Wednesday, 19 December 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में केरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन

पूरे विश्व में फैली भारतीय योग विद्या का एक हजार बिलियन डाॅलर है व्यवसाय- डाॅ.शेखावत

लाडनूँ, 19 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने कहा है कि योग को भारतीय ऋषियों ने आत्म-उद्धार और मोक्ष प्राप्ति के साधन के रूप में आविष्कृत किया था, लेकिन आज समय के साथ उसका स्वास्थ्य बदल गया है और योग आज स्वास्थ्य प्राप्ति का साधन बन गया है। उन्होंने यहां सेमिनार हाॅल में आयोजित कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम के तहत राजकीय सुजला महाविद्यालय के विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने योग शिक्षा के उपयोग और केरियर निर्माण में सहायक की भूमिका के बारे में बोलते हुये कहा कि भारत की यह विद्या आज पूरे विश्व में फैली हुई है और एक हजार बिलियन डाॅलर का व्यवसाय केवल योग शिक्षा का है। प्रत्येक कार्यक्षेत्र में कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढाने के लिये अपने संस्थान में योग-सलाहकारों की नियुक्ति कर रहे हैं। आज लगभग हर व्यक्ति में विविध प्रकार की शारीरिक समस्यायें और तनाव की स्थिति है, जिसका एकमात्र कारण लाईफ स्टाइल बदलना है। इसे योग द्वारा फिर बदला जासकता है। योग से शरीर व मन का संतुलन बना रहता है।

प्राचार्य हुये योग शिक्षा से प्रभावित

कार्यक्रम में राजकीय सुजला महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. चतरसिंह डोटासरा ने बताया कि सुजला काॅलेज के युवा विकास केन्द्र के तहत आयोजित व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों के भ्रमण का कार्यक्रम जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय का रखा गया, जिसमें उन्हें केरियर निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। उन्होंने कार्यक्रम में प्राप्त जानकारी को विद्यार्थियों के लिये लाभदायक बताया तथा कहा कि वे यहां योग शिक्षा से बहुत प्रभावित हुये हैं और स्वयं यहां योग शिविर में भाग लेने के इच्छुक हैं। कार्यक्रम में समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने एमएसडब्लू करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य और केरियर के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये बताया कि यह हंड्रेड पर्सेंट जोब ओरियेंटेड कोर्स है, जो इस क्षेत्र में एकमात्र इसी विश्वविद्यालय में है।

निःशुल्क होस्टल, मेस व शिक्षण शुल्क की सुविधायें

डाॅ. रविन्द्र सिंह शेखावत ने अहिंसा एवं शांति विभाग के अन्तर्गत संचालिक विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं सुविधाओं के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि विश्वविद्यालय में एमए डिग्री के कोर्स में दो साल तक 10 हजार रूपये वार्षिक छात्रवृति देय है। इसी प्रकार एमफिल और पीएचडी में भी छात्रवृति की सुविधा देय है। इस संस्थान की अलग विषयों के कारण पृथक पहचान है और इसी कारण यहां विदेशी विद्यार्थियों के साथ विभिन्न प्रंतों के विद्यार्थी भी अध्ययनरत हैं। डाॅ. योगेश जैन ने जैन विद्या एवं तुलनात्मक धर्म व दर्शन विभाग के अन्तर्गत संचालित कोर्सेंज के बारे में विवरण प्रस्तुत किया एवं उनकी उपयोगिता व उनसे मिलने वाले रोजगार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैनोलाॅजी विषय पढने वाले विद्यार्थियों को यहां छात्रावास एवं भोजन की सुविधा निःशुल्क है। इसके अलावा पीएचडी करने वाले शोधार्थियों के लिये 28 हजार रूपये सहयोग प्रदान किये जाने की सुविधा है। कार्यक्रम संयोजक डाॅ.सत्यनारायण भारद्वाज ने प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के बारे में बताया और कहा कि यहां से स्नातकोत्तर करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिये रहना-खाना और फीस सभी निःशुल्क हैं। नेट और जेआरएफ के लिये भी सुविधा उपलब्ध है तथा कम्पीटिशन की तैयारी के लिये भी निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है।

