Saturday, 11 August 2018

संस्थान के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान मे दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन

समाज में नैतिकता व सेवा के विस्तार के लिये हो शिक्षा का उपयोग- प्रो. त्रिपाठी


लाडनूँ, 6 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुये आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि कोरी शिक्षा सारहीन और निर्जीव होती है। शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज में नैतिकता के विस्तार और सेवा कार्य को प्रसारित करना होता है। इस सम्बंध में जैन विश्वभारती संस्थान के समाज कार्य विभाग के छात्र समाज सुधार व सेवा कार्यों में निरन्तर लगे हुये हैं तथा समाज को नशाबंदी, स्वच्छता, रोगमुक्ति आदि के कार्यक्रमों के साथ जन जागृति के उत्तम कार्य को ध्येय बनाकर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि समाज में केवल उन्हीं लोगों का लोग अनुकरण करते हैं, जो चरित्रवान होते हैं। प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान की विशेषताओं, व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं के बारे में भी बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने एम.एसडब्लू. के दो वर्षीय पाठ्यक्रम का वर्णन प्रस्तुत किया तथा कहा कि अनुशासन और मूल्यों का पालन इस संस्थान की विशेषता है। यहां नैतिक मूल्यों को शिक्षा के साथ जोड़ा गया है, जो आज समाज के लिये सबसे ज्यादा जरूरी बन गये हैं। कार्यक्रम में इन्द्रा राम पूनिया, चांदनी सिंह आदि शोधार्थी, विद्यार्थी एवं व्यख्यातागण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अंकित शर्मा ने किया।

Monday, 6 August 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा सुजानगढ की छात्राओं के लिये संस्थान द्वारा निःशुल्क बस सेवा शुरू

लाडनूँ, 6 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा सुजानगढ से आने वाली छात्राओं के लिये नई बस सेवा सोमवार को शुरू की गई है। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष नये सत्र में प्रवेश लेने वाली सभी छात्राओं के लिये एक साल तक यह बस सेवा निःशुल्क रहेगी। गौरतलब है कि संस्थान के अधीन संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की छात्राओं के लिये संस्थान में बेहतरीन सुविधाओं से युक्त छात्रावास सुविधा उपलब्ध है, वहीं विभिन्न ग्रामीण अंचलों से आने वाली छात्राओं के लिये वाहनों की सुविधा भी दी जा रही है।


Friday, 3 August 2018

नवागन्तुक विद्यार्थियों का स्वागत कार्यक्रम का आयोजन

आचार के बिना महत्वहीन है ज्ञान- डाॅ. समणी संगीतप्रज्ञा

लाडनूँ, 3 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के प्राकृत एवं संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी सगीत प्रज्ञा ने कहा है कि ज्ञान तभी सार्थक बन सकता है, जब आचार उन्नत होता है। बिना आचार के ज्ञान महत्वहीन हो जाता है। ज्ञान और आचरण दोनों के समान रूप से उन्नत होने से ही व्यक्तित्व का विकास होता है और जीवन में व्यक्ति सफल बन पाता है। वे यहां अपने विभाग के नवागन्तुक विद्यार्थियों के स्वागत के लिये किये गये आयोजन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत वार्तालाप के लिये प्रेरित किया तथा उन्होंने कहा कि जितना अध्ययन करें, वह जागरूकता पूर्वक करे, ताकि उसे अन्य के लिये भी अध्यापन में सहायक बनाया जा सके। वरिष्ठ संस्कृत विद्वान प्रो. दामोदर शास्त्री ने इस अवसर पर कहा कि जब व्यक्ति अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेता है तो उसे अपनी पूरी शक्ति को केन्द्रित करके झोंक देना चाहिये। अपनी शक्ति का विकिरण करना विद्यार्थी के लिये हानिकर सिद्ध होता है। इस अवसर पर संस्थान में शिक्षा ग्रहण करने आये विदेशी विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि यह संस्थान अपने आप में विलक्षण है, जहां विद्यार्थी शिक्षा के साथ नैतिकता सीखते हैं। कार्यक्रम में सभी नव-प्रवेशित विद्यार्थियों ने अपना परिचय प्रस्तुत किया। उन्हें भी फैकल्टी से परीचित करवाया गया। कार्यक्रम के दौरान विविध गेम्स भी खिलाये गये। कार्यक्रम का प्रारम्भ मुमुक्षु बहिनों के मंगलाचरण से किया गया। अंत में मुमुक्षु दर्शिका ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन मुमुक्षु वंदना व करिश्मा ने किया।

