Saturday, 30 June 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के विद्यार्थियों ने बनाये 5 विश्व रिकाॅर्ड

लाडनूँ, 30 जुन 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) ने जहां योग व जीवन विज्ञान की शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तिमान कायम किये हैं, वहीं संस्थान के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के 4 विद्यार्थियों ने एक साथ 5 विश्व रिकाॅर्ड बनाकर मिसाल कायम करते हुये संस्थान की कीर्ति को चार चांद लगाये हैं। इनके द्वारा कायम विश्व रिकाॅर्ड को ‘‘गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकाॅर्ड’’ में दर्ज किया गया है, जिसे प्रमाण पत्र इन्हें जारी कर दिये गये हैं। ये चारों विद्यार्थी यहां दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से योग एवं जीवन विज्ञान विषय में स्नातकोततर पाठ्यक्रम कर रहे हैं। इनमें से लक्ष्मणगढ (सीकर) के पास के एक छोटे से गांव के रहने वाले जयपाल प्रजापत ने लगातार योगाभ्यास करते हुये दो विश्व रिकाॅर्ड कायम किये। जयपाल ने लगातार 2 घंटे 21 मिनट तक शीर्षासन करके विश्व रिकाॅर्ड बनाया। यह प्रदर्शन उसने छतीसगढ राज्य के भिलाई में किया था। इसके बाद जयपाल ने फिर गुजरात प्रांत के अहमदाबाद में लगातार 3 घंटा 33 मिनट तक मयूर चाल का प्रदर्शन करके दूसरा विश्व रिकाॅर्ड बनाया। इसी प्रकार संस्थान के दूसरे विद्यार्थी जोधपुर के रहने वाले ललित भारती ने योग मुद्रा में विश्व रिकाॅर्ड बनाया, जिन्होंने लगातार 1 घंटा 35 मिनट तक खेचरी मुद्रा का प्रदर्शन किया। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की दूरस्थ शिक्षा की मेड़ता रोड रहने वाली छात्रा जानकी प्रजापति ने भी योगासन में विश्व रिकाॅर्ड कायम किया, उसने लगातार 45 मिनट तक हनुमानासन में रहने का प्रदर्शन सफलता पूर्वक किया था। इसी प्रकार चैमूं के रहने वाले रामरस चैधरी ने तेजगति से लगातार एक सौ सूर्य नमस्कारों का प्रदर्शन करके फास्टेस्ट हंड्रेड सूर्यनमस्कार योगा का रिकाॅर्ड कायम किया है। चैधरी ने ये एक सौ सूर्य नमस्कार योग मात्र 7 मिनट 32 सैकंड में पूरे किये थे। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने इन तीनों विद्यार्थियों को चार विश्व रिकाॅर्ड कायम करने के लिये बधाई व शुभकामनायें प्रेषित की है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि इन विद्यार्थियों को आगामी दिनों में विश्वविद्यालय में समारोह आयोजित किया जाकर सम्मानित किया जायेगा।