विद्यार्थियों ने किया विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन

राजकीय सुजला महाविद्यालय से युवा विकास केन्द्र के तत्वावधान में आये छात्र-छात्राओं ने यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की योग विभाग, विज्ञान संकाय आदि की विभिन्न प्रयोगशालाओं, जिम की सुविधा, छात्रावास, विभिन्न विभागों, स्मार्ट कक्षाओं, डिजीटल स्टुडियो, विशाल ग्रंथागार लाईब्रेरी, हस्तलिखित पुस्तकों, कलाकृतियों, रमणीक हरीतिमा युक्त परिसर, ध्यान केन्द्र, खेल मैदान आदि का अवलोकन किया तथा डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज एव स्थानीय स्टाफ से पूरी जानकारी प्राप्त की।

Thursday, 13 December 2018

विमल विद्या विहार में शिक्षकों के लिये 15 दिवसीय ओरियेंटेशन प्रोग्राम का आयोजन

नवीन प्रवृतियों से शिक्षा में गुणवता वृद्धि संभव- प्रो. जैन

लाडनूँ 13 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने विद्यालयी शिक्षा में नवीन प्रवृतियों के बारे में अवगत करवाते हुये कहा कि इनके बारे में सभी शिक्षकों की जानकारी होना आवश्यक है। इनसे शिक्षा की गुणवता में वृद्धि संभव हो पाती है। उन्होंने यहां विमल विद्या विहार सीनियर सैकेंडरी स्कूल में संचालित 15 दिवसीय ओरियेंटेश प्रोग्राम में छठे दिवस आयोजित कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुये बताया कि शिक्षण की नवीन प्रवृतियों में ग्रेडिंग सिस्टम, सेमेस्टर सिस्टम, क्रेडिट सिस्टम, मूल्यांकन की पद्धति आदि को विद्यार्थियों को केन्द्रित करके तैयार किया गया है। इनके द्वारा विद्यार्थी अपनी रूचि के अनुसार, अपनी क्षमताओं, योग्यताओं व दक्षताओं का विकास भरपूर ढंग से कर सकें। प्रो. जैन ने बताया कि आत स्मार्ट लर्निंग, ई-लर्निंग, सोशल मीडिया लर्निंग, मोबाईल लर्निंग का प्रचलन तेजी से बढा है, जिससे छात्रों को प्रतयेक स्थान पर अपनी शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा संभव हो पाई है। उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी ने मूक्स लर्निंग के कोर्स इन नवीन प्रवृतियों के अन्तर्गत संचालित किये हैं। इनके अलावा कौशल विकास, जीवन कौशल, सम्प्रेषण कौशल, तनाव प्रबंधन, नेतृत्व शैली, शोध लर्निंग, प्रोजेक्ट मैथड, क्रियात्मक विधि का प्रयोग, पाठ्येतर क्रियायें आदि विषयों के बारे में विस्तार से बताते हुये उन्होंने इनसे भी सभी शिक्षकों को अवगत करवाया जाना आवश्यक है। कार्यक्रम में 35 शिक्षकों ने हिस्सा लेकर शिक्षण की नवीन प्रवृतियों की जानकारी प्राप्त की और इसे शिक्षा को गुणवता पूर्ण बनाने व नवीनता प्रदान करने के लिये उपयोगी बताया।

Monday, 10 December 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में विश्व मानवाधिकार दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