Thursday, 2 August 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन

जीवन में मूल्यों के धारण से निखरता है व्यक्तित्व- कक्कड़

लाडनूँ, 2 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का शुभारम्भ यहां कुलसचिव वीके कक्कड़ के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने की तथा दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, डाॅ. हेमलता जोशी व डाॅ. विनोद सियाग विशिष्ट अतिथि थे। शिविर का शुभारम्भ करते हुये कुलसचिव वीके कक्कड़ ने कहा कि व्यक्ति के जीवन का समुचित विकास तभी कहा जायेगा, जब उसका व्यक्तित्व संतुलित और निखार वाला हो। व्यक्तित्व में निखार आता है मूल्यों को जीवन में उतारने से। नैतिक मूल्यों के धारण से सम्पूर्ण मानवता पोषित होती है। व्यक्ति का दृष्टिकोण बदल जाता है। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि जीवन में उच्च चरित्र ही सफलता का मापदंड होता है। इसे ध्यान में रखते हुये इस जैन विश्वभारती संस्थान में चरित्र निर्माण पर पूरा जोर दिया गया है। उन्होंने शिविर के सम्भागियों को संस्थान में संचालित पाठ्यक्रमों, विशेषताओं, व्यवस्थाओं व सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। शिविर के समन्वयक डाॅ. अशोक भास्कर ने प्रेक्षाध्यान, योग व जीवन विज्ञान के बारे में बताया तथा इनके माध्यम से व्यक्तित्व विकास के मार्ग पर प्रकाश डाला। शुभारम्भ के पश्चात के सत्र में सभी सम्भागियों को कायोत्सर्ग का अभ्यास करवाया गया।

Saturday, 28 July 2018

संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन

धर्मग्रंथ भी वृक्षों की रक्षा का संकल्प दिलाते हैं- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 28 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में शनिवार को सावन मास के प्रथम दिवस पर संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी़ के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बिल्व, नीम्बू, अनार, गुलाब आदि विभिन्न पौधों को लगाया गया। पौधों की व्यवस्था छात्राध्याओं ने स्वयं के स्तर पर की। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. त्रिपाठी़ ने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों में वृक्षों के लिये बहुत ही सकारात्मक वर्णन दिया गया है। उनकी रक्षा, पालन और यहां तक कि पीपल, बड़ आदि वृक्षों का पूजन तक इस आशय से किया गया है कि आमजन के मन में वृक्षों को बचाने की भावना व्याप्त रहे। उन्होंने विश्व स्तर पर पर्यावरण के संकट से बचने के लिये वृक्षों की उपादेयता के बारे में बताया तथा कहा कि पेड़ लगाने का एक स्वतः स्फूर्त आंदोलन होना चाहिये। इस अवसर पर शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन, अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच, दूरस्थ शिक्षा की उपनिदेशक नुपूर जैन, डाॅ. प्रगति भटनागर, कमल मोदी, मधुकर दाधीच, सोनिका जैन, अभिषेक चारण, सोमवीर, बलवीर, रत्ना चैधरी आदि उपस्थित थे।