Sunday, 24 June 2018

जैन विश्वभारती संस्थान द्वारा उपखंड स्तरीय योग समारोह का आयोजन

योग जीवन को बदलने वाली क्रिया - मुनि जयकुमार

लाडनूँ 21 जून 2018। विश्व योग दिवस के अवसर पर गुरूवार को जैन विश्व भारती स्थित अन्तर्राष्ट्रीय प्रेक्षा केन्द्र भवन में उपखंड स्तरीय योग समारोह का आयोजन जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा किया गया, जिसमें योग की विभिन्न क्रियायें, आसन, ध्यान व प्राणायाम आदि का सामुहिक अभ्यास किया गया। जैन विश्वभारती संस्थान, उपखंड प्रशासन एवं जैन विश्व भारती के संयुक्त तत्वावधान में एवं जैन मुनि जयकुमार के सान्निय में आयोजित इस योग समारोह की अध्यक्षता संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने की तथा मुख्य अतिथि विधायक मनोहर सिंह थे। मुनिश्री जयकुमार ने समारोह को सम्बोधित करते हुये कहा कि योग जीवन को बदलने वाली प्रक्रिया है। ध्यान व योग-साधना नियमित किये जाने पर ही उसके परिणाम सामने आते हैं तथा इसके सतत् अभ्यास से शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक शक्तियों का विकास भी संभव हो पाता है।
योग से हाती है चित्त की यात्रा
संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि योग जहां शरीरिक स्वास्थ्य का लाभ देता है, वहीं योग से मन एवं चित्त को भी साधा जा सकता है। इससे चित्त की यात्रा भी संभव होती है। उन्होंने योग से शरीर, मन और चित्त की यात्रा का वर्णन प्रस्तुत किया तथा कहा कि नियमित योगाभ्यास से चित्त की गहराइयों तक असर होता है और जो बदलाव आते हैं, वे स्थाई और अनुकरणीय बन जाते हैं। विधायक मनोहर सिंह ने इस अवसर पर योग को बढावा देने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि हर व्यक्ति को योग अपनाना चाहिये। उपखंड अधिकारी रामसिंह राजावत ने योग को विश्व स्तर पर मिली मान्यता को भारतीय संस्कृति की विजय बताया तथा कहा कि योग दिवस पर विश्व के लगभग सभी देशों के नागरिकगण योगाभ्यास में जुटे हुये हैं तथा योग की महत्ता के बारे में चर्चायें कर रहे हैं। संस्थान के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अंत में आभार ज्ञापित करते हुये कहा कि योग मानव मात्र के लिये लाभदायक है, इसे किसी धर्म-सम्प्रदाय की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

योगासन व यौगिक क्रियाओं का अभ्यास
योग समारोह में संथान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने सभी सम्भागियों को यौगिक क्रियायें, योगासन, ध्यान, प्राणायाम आदि के अभ्यास करवाये। छात्रा ताम्बी दाधीच ने सबके सम्मुख सभी क्रियाओं का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर तहसीलदार आदूराम मेघवाल, ब्लाॅक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी श्याम सिंह चैहान, आयुर्वेद अधिकारी डाॅ. जेपी मिश्रा, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, चांद कपूर सेठी, लूणकरण शर्मा, सुशील पीपलवा, रमेश सिंह राठौड़, गिरधर राजपुरोहित, ललित वर्मा, नीतेश माथुर, राजेन्द्र माथुर, अंजना शर्मा, हनुमान मल जांगिड़ तथा क्षेत्र के सरकारी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी एवं नागरिकगण ने सामुहिक योगाभ्यास किया।

Thursday, 31 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग प्रदर्शन को यूजीसी ने लिया अपनी वेबसाईट पर

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग प्रदर्शन को यूजीसी ने लिया अपनी वेबसाईट पर

लाडनूँ, 31 मई 2018। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपनी वेब साईट के होम पेज पर जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा करवाये गये योगाभ्यास को महत्व दिया है। यूजीसी ने अपनी वेब साईट डब्लूडब्लूडब्लू डाॅट यूजीसी डाॅट एसी डाॅट इन(www.ugc.ac.in) के होमपेज पर दी गई स्लाइड में इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योगाभ्यास के योग-प्रदर्शन का फोटो अपलोड किया है। यह इस संस्थान के लिये गौरव समझा जा रहा है कि यूजीसी ने इसे इतना महत्व प्रदान किया है। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शिक्षित-प्रशिक्षित विद्यार्थी देश-विदेश में योग और धर्म व दर्शन का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं तथा विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में उच्च पदों पर योग-शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जिनमें पुलिस व सेना भी शामिल है। गौरतलब है कि जैन विश्वभारती संस्थान देश की संस्कृति, प्राच्य विद्याओं, धर्म व दर्शन, प्राच्य भाषा, योग व जीवन विज्ञान, अहिंसा एवं शाति आदि के अध्ययन व शोध लिये समर्पित मिशन के रूप में संचालित किया जा रहा है। राजस्थान पुलिस के पूर्व महानिदेशक डाॅ. मनोज भट्ट ने भी योग को अपना विषय चुनते हुये यहां से अपनी शोध सम्पन्न करके पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।

