला प्रस्तुतिकरण विद्यार्थियों में ज्ञान वृद्धि के साथ उनके जीवन में उपयोगी सिद्ध होने वाला होता है।

मूल्यपरक शिक्षा के लिये समर्पित संस्थान

इस संस्थान की स्थापना के पीेछे आचार्य तुलसी की दूरदृष्टि रही थी और नैतिक जीवन मूल्यों की समाज में पुनर्स्थापना को मुख्य उद्देश्य बनाकर ही इसे शुरू किया गया था। अपनी संस्थापना से लेकर आज तक यह संस्थान मूल्यपरक शिक्षण-प्रशिक्षण के लिये समर्पित है। यहां जीवन विज्ञान की शिक्षा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है तथा पृथक विषय के रूप में भी जीवन विज्ञान की डिग्री दी जाती है। जीवन विज्ञान में जीवन मूल्यों पर पूरा ध्यान दिया जाता है। यहां का आध्यात्मिक वातावरण, संतों का सामीप्य और विद्यार्थी-निमित तय मर्यादाओं के पालन से विद्यार्थियों में चारित्रिक विकास एवं मूल्यों का समावेश होने से उनका जीवन उज्जवल बन पाता है। इस संस्थान का ध्येय वाक्य है- ‘णाणस्स सार मायारो‘ अर्थात ज्ञान का सार आचार है। इस ध्येय वाक्य के अनुरूप यहां दुनियावी शिक्षा के साथ व्यक्तिगत आचरण की शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

भोजन एवं आवास की निःशुल्क सुविधा

संभवतः यह पहला संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) होगा, जहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ निःशुल्क छात्रावास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध है। यहां जैन विद्या, प्राकृत एवं संस्कृत भाषा में स्नातकोत्तर करने के लिए प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को यह सुविधा दी जाती है। इनमें अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिये यहां अध्ययन की सुविधा भी पूर्ण रूप से निःशुल्क है। अन्य पाठ्यक्रमों में भी शुल्क अतिन्यून होने व छूट उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को आर्थिक दृष्टि से नहीं सोचना पड़ता, फिर यहां छात्रवृति की सुविधा भी होने से विद्यार्थियों को पढाई बोझ नहीं लग पाती है।

शोध-परियोजनाओं के लिये खर्च की व्यवस्था

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शोध को विशेष महत्व दिया जाता है, इसके लिये विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का संचालन भी संस्थान द्वारा किया जाता रहा है। नवाचारी शोध प्रोजेक्ट के तहत पायलट प्रोजेक्ट के लिये 50 हजार, माइनर प्रोजेक्ट के लिये 2 लाख, और मेजर प्रोजेक्ट के लिये 10 लाख रूपयों का वितीय सहयोग संस्थान की ओर से उपलब्ध करवाया जाता है। इस राशि का उपयोग शोधकर्ता अपने शोध कार्य के लिये उपकरण, पुस्तकें, जर्नल, स्टेशनरी, प्रिंटिंग, विश्लेषण सेवायें प्राप्त करने तथा आवश्यक यात्रा, फील्ड वर्क, सेमिनार, वर्कशाॅप आदि के लिये कर सकता है। कोई संस्थान अपने खर्च से शोध परियोजनाएं संचालित करें, दुर्लभ है।

वृद्धों व साधुओं के लिए भी पढाई की व्यवस्था

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) ने जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके लोगों में भी पढाई के प्रति ललक जगा दी है। यहां के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से बड़ी संख्या में देश भर के बड़ी आयु के लोग बीए से लेकर एमए और पीएचडी तक का अध्ययन व शोध कर रहे हैं एवं डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। यहां 60 से 80 वर्ष की आयु में भी पढने वाले विद्यार्थी लगातार रहे हैं। इनके अलावा यहां अपरिग्रही साधु-साध्वियों के लिये निःशुल्क शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध हैं वे देश में कहीं भी भ्रमण करते हुये अपनी पढाई जारी रख सकते हैं। बड़ी संख्या में साधु-साध्वियों ने यहां से उच्च शिक्षा प्राप्त करके डिग्रियां हासिल की हैं। पढाई को किसी भी कारण से बीच में छोड़ देने वाले जीवन के किसी भी हिस्से में अपनी पढाई वापस शुरू कर सकते हैं।