Friday, 27 July 2018

जैन विश्वभारती संस्थान में गुरू पूर्णिमा पर कार्यक्रम का आयोजन

जैन विश्वभारती  संस्थान में गुरू पूर्णिमा पर कार्यक्रम का आयोजन

अज्ञान मिटा कर ज्ञान का दीप जलाने वाला ही गुरू- मुनि जयकुमार

लाडनूँ, 27 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती  संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में गुरू पूर्णिमा पर कार्यक्रम में मुनिश्री जयकुमार ने कहा है कि जो भीतर की गुरूता को, अन्तर की चेतना को और विवेक को जागृत करें वही गुरू होता है। वे यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के महाप्रज्ञ सभागार में नियमित ध्यान व प्रार्थना के पश्चात गुरू पूर्णिमा पर्व को लेकर समस्त स्टाफ को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरू की पहचान यह है कि वह अज्ञान को खत्म करता है, भीतर में ज्ञान के दीप को प्रज्ज्वलित करता है। गुरू अच्छे मार्ग को प्रशस्त करता है और करणीय व अकरणीय कर्म के विवेक को जागृत करता है। गुरू अपने शिष्य में भी गुरूतत्व का जागरण करता है। इससे पूर्व मुनिश्री ने सबको गहरे ध्यान के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़, उप कुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, दीपाराम खोजा, डाॅ. बी. प्रधान, विजयकुमार शर्मा, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. विकास शर्मा, डाॅ. अशोक भास्कर आदि उपस्थित थे। इसके अलावा संस्थान के शिक्षा विभाग में भी गुरू पूर्णिमा पर्व मनाया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने इस अवसर पर कहा कि गुरू के विचारों को आत्मसात करें, वे हमारे संकटों में पाथेय प्रदान करेंगे। डाॅ. आभासिंह, छात्राध्यापिका कंचन कंवर, सरिता फिरौदा, पल्लवी, अंजलि, पूजा गौड़ आदि ने भी अपने विचार कविता, भाषण व कहानी के रूप में व्यक्त किये। कार्यक्रम में डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. बी. प्रधान, डाॅ. विष्णु कुमार, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. सरोज राय, डाॅ. गिरधारी लाल, मुकुल सारस्वतए दिव्या जांगिड़ आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन देवी लाल ने किया।

गुरू शिष्य को ढालता है - प्रो. त्रिपाठी

महर्षि वेदव्यास के जन्मजयन्ती के उपलक्ष्य में गुरू पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है। वैसे पुराणों में भगवान शिव को आदि गुरू माना गया है। उन्होंने शनि और परशुराम को शिष्य के रूप में शिक्षा दी थी। इसलिये उन्हें आदि गुरू माना गया है। यह बात आचार्य कालु कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने गुरू पूर्णिमा पर्व पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कही। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरू शिष्य की बहुत ही उज्ज्वल परम्परा रही है। शंकराचार्य को भी उनके गुरू गौड़पाद ने बनाया था। रामबोला को तुलसीदास गुरू नरहरिदास ने बनाया था तथा शिवाजी प्रसिद्ध हुए अपने गुरू रामदास की शिक्षा के कारण। विवेकानन्द को भी उनके गुरू रामकृष्ण ने बनाया था। सिकन्दर ने अपने गुरू अरस्तु से एक बार कहा था कि एक अरस्तु सैकड़ों सिकन्दर बना सकता है, किन्तु सैकड़ों सिकन्दर मिलकर भी एक अरस्तु नहीं बना सकते। ऐसी होती है गुरू की महिमा। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि निर्मल भावों से गुरू का आदर और सम्मान करना चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के हिन्दी व्याख्याता अभिषेक चारण द्वारा आदिकाल से आधुनिक काल तक गुरू के महत्त्व को व्याख्यायित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सोमवीर सागवान द्वारा किया गया।

Thursday, 26 July 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में तीन दिवसीय आमुखीकरण एवं प्रेक्षाध्यान शिविर का आयोजन