Wednesday, 30 May 2018

ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के लिए मंगल भावना एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित

समन्वय, व्यावहारिकता व सहनशीलता से मिलती है सफलता- कक्कड़

लाडनूँ, 30 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कॅरियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में संचालित ग्रीष्मकालीन कक्षाओं के लिए प्रमाण पत्र वितरण समारोह एवं शिक्षा विभाग के तत्वावधान में मंगलभावना समारोह का संयुक्त आयोजन किया गया। बुधवार को यहां सेमिनार हाॅल में आयोजित इस कार्यक्रम में समर केम्प में आयोजित विभिन्न शाॅर्ट टर्म प्रोग्राम के प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया तथा शिक्षा विभाग की अनुसंधान पत्रिका ‘‘हंस वाहिनी’’ शैक्षित चिंतन का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा कि जीवन में समन्वय, व्यावहारिकता और सहनशीलता मूल्यवान गुण होते हैं और जीवन में सफलता के लिए इनकी आवश्यकता रहती है। फ्रेंड सर्किल का विस्तार के साथ उनके साथ नेटवर्किंग भी आवश्यक है। रिलेशन मेंटेन रखने के लिए लगातार संवाद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि समर कैम्प से नया सीखने को मिलता है, जिसमें उम्र का कोई प्रतिबंध नहीं है। इनमें सबसे छोटी उम्र के और वयोवृद्ध भी भाग ले रहे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग की बीएड छात्राओं की शिक्षा पूर्ण होने पर टीम वर्क से कार्य करने एवं सदैव अच्छे आइडियाज को ग्रहण करने और बुरे आईडियाज को उपेक्षित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि समाज में अधिकतम स्वीकार्यता का निर्माण करना चाहिए। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) केवल डिग्री कार्यक्रम का संचालन ही नहीं रकता बल्कि सम्पूर्ण समुदाय को जोड़ने का करता है। यह एक ऐसा विद्या केन्द्र है, जहां अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों व चरित्र की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि ये मूल्य जीवन के हर पड़ाव में साथ निभाते हैं। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कहा कि बिना मेहनत के सफलता नहीं मिल सकती है। डिग्रियों के साथ कौशल भी जरूरी होता है। श्रमनिष्ठा एवं कर्तव्यनिष्ठा से जीवन में आगे बढा जा सकता है। उन्होंने समर केम्प के बारे में कहा कि इसमें रूचि व क्षमता के अनुरूप अपना विकास कर पाने में व्यक्ति समर्थ होता है। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग की छात्राध्यापिकाओं धर्मशिखा सेन व प्रीति ने अपने अनुभव प्रस्तुत किये, वहीं समर केम्प की हेमलता शर्मा, टीना सेन, सोनिया इंदौरिया, ऋत्विक दुबे, प्रियंका स्वामी, कृष्णा अग्रवाल आदि ने भी अपने अनुभव साझा किये। उपरजिस्ट्रार डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने प्रारम्भ में स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन कॅरियर काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने किया।

Saturday, 26 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की सम्पर्क कक्षाओं का मंगल भावना समारोह आयोजित