स्किल बेस्ड ट्रेनिंग व रोजगार निर्देशन

यहां संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में स्किल डेवलेपमेंट की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। योग, प्राकृतिक चिकित्सा के लिये यहां 3 माह का प्रमाण पत्र कार्यक्रम संचालित किया जाता है। इसके अलावा ब्यूटी कल्चर कार्यक्रम में ब्यूटी पार्लर खोलने, केश सज्जा करने, दुल्हन तैयार करने आदि का कोर्स करवाया जाता है। इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों की मरम्मत व रखरखाव सम्बंधी प्रमाण पत्र कार्यक्रम भी युवाओं को निःशुल्क प्रदान करने की व्यवस्था है। यहां समर प्रोग्राम के अन्तर्गत शोर्ट टर्म कोर्सेज करवाये जाते हैं, जिनमें कुकिंग प्रशिक्षण, योगा ट्रेनिंग, इंटीरियर डिजाईन, क्राफ्टिंग एंड पेंटिंग, स्पोर्टस ट्रेनिंग, बेसिक कम्प्यूटर, हेयर एंड स्किन केयर, स्पोकन इंगलिश, डांस व मार्शल आर्ट के कोर्स शामिल हैं। यहां समाज कार्य विभाग के अन्तर्गत एम.एस.डब्लू. का दो वर्षीय स्नातकोतर कोर्स तो शत प्रतिशत प्लसमेंट वाला है। बीएड व एमएड के कोर्स भी कॅरियर के लिये बेहतरीन सिद्ध हो रहे हैं। इनके अलावा कॅरियर काउंसलिंग, गाईडेंस, कॅरियर व्याख्यान, ज्ञान केन्द्र में रोजगार सम्बंधी सहायता आदि के माध्यम से विद्यार्थियों को कॅरियर निर्माण की दिशा में सहायता मिलती है।

अंग्रेजी संवाद एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण में दक्षता

यहां सभी के लिये अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्प्रेषणता की तरफ पूरा ध्यान दिया जाता है। विद्यार्थियों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिये तैयार करने के लिये अंग्रेजी व कम्प्यूटर में दक्षता आवश्यक होती है और इन दोनों ही विधाओं पर यहां पूरा जोर दिया जाता है। यहां हर विद्यार्थी के लिये अंग्रेजी माध्यम नहीं होने पर भी अंग्रेजी का ज्ञान व संवाद विधा अवश्य सिखाई जाती है। इसी तरह से कंप्यूटर का ज्ञान भी सबको करवाया जाता है, ताकि विद्यार्थी कहीं भी पीछे नहीं रह पाये।

महिला शिक्षा महत्वपूर्ण

यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एक तरह से महिला शिक्षा को समर्पित कहा जा सकता है। यहां महिला शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है। संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में बीए, बीकाॅम, बीएससी के पाठ्यक्रमों में केवल बालिकाएँ ही प्रवेश ले सकती हैं। इसी प्रकार यहां शिक्षा विभाग में संचालित बीएड, एमएड, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड पाठ्यक्रमों में भी केवल कन्याओं के लिये ही प्रवेश रक्षित है। आचार्य तुलसी की सोच के अनुरूप इस संस्थान में महिला शिक्षा को ही प्राथमिकता दी जाती है। यहां बालिकाओं की शिक्षा के साथ सुरक्षा, आत्मरक्षा, उचित देखभाल एवं उनके सर्वांगीण विकास पर पूरा ध्यान दिया जाता है।

Thursday, 10 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में निःशुल्क योग कक्षाओं का आयोजन

घुटनों के दर्द से बचना है तो पानी बैठ कर पीयें- डाॅ. माहेश्वरी

लाडनूँ, 10 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) अपने नित नये प्रयोगों और रचनात्मक चिंतन व कार्यों के लिए विख्यात है। संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित योग व ध्यान की निःशुल्क कक्षाओं का शुभारम्भ गुरूवार को सुबह प्रारम्भ किया गया। योग-कक्षा का संचालन करते हुये प्रशिक्षक डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने कहा कि व्यक्ति को पानी हमेशा बैठ कर ही पीना चाहिए। इससे अनेक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। योग एवं ध्यान की इस कक्षा में सम्भागियों को प्रशिक्षण प्रदान करते हुए उन्होंने बताया कि पानी सदैव धीरे-धीरे अर्थात घूँट-घूँट कर पीना चाहिए और बैठकर पीना चाहिए। कभी भी खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए। बैठक कर पानी पीने से घुटनों के दर्द से बचा जा सकता है। इसी प्रकार कभी भी बाहर से आने पर जब शरीर गर्म हो या श्वाँस तेज चल रही हो, तब थोड़ा रुककर, शरीर का ताप सामान्य होने पर ही पानी पीना चाहिए। खड़े होकर पानी पीने से गुर्दा, गठिया व जोड़ों के दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ये कक्षाएं संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा अपने शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ के लिए निःशुल्क आयोजित की जा रही हैं। कक्षाएं प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक एक घंटे संचालित की जायेगी। अपने समस्त कार्मिकों के उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य व मानसिक विकास के लिए इन कक्षाओं का आयोजन ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय शुरू किया गया है। गुरूवार को इन कक्षाओं में ध्यान के बाद शरीर के समस्त जोड़ों के संचालन की विविध क्रियाओं का अभ्यास करवाया गया तत्पश्चात कायोत्सर्ग और कमर, घुटने, गर्दन आदि के व्यायाम करवाए गए।