चैम्पियन बनने तक संघर्ष जारी रखें- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 26 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में गुरूवार को तीन दिवसीय आमुखीकरण एवं प्रेक्षाध्यान शिविर का शुभारम्भ कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ द्वारा किया गया। यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में आयोजित शुभारम्भ समारोह को सम्बोधित करते हुये कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने हर काम उत्साहपूर्वक करने के लिये प्रोत्साहित करते हुये कहा कि किसी का समय कभी निकलता नहीं है, बल्कि हमेशा वर्तमान समय का सुदपयोग करें। उन्होंने कहा कि तब तक लड़ना जरूरी है, जब तक कि चैम्पियन नहीं बन जावें। हारते-हारते ही शिखर पर पहुंचा जा सकता है। हर काम को तुरन्त करें, उसे टालें कभी नहीं। काम को उत्साहपूर्वक करने से ही जीवन में बदलाव आयेगा और जीवन रोमांचित बनेगा, आगे बढने में इससे मदद मिलेगी। प्रो. दूगड़ ने कहा कि जीवन में कभी भी नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करें। मूल्यों पर हमेशा अडिग रहें, तभी जल्दी विकास संभव है। उन्होंने मैत्री के विकास के सम्बंध में बताया कि कठिनाई के समय किसी के साथ खड़ा होंगे, तो वह व्यक्ति सदा के लिये आपका बन सकता है, चाहे वह आपका विरोधी भी रहा हो। उन्होंने किसी के लिये प्रतिक्रिया करने के बजाये शांत रहने व सहिष्णु बनने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि जो प्रतिक्रिया करता है, वह हमेशा पराजित होता है। शांत रहने पर सामने वाले पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव कायम होता है। उन्होंने प्रेक्षाध्यान पद्धति को ध्यान की श्रेष्ठ प्रणाली बताते हुये कहा कि विदेशों में भी प्रेक्षाध्यान के प्रशिक्षक तैयार हो रहे हैं। प्रेक्षाध्यान की देश-विदेशों में बहुत चर्चा हुई है। अमेरिका, बेल्जियम आदि देशों से विदेशी लोग यहां जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में भी प्रेक्षाध्यान व योग सीखने के लिये आते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय को ए-श्रेणी प्राप्त एक उच्च स्तर का संस्थान बताते हुये कहा कि नैतिक मूल्यों के लिये यह संस्थान विख्यात है।

हर क्रिया से मन की संगति आवश्यक

जैन विद्या एवं तुलनात्मक धम्र व दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. समणी ऋजुप्रज्ञा ने प्रेक्षाध्यान शिविर के तीन दिनों को जीवन को दिशा देने वाला बताया तथा कहा कि गति से अधिक दिशा महत्वपूर्ण होती है। अगर दिशा सही नहीं हो तो गति अधिक होने पर भी लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने भावक्र्रिया को ऐसी विधि बताई, जिसमें हर पल व्यक्ति ध्यान में रहता है। उन्होंने कहा कि जो भी गतिविधि करें, उसके साथ मन का जुड़ा होना जरूरी है। क्रिया के साथ मन जुड़ा रहे तो वह भावक्रिया ध्यान बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अच्छी संगति और एकाग्रता को आवश्यक बताते हुये कहा कि प्रेक्षाध्यान से एकाग्रता का विकास होता है और छात्राओं में स्मरण शक्ति भी बढती है।

प्रेक्षाध्यान से जीवन में बदलाव संभव

प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने इस अवसर पर प्रेक्षाध्यान को महाप्रज्ञ प्रणीत ध्यान की बेजोड़ प्रणाली बताया तथा कहा कि इसे विश्व भर में स्वीकारा जा गया है। इससे जीवन में बदलाव लाया जाना संभव है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रगति भटनागर ने किया। शिविर में प्रथम सत्र में प्रेक्षाध्यान व योग का अभ्यास पारूल दाधीच व निकिता उत्तम ने करवाया। अंतिम सत्र में प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने छात्राओं को संस्थान के विभागों, पाठ्यक्रमों, व्यवस्थाओं, विशेषताओं आदि की जानकारी दी। यह तीन दिवसीय शिविर नवप्रवेशित छात्राओं के आमुखीकरण के साथ उन्हें ध्यान पद्धति से परीचित करवाने के लिये किया जा रहा है।