समस्याओं से संघर्ष करें, पीठ न मोड़ें- प्रो. त्रिपाठी

लाडनूँ, 26 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अन्तर्गत योग एवं जीवन विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की एक महिने की अवधि की सम्पर्क कक्षाओं के समापन पर यहां महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में मंगल भावना समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों को यहां जो शिक्षा, मर्यादायें, नैतिक मूल्य सीखें हैं, उनका प्रसार वे जहां कहीं भी रहें अवश्य करें। उन्होंने जीवन में आने वाली समस्याओं व बाधाओं से हमेशा संघर्ष करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में कभी हार नहीं मानना चाहिए, बल्कि हर समस्या से लड़ कर उसका मुकाबला करते रहें। पीठ दिखाना कभी उचित नहीं होता। प्रो. त्रिपाठी ने योग की आराधना व साधना को दीपक की तरह से स्वयं जलकर दूसरों को रोशन करने की आवश्यकता बताई। समारोह के मुख्य अतिथि संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने इस अवसर पर गुरू गोविन्द सिंह पर आधारित एक पंजाबी गीत सुनाया और कहा कि यहां के हर विद्यार्थी में ऊर्जा का निरन्तर संचार रहे। समारोह के विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, नुपूर जैन, डाॅ. अशोक भास्कर, डाॅ. जुगल किशोर दाधीच थे। सभी अतिथियों को विद्यार्थियों ने श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तकें सम्मान-स्वरूप भेंट की।

सराहनीय रही सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

समारोह में रेखा, ने राजस्थानी गीत ‘‘ पिया आवो तो म्है मनड़ै री बात करल्यां.......’’ पर नृत्य प्रस्तुत किया। श्वेता कंवर ने लौंग और इलायची सम्बंधी प्रणय गीत पर पंजाबी नृत्य पेश किया, जिसे सबने खूब सराहा। सरिता रैवाड़ ने राजस्थानी घूमर गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर सबको मोहित किया। सुमन, प्रेम कंवर, राजीव, राहुल स्वामी ने गीत प्रस्तुत किये। सुनिता सारण, विनीता अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में गुरू वंदन व प्रेरणादायक विचार रखे। कार्यक्रम में पंकज भटनागर, हरिगोपाल, आशा पारीक, निकिता, प्रगति, पारूल, अंकिता आदि एवं सभी विद्यार्थी उपस्थित थे।

Friday, 25 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

यौन उत्पीड़न की घटनाओं के प्रति जागरूक रहें, हिचकिचायें नहीं- डाॅ. विश्नोई


लाडनूँ, 25 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में यौन उत्पीड़न, कानूनी अधिकार एवं न्यायिक संरक्षण विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। सिविल न्यायाधीश एवं प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडनायक (कनिष्ठ वर्ग) डाॅ. पवन कुमार विश्नोई ने कहा कि विधायिका ने बहुत सारे कानून बनाये हैं, लेकिन हर व्यक्ति उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं रखता, इसलिए विधिक साक्षरता आवश्यक है। उन्होंने पोक्सो कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे अपने साथ घटित किसी भी घटना के बारे में बताने से हिचकिचाते हैं, लेकिन अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार व हरकतों को देखकर उसका आभास लगाना चाहिए और उनके प्यार से पूछना चाहिए। अगर किसी बच्चे के साथ लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्हें नहीं रोका जाता है तो वे बड़े अपराध से जुड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी अश्लील साहित्य या ऐसी कोई वस्तु, शरीर का कोई अंग लैंगिक आशय से दिखाता है या इलेट्रोनिक उपकरणों से पीछा करता है तो वह यौन उत्पीड़न है और ऐसा किसी बच्चे के साथ करने पर वह बाल यौन उत्पीड़न होता है। उन्होंने वहां मौजूद विद्यार्थियों से कहा कि वे सदैव जागरूक रहें और कानून की जानकारी सबको प्रदान करें व कानून का उपयोग भी करें।