व्यक्ति की गरिमा व समानता का अधिकार रक्षित होना आवश्यक- प्रो. धर

लाडनूँ 10 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में मानवाधिकार दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शोध निदेशक प्रो. अनिल धर ने व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के बारे में बताते हुये राज्य व राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार आयोगों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा कर रखी है। संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में कहा गया है कि कुछ ऐसे मानवाधिकार हैं, जो कभी छीने नहीं जा सकते, जिनमें मानव की गरिमा है और स्त्री-पुरुष के समान अधिकार हैं। इस घोषणा के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसम्बर 1948 को मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा अंगीकार की। संयुक्त राष्ट्र संघ की समान्य सभा ने मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकृत और घोषित किया। इस घोषणा से राष्ट्रों को प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और वे इन अधिकारों को अपने संविधान या अधिनियमों के द्वारा मान्यता देने और क्रियान्वित करने के लिए अग्रसर हुए। प्रो. धर ने बताया कि किसी भी इंसान की जिंदगी, आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार ही मानवाधिकार है। भारतीय संविधान इस अधिकार की न सिर्फ गारंटी देता है, बल्कि इसे तोड़ने वाले के लिये सजा का प्रावधान भी है। भारत में 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून अमल में आया और 12 अक्टूबर, 1993 में सरकार ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन किया। डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी पूरी जिम्मेदारी से निभाने की सलाह दी तथा कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने दायित्वों को समझ ले तो अधिकारों की रक्षा स्वतः ही हो जाती है और कानून का उपयोग ही नहीं करना पड़ता है। कार्यक्रम में हरफूल ठोलिया, राजेश माली, उषा जैन, रजनी प्रजापत, वंदना प्रजापत, आसिफ खान, शीतल प्रजापत, हंसराज कंवर, प्रतिभा कंवर, किरण बानो, सरिता लोहिया, सपना जांगिड़, हीरालाल भाकर, गजानन्द चारण, मेहरून, तमन्ना आदि उपस्थित रहे।

Saturday, 8 December 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में स्वच्छता अभियान को लेकर व्याख्यान आयोजित

स्वच्छता अभियान के प्रचारक बनें विद्यार्थी- डाॅ. शेखावत

लाडनूँ 8 सितम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में महात्मा गांधी के 150वीं जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष में शनिवार को सेमिनार हाॅल में एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। स्वच्छता अभियान पर आधारित इस कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुये विभागाध्यक्ष एवं उपकुलसचिव डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने कहा कि विद्यार्थियों को स्वच्छता अभियान के प्रचारक की भूमिका निभानी चाहिये। सफाई की शुरूआत हमें खुद से और अपने आस पास के परिसर से ही करनी होगी। अपने मौहल्ले और गांव को स्वच्छ रखने में अगर हम सफल रहे तो निश्चित मानिये कि यह पूरा देश भी स्वच्छ हो जायेगा। उन्होंने कहा कि वे कहीं भी किसी व्यक्ति के कचरा बाहर रास्ते में डालते हुये पाये जाने पर उसे रोक कर उससे कचरा लेकर कचरा पात्र या कचरा-वाहन में डालना चाहिये, ताकि उसे सीख मिले। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को लेकर छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने से बहुत सुधार किया जा सकता है। हमें व्यावहारिक रूप से सफाई के महत्व को लागू करना चाहिये। कचरे का निष्पादन करने में सूखे-ठोस व गीले कचरे को अलग-अलग एवं पैक करके डालने के महत्व को समझाया तथा कहा कि कार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों को कभी भी खुले में नहीं डालना चाहिये। डाॅ. शेखावत ने खुले में शौच एवं मूत्रादि करने से होने वाली हानियों को गिनाया तथा हाथ साफ करने, घर में जूते लेकर नहीं जाने, जल-संग्रहण को स्वच्छ बनाने, उसे ढक कर रखने आदि पारम्परिक एवं व्यावहारिक सफाई के महत्व को समझाया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अशोक भास्कर ने किया।

Thursday, 6 December 2018

उच्च शिक्षा व केरियर निर्माण जागरूकता अभियान के तहत आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा पहल