नियमित योगासनों से अनेक बीमारियों का निरोध संभव- डाॅ. शेखावत

लाडनूँ, 11 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने यहां संचालित की जा रही योग कक्षा में सम्भागियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं ध्यान के प्रयोग करवाए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग के इन आसनों एवं क्रियाओं का नियमित अभ्यास करने से कमर दर्द, ब्लड प्रेशर, गर्दन का दर्द, सिरदर्द आदि नहीं रहते तथा अनेक बीमारियों का शरीर में प्रवेश ही नहीं हो पाता। उन्होंने वस्त्र को स्वच्छ बनाने के लिए जो धोने की क्रिया होती है, वैसे ही शरीर की मांसपेशियों को शुद्ध करने के लिए यौगिक क्रिया आवश्यक है।

योग से स्वास्थ्य लाभ के साथ होता है कार्यशैली में परिवर्तन- प्रो. दूगड़
लाडनूँ, 14 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि योग से व्यक्ति स्वस्थ रहता है तथा उसकी कार्यशैली में परिवर्तन आता है। योगसनों और क्रियाओं का लाभ तभी मिल पाता है, जब उन्हें नियमित रूप से लगातार किया जाता रहे। वे यहां लगाई जा रही योग कक्षा का अवलोकन कर रहे थे। उन्होंने सम्भागियों को सम्बोधित करते हुए नियमित रूप से प्राणायाम व योगासन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बताया कि संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समस्त स्टाफ के लिए अनिवार्य रूप से शुरू की गई योग कक्षा का लाभ सभी को प्राप्त करना चाहिए। योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने योग कक्षा में सम्भागियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं प्राणायम के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अपने स्वास्थ्य को सुधारने एवं मोटापा घटा कर शरीर को संतुलित बनाने के लिए भोजन का पूर्ण बनाना आवश्यक है। इसमें यथासंभव साबुत अन्न व फलों का प्रयोग करना चाहिए। फलों का जूस पीने के बजाये उन्हें खाने से शरीर को आवश्यक फाईबर और तत्व मिल पाते हैं। इसी प्रकार रिफाुइंड तेल के बजाये देसी घी अघिक लाभदायक होता है। भोजन के साथ शरीरिक मेहनत पर भी पूरा जोर देना चाहिए। जो व्यक्ति खाने-पीने पर पूरा ध्यान देता है और शरीर से कैलोरी जलाने पर भी ध्यान देता है, वह स्वस्थ रहता है तथा लम्बी आयु को प्राप्त होता है।

विपरीत परिस्थितियों में भी योग से पूर्ण स्वास्थ्य लाभ संभव- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 15 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि योग से मनुष्य अपने किसी भी क्षेत्र में कार्य करते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रख सकता है। योग को आवश्यक रूप से प्रतिदिन नियमित रूप से करना चाहिये। उन्होंने यहां संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में चल रही कार्मिकों की योग कक्षा के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योगमय जीवन शैली को अपनाने से व्यक्ति अपने प्रकार की व्याधियों से मुक्त रह पाता है। उन्होंने कहा कि जो यौगिक क्रियायें, योगासनों एवं प्राणायाम के प्रयोग बताये हैं, उन्हें अपने घर पर नियमित अभ्यास का हिस्सा बनायें, ताकि उनका वास्तविक लाभ उठाया जा सके। योग प्रशिक्षक डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने योग कक्षा में शामिल सभी सम्भागियों को आंख, कान, गर्दन, कमर, घुटनों आदि के स्वास्थ्य केे लिये विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं प्राणायम के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग से शरीर के समस्त अवयव सक्रिय हो जाते हैं और वे सही रूप में कार्य करने लगते हैं। छोटी-छोटी क्रियायें नियमित रूप से करने पर उनका व्यापक शारीरिक लाभ मिलता है। इसलिये योगाभ्यास का आलस नहीं रखना चाहिये।

Wednesday, 9 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अंग्रेजी सम्प्रेषण दक्षता निखारने हेतु कार्यशाला का आयोजन