सोच बदलें, आवाज उठायें

सहायक लोक अभियोजक आनन्द व्यास ने बताया कि संविधान सबको मौलिक अधिकार देता है और न्यायपालिका उन अधिकारों का संरक्षण करती है। पूरे देश में यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ रही है, ये पिछले 10-15 सालों से अधिक है, क्योंकि अभिभावकों ने अपने बच्चों की उपेक्षा शुरू कर दी। जरूरी यह है कि बच्चों को खुलकर बताने का माहौल प्रदान करें। समय बदल रहा है और इसके साथ हमें भी बदलने की जरूरत है। आप अपने परिवार से इसकी शुरूआत करें, तो समाज तक बात पहुंचेगी और पिफर जिले व राष्ट्र में बदलाव आयेगा। सोच बदलें और सहन करने का आदत बदलें। जब तक पीड़ित स्वयं लड़ने के लिऐ तैयार नहीं होंगे तब तक न्याय नहीं मिलेगा तथा कोर्ट व कानून कुछ नहीं कर पाएंगे। कहीं भी गलत हो रहा है तो आंखें बंद करके नहीं निकलें, बल्कि सजग रह कर आवाज उठायें। यौन उत्पीड़न रोकने का सबसे बड़ा जिम्मा स्वयं पर ही होता है। उन्होंने बिना सहमति, इच्छा के विरूद्ध लैंगिक कृत्य करना, प्रयास करना या उकसाना, पीछा करना आदि सभी यौन उत्पीड़न बताया तथा कहा कि यह किसी भी आॅफिस, प्राईवेट क्षेत्र सभी जगह हो सकता है। उन्होंने छोटी हरकतों को महिलाओं द्वारा नहीं बताने व उनकी उपेक्षा करने से कृत्य करने वाला का हौसला बढ जाता है और वहबड़ा अपराध भी कारित कर देता है। इसलिए आवाज उठाने की हिम्मत करें, इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी।

नैतिक मूल्यों की शिक्षा आवश्यक

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अंत में अपने सम्बोधन में कहा कि अगर नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जावे तो इन समस्याओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने संयुक्त परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें यौन शोषण व अपराध संभव नहीं होते। बिरादरी की व्यवस्था में वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम, घरेलु नौकरों आदि की जरूरतें खत्म हो जाती है। उन्होंने नैतिक मूल्यों की शिक्षा को स्वीकार करना जरूरी बताया तथा कहा कि जीवन की अधिकांश मुश्किलों को इससे समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने किया। इस अवसर पर बार संघ के पूर्व अध्यक्ष चेतन सिंह शेखावत, छोगाराम बुरड़क, न्यायिक कर्मचारी कपिल व अजीज खां आदि मौजूद थे।

Tuesday, 22 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में : नृत्य, कंप्यूटर, योग, स्पोकन इंगलिश आदि का प्रशिक्षण

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में 337 प्रशिक्षणार्थी लाभान्वित


लाडनूँ, 22 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में कैरियर काउंसलिंग सेल के अन्तर्गत संचालित की जा रही ग्रीष्मकालीन कक्षाओं में शहर के 337 प्रशिक्षणार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों से लाभान्वित हो रहे हैं। काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने इन समर कक्षाओं का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि सेल के तहत अभिरूचि एवं व्यावसायिक कौशल की दृष्टि से तैयार किऐ गये कुल 10 समर प्रोग्रामों में से 8 प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं। इनमें इंटीरियर डिजाईन एंड डेकोरशन, हेयर एंड स्किन केयर, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, स्पोकन इंगलिश, योगा प्रशिक्षण, मार्शल आट्र्स, डांस, स्पोर्ट्स के पाठ्यक्रमों में ये प्रशिक्षणार्थी नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। डाॅ. दाधीच ने बताया कि जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कॅरियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में हर वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय का सदुपयोग करने के लिऐ तैयार शाॅर्ट टर्म प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं, जिनमें इस क्षेत्र के युवक-युवतियां बड़ी संख्या में लाभान्वित हो रहे हैं। रामनारायण गेणा ने बताया कि विषय विशेषज्ञ डाॅ. अशोक भास्कर, नीतू सुथार, नुपूर जैन, सोमवीर सागवान, महेश शर्मा, ताम्बी दाधीच, कमलेश जगवानी और रितू द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।