तीन दिवसीय प्रेक्षाध्यान षिविर में दूसरे दिन व्यक्तित्व विकास को किया व्याख्यायित

27 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में चल रहे त्रिदिवसीय प्रेक्षाध्यान शिविर के दूसरे दिन जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष एवं संस्थान के डिप्टी रजिस्ट्रार डाॅ. प्रद्युम्नसिंह शेखावत ने छात्राओं को व्यक्ति जीवन में व्यक्तित्व के महत्त्व को व्याख्यायित करते हुए बताया कि व्यक्तित्व विकास में कद व सुन्दरता मायने नहीं रखती बल्कि व्यक्ति के गुण व उसकी जीवन के प्रत्येक पहलू के प्रति सकारात्मकता ही उसके सफल व्यक्तित्व निर्माण में सहायक सिद्ध होती है, वहीं द्वितीय सत्र में शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन द्वारा ‘‘छात्राओं के व्यक्तित्व विकास में शिक्षा की भूमिका’’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन के साथ-साथ सतत् परिश्रम एक सफल व्यक्तित्व का निर्माण करता है। इस अवसर पर संस्थान के व्याख्याता अभिषेक चारण, कमल कुमार मोदी, मधुकर दाधिच, डाॅ. बलवीर सिंह, सोनिका जैन, सुश्री रत्ना चैधरी एवं नीतू सुथार आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रगति भटनागर द्वारा किया गया। शिविर में छात्राओं को प्रेक्षाध्यान एवं योग का अभ्यास जीवन विज्ञान विभाग की शोधार्थी सुश्री पारूल दाधिच एवं निकिता उत्तम द्वारा करवाया गया।

नैतिक मूल्यों के समावेश से जीवन में परिवर्तन आता है- प्रो. धर

लाडनूँ, 28 जुलाई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय आमुखीकरण एवं प्रेक्षाध्यान शिविर का शनिवार को समारोह पूर्वक समापन किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि शोध निदेशक प्रो. अनिल धर ने कहा कि जीवन में मूल्यों का अपना महत्व होता है। उनके बिना जीवन सारहीन बन जाता है। नैतिक मूल्यों का समावेश जीवन को आमूल-चूल रूप से बदल देता है तथा जीवन में सुदृश फूलों की खुशबू भर जाती है। समारोह के मुख्य वक्ता अहिंसा एवं शांति विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि जीवन में समय की पाबंदी को महत्व अवश्य दें। समय पर किये गये कार्य ही सुफल देने वाले होते हैं। दीर्घसूत्रता से जीवन में बिगाड़ आता है। उन्होंने कहा कि हर छात्रा को अपने आप को पहचानना चाहिये। स्व को जानने से ही उसका लक्ष्य परिपक्व हो सकता है। इससे पूर्व प्रचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने तीन दिवसीय शिविर का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा कहा कि यह शिविर छात्राओं के जीवन में सकारात्मकता भरेगा। शिविरार्थी छात्राओं सरिता शर्मा, संध्या वर्मा, शिवानी आचार्य आदि ने अपने अनुभव अन्य छात्राओं के साथ साझा किये। शिविर का अंतिम दिवस व्यक्तित्व विकास एवं आमुखीकरण पर केन्द्रित रहा। सभी शिविरार्थी छात्राओं ने इस अवसर पर वृक्षारोपण करके अपने संकल्प को मजबूत किया। शिविर के अंतिम सत्र में योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने छात्राओं को लाफिंग थैरेपी से परीचित करवाया तथा अभ्यास करवाते हुये उसके लाभ बताये। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. बलवीर सिंह चारण ने किया।