सम्भागियों को बताये विभिन्न परिस्थितियों में अंग्रेजी संवाद कायम करने के तरीके

लाडनूँ, 9 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्पर्क कला कार्यशाला में मंगलवार को विभिन्न काल्पनिक परिस्थियों का नाट्य प्रस्तुतिकरण करवाते हुए मनोरंजक ढंग से अंग्रेजी सम्भाषण को परिपक्व बनाया गया। विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में लाडनूँ के पर्यटन व धार्मिक स्थलों के सम्बंध में गाइड व पर्यटकों के बीच वार्ता, रोगी व चिकित्सक के बीच के संवाद, जन्मदिन पर पार्टी आयोजित करने के लिए मित्रों के दबाव का वार्तालाप, लड़के व लड़की के रिश्ते के सम्बंध में दोनों पक्षों के बीच परस्पर सम्पर्क-संवाद तथा ट्रेन में बिना टिकिट के पकड़े गये यात्री एवं टिकिट चैकर के बीच की वार्ता को नाट्य-रूपान्तरित किया गया। कार्यशाला में निर्देशक डाॅ. गोविन्द सारस्वत व प्रो. रेखा तिवाड़ी ने सभी प्रतिभागियों को संवाद की कुशलता, शब्दों के चयन, व्याकरण के प्रयोग एवं बेझिझक अंग्रेजी वार्तालाप करने के नुस्खे बताये। गौरतलब है कि संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक स्टाफ को अविरल अंग्रेजी संवाद के लिए तैयार करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह निःशुल्क कार्यशाला एक माह तक संचालित की जायेगी।

झिझक दूर होने पर अंग्रेजी बोलना सरल- डाॅ. सारस्वत

लाडनूँ, 15 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अंग्रेजी भाषा विभाग के तत्वावधान में विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक कार्मिकों के लिए आयोजित की जा रही अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्पर्क कला के विकास के लिए निःशुल्क कार्यशाला का मंगलवार को समापन किया गया। इस अवसर पर विभागध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत ने कहा कि अंग्रेजी को अपने कार्यस्थल व रोजमर्रा के जीवन की भाषा बनाने के लिए आवश्यक है कि अपनी दिनचर्या के हिस्सों में आवश्यक छोटे-छोटे वाक्यांश को प्रयोग में लाया जावे। जब तक अंग्रेजी बोलने की झिझक नहीं मिटेगी, उसे सरलता से नहीं बोला जा सकेगा। इसलिए नियमित अभ्यास को जारी रखा जाना चाहिए। कार्यशाला के सम्भागियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व अनुभव अंग्रेजी में साझा किये तथा कुछ सम्भागियों ने वार्तालाप के जरिये अपनी भावनायें व्यक्त की। विजय कुमार शर्मा, मुकुल सारस्वत, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. हेमलता जोशी, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, गीता पूनिया, डाॅ. बीएल जैन, सोनिका जैन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, कमल कुमार मोदी, डाॅ. विवेक माहेश्वरी, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, डाॅ. वीरेन्द्र भाटी, डाॅ. अमिता जैन आदि ने इन कक्षाओं को लाभदायक बताया तथा कहा कि इससे सम्भागियों की अंग्रेजी बोलने की झिझक दूर हुई है।

अब विदेशों में भी अध्ययन कर पायेंगे जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के विद्यार्थी

जैन विश्वभारती संस्थान का देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से एमओयू

लाडनूँ, 9 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) निरन्तर वैश्विक स्तर पर अग्रसर हो रहा है। इसके अन्तर्गत दो विदेशी विश्वविद्यालयों से उसके एमओयू/एग्रीमेंट्स हैं। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वीके कक्कड़ ने बताया कि देश-विदेश के 9 विश्वविद्यालयों से जैन विश्वभारती संस्थान के साथ एमओयू हुये हैं, जिनमें विद्यार्थियों एवं फेकल्टी का एक्सचेंज कार्यक्रम तय किए गए हैं। इन शिक्षण संस्थानों व विश्वविद्यालयों से अन्तर्सम्बंधों के कारण जहां इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को विदेशों के विश्वविद्यालयों में नवीन शिक्षण पद्धतियों एवं तकनीकों को सीखने का अवसर मिलेगा, वहीं विदेशी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को यहां आकर जैन विद्या, योग व जीवन विज्ञान, संस्कृत व प्राकृत भाषा, भारतीय संस्कृति, पाठ्यक्रमों एवं पद्धतियों को नजदीकी से देखने-समझने एवं सीखने का अवसर मिल पायेगा। कुलसचिव कक्कड़ ने बताया कि सिंगापुर की प्रज्ञा योग, बेल्जियम की घेंट यूनिवर्सिटी, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी जयपुर, स्वार्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी गांधीनगर, कोबा की प्रेक्षाध्यान एकेडमी एवं स्वामी विवेकानन्द योग अनुसंधान विश्वविद्यालय बैंगलोर के साथ अन्तर्सम्बंध स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ इस विश्वविद्यालय के साथ अन्तर्सम्बंध रहे हैं।