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा पहल

लाडनूँ 6 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय द्वारा युवावर्ग को सही दिशा प्रदान करने के लिये पहल करते हुये अपने केरियर निर्माण एवं उच्च शिक्षा परामर्श कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को केरियर निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी दी गई और उन्हें उनके अध्ययन के अनुकूल परामर्श प्रदान किया गया तथा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के सम्बंध में भी उनका मार्गदर्शन किया गया। यहां के राजकीय भूतोड़िया बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय केशरदेवी सेठी बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, लाड मनोहर बालनिकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, विमल विद्या विहार उच्च माध्यमिक विद्यालय, संस्कार उच्च माध्यमिक विद्यालय, आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, कनकश्याम उच्च माध्यमिक विद्यालय, सेंट जेवियर्स पब्लिक स्कूल, सुभाष बोस शिक्षण संस्थान, सत्यम उच्च मा. विद्यालय, सैनिक वेलफेयर स्कूल, मौलाना आजाद स्कूल, मदनलाल भंवरीदेवी आर्य मेमोरियल स्कूल, दयानन्द सरस्वती स्कूल, निम्बी जोधां के नवभारत स्कूल, आदर्श विद्या मंदिर स्कूल, नवीन विद्यापीठ स्कूल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय व स्वामी विवेकानन्द राजकीय माॅडल स्कूल में डाॅ. प्रगति भटनागर, सोनिका जैन, डाॅ. बलवीर चारण, डाॅ. रत्ना चैधरी, दिव्या राठौड़, अभिषेक चारण व सोमवीर सांगवान ने अलग-अलग विद्यालयों का जिम्मा लेकर कैरियर निर्माण एवं उच्च शिक्षा जागरूकता के कार्यक्रमों का आयोजन किया तथ विद्यार्थियों में उच्च शिक्षा के प्रति एवं केरियर के सम्बंध में जानकारी प्रदान की गई।

बैठक आयोजित कर दिये निर्देश

इससे पूर्व प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने अपने आचार्यगणों की एक बैठक का आयोजन करके युवा वर्ग में उच्च शिक्षा व केरियर के प्रति जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता बताई तथा इसके लिये क्षेत्र में एक अभियान चलाया जाकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय निरन्तर विद्यार्थी जागरूकता की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत समय-समय पर विभिन्न विषयों पर व्याख्यान आयोजित करने, अनेक प्रकार की सांस्कृतिक-साहित्यिक व खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन करने, घुड़सवारी प्रशिक्षण प्रदान करने, युवा महोत्सव व मेलों का आयोजन करने, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये ज्ञान केन्द्र का संचालन करने, ज्ञान व कौशल वृद्धि के लिये विविध क्लबों का संचालन करने आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहता है।

Saturday, 1 December 2018

विश्व एड्स दिवस पर लोगों को रेड रिबन लगाकर दिया बचने का संदेश

एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति को दुत्कारें नहीं, उसे प्यार दें- डाॅ. मिश्रा

लाडनूँ, 01 दिसम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग में शनिवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा सबको रेड बिरन लगाकर जागरूकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में एड्स व रोकथाम के बारे में बताया गया। विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने बताया कि एड्स- एच.आई.वी. नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्ताह के बाद ही रक्त की जॉंच से ज्ञात होता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है, ऐसे व्यक्ति को एच.आई.वी. पोजिटिव कहते हैं। एच.आई.वी. पोजिटिव व्यक्ति कई वर्षो 6 से 10 वर्ष तक सामान्य प्रतीत होता है और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है, लेकिन दूसरो को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है। उन्होंने बताया कि एड्स का खतरा केवल उन लोगों को होता है, जो एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखता है, वेश्यावृति करने वालों से यौन सम्पर्क रखता है, इंजेक्शन द्वारा नशीली दवायें लेता है, यौनरोगों से पीड़ित है, पिता या माता के एच.आई.वी. संक्रमण के पश्चात पैदा होने वाला बच्चा और बिना जांच किया हुआ रक्त ग्रहण करने वाला व्यक्ति है। उन्होंने ऐसी किसी भी प्रवृति से बचने की सलाह दी। डाॅ. पुष्पा मिश्रा ने बताया कि एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने, एक साथ भोजन करने, एक ही घडे का पानी पीने, एक ही बिस्तर और कपडों के प्रयोग, एक ही कमरे अथवा घर में रहने, एक ही शौचालय, स्नानघर प्रयोग में लेने से, बच्चों के साथ खेलने आदि सामान्य संबंधो से यह रोग नहीं फैलता है। मच्छरों, खटमलों आदि के काटने से भी यह रोग नहीं फैलता है। उन्होंने एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति को दुत्कारने के बजाये उसे प्यार देने की आवश्यकता बताई।

