Saturday, 11 August 2018

संस्थान के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान मे दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन

समाज में नैतिकता व सेवा के विस्तार के लिये हो शिक्षा का उपयोग- प्रो. त्रिपाठी


लाडनूँ, 6 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समाज कार्य विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय आमुखीकरण कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुये आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि कोरी शिक्षा सारहीन और निर्जीव होती है। शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज में नैतिकता के विस्तार और सेवा कार्य को प्रसारित करना होता है। इस सम्बंध में जैन विश्वभारती संस्थान के समाज कार्य विभाग के छात्र समाज सुधार व सेवा कार्यों में निरन्तर लगे हुये हैं तथा समाज को नशाबंदी, स्वच्छता, रोगमुक्ति आदि के कार्यक्रमों के साथ जन जागृति के उत्तम कार्य को ध्येय बनाकर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि समाज में केवल उन्हीं लोगों का लोग अनुकरण करते हैं, जो चरित्रवान होते हैं। प्रो. त्रिपाठी ने संस्थान की विशेषताओं, व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं के बारे में भी बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये विभागाध्यक्ष डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान ने एम.एसडब्लू. के दो वर्षीय पाठ्यक्रम का वर्णन प्रस्तुत किया तथा कहा कि अनुशासन और मूल्यों का पालन इस संस्थान की विशेषता है। यहां नैतिक मूल्यों को शिक्षा के साथ जोड़ा गया है, जो आज समाज के लिये सबसे ज्यादा जरूरी बन गये हैं। कार्यक्रम में इन्द्रा राम पूनिया, चांदनी सिंह आदि शोधार्थी, विद्यार्थी एवं व्यख्यातागण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अंकित शर्मा ने किया।

Monday, 6 August 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा सुजानगढ की छात्राओं के लिये संस्थान द्वारा निःशुल्क बस सेवा शुरू

लाडनूँ, 6 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा सुजानगढ से आने वाली छात्राओं के लिये नई बस सेवा सोमवार को शुरू की गई है। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष नये सत्र में प्रवेश लेने वाली सभी छात्राओं के लिये एक साल तक यह बस सेवा निःशुल्क रहेगी। गौरतलब है कि संस्थान के अधीन संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की छात्राओं के लिये संस्थान में बेहतरीन सुविधाओं से युक्त छात्रावास सुविधा उपलब्ध है, वहीं विभिन्न ग्रामीण अंचलों से आने वाली छात्राओं के लिये वाहनों की सुविधा भी दी जा रही है।


Friday, 3 August 2018

नवागन्तुक विद्यार्थियों का स्वागत कार्यक्रम का आयोजन

आचार के बिना महत्वहीन है ज्ञान- डाॅ. समणी संगीतप्रज्ञा

लाडनूँ, 3 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के प्राकृत एवं संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. समणी सगीत प्रज्ञा ने कहा है कि ज्ञान तभी सार्थक बन सकता है, जब आचार उन्नत होता है। बिना आचार के ज्ञान महत्वहीन हो जाता है। ज्ञान और आचरण दोनों के समान रूप से उन्नत होने से ही व्यक्तित्व का विकास होता है और जीवन में व्यक्ति सफल बन पाता है। वे यहां अपने विभाग के नवागन्तुक विद्यार्थियों के स्वागत के लिये किये गये आयोजन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत वार्तालाप के लिये प्रेरित किया तथा उन्होंने कहा कि जितना अध्ययन करें, वह जागरूकता पूर्वक करे, ताकि उसे अन्य के लिये भी अध्यापन में सहायक बनाया जा सके। वरिष्ठ संस्कृत विद्वान प्रो. दामोदर शास्त्री ने इस अवसर पर कहा कि जब व्यक्ति अपना लक्ष्य निर्धारित कर लेता है तो उसे अपनी पूरी शक्ति को केन्द्रित करके झोंक देना चाहिये। अपनी शक्ति का विकिरण करना विद्यार्थी के लिये हानिकर सिद्ध होता है। इस अवसर पर संस्थान में शिक्षा ग्रहण करने आये विदेशी विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि यह संस्थान अपने आप में विलक्षण है, जहां विद्यार्थी शिक्षा के साथ नैतिकता सीखते हैं। कार्यक्रम में सभी नव-प्रवेशित विद्यार्थियों ने अपना परिचय प्रस्तुत किया। उन्हें भी फैकल्टी से परीचित करवाया गया। कार्यक्रम के दौरान विविध गेम्स भी खिलाये गये। कार्यक्रम का प्रारम्भ मुमुक्षु बहिनों के मंगलाचरण से किया गया। अंत में मुमुक्षु दर्शिका ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन मुमुक्षु वंदना व करिश्मा ने किया।

Thursday, 2 August 2018

जैन विश्वभारती संस्थान के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन

जीवन में मूल्यों के धारण से निखरता है व्यक्तित्व- कक्कड़

लाडनूँ, 2 अगस्त 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में तीन दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का शुभारम्भ यहां कुलसचिव वीके कक्कड़ के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने की तथा दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, डाॅ. हेमलता जोशी व डाॅ. विनोद सियाग विशिष्ट अतिथि थे। शिविर का शुभारम्भ करते हुये कुलसचिव वीके कक्कड़ ने कहा कि व्यक्ति के जीवन का समुचित विकास तभी कहा जायेगा, जब उसका व्यक्तित्व संतुलित और निखार वाला हो। व्यक्तित्व में निखार आता है मूल्यों को जीवन में उतारने से। नैतिक मूल्यों के धारण से सम्पूर्ण मानवता पोषित होती है। व्यक्ति का दृष्टिकोण बदल जाता है। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि जीवन में उच्च चरित्र ही सफलता का मापदंड होता है। इसे ध्यान में रखते हुये इस जैन विश्वभारती संस्थान में चरित्र निर्माण पर पूरा जोर दिया गया है। उन्होंने शिविर के सम्भागियों को संस्थान में संचालित पाठ्यक्रमों, विशेषताओं, व्यवस्थाओं व सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। शिविर के समन्वयक डाॅ. अशोक भास्कर ने प्रेक्षाध्यान, योग व जीवन विज्ञान के बारे में बताया तथा इनके माध्यम से व्यक्तित्व विकास के मार्ग पर प्रकाश डाला। शुभारम्भ के पश्चात के सत्र में सभी सम्भागियों को कायोत्सर्ग का अभ्यास करवाया गया।