लगाये रेड रिबन

संस्थान के समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों ने विश्व एड्स दिवस पर शनिवार को यहां समस्त विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों व स्टाफ को रेड रिबन लगाकर उन्हें एड्स से बचाव का संदेश दिया। इसी प्रकार उन्होंने बालसमंद गांव में मनसुखलाल सारड़ा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पहुंच कर लोगों को एड्स रोग की जानकारी दी एवं उससे बचाव के तरीके समझाये। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपप्रधानाचार्य मंजू कंवर ने एचआईवी-एड्स की वर्तमान स्थिति व फैलाव की संभावना बताई। विशिष्ट अतिथि डाॅ. बलवीर सिंह ने एड्स का इतिहास बताते हुयेे समस्या के समाधान प्रकाश डाला और जन सहयोग को जरूरी बताया। ललिता शर्मा ने विश्व एड्स दिवस 2018 की थीम ‘‘अपनी स्थिति जानें’’ के बारे में बताते हुये जागरूकता आवश्यक बताई। जितेन्द्र उपाध्याय ने एड्स के कारण व बचाव पर प्रकाश डाला। डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, डाॅ. पुष्पा मिश्रा व जितेन्द्र सिंह ने भी विचार व्यक्त किये। इस कार्यक्रम में रणजीत जायसवाल, फिरदौस, ममता, मुकेश,युधिष्ठिर, सुनील, चित्रा, सुनीता, राधा, दीपक आदि के अलावा विद्यालय के छात्रा व ग्रामवासी भी उपस्थित रहे।

Friday, 30 November 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में व्याख्यानमाला का आयोजन

भक्तिकालीन संत भक्ति के साथ सामाजिक बदलाव के अग्रदूत थे- चारण

लाडनूँ, 30 नवम्बर 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के आचार्य कालु कन्या महाविद्यालय के अन्तर्गत संचालित मासिक व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘‘भक्ति आंदोलन एवं समरसता’’ विषय पर अभिषेक चारण ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने भक्तिकाल के विभिन्न संतों का उल्लेख करते हुये उनके द्वारा जाति प्रथा, पांखड और अंधविश्वासों पर अपनी काव्य-वाणी द्वारा की गई चोटों का विवरण प्रस्तुत किया तथा लोक मानस में उनके प्रभाव का अंकन अपने व्याख्यान में किया। चारण ने संत कबीर, नामदेव, रामानन्द आदि के उदाहरण देते हुये कहा कि भक्तिकाल में पूरे देश में सामाजिक समरसता कायम करने का बीड़ा तत्कालीन संत समाज ने उठाया था, जो अद्वितीय है। उन्होंने केवल भक्ति की धारा ही समाज में प्रवाहित नहीं की बल्कि उन्होंने समाज के बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उनकी वाणी ने जनमानस को झकझोर कर रख दिया था। संतों की समरसता की वाणी आज भी उद्धृरणीय है और वह समाज को संदेश देने व बदलाव लाने में सक्षम हैं। इस अवसर पर डाॅ. प्रगति भटनागर, सोनिका जैन, रत्ना चैधरी, बलवीर चारण, डाॅ. सोमवीर सांगवान, कमल मोदी, डाॅ. मधुकर, योगेश टाक आदि ने व्याख्यान की समीक्षा एवं शोधपत्र के बिन्दुओं पर चर्चा करते हुये प्रस्तुत व्याख्यान को उच्च कोटि का बताया। अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने आभार ज्ञापन में भक्तिकालीन संतों के अवदान को राष्ट्र की एकता और अखंडता को कायम करनेवाला